NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 8: Unity in Diversity, or ‘Many in the One’ के अंतर्गत भारतीय समाज, भूगोल और राजव्यवस्था (Polity) की सबसे बुनियादी और खूबसूरत विशेषता—“विविधता में एकता” को समझने की नींव रखता है। भारत एक ऐसा विशाल उपमहाद्वीप है जहाँ कदम-कदम पर भूगोल, जलवायु, भाषा, खान-पान, वेशभूषा और धार्मिक प्रथाओं में भिन्नता पाई जाती है। इसके बावजूद, एक अदृश्य और मजबूत धागा इन सभी विविधताओं को एक राष्ट्रीय चेतना में पिरोता है।
एक समृद्ध विविधता (A Rich Diversity)
- भारत की विविधता: भारत की विशाल जनसांख्यिकी (1.4 बिलियन से अधिक आबादी, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 18 प्रतिशत है) के कारण यहाँ पोशाक, भोजन, भाषा, लिपि और रीति-रिवाजों में अद्भुत विविधता पाई जाती है।
- पीपुल ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट (People of India project):
- संस्था: भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India – AnSI) द्वारा 20वीं सदी के उत्तरार्ध में यह विशाल सर्वेक्षण आयोजित किया गया था।
- मुख्य निष्कर्ष: इसके तहत देश के सभी राज्यों में 4,635 समुदायों का अध्ययन किया गया।
- भाषा और लिपि: देश में 325 भाषाओं और 25 लिपियों की पहचान की गई।
- प्रवासन (Migration): सर्वेक्षण में पाया गया कि बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी (Migrants) हैं, जो अपने जन्मस्थान या मूल समुदाय से दूर दूसरे क्षेत्रों में रह रहे हैं।
- विविधता में एकता (Unity in Diversity): लगभग एक सदी पहले, ब्रिटिश इतिहासकार विन्सेंट स्मिथ (Vincent Smith) ने भारतीय इतिहास लेखन की जटिलता पर विचार करते हुए कहा था कि भारत की असली पहचान इसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है।
सभी के लिए भोजन (Food for All)
- सामान्यता में विविधता: भारत में हजारों प्रकार के क्षेत्रीय व्यंजन हैं, लेकिन उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बुनियादी अनाज (Staple Grains) और मसाले पूरे देश में समान हैं। यह “समान सामग्री (एकरूपता) + विभिन्न संयोजन (विविधता)” का सबसे अच्छा उदाहरण है।

प्रमुख खाद्यान्न वर्गीकरण
| अनाज का प्रकार | उदाहरण (Examples) | मुख्य प्रीलिम्स फैक्ट |
| खाद्यान्न / अनाज (Cereals) | चावल (जैसे बासमती, सोना मसूदी, पोन्नी, कोल्लम), जौ (Barley), गेहूँ और मक्का। | यह अधिकांश भारतीयों का मुख्य आधार भोजन (Staple food) है। |
| मोटे अनाज (Millets / श्रीअन्न) | बाजरा (Pearl millet), ज्वार (Sorghum), रागी (Finger millet)। | शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण पोषण का स्रोत। |
| दलहन (Pulses / Grams) | अरहर, मूंग, मसूर, चना, राजमा, सफेद लोबिया। | भारतीय भोजन में प्रोटीन का मुख्य स्रोत। |
| साझा मसाले (Common Spices) | हल्दी (Turmeric), जीरा (Cumin), इलायची (Cardamom), अदरक (Ginger)। | ये मसाले भौगोलिक सीमाओं से परे पूरे उपमहाद्वीप के व्यंजनों में समान रूप से उपयोग किए जाते हैं। |
वस्त्र और परिधान (Textiles and Clothing)
- पहनावे में एकरूपता (Unity in Clothing): भारत में हर क्षेत्र और समुदाय की अपनी विशिष्ट वस्त्र शैलियाँ हैं, लेकिन कुछ पारंपरिक परिधानों में एकरूपता दिखाई देती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण साड़ी है, जो बिना सिला हुआ (Unstitched) एक सीधा कपड़ा है।
1 . साड़ी का ऐतिहासिक संदर्भ
- प्राचीनता के साक्ष्य: साड़ी का इतिहास बेहद पुराना है। बिहार के वैशाली से प्राप्त एक पत्थर की नक्काशी/राहत मूर्तिकला (Stone Relief) ईसा पूर्व (BCE) की कुछ शताब्दियों पुरानी है, जिसमें एक महिला को साड़ी पहने हुए दिखाया गया है।
- विदेशी यात्रियों का विवरण: पिछली शताब्दियों में भारत आए कई विदेशी यात्रियों ने साड़ी की सादगी, किफ़ायती होने (Economy) और इसे पहनने के विविध तरीकों की जमकर सराहना की थी।
2 . बुनाई, डिज़ाइन और भौगोलिक विविधता
साड़ी को अलग-अलग क्षेत्रों में पहनने के तरीके (Draping styles) भिन्न हैं, लेकिन मूल रूप से यह एक ही परिधान है। इसके डिज़ाइनों को कपड़े की बुनाई के दौरान या बुनने के बाद छपाई (Printing) के माध्यम से उभारा जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के रंजक (Pigments) उपयोग होते हैं।
प्रमुख सिल्क साड़ी और उनके क्षेत्र
| रेशम साड़ी का प्रकार (Silk Sari Type) | प्रमुख विशेषता / भौगोलिक क्षेत्र |
| बनारसी (Banarasi) | वाराणसी, उत्तर प्रदेश (अपनी भारी जरी और कढ़ाई के लिए प्रसिद्ध)। |
| कांजीवरम (Kanjivaram) | तमिलनाडु (कांचीपुरम क्षेत्र की प्रसिद्ध रेशमी साड़ी)। |
| पैठणी (Paithani) | महाराष्ट्र (इसके पल्लू पर मोर की आकृति और सोने के धागों का काम होता है)। |
| पाटन पटोला (Patan Patola) | पाटन, गुजरात (यह डबल इकत बुनाई – Double Ikkat की एक दुर्लभ कला है)। |
| मूंगा (Muga) | असम (मूंगा सिल्क अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक के लिए जाना जाता है)। |
| मैसूर (Mysore) | कर्नाटक (शुद्ध रेशम और न्यूनतम सोने के काम के लिए प्रसिद्ध)। |
त्योहारों की विविधता (Festivals Galore)
- विविधता में एकता का प्रतीक: भारत में त्योहारों की अत्यधिक विविधता है, लेकिन कई त्योहार पूरे देश में एक ही समय पर अलग-अलग नामों से मनाए जाते हैं।
- मकर संक्रांति: यह इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जो भारत के कई हिस्सों में फसल कटाई के मौसम (Harvest Season) की शुरुआत का प्रतीक है। यह प्रतिवर्ष 14 जनवरी या उसके आसपास मनाया जाता है।

मकर संक्रांति के विभिन्न क्षेत्रीय नाम
| त्योहार का नाम (Festival Name) | संबद्ध राज्य / क्षेत्र (State / Region) |
| लोहड़ी / माघी (Lohri / Maghi) | पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिम भारत |
| उत्तरायण (Uttarayan) | गुजरात |
| खिचड़ी पर्व (Khichdi Parv) | उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर भारत |
| माघ बिहू (Magh Bihu) | असम और पूर्वोत्तर भारत |
| पौष संक्रांति (Poush Songkranti) | पश्चिम बंगाल |
| शिशुर संक्रांत (Shishur Saenkraat) | जम्मू और कश्मीर / हिमालयी क्षेत्र |
| मकर संक्रांत (Makar Sankraat) | राजस्थान / मध्य भारत |
| पेड्डा पांडुगा (Pedda Panduga) | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना |
| मकर संकमण (Makara Sankramana) | कर्नाटक |
| पोंगल (Pongal) | तमिलनाडु |
| मकर विलक्कू (Makara Vilakku) | केरल (सबरीमाला मंदिर में विशेष उत्सव) |
महाकाव्य का विस्तार (An Epic Spread)
- साहित्यिक विविधता में एकता: भारतीय साहित्य भाषाई और तकनीकी विविधताओं के बावजूद समान विषयों, सरोकारों और नैतिक मूल्यों को साझा करते हैं।
1. पंचतंत्र
- मूल भाषा व काल: मूल संस्कृत पाठ कम से कम 2,200 वर्ष पुराना है।
- विशेषता: यह पशु-पक्षियों को मुख्य पात्र बनाकर व्यावहारिक जीवन कौशल (Life Skills) सिखाने वाली कहानियों का संग्रह है।
- वैश्विक प्रसार: यह भारत से बाहर दक्षिण-पूर्व एशिया, अरब जगत और यूरोप तक फैला। एक अनुमान के अनुसार, 50 से अधिक भाषाओं में पंचतंत्र के लगभग 200 रूपांतरण (Adaptations) मौजूद हैं। यह ‘एक’ से ‘अनेक’ होने का आदर्श उदाहरण है।
2. भारत के दो महाकाव्य (India’s Two Epics)
- रामायण और महाभारत: ये दोनों मूल रूप से लंबे संस्कृत काव्य हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य ‘धर्म की पुनर्स्थापना’ (Re-establish dharma) के लिए नायकों के संघर्ष को दिखाना है।
- महाभारत: पांडवों (कृष्ण की सहायता से) और उनके चचेरे भाइयों (कौरvus/कौरवों) के बीच राज्य की प्राप्ति का संघर्ष।
- रामायण: श्री राम द्वारा भाई लक्ष्मण और हनुमान की सहायता से राक्षस राजा रावण का वध और सीता की मुक्ति।
- सांस्कृतिक प्रभाव: दो सहस्राब्दियों से भी अधिक समय से इन महाकाव्यों का क्षेत्रीय भाषाओं और लोककथाओं (Folklore) में निरंतर रूपांतरण हो रहा है। अकेले तमिलनाडु में महाभारत के लगभग 100 लोक संस्करण प्रलेखित किए गए हैं।
जनजातीय जुड़ाव और पुरातात्विक साक्ष्य (Tribal Connections & Field Evidence)
- जनजातीय रूपांतरण: भील, गोंद, मुंडा जैसी कई जनजातियों के पास रामायण और महाभारत के अपने मौखिक संस्करण (Oral versions) हैं।
- स्थानीय किंवदंतियाँ: उत्तर-पूर्व, हिमालयी क्षेत्रों और कश्मीर सहित भारत की अधिकांश जनजातियाँ मानती हैं कि इन महाकाव्यों के नायक (जैसे पांडव, द्रौपदी या दुर्योधन) उनके क्षेत्रों में आए थे।
- ‘पंच पांडवर’ पत्थर की नक्काशी:
- स्थान: नीलगिरि के जंगलों (तमिलनाडु) में स्थित एक नक्काशीदार पत्थर, जिसमें पांच पांडव भाइयों को दर्शाया गया है।
- संरक्षण: इस मंदिर/स्थल की देखरेख इरुला जनजाति द्वारा की जाती है, जो पांडवों के इस क्षेत्र से गुजरने की स्मृति में इसे पूजते हैं।
- K.S. सिंह (पीपुल ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट के निदेशक) का कथन: “देश में शायद ही कोई ऐसा स्थान हो, जहाँ लोककथाओं के अनुसार पांडव जैसे महाकाव्य के नायक न पहुँचे हों।”
| साहित्यिक कृतियाँ / साक्ष्य | संबद्ध जनजाति / क्षेत्र | फैक्ट्स |
| पंचतंत्र | वैश्विक (50+ भाषाएँ) | 2,200 वर्ष पुराना संस्कृत ग्रंथ, व्यावहारिक जीवन कौशल पर आधारित। |
| इरुला जनजाति | नीलगिरि, तमिलनाडु | ‘पंच पांडवर’ नामक नक्काशीदार पत्थर के मंदिर का संरक्षण करते हैं। |
| महाभारत के लोक संस्करण | तमिलनाडु | अकेले एक राज्य में लगभग 100 लोक स्वरूप मौजूद हैं। |
| शास्त्रीय कला और वास्तुकला | संपूर्ण भारत | इनमें भी विविधता के साथ अंतर्निहित एकता (Underlying Unity) दिखाई देती है। |