17 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय समय संप्रभुता को रेखांकित करता ‘वन नेशन, वन टाइम’ विज़न (व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी), CSIR-NIScPR और CGPDTM का ऐतिहासिक समझौता (NKRC), तथा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रमाण देती स्पिरुलिना आधारित ‘सी-फाइकोसायनिन’ उत्पादन तकनीक, वैश्विक व्यापार को गति देता भारत-यूके CETA व सामाजिक सुरक्षा समझौता, कपड़ा उद्योग में चक्रीयता को रेखांकित करता भारत टेक्स 2026 (तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र और चक्रीय अर्थव्यवस्था), दिल्ली-NCR में पर्यावरण सुधार हेतु वायु प्रदूषण नियंत्रण की नई शमन कार्ययोजना, और कृषि-लचीलेपन व जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से REWARD कार्यक्रम के तहत सैटेलाइट और ड्रोन आधारित जलागम प्रबंधन की दूरगामी तकनीकी पहल शामिल हैं।
भारत टेक्स 2026-तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र, चक्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत टेक्स 2026, विजननेक्स्ट, टिकाऊ वस्त्र पहल (Sustainable Textile Initiatives), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, विकास और रोजगार; औद्योगिक नीति और विकास; पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट (चक्रीय अर्थव्यवस्था/Circularity)।
चर्चा में क्यों?
भारत के सबसे बड़े वैश्विक कपड़ा महाकुंभ ‘भारत टेक्स 2026’ का तीसरा दिन संपन्न हुआ। इस दिन का मुख्य फोकस भारतीय वस्त्र उद्योग में सस्टेनेबिलिटी (सस्टेनेबल विकास), सर्कुलरिटी (चक्रीयता), भविष्य के कौशल, टिकाऊ सोर्सिंग और वैश्विक व्यापार एकीकरण पर केंद्रित रहा। इसमें विभिन्न नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, निवेशकों और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्य बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं
1. विजननेक्स्ट ट्रेंड पब्लिकेशन का अनावरण
- केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह द्वारा VisionNxt नामक ट्रेंड पब्लिकेशन का अनावरण किया गया।
- यह राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो वैश्विक बाजारों की मांग के अनुसार भारतीय पारंपरिक डिज़ाइनों और उपभोक्ता प्राथमिकताओं का पूर्वानुमान (Forecasting) लगाने में मदद करती है।
2. सर्कुलरिटी और हरित नवाचार
- गेहूं के भूसे से वस्त्र (Wheat Straw to Wardrobes): कृषि अवशेषों (फसल के बचे हुए अवशेषों) से अगली पीढ़ी के कपड़ा फाइबर (Eco-friendly fibers) विकसित करने पर गहन विमर्श किया गया। यह पराली जलाने की समस्या का समाधान भी कर सकता है और वस्त्र निर्माण के लिए एक नया सतत माध्यम भी देगा।
- इंडिया सस्टेनेबल टेक्सटाइल मार्क: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से भारतीय वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए एक क्रेडिबल सामाजिक और पर्यावरणीय बेंचमार्क विकसित करने पर चर्चा हुई।
- सर्कुलर टेक्सटाइल: डायलॉग से क्रियान्वयन तक के चक्र पर जोर देते हुए अपशिष्ट कम करने और कपड़े के पुनर्चक्रण (Recycling) के व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा हुई।
3. जैविक कपास मूल्य श्रृंखला और निष्पक्ष मूल्य निर्धारण
- किसानों के हितों के संरक्षण और दीर्घकालिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए जैविक कपास (Organic Cotton) मूल्य श्रृंखला में पारदर्शी मूल्य निर्धारण (Fair Commodity Pricing) मॉडल अपनाने पर सहमति बनी।
4. डिजिटल और वैश्विक निर्यात बाजार
- अमेज़न ग्लोबल सेलिंग: ‘भारत से दुनिया तक’ (From Bharat to the World) मास्टरक्लास के तहत ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटप्लेस का उपयोग करके भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़ने पर जोर दिया गया।
5. मध्य प्रदेश राज्य सत्र
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में राज्य के समृद्ध कपड़ा इतिहास, चंदेरी और माहेश्वरी जैसी पारंपरिक बुनाई पद्धतियों, विनिर्माण क्षमता और निवेश की संभावनाओं का प्रदर्शन किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य
| घटक / पहल | मुख्य बिंदु |
| भारत टेक्स 2026 | भारत का सबसे बड़ा एकीकृत वैश्विक कपड़ा व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रम। इसका उद्देश्य संपूर्ण मूल्य श्रृंखला – ‘फाइबर से फैशन’ का प्रदर्शन करना है। |
| VisionNxt | NIFT द्वारा संचालित देश का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) फैशन ट्रेंड फोरकास्टिंग पोर्टल/प्रकाशन। |
| चक्रीय अर्थव्यवस्था | ऐसा मॉडल जिसमें संसाधनों के उपयोग को कम से कम किया जाता है तथा कचरे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग योग्य बनाया जाता है। |
| इंडिया सस्टेनेबल टेक्सटाइल मार्क | UNDP और भारत सरकार की संयुक्त पहल, जिसका उद्देश्य भारतीय वस्त्रों को वैश्विक पर्यावरणीय मानदंडों के अनुकूल प्रमाणित करना है। |
परिवर्तन योजना: दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की नई पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: परिवर्तन योजना, BS-VI मानक, NCRPB, MoHUA, MoRTH।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, बुनियादी ढांचा (परिवहन), सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने परिवर्तन योजना के परिचालन दिशानिर्देशों (Guidelines) को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में चलने वाली पुरानी, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली बसों और ट्रकों को हटाकर उनके स्थान पर नए BS-VI मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना है।
योजना की मुख्य बातें
- पूरा नाम: PARIVARTAN (Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions).
- कुल बजट (Outlay): ₹9,585 करोड़ (जिसमें केंद्र सरकार का बजटीय सहयोग ₹5,041 करोड़ है)।
- कार्यान्वयन और फंडिंग:
- इसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा लागू किया जाएगा।
- इसकी फंडिंग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के माध्यम से की जाएगी।
- डिजिटल एकीकरण: इस योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जो वाहन, वी-स्क्रैप, डिजी-ईएलवी और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के साथ जुड़ा होगा।
लाभार्थियों को मिलने वाले प्रमुख प्रोत्साहन
पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (Scrap) में देकर नई गाड़ी खरीदने वालों को सरकार ये बड़े फायदे दे रही है:
- टैक्स और फीस में छूट: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने नए वाहनों की खरीद पर 10 साल के लिए मोटर वाहन कर (Motor Vehicle Tax) में छूट और पंजीकरण शुल्क (Registration Fee) माफी की अधिसूचना जारी कर दी है।
- लोन पर सब्सिडी: वाहन लोन पर 5% की ब्याज छूट (Interest Subvention)।
- मैन्युफैक्चरर डिस्काउंट: देश के 11 प्रमुख कमर्शियल वाहन निर्माताओं (OEMs) ने MoRTH के साथ समझौता किया है, जिसके तहत नई गाड़ी पर कम से कम 8% की छूट मिलेगी।
- ईंधन और वित्तीय सहायता: डीजल/CNG वाहनों के लिए मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य
| तथ्य | विवरण |
| नोडल मंत्रालय | मंजूरी: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा। कार्यान्वयन: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा। |
| लक्षित क्षेत्र | संपूर्ण दिल्ली-NCR क्षेत्र (शामिल राज्य: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR जिले)। |
| लक्षित वाहन | केवल वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicles) जैसे ट्रक और बसें। |
| NCRPB | राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (यह MoHUA के तहत एक वैधानिक निकाय है)। |
REWARD कार्यक्रम: सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक से जलागम प्रबंधन
- प्रारंभिक परीक्षा: REWARD कार्यक्रम, राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA), WDC-PMKSY 3.0, ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि (वर्षा आधारित कृषि और सिंचाई), जल विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (कृषि में ड्रोन और अंतरिक्ष तकनीक का अनुप्रयोग)।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के ज्ञान भागीदार (Knowledge Partner) के रूप में जयपुर, राजस्थान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। विश्व बैंक की सहायता से चल रहे REWARD कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यशाला का विषय “वाटरशेड योजना और निगरानी के लिए सैटेलाइट और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण” था।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु और रणनीतिक निर्णय
- उद्देश्य: वाटरशेड (जलागम) विकास और प्रबंधन के लिए सैटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन (UAV) जैसी उन्नत तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर मंथन करना।
- राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (NTG): कार्यशाला का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के लिए सैटेलाइट और ड्रोन सर्वेक्षण के उपयोग को मानकीकृत (Standardized) किया जाए। इन पद्धतियों को आगामी राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (NTG) में शामिल किया जाएगा।

- भविष्य की रूपरेखा: यह तकनीकी इनपुट भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना WDC-PMKSY 3.0 (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- वाटरशेड विकास घटक) के आधार स्तंभ के रूप में कार्य करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य
| पहल / संस्था | मुख्य बिंदु |
| REWARD कार्यक्रम | पूरा नाम: Rejuvenating Watersheds for Agricultural Resilience through Innovative Development. वित्तपोषण: यह विश्व बैंक (World Bank) द्वारा सहायता प्राप्त परियोजना है। लक्ष्य: वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में जल सुरक्षा और लचीलापन (Resilience) बढ़ाना। |
| NRAA | राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण: यह भारत के वर्षासिंचित क्षेत्रों में स्थायी कृषि पद्धतियों के लिए नीतियां बनाने वाला नोडल निकाय है। |
| तकनीक का लाभ | ड्रोन और सैटेलाइट से जलभराव, मृदा क्षरण, और वनस्पतियों के घनत्व की रीयल-टाइम सटीक मैपिंग संभव होती है, जिससे वाटरशेड का बेहतर नियोजन (Planning) होता है। |
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता की दिशा में ऐतिहासिक कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – रेलवे।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech) – प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; पर्यावरण (Environment) – प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन; नवीकरणीय ऊर्जा (Green Hydrogen)।
चर्चा में क्यों?
भारतीय रेलवे देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) आधारित ट्रेन का परिचालन शुरू करने जा रही है। इस ट्रेन का उद्घाटन हरियाणा के जींद-सोनीपत खंड (Northern Railway) पर किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के दृष्टिकोण के तहत विकसित यह परियोजना भारत को उन चुनिंदा वैश्विक देशों की श्रेणी में खड़ा करती है जो शून्य-कार्बन रेल परिवहन प्रणाली पर काम कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु: तकनीक, अवसंरचना और सुरक्षात्मक पहलू
1. ट्रेन की तकनीकी विशिष्टताएँ
- ट्रेनसेट संरचना: यह 10 कोच वाली एक हाइड्रोजन ट्रेनसेट है, जिसमें 2 ड्राइविंग पावर कार (DPCs) और 8 ट्रेलर कोच (TCs) शामिल हैं।
- पावर क्षमता: इसमें 1200 kW का हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रोपल्शन (Propulsion) सिस्टम लगाया गया है।
- गति और क्षमता: इस ट्रेन की परिचालन गति 75 किमी/घंटा और डिजाइन गति 110 किमी/घंटा है, जो लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है।
- रूट नेटवर्क: यह ट्रेन जींद जंक्शन से सोनीपत के बीच चलेगी और रास्ते में आने वाले कुल 12 मध्यवर्ती स्टेशनों (जैसे जींद सिटी, गोहाना आदि) को जोड़ेगी।
2. ईंधन सेल कार्यप्रणाली
- PEMFC तकनीक: ट्रेन में बिजली उत्पादन के लिए ‘प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल’ (PEMFC) का उपयोग किया गया है।
- कार्य सिद्धांत: इसमें ‘परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड’ (PFSA) बहुलक झिल्ली (Polymer Membrane) के दोनों ओर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक अभिक्रिया कराई जाती है, जिससे बिजली बनती है और सह-उत्पाद के रूप में केवल पानी की भाप (Water Vapor) और गर्मी निकलती है।

- ऊर्जा घनत्व: हाइड्रोजन एक उच्च-ऊर्जा ईंधन है जिसका ऊर्जा घनत्व 120 MJ/Kg है, जबकि सामान्य डीजल का ऊर्जा घनत्व केवल 43 MJ/Kg होता है।
3. सुदृढ़ हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर
- देश का सबसे बड़ा रिफ्यूलिंग स्टेशन: हरियाणा के जींद में देश का पहला और सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन भंडारण एवं ईंधन भरने वाला स्टेशन स्थापित किया गया है, जिसकी क्षमता एक समय में 3,000 किलोग्राम कंप्रेस्ड हाइड्रोजन स्टोर करने की है।
- वैधानिक मंजूरी: इस ईंधन भंडारण और वितरण प्रणाली को पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा लाइसेंस प्रदान किया गया है।
- वैश्विक मानक: इस पूरे इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय मानकों (NFPA-2 और ISO 19880 सीरीज) के तहत तैयार किया गया है और जर्मनी की प्रसिद्ध तकनीकी एजेंसी TÜV SÜD द्वारा इसका स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट किया गया है।
4. व्यापक सुरक्षा तंत्र
- लिकेज और फ्लेम डिटेक्टर: रिफ्यूलिंग स्टेशनों और ट्रेन में अत्यधिक संवेदनशील हाइड्रोजन लीक सेंसर तथा फ्लेम डिटेक्टर स्थापित किए गए हैं।
- स्वचालित सुरक्षा शट-ऑफ: किसी भी असामान्य ताप या धुएं का पता चलते ही प्रणाली स्वतः ही हाइड्रोजन की आपूर्ति को रोक देती है।
- आपातकालीन मोड: लोको पायलट के केबिन में एक विशेष ‘आपातकालीन मोड’ दिया गया है जिससे ट्रेन को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा सके। इसके साथ ही, दिल्ली के शकूरबस्ती में इस ट्रेन के रख-रखाव के लिए एक अत्याधुनिक डिपो तैयार किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| PEMFC | प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल — वह तकनीक जो परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) झिल्ली का उपयोग कर शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ बिजली बनाती है। |
| RDSO | अनुसंधान, अभिकल्प और मानक संगठन — भारतीय रेलवे की वह तकनीकी संस्था जिसने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के डिजाइन और विशिष्टताओं को मंजूरी दी है। |
| PESO | पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन — भारत में विस्फोटक, संपीड़ित गैसों और पेट्रोलियम पदार्थों की सुरक्षा को विनियमित करने वाला नोडल निकाय, जिसने जींद स्टेशन को मंजूरी दी। |
| TUV SUD | जर्मनी की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तकनीकी निरीक्षण एजेंसी जिसने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (Safety Assessment) किया है। |
| जींद-सोनीपत खंड | भारत का पहला रेल खंड जहां 17 जुलाई 2026 से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन का व्यावसायिक परिचालन शुरू किया जा रहा है। |
पैमाना डैशबोर्ड: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र की त्रैमासिक रिपोर्ट
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; शासन व्यवस्था (Governance) – ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग और पारदर्शिता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3: बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानन, रेलवे और दूरसंचार; आर्थिक विकास; डेटा-संचालित नीति निर्माण।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की निगरानी को मजबूत करने के लिए PAIMANA (Project Assessment, Infrastructure Monitoring & Analytics for Nation-building) परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का नवीनतम त्रैमासिक अपडेट जारी किया है। आपको बता दें कि इस डिजिटल डैशबोर्ड को पहली बार 16 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य ‘वन नेशन, वन टाइम’ की तर्ज पर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policymaking) को बढ़ावा देना और देश के प्रमुख बुनियादी ढांचा उप-क्षेत्रों के प्रदर्शन को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना है।
मुख्य बिंदु: पैमाना डैशबोर्ड के प्रमुख नीतिगत आयाम और क्षेत्रीय रुझान
1. डैशबोर्ड की संरचना और मुख्य विशेषताएं
- मानकीकृत ढांचा: यह डैशबोर्ड मुख्य रूप से पांच महत्वपूर्ण आयामों पर काम करता है – पहुंच (Access), गुणवत्ता (Quality), राजकोषीय लागत और राजस्व (Fiscal Cost & Revenue), उपयोग (Utilization), और वहनीयता (Affordability)।
- विस्तारित संकेतक: इस त्रैमासिक अपडेट में 44 नए संकेतकों को जोड़ा गया है, जिससे अब इस डैशबोर्ड पर कुल संकेतकों की संख्या बढ़कर 165 हो गई है जो देश के बुनियादी ढांचे की व्यापक ट्रैकिंग को सुनिश्चित करते हैं।
- एकल सार्वजनिक मंच: यह नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस पर इंटरैक्टिव विज़ुअलाइज़ेशन और टाइम-सीरीज़ विश्लेषण की सुविधा देकर पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
2. विभिन्न बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के प्रमुख डेटा बिंदु (FY 2025-26)
दूरसंचार (Telecommunications):
- देश में कुल टेलीफोन ग्राहकों की संख्या 10.7% की वार्षिक वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2024-25 के 120.17 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 133.06 करोड़ तक पहुंच गई है।
- इसी अवधि में डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देते हुए टेली-घनत्व (Tele-density) सुधरकर 93.26% हो गया है, जबकि मोबाइल टावरों की संख्या 8.55 लाख और बेस ट्रांसीवर स्टेशनों (BTS) की संख्या 32.25 लाख हो गई है।
नागरिक विमानन (Civil Aviation):
- वित्त वर्ष 2026-27 (मई तक) में कुल यात्री यातायात 7.1 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि कार्गो हैंडलिंग 10.6% की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 7.3 लाख टन पर पहुंच गई है।
- देश में हवाई अड्डों (Aerodromes) की कुल संख्या वर्ष 2014 के बाद 81 की वृद्धि दर्ज करते हुए अब वर्तमान में 165 हो गई है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग:
- वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 9,360 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है, जिसने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में संपर्क को काफी मजबूत किया है।
- वित्त वर्ष 2026-27 (मई तक) इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (FASTag) लेनदेन में 39.7% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो कुल ₹88 करोड़ के स्तर को पार कर गया है।
रेलवे (Railways):
- ब्रॉड गेज वैगनों की औसत वहन क्षमता वर्ष 2015-16 के 60.8 टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 64.0 टन हो गई है, जबकि औसत माल ढुलाई प्रति वैगन लगभग 68 टन तक पहुंच गई है।
- वर्ष 2024-25 में देश का संपूर्ण रेल नेटवर्क 1.37 लाख ट्रैक किलोमीटर से अधिक विस्तृत हो चुका है, जो प्रतिदिन औसतन 19.98 मिलियन यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है।
बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग (Ports & Waterways):
- वर्ष 2025 में भारत का समुद्री बेड़ा (Fleet) बढ़कर 1,592 जहाजों का हो गया है, जबकि देश का समुद्री व्यापार वर्ष 2015 के 76 मिलियन टन से लगभग दोगुना होकर वर्ष 2023 में 145 मिलियन टन पर पहुंच गया है।
- वर्ष 2024-25 में अंतर्देशीय जलमार्ग जहाजों का बेड़ा 10,623 तक पहुंच गया है, और देश के नौगम्य जलमार्गों (Navigable Waterways) की कुल लंबाई बढ़कर 29,151.9 किलोमीटर हो गई है।
ऊर्जा क्षेत्र (Power):
- नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड को मजबूत करने के लिए भारत की ऊर्जा भंडारण क्षमता वर्ष 2027-28 के 87 GWh से दस गुना से अधिक बढ़कर वर्ष 2035-36 तक 888 GWh होने का अनुमान लगाया गया है।
- इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष 2035-36 तक पंप्ड स्टोरेज प्लांट (PSP) की क्षमता 94 GW और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की क्षमता 80 GW तक बढ़ाई जाएगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| PAIMANA डैशबोर्ड | MoSPI द्वारा अप्रैल 2026 में लॉन्च किया गया एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, जो देश के 6 प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के 165 मानकीकृत संकेतकों की निगरानी करता है। |
| MoSPI | सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय — देश में पैमाना डैशबोर्ड के माध्यम से त्रैमासिक आधार पर आधिकारिक बुनियादी ढांचा डेटा जारी करने वाला नोडल मंत्रालय। |
| डैशबोर्ड के 5 आयाम | एक्सेस (पहुंच), क्वालिटी (गुणवत्ता), फिस्कल कॉस्ट एंड रेवेन्यू (लागत व राजस्व), यूटिलाइजेशन (उपयोग), और अफोर्डेबिलिटी (वहनीयता)। |
| ऊर्जा भंडारण लक्ष्य (2035-36) | ग्रिड स्थिरता के लिए 888 GWh कुल भंडारण क्षमता का लक्ष्य, जिसमें प्रमुख योगदान पंप किए गए भंडारण संयंत्रों (PSP – 94 GW) और बैटरी स्टोरेज (BESS – 80 GW) का होगा। |
| सर्वाधिक संकेतक वाला क्षेत्र | वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग क्षेत्र (Ports, Shipping & Waterways) कुल 62 संकेतकों के साथ इस डैशबोर्ड पर शीर्ष पर है। |
‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ और भारत का ‘वन नेशन, वन टाइम’ मिशन
- प्रारंभिक परीक्षा: शासन व्यवस्था (Governance) – ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं और सीमाएं; सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech) – तकनीकी का स्वदेशीकरण और नवीन तकनीक का विकास; आंतरिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे (Critical Infrastructure) की सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने बेंगलुरु के जक्कुर में स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला (RRSL) में ‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ पर आधारित ‘भारतीय मानक समय (IST) – वितरण प्रदर्शन नेटवर्क’ का आधिकारिक उद्घाटन किया है। यह ऐतिहासिक पहल भारत सरकार के महत्वाकांक्षी विज़न ‘वन नेशन, वन टाइम’ के तहत शुरू की गई है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य पूरे देश में एक समान, अत्यधिक सटीक और पूरी तरह से सुरक्षित समय मानक स्थापित करना है।
मुख्य बिंदु: डिजिटल संप्रभुता और स्वदेशी समय वितरण प्रणाली
1. विदेशी समय स्रोतों पर निर्भरता से मुक्ति
- डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: यह नई प्रणाली जीपीएस (GPS) जैसे विदेशी टाइम सोर्स पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह से समाप्त कर देगी, जिससे देश के महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे को आत्मनिर्भरता मिलेगी।
- साइबर सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण: बाहरी समय संदर्भों पर निर्भरता कम होने से देश के संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों को संभावित साइबर हमलों, टाइम-स्पूफिंग और डेटा में हेरफेर (Data Manipulation) जैसे गंभीर बाहरी खतरों से अधिकतम सुरक्षा प्राप्त होगी।
2. महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उच्च-सटीक सिंक्रोनाइज़ेशन
- वित्तीय बाजारों में स्थिरता: यह उप-नैनोसेकंड स्तर की उच्च-सटीक समय सिंक्रोनाइज़ेशन तकनीक हमारे उच्च-आवृत्ति वित्तीय बाजारों (High-frequency financial markets) और स्टॉक एक्सचेंजों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करेगी।
- नेटवर्क सुरक्षा: यह स्वदेशी प्रणाली डिजिटल बैंकिंग भुगतानों में पारदर्शिता लाने, दूरसंचार नेटवर्क की क्षमता सुधारने और राष्ट्रीय पावर ग्रिड को किसी भी प्रकार की विफलता से बचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी।
3. परियोजना का प्रशासनिक और सहयोगी ढांचा
- नोडल एजेंसी: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कानूनी मापविज्ञान प्रभाग (Legal Metrology Division) इस पूरे राष्ट्रीय प्रोजेक्ट की मुख्य नोडल एजेंसी है।
- बहु-संस्थागत सहयोग: इस स्वदेशी प्रणाली को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने के लिए देश की प्रमुख तकनीकी और नियामक संस्थाओं जैसे राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), इसरो, बीएसएनएल (BSNL) और सेबी ने एक साथ मिलकर कार्य किया है।
4. भविष्य के डिजिटल गवर्नेंस का आधार
- पारदर्शिता में सुधार: पूरे देश के लिए एक समान समय प्रोटोकॉल (Uniform Time Protocol) का होना आने वाले समय में भारत के भविष्य के प्रौद्योगिकी-संचालित डिजिटल गवर्नेंस का मुख्य आधार स्तंभ बनेगा।
- सार्वजनिक सेवाओं का सुदृढ़ीकरण: सरकारी डेटाबेस और टाइम-स्टैम्पिंग में एकरूपता आने से देश की सार्वजनिक सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (WRT) | सर्न द्वारा विकसित एक ओपन-सोर्स तकनीक, जो मानक ईथरनेट नेटवर्क पर सब-नैनोसेकंड की सटीकता के साथ डेटा ट्रांसफर और सटीक समय सिंक्रोनाइज़ेशन प्रदान करती है। |
| भारतीय मानक समय (IST) | भारत का आधिकारिक समय मानक जो 82.5^E देशांतर पर आधारित है, जिसे बनाए रखने की कानूनी जिम्मेदारी नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL), नई दिल्ली की है। |
| समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) | यह दुनिया का प्राथमिक समय मानक है जिसके द्वारा दुनिया अपनी घड़ियों और समय को नियंत्रित करती है, भारत की नई प्रणाली इसी अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का अनुपालन करती है। |
| कानूनी मापविज्ञान प्रभाग | उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला प्रभाग जो भारत में ‘वन नेशन, वन टाइम’ विज़न के तहत इस पूरे प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन की नोडल एजेंसी है। |
| सहयोगी नियामक और निकाय | SEBI (शेयर बाजार समय के लिए), ISRO (सैटेलाइट आधारित समय मिलान के लिए), और BSNL (नेटवर्क आधारित समय वितरण के लिए तकनीकी सहयोग)। |
CSIR-NIScPR और CGPDTM के बीच समझौता ज्ञापन (MoU): वैश्विक ज्ञान संसाधनों तक पहुंच का सुदृढ़ीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; महत्वपूर्ण संस्थान और उनकी भूमिका।
- मुख्य परीक्षा GS Paper 3: बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से संबंधित मुद्दे; सूचना प्रौद्योगिकी (IT); देश का आर्थिक विकास और नवाचार (Innovation) इकोसिस्टम।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली के बौद्धिक संपदा भवन में CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) और पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिन्ह महानियंत्रक कार्यालय (CGPDTM) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते के तहत CGPDTM अब राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन कंसोर्टियम (NKRC) में भागीदारी करेगा, जो देश में बौद्धिक संपदा प्रशासन और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य बिंदु: सहयोग के रणनीतिक आयाम और लाभ
1. राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन कंसोर्टियम (NKRC) क्या है?
- स्थापना और विकास: यह कंसोर्टियम पिछले 25 वर्षों (रजत जयंती वर्ष) से काम कर रहा है। यह मुख्य रूप से वैज्ञानिक और तकनीकी सूचना संसाधनों के लिए राष्ट्रीय स्तर के लाइसेंसों को सुरक्षित करने और उनके साझाकरण की निगरानी करता है।
- विस्तारित नेटवर्क: वर्तमान में NKRC सीएसआईआर (CSIR), विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत आने वाले 82 सदस्य संस्थानों को अपनी सेवाएं दे रहा है।
- संसाधनों की उपलब्धता: इसके तहत शोधकर्ताओं को सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं (Journals), पेटेंट डेटाबेस, मानकों और विशिष्ट शोध उपकरणों तक आसान पहुंच मिलती है। यह कंसोर्टियम देश में ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ONOS) पहल के क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. CGPDTM के लिए इस समझौते का महत्व
- बेहतर पेटेंट जांच (Patent Examination): वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य तक आसान पहुंच मिलने से CGPDTM के परीक्षकों को ‘प्रायर-आर्ट सर्च’ (Prior-art Searches – पहले से मौजूद तकनीक की खोज) करने और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। इससे पेटेंट आवेदनों के निपटारे की गुणवत्ता में सुधार होगा।
- लागत में भारी बचत: कंसोर्टियम मॉडल के माध्यम से डेटाबेस और शोध पत्रिकाओं की सदस्यता लेने पर एकल खरीद की तुलना में सरकार को भारी बजटीय बचत होगी।
3. भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
दोनों संस्थाओं के प्रमुखों – प्रो. (डॉ.) उन्नत पी. पंडित (महानियंत्रक, CGPDTM) और डॉ. गीता वाणी रायसम (निदेशक, CSIR-NIScPR) के अनुसार, यह साझेदारी केवल अकादमिक पहुंच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निम्नलिखित क्षेत्रों में भी काम करेगी:
- पेटेंट सूचना सेवाएं और बौद्धिक संपदा (IP) प्रबंधन।
- विज्ञान संचार (Science Communication) और विज्ञान नीति अनुसंधान।
- डिजिटल ज्ञान प्रबंधन और क्षमता निर्माण (Capacity Building)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| NKRC | राष्ट्रीय ज्ञान संसाधन कंसोर्टियम (स्थापना: 2001) — यह देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों को विश्व स्तरीय ई-संसाधनों और शोध पत्रिकाओं तक निर्बाध पहुंच प्रदान करता है। |
| CGPDTM | वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के DPIIT के तहत नोडल कार्यालय — जो भारत में पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेतकों (GI) के प्रशासन और विनियमन को संभालता है। |
| CSIR-NIScPR | वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की घटक प्रयोगशाला — जो मुख्य रूप से विज्ञान संचार, वैज्ञानिक प्रकाशन और विज्ञान नीति अनुसंधान पर केंद्रित है। |
| ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ | सरकार की एक प्रमुख पहल जिसके साथ मिलकर NKRC देश के सभी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को वैज्ञानिक डेटाबेस की समान पहुंच दिलाने के लिए काम कर रहा है। |
| प्रायर-आर्ट सर्च | पेटेंट परीक्षा के दौरान की जाने वाली खोज, जिससे यह पता लगाया जाता है कि आवेदक का आविष्कार वास्तव में नया है या पहले से ही दुनिया में कहीं मौजूद है। |
स्पिरुलिना से स्वदेशी ‘सी-फाइकोसायनिन’ तकनीक का व्यावसायीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)।
- मुख्य परीक्षा GS Paper 3: प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण; जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और इसका अनुप्रयोग; खाद्य सुरक्षा और जैव अर्थव्यवस्था (Bio-economy)।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने हैदराबाद की कंपनी मैसर्स के. एन. बायोसाइंसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य “स्पिरुलिना को सेल फैक्ट्री के रूप में उपयोग करके सी-फाइकोसायनिन का उत्पादन” नामक परियोजना के तहत एक स्वदेशी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू करना है।
जैव-प्रौद्योगिकी और स्वदेशी उत्पादन का नया मॉडल
1. सी-फाइकोसायनिन क्या है?
- प्राकृतिक नीला रंग: यह स्पिरुलिना (एक प्रकार का ब्लू-ग्रीन शैवाल) से प्राप्त होने वाला एक अत्यंत मूल्यवान प्राकृतिक नीला वर्णक (Natural Blue Pigment) है।
- बहु-क्षेत्रीय अनुप्रयोग: इसका उपयोग खाद्य उद्योग, न्यूट्रास्यूटिकल्स, कृषि, जलीय कृषि, पोल्ट्री फीड और बायोस्टिमुलेंट क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता है।
- आयात पर निर्भरता में कमी: वर्तमान में भारत प्राकृतिक नीले रंगों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है; यह परियोजना भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगी।
2. अनुसंधान से बाजार तक: सार्वजनिक-निजी सहयोग
- तकनीक का विकास: इस अनूठी तकनीक को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है।
- स्वदेशी स्ट्रेन का उपयोग: उत्पादन के लिए आईआईटी गुवाहाटी ने पूरी तरह से स्वदेशी स्पिरुलिना स्ट्रेन (NCIM 5143) का उपयोग किया है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT): इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर उतारने के लिए औपचारिक रूप से हैदराबाद की के. एन. बायोसाइंसेज कंपनी को ट्रांसफर कर दिया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘बायो-मैन्युफैक्चरिंग’ का बेहतरीन उदाहरण है।
3. पर्यावरण-अनुकूल निष्कर्षण तकनीक
- नियंत्रित खेती (Upstream Process): प्रकाश और पोषक तत्वों की नियंत्रित फोटोऑटोट्रॉफिक परिस्थितियों में स्पिरुलिना की उच्च-घनत्व खेती की जाती है।
- हरित निष्कर्षण (Downstream Process): इसमें रसायनों के बिना, पूरी तरह से सॉल्वेंट-फ्री और सिंगल-स्टेप शुद्धिकरण प्रक्रिया अपनाई जाती है।
- गुणवत्ता: अंतिम उत्पाद के रूप में एक बेहद स्थिर और पानी में घुलनशील नीला पाउडर प्राप्त होता है, जो वैश्विक अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष है।
4. भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bio-economy) पर प्रभाव
- आयात प्रतिस्थापन: यह कदम विदेशों से महंगे सिंथेटिक और प्राकृतिक रंगों के आयात को कम करेगा।
- ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग: पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना टिकाऊ और रासायनिक मुक्त औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| सी-फाइकोसायनिन | स्पिरुलिना शैवाल से प्राप्त होने वाला एक प्राकृतिक नीला वर्णक (Pigment), जो एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर और पूरी तरह से पानी में घुलनशील है। |
| स्पिरुलिना | यह एक प्रकार का नीला-हरा शैवाल है जो प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर होने के कारण सुपरफूड माना जाता है। |
| NCIM 5143 | आईआईटी गुवाहाटी द्वारा उपयोग किया गया स्पिरुलिना का विशिष्ट स्वदेशी स्ट्रेन, जिसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले फाइकोसायनिन के लिए किया गया है। |
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) एवं सामाजिक सुरक्षा समझौता
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
- मुख्य परीक्षा GS Paper 3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; वैश्विक व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय समझौते।
चर्चा में क्यों?
भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए भारत-यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौते के लागू होने को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। यह कदम दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को एक नए युग में ले जाने का काम करेगा।
समझौतों के प्रमुख नीतिगत स्तंभ और देश पर प्रभाव
1. भारत-यूके CETA (Comprehensive Economic and Trade Agreement)
- बाजार तक आसान पहुंच: यह समझौता भारत के कृषि क्षेत्र, नए उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) को यूके (UK) के बाजार में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए नए अवसर और मजबूत पहुंच प्रदान करेगा।
- सहयोग के नए आयाम: इसके तहत दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी (Technology), पेशेवर सेवाओं (Professional Services) और नवाचार (Innovation) के क्षेत्रों में सहयोग को अत्यधिक गहरा किया जाएगा।
- कुशल प्रतिभाओं की गतिशीलता: CETA के लागू होने से भारत के कुशल पेशेवरों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए यूके में काम करने और गतिशीलता (Mobility) के नियमों में सुगमता आएगी।
2. सामाजिक सुरक्षा समझौता (Social Security Agreement – SSA)
- अस्थायी पेशेवरों को बड़ी राहत: यह समझौता यूनाइटेड किंगडम (UK) में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान से बचाएगा, जिससे उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी।
- भारतीय उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता: भारतीय कंपनियों को यूके में अपने कर्मचारियों के लिए दोहरे कर या योगदान से मुक्ति मिलेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय व्यवसायों की परिचालन लागत कम होगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
3. रणनीतिक और आर्थिक महत्व
- आपसी विश्वास का प्रतीक: यह साझेदारी दो बड़े और मजबूत लोकतंत्रों के बीच बढ़ते आपसी रणनीतिक विश्वास और एक भविष्योन्मुखी आर्थिक साझेदारी के निर्माण के संकल्प को दर्शाती है।
- साझा समृद्धि: यह समझौता दोनों देशों के लोगों के लिए साझा महत्वाकांक्षाओं को वास्तविक और धरातलीय अवसरों में बदलने का काम करेगा, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को गति मिलेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| CETA (भारत-यूके) | व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता — इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बाधाओं को कम करना और सेवाओं एवं वस्तुओं के व्यापार को बढ़ावा देना है। |
| सामाजिक सुरक्षा समझौता (SSA) | दो देशों के बीच होने वाला एक द्विपक्षीय समझौता, जो दोहरे सामाजिक सुरक्षा करों के भुगतान को रोकता है और प्रवासियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की रक्षा करता है। |
| MSMEs पर प्रभाव | भारतीय लघु उद्योगों को शून्य या कम सीमा शुल्क दरों पर यूके के विकसित बाजार में अपने उत्पादों को निर्यात करने का सीधा अवसर मिलेगा। |
| द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य | भारत और यूके ने अपने ‘रोडमैप 2030’ के तहत वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का साझा लक्ष्य रखा है। |