20 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत बिहार के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाले मखाना क्षेत्र (पारंपरिक फसल से वैश्विक ‘सुपरफूड’ तक का सफर), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा न्हावा शेवा बंदरगाह पर 56 किग्रा मेथामफेटामाइन ज़ब्ती के माध्यम से नशीली दवाओं के नेटवर्क पर कार्रवाई, सुशासन में AI, क्वांटम और साइबर सुरक्षा, सामाजिक सशक्तीकरण हेतु विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए SEED योजना, संपर्क क्षमता व क्षेत्रीय व्यापार को गति देने के लिए बिहार में NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड का 4-लेन में उन्नयन, सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हेतु श्वेत क्रांति 2.0, तथा भारत के नारियल क्षेत्र (‘कल्पवृक्ष’ से वैश्विक पहचान तक) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
मखाना क्षेत्र: एक पारंपरिक फसल से वैश्विक ‘सुपरफूड’ तक का सफर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय मखाना बोर्ड, मखाना अनुसंधान केंद्र (NRCM), HSN कोड, पोषण स्तर, भौगोलिक स्थितियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि (फसल पैटर्न, उत्पादकता), खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योग (फायदे, मूल्य संवर्धन, निर्यात), किसानों की आय दोगुनी करना।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने मखाना (Fox Nut) को एक प्रमुख एग्री-सुपरफूड के रूप में स्थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की, जिसे 15 सितंबर 2025 को बिहार में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक की अवधि के लिए ₹476.03 करोड़ के बजट के साथ मखाना विकास के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) को मंजूरी दी है।
मखाना: बुनियादी जानकारी एवं भारत में स्थिति
- वैज्ञानिक नाम: Euryale ferox (यह उथले तालाबों, झीलों और आर्द्रभूमि में उगाई जाने वाली एक जलीय फसल है)।
- खाद्य भाग: पौधा का बीज (भूनने और पॉलिश करने के बाद यह ‘पाप्ड मखाना’ बनता है)।
- वैश्विक दबदबा: भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है।
- बिहार का एकाधिकार: भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 3/4 भाग और वैश्विक आपूर्ति का 80-85% हिस्सा अकेले बिहार से आता है (मुख्य रूप से कोसी बेसिन: सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मिथिला और सीमांचल)।
उत्पादन, बाज़ार और मूल्य वृद्धि
| मापदंड / विवरण | तथ्य एवं आंकड़े |
| कुल उत्पादन (2025–26, 2nd Adv. Est.) | 80,590 मीट्रिक टन (औसत उत्पादकता: 2.34 MT/हेक्टेयर) |
| बिहार का योगदान (2025-26) | 60,000 मीट्रिक टन |
| बाज़ार आकार (2029-30 का अनुमान) | ₹11,000 – ₹12,000 करोड़ |
| कीमतों में उछाल | ₹500/किग्रा (2020-22) से बढ़कर ₹1,250/किग्रा (2025) |
| मासिक घरेलू खपत (पाप्ड मखाना) | 3,000-3,500 MT (त्योहारों के दौरान 5,000 MT तक) |
| आधुनिक खेती तकनीक/किस्में | फील्ड-सिस्टम फार्मिंग, स्वर्ण वैदेही, सबौर मखाना-1 |
मखाना का निर्यात परिदृश्य
- नया HSN कोड (2025): विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 2025 में पाप्ड मखाना और उसके उत्पादों के लिए अलग HSN कोड जारी किया (इससे पहले सामान्य कोड के तहत ट्रैक होता था)।
- निर्यात मात्रा (2025-26): 7,264.89 मीट्रिक टन (मूल्य: ₹192.96 करोड़ / 19296.08 लाख रुपये)।
- प्रमुख बाजार (कुल का 77% हिस्सा):
- अमेरिका (40%)
- कनाडा (20%)
- संयुक्त अरब अमीरात (17%)
- प्रीमियम मूल्य वाले बाज़ार (कम मात्रा, उच्च कीमत): जर्मनी (26.0/किग्रा), नेपाल (21.6/किग्रा), ऑस्ट्रेलिया (21.0/किग्रा)।
वैज्ञानिक एवं पोषण संबंधी पहलू
- सुपरफूड गुण: कम सोडियम, कोलेस्ट्रॉल मुक्त, वसा की मात्रा बहुत कम (0.33 ग्राम/100 ग्राम)।
- प्रोटीन की सुपाच्यता: लगभग 95% प्रोटीन पाचनशक्ति, इसका आवश्यक एमिनो एसिड इंडेक्स मछली के समकक्ष है।

- मधुमेह और दिल के लिए सुरक्षित: इसका ग्लाइसेमिक लोड कम होता है, जो डायबिटीज प्रबंधन में मददगार है।
- एंटी-एजिंग और मिनरल्स: मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, और आयरन से भरपूर। यह बादाम और अखरोट के मुकाबले बेहतर पोषण विकल्प माना जा रहा है।
मखाना का मूल्य संवर्धन और तकनीक
मूल्य संवर्धन के 3 चरण:
- फार्म-स्तरीय उत्पादन: तालाब की तैयारी, बीज बोना और हाथों से जलभराव से बीज निकालना (अत्यधिक श्रम-साध्य)।
- प्राथमिक प्रसंस्करण: बीजों को सुखाना, सफाई करना, उच्च तापमान पर भूनना, पॉपिंग (फोड़ना), ग्रेडिंग और पॉलिशिंग।
- द्वितीयक प्रसंस्करण: फ्लेवर्ड मखाना, रेडी-टू-ईट स्नैक्स, मखाना आटा और पैकेजिंग।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र (NRCM):
- स्थान: दरभंगा (बिहार)।
- उपलब्धियां:
- मखाना-सह-मछली एकीकृत खेती (Makhana-cum-fish farming) मॉडल।
- कांटों रहित सिंघाड़ा और मखाना की उच्च उपज देने वाली किस्में विकसित कीं।
- मखाना सीड वाशर, सीड ग्रेडर, रोस्टिंग और पॉपिंग मशीन जैसी तकनीकों का पेटेंट/कमर्शियलाइजेशन।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| तथ्य | महत्वपूर्ण तथ्य |
| फसल की प्रकृति | Euryale ferox – उथले पानी में उगने वाली जलीय फसल |
| वैश्विक शेयर | भारत विश्व में नंबर-1; बिहार वैश्विक आपूर्ति का 80-85% उत्पादन करता है |
| केंद्रीय योजना बजट | ₹476.03 करोड़ (2025-26 से 2030-31 तक) |
| राष्ट्रीय मखाना बोर्ड | बजट 2025-26 में घोषित; 15 सितंबर 2025 को बिहार में लॉन्च |
| निर्यात का नया कोड | DGFT द्वारा 2025 में नया HSN कोड आवंटित |
| प्रमुख निर्यातक देश | अमेरिका (40%), कनाडा (20%), यूएई (17%) |
DRI ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर मक्का में छिपाई गई 56 किग्रा मेथामफेटामाइन जब्त की
- प्रारंभिक परीक्षा: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), NDPS अधिनियम 1985, मेथामफेटामाइन (कृत्रिम दवाएं)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking), सीमावर्ती/बंदरगाह सुरक्षा, अवैध गतिविधियों का नेटवर्क।
चर्चा में क्यों?
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक विशेष खुफिया अभियान में न्हावा शेवा बंदरगाह (नवी मुंबई) पर भारत से सऊदी अरब भेजी जा रही 56 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की एक बड़ी खेप जब्त की। तस्करों ने इस मादक पदार्थ को छिपाने के लिए एक नया तरीका (Modus Operandi) अपनाया था। उन्होंने पाउडर रूप में मौजूद मेथामफेटामाइन को मक्के (Maize) के 351 बैगों में से एक में मिला दिया था ताकि नियमित सीमा शुल्क जांच से बचा जा सके। मामले में निर्यातक और फ्रेट फॉरवर्डर को NDPS अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य बिंदु: ऑपरेशन, छुपाने की तकनीक और जोखिम
1. तस्करी का अनूठा तरीका
- कृषि जिंस का आवरण: तस्करों ने सामान्य मक्के की आड़ में मेथामफेटामाइन को पूरी तरह मिला दिया था।
- गंतव्य: इस खेप को भारत से सऊदी अरब अवैध रूप से निर्यात किया जाना था।
- त्वरित कार्रवाई: DRI ने तात्कालिक जांच के माध्यम से विदेशी खरीदार से तालमेल बिठाने वाले फ्रेट फॉरवर्डर और मुख्य निर्यातक दोनों को गिरफ्तार किया।
2. मेथामफेटामाइन क्या है? (रसायन और स्वास्थ्य पर प्रभाव)
- प्रकृति: यह एक अत्यधिक शक्तिशाली सिंथेटिक साइकोस्टिमुलेंट है।
- स्वास्थ्य जोखिम: यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर सीधा प्रभाव डालता है। इसके सेवन से हृदय गति और रक्तचाप में अत्यधिक वृद्धि, मतिभ्रम (Paranoia), साइकोसिस और गंभीर शारीरिक निर्भरता उत्पन्न होती है।
3. सुरक्षा और नेटवर्क संबंधी चिंताएं
- यह घटना दर्शाती है कि ट्रांसनेशनल ड्रग सिंडिकेट अब पारंपरिक रास्तों के बजाय वैध व्यापारिक मार्गों और कृषि शिपमेंट का दुरुपयोग कर रहे हैं।
- बंदरगाह आधारित सुरक्षा और कंटेनर स्कैनिंग बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) का परिचय
- स्थापना: 4 दिसंबर 1957।
- नोडल एजेंसी: यह केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली भारत की शीर्ष तस्करी-विरोधी खुफिया एजेंसी है।
- मुख्य कार्य: सीमा शुल्क चोरी, वाणिज्यिक धोखाधड़ी, मादक पदार्थों, सोने, हथियारों और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी को रोकना और खुफिया जानकारी एकत्रित करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्रवाई करने वाली एजेंसी | राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) |
| नोडल मंत्रालय | वित्त मंत्रालय (CBIC के तहत) |
| ज़ब्त मादक पदार्थ | मेथामफेटामाइन (56 किग्रा) |
| कार्रवाई का स्थान | न्हावा शेवा पोर्ट (जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट – JNPT) |
| प्रासंगिक कानून | NDPS (स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ) अधिनियम, 1985 |
| ड्रग की प्रकृति | सिंथेटिक साइकोस्टिमुलेंट (कृत्रिम उत्तेजक) |
AI, क्वांटम और साइबर सुरक्षा से बदल रहा गवर्नेंस: डॉ. जितेंद्र सिंह
- प्रारंभिक परीक्षा: लेटरल एंट्री, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA), विजन इंडिया @2047।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): शासन व्यवस्था और प्रौद्योगिकी (Governance & Technology), सिविल सेवाओं की भूमिका, ई-गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा का अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय राज्य मंत्री (PMO, कार्मिक एवं जन शिकायत) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लेटरल एंट्री के माध्यम से आए संयुक्त सचिवों, निदेशकों और उप सचिवों के लिए आयोजित 15-दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के प्रतिभागियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उपकरण प्रशासनिक प्रक्रियाओं एवं सुशासन (Governance) को तेजी से बदल रहे हैं।
मुख्य बिंदु: रिफ्रेशर कोर्स, तकनीक और प्रभावी संचार
1. शासन व्यवस्था में उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका
- तकनीकी अनुकूलन: AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा जैसे नए उपकरण सरकारी योजनाओं की डिलीवरी, मॉनिटरिंग और नीति विश्लेषण (Policy Analysis) को सुगम बना रहे हैं।
- निरंतर अधिगम (Continuous Learning): बदलते प्रशासनिक वातावरण में अधिकारियों को लगातार अपने कौशल और ज्ञान को अपडेट करने की आवश्यकता है।
2. सरकारी संचार के 4 प्रमुख स्तर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर दिया कि अधिकारियों के लिए केवल आंतरिक पत्राचार काफी नहीं है। सोशल मीडिया के युग में अधिकारियों में मजबूत संचार कौशल होना आवश्यक है:
- सहकर्मियों एवं सरकारी कार्यवाहकों से संचार (Government Functionaries & Colleagues)
- राजनीतिक कार्यवाहकों से संचार (Political Functionaries)
- मीडिया के साथ संचार (Media)
- आम जनता के साथ सार्वजनिक संचार (Public Communication / Common People)
3. लेटरल एंट्री और संस्थागत ढांचा
- ताजा प्रतिभा और दृष्टिकोण: विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रशासन में लाने के लिए लेटरल एंट्री का संस्थागत मॉडल अपनाया गया है, जिसके तहत अब तक लगभग 63 अधिकारी सेवा में आए हैं।
- दोतरफा संवाद और फीडबैक: रिफ्रेशर कोर्स का उद्देश्य केवल व्याख्यान देना नहीं, बल्कि दोतरफा संवाद बनाना है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सुधार के लिए अधिकारियों से निष्पक्ष और अनाम (Anonymous) फीडबैक लिया जाएगा।
- IIPA की भूमिका: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की पहुंच को राज्यों, केंद्रीय निकायों और निजी क्षेत्र तक विस्तारित किया जा रहा है।
4. विजन @2047 में अधिकारियों की भूमिका
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण में लेटरल एंट्री और सिविल सेवकों को ‘भारत @47 के वास्तुकार’ (Architects of India ’47) के रूप में चित्रित किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | लेटरल एंट्री अधिकारियों हेतु 15-दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स |
| आयोजक संस्थान | भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) / कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग |
| लेटरल एंट्री संख्या | अब तक लगभग 63 अधिकारी नियुक्त किए गए |
| प्रमुख पाठ्यक्रम विषय | AI, साइबर सुरक्षा, नीति विश्लेषण, डिजिटल परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और संचार |
| मुख्य दृष्टिकोण | विकसित भारत @2047 में अधिकारियों की क्षमता निर्माण |
विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों का सशक्तिकरण: SEED योजना
- प्रारंभिक परीक्षा: SEED योजना, DWBDNC बोर्ड, विमुक्त (DNT), घुमंतू (NT) और अर्ध-घुमंतू (SNT) समुदाय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सामाजिक न्याय, समाज के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, समावेशी विकास और गरीबी उन्मूलन।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (DNT/NT/SNT) समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए SEED योजना (Scheme for Economic Empowerment of DNTs) के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रगति की समीक्षा की गई है।
मुख्य बिंदु: DWBDNC बोर्ड, SEED योजना के घटक और प्रभाव
1. पृष्ठभूमि और संस्थागत ढांचा
- राष्ट्रीय आयोग (2015-2017): विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए जनवरी 2015 में एक राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया था, जिसने दिसंबर 2017 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
- DWBDNC का गठन (2019): आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए विकास और कल्याण बोर्ड (DWBDNC) की स्थापना की।
- मंत्रालय: यह बोर्ड और योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत संचालित है।
2. SEED योजना के 4 मुख्य घटक
DWBDNC द्वारा संचालित SEED योजना इन समुदायों के समग्र विकास के लिए 4 स्तंभों पर आधारित है:
- मुफ्त कोचिंग (Coaching for Competitive Exams): प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए प्रतिभाशाली DNT छात्रों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग प्रदान करना।
- स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance): DNT/NT/SNT समुदायों के परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा और बीमा कवर उपलब्ध कराना।
- आजीविका सहायता (Livelihood Initiatives): सामुदायिक स्तर पर आजीविका गतिविधियों, स्वरोजगार और कौशल विकास को बढ़ावा देना।
- आवास निर्माण हेतु वित्तीय सहायता (Housing Assistance): पात्र परिवारों को पक्के मकानों के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना।
3. सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
- समावेशी विकास: ऐतिहासिक रूप से हास्ये पर रहे और वंचित DNT/NT/SNT समुदायों को मुख्यधारा के अवसरों से जोड़ना।
- जीवन स्तर में सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की एक एकीकृत दृष्टिकोण (Comprehensive Approach) से पूर्ति करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | SEED योजना (Scheme for Economic Empowerment of DNTs) |
| नोडल मंत्रालय | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय |
| कार्यान्वयन एजेंसी | DWBDNC बोर्ड (स्थापना: फरवरी 2019) |
| 4 मुख्य घटक | 1. मुफ्त कोचिंग 2. स्वास्थ्य बीमा 3. आजीविका 4. आवास सहायता |
| लक्ष्य समूह | विमुक्त (DNT), घुमंतू (NT) और अर्ध-घुमंतू (SNT) समुदाय |
बिहार में NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड का 4-लेन में उन्नयन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय राजमार्ग 22 (NH-22), हाइब्रिड एनुइटी मॉडल (HAM), पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान, भारत-नेपाल सीमा संपर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, हवाई अड्डे, रेलवे (Infrastructure: Roads & Logistics), पीएम गतिशक्ति, सीमा पार व्यापार और क्षेत्रीय विकास।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने बिहार में NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को 4-लेन मानक में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। यह परियोजना हाइब्रिड एनुइटी मॉडल (HAM) के तहत ₹3,590.73 करोड़ की कुल पूंजीगत लागत से विकसित की जाएगी, जिसकी कुल लंबाई 82.578 किमी होगी।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक महत्व, इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी
1. रणनीतिक और सीमा पार कनेक्टिविटी
- भारत-नेपाल सीमा संपर्क: यह कॉरिडोर सोनबरसा स्थित भारत-नेपाल सीमा को मुजफ्फरपुर में NH-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जोड़ता है।
- क्रॉस-बॉर्डर फ्रेट: यह निकटवर्ती भिठ्ठामोड़ स्थित लैंड पोर्ट के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच यात्री और कार्गो आवागमन को सुगम बनाएगा।
- राष्ट्रीय माल ढुलाई ग्रिड: यह NH-31 और NH-122 जैसे मौजूदा गलियारों के साथ मिलकर बरौनी औद्योगिक क्षेत्र और गंगा नदी के लॉजिस्टिक्स हब से सीधा संपर्क प्रदान करेगा।
2. गति, सुरक्षा और प्रमुख इंजीनियरिंग अवसंरचना
- डिजाइन स्पीड: इस 4-लेन सड़क को 100 किमी/घंटा की डिज़ाइन स्पीड और 80 किमी/घंटा की औसत गति के लिए डिज़ाइन किया गया है। सुरक्षित और तीव्र यात्रा के लिए इसमें कोई ऐट-ग्रेड मीडियन ओपनिंग नहीं होगी।
- प्रमुख पुल व फ्लाईओवर्स: यातायात को निर्बाध रखने के लिए 7 बड़े पुल (बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल शामिल), 3 रेलवे ओवर ब्रिज (ROBs), और 2 फ्लाईओवर्स (1,170 मीटर और 270 मीटर) बनाए जाएंगे।

- यातायात भीड़ में कमी: यह मुजफ्फरपुर, मक़सूदपुर, रून्नीसैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भिट्ठाहिया और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या को खत्म करेगा।
3. PM गतिशक्ति और सामाजिक-आर्थिक नोड्स का एकीकरण
यह परियोजना पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों के तहत तैयार की गई है, जो बिहार में विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स को आपस में जोड़ती है:
- 5 आर्थिक नोड्स: 4 औद्योगिक एस्टेट्स और 1 मेगा फूड पार्क को कनेक्टिविटी मिलेगी।
- 4 सामाजिक नोड्स: बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनौरा धाम (सीतामढ़ी), तथा मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) को सीधा लाभ।
- 2 लॉजिस्टिक्स नोड्स: मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों से सीधा संपर्क।
- पर्यटन व सांस्कृतिक गलियारा: बौद्ध सर्किट और ऐतिहासिक जानकी पुनौरा धाम मंदिर तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| राजमार्ग एवं लंबाई | NH-22 (मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड) – 82.578 किमी |
| लागत एवं मॉडल | ₹3,590.73 करोड़ | हाइब्रिड एनुइटी मॉडल (HAM) |
| जोड़ने वाला मुख्य कॉरिडोर | NH-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) और भारत-नेपाल सीमा (सोनबरसा/भिठ्ठामोड़) |
| डिजाइन स्पीड | 100 किमी/घंटा (औसत गति: 80 किमी/घंटा) |
| प्रमुख नदी पुल | बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा प्रमुख पुल |
श्वेत क्रांति 2.0: भारत का डेयरी क्षेत्र एवं सहकारिता मॉडल
- प्रारंभिक परीक्षा: श्वेत क्रांति 2.0, राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD), दुग्ध उपलब्धता एवं उत्पादकता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, कृषि एवं पशुपालन का अर्थशास्त्र, सहकारिता (Cooperatives), आपूर्ति श्रृंखला, ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने हाल ही में लोकसभा में श्वेत क्रांति 2.0 और भारत में डेयरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली विभिन्न योजनाओं का विवरण साझा किया। सहकारिता मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने संयुक्त रूप से 19 सितंबर 2024 को ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की शुरुआत की थी। इसका मुख्य लक्ष्य डेयरी सहकारिताओं के माध्यम से दूध की खरीद (Procurement) में अगले 5 वर्षों में 50% की वृद्धि करना और वंचित पंचायतों तक पहुंच बनाना है।
मुख्य बिंदु: श्वेत क्रांति 2.0, उत्पादकता आंकड़े और सहयोगी योजनाएं
1. 75,000 नई प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों (DCS) का लक्ष्य
- विस्तार योजना: अगले 5 वर्षों (2024-25 से 2028-29) में देशभर में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य रखा गया है।
- शीर्ष राज्यीय लक्ष्य: सबसे अधिक समितियां उत्तर प्रदेश (10,130), ओडिशा (8,547), राजस्थान (8,012), बिहार (6,544) और आंध्र प्रदेश (7,042) में स्थापित की जाएंगी।
- महिला सशक्तिकरण: वर्तमान में लगभग 1.7 करोड़ किसान डेयरी सहकारिताओं से जुड़े हैं, जिनमें करीब 38% महिलाएं हैं।
2. भारत का दुग्ध क्षेत्र: उत्पादन एवं उत्पादकता वृद्धि
- वैश्विक स्थिति: भारत 1998 से दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बना हुआ है और वैश्विक उत्पादन में 25% का योगदान देता है।
- प्रति व्यक्ति उपलब्धता: भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम/दिन है, जो ICMR के 300 ग्राम/दिन के मानक से अधिक है।
- उत्पादकता में उछाल: राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत IVF और सेक्स-सोर्टेड सीमेन (Sex-sorted Semen) तकनीक के कारण मवेशियों और भैंसों की औसत उत्पादकता में 36.63% की वृद्धि हुई है (2013-14 के 1648.17 किग्रा/पशु/वर्ष से बढ़कर 2024-25 में 2251 किग्रा/पशु/वर्ष)।
- देशी नस्लों की प्रगति: देशी/गैर-नस्ली मवेशियों की उत्पादकता 2014-15 के 927 किग्रा से बढ़कर 2024-25 में 1343.2 किग्रा (44.89% वृद्धि) हो गई है। भैंसों की उत्पादकता में 25.80% की बढ़ोतरी (1880 किग्रा से 2365.2 किग्रा) दर्ज की गई।
3. डिजिटल पारदर्शिता और प्रमुख सहायक योजनाएं
- डिजिटल खरीद (NPDD): राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत DPMCUs और AMCUs के माध्यम से परीक्षण में शुद्धता और किसानों के खातों में सीधा भुगतान (DBT) सुनिश्चित हो रहा है।
- ब्याज राहत (SDCFPO): प्रतिकूल परिस्थितियों में डेयरी सहकारिताओं को सॉफ्ट वर्किंग कैपिटल लोन पर 2% (और त्वरित भुगतान पर अतिरिक्त 2%) ब्याज छूट मिलती है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AHIDF): पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के जरिए प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु 3% की दर से वार्षिक ब्याज राहत दी जाती है।
- सस्ती पशु दवाएं (LHDCP & पशु औषधि): ‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत PM-KSK और सहकारिताओं के माध्यम से किफायती जेनेरिक पशु दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लॉन्च तिथि | 19 सितंबर 2024 (सहकारिता + पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय) |
| 5-वर्षीय लक्ष्य | 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियों (DCS) का गठन |
| दूध खरीद लक्ष्य | डेयरी सहकारिताओं द्वारा दूध खरीद में 50% की वृद्धि |
| वैश्विक स्थिति | दुग्ध उत्पादन में 1st स्थान (वैश्विक हिस्सेदारी: 25%) |
| प्रति व्यक्ति उपलब्धता | 485 ग्राम/दिन (ICMR मानक: 300 ग्राम/दिन) |
भारत का नारियल क्षेत्र: ‘कल्पवृक्ष’ से वैश्विक पहचान तक
- प्रारंभिक परीक्षा: नारियल विकास बोर्ड (CDB), कोपरा के लिए MSP (मिलिंग एवं बॉल कोपरा), नारियल संवर्धन योजना, नीरा , केरा सुरक्षा बीमा योजना.
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, कृषि और फसल प्रणाली (Multi-tier Farming), खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन (Value Addition), कृषि निर्यात लक्ष्य (2030/2047), ग्रामीण आजीविका और कौशल विकास.
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली कृषि (High-Value Agriculture) के ₹350 करोड़ के आवंटन के तहत नारियल संवर्धन योजना (Coconut Promotion Scheme) की घोषणा की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का नारियल उत्पाद निर्यात 62% बढ़कर ₹7,038.35 करोड़ (794.70 मिलियन) तक पहुंच गया है। इसके साथ ही सरकार ने सीजन 2026 के लिए मिलिंग कोपरा का MSP बढ़कर ₹12,027/क्विंटल और बॉल कोपरा का MSP ₹12,500/क्विंटल कर दिया है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक स्थिति, राज्यवार आंकड़े और बहुस्तरीय खेती
1. भारत की वैश्विक स्थिति और राज्यवार प्रदर्शन
- वैश्विक नेतृत्व: भारत नारियल उत्पादन में दुनिया में प्रथम (31.24%) और खेती के क्षेत्रफल में तीसरे स्थान (17.90%) पर है। वर्ष 2024-25 में 2.19 मिलियन हेक्टेयर से 20,301.22 मिलियन नट्स का उत्पादन हुआ।
- क्षेत्रफल में अग्रणी: केरल (7.54 लाख हेक्टेयर) नारियल खेती के क्षेत्रफल में देश में सबसे आगे है।
- उत्पादन और उत्पादकता: तमिलनाडु कुल उत्पादन में शीर्ष पर है, जबकि आंध्र प्रदेश प्रति हेक्टेयर उत्पादकता (Productivity) में देश में प्रथम स्थान पर है।
- आजीविका प्रभाव: देश में लगभग 3 करोड़ लोग और 10 मिलियन (1 करोड़) किसान आजीविका के लिए सीधे तौर पर नारियल क्षेत्र पर निर्भर हैं।
2. छत्तीसगढ़ मॉडल: बस्तर पठार में बहुस्तरीय खेती
- फसल विविधीकरण: बस्तर (छत्तीसगढ़) में नारियल विकास बोर्ड के DSP फार्म कोंडागांव के मार्गदर्शन में किसानों ने धान और मोटे अनाज के पारंपरिक चक्र से हटकर नारियल आधारित बहुस्तरीय खेती मॉडल अपनाया।
- इंटरकॉपिंग: नारियल के पौधों के बीच खाली जगह में अनानास (Pineapple), ड्रैगन फ्रूट, आम, लीची, कॉफी, स्ट्रॉबेरी और हरी सब्जियों की खेती की जा रही है।
- आर्थिक लाभ: उदाहरण के लिए, बाकावंड ब्लॉक के कृषक एशांश सिंह राठौर ने 2,500 नारियल के पेड़ों के साथ इंटरक्रॉपिंग करके नारियल से ₹5-6 लाख और अंतर-फसलों से ₹10 लाख की अतिरिक्त वार्षिक आय अर्जित की।
3. निर्यात ढांचा और मूल्य संवर्धन
- पारंपरिक से आधुनिक उत्पाद: भारत का निर्यात अब केवल कच्चे नारियल या खोपरे तक सीमित नहीं है। अब वर्जिन कोकोनट ऑयल (VCO), कोकोनट मिल्क, कोकोनट वॉटर और एक्टिवेटेड कार्बन का बड़े पैमाने पर निर्यात हो रहा है।
- मुख्य निर्यात बाजार: यूएसए, यूएई, जर्मनी, यूके, रूस, तुर्की, और नीदरलैंड्स भारत के मुख्य व्यापारिक भागीदार बन चुके हैं।

- संस्थागत रीढ़ (CDB): 12 जनवरी 1981 को स्थापित नारियल विकास बोर्ड (कोच्चि) कृषि मंत्रालय के तहत कार्यरत है, जो सह-उत्पाद प्रसंस्करण और निर्यात प्रोत्साहन परिषद (Export Promotion Council) के रूप में कार्य करता है।
4. प्रमुख सरकारी योजनाएं और कौशल पहल
- कोपरा के लिए MSP (2026): मिलिंग कोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर ₹12,027/क्विंटल (₹445 वृद्धि) और बॉल कोपरा का ₹12,500/क्विंटल (₹400 वृद्धि) किया गया। NAFED और NCCF इसकी केंद्रीय खरीद एजेंसियां हैं।
- नारियल संवर्धन योजना (बजट 2026-27): कीट प्रकोप, रूट विल्ट बीमारी और पुराने पेड़ों के कायाकल्प (Rejuvenation) के लिए शुरू की गई। 2025-26 में 1,672 हेक्टेयर क्षेत्र का कायाकल्प किया गया।
- कोकोमित्रा: 6-10 प्रशिक्षित ताड़ चढ़ने वालों (Climbers) का पंजीकृत कार्यबल समूह, जिन्हें आधुनिक उपकरण और सुरक्षा साधन दिए जाते हैं।
- केरा कौशल केंद्र: नारियल के खोल (Shell), लकड़ी और फाइबर से हस्तशिल्प बनाने वाले 15-सदस्यीय समूहों को ₹2.67 लाख की वित्तीय सहायता दी जाती है।
- केरा सुरक्षा बीमा योजना: नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाले मजदूरों और नीरा तकनीशियनों को दुर्घटना बीमा कवर प्रदान करती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| उपनाम | “कल्पवृक्ष” |
| वैश्विक रैंकिंग | उत्पादन: 1st (31.24%) | क्षेत्रफल: 3rd (17.90%) |
| शीर्ष राज्य | क्षेत्रफल: केरल | उत्पादन: तमिलनाडु | उत्पादकता: आंध्र प्रदेश |
| कोपरा MSP (2026) | मिलिंग: ₹12,027/क्विंटल | बॉल: ₹12,500/क्विंटal |
| केंद्रीय खरीद एजेंसी | NAFED एवं NCCF |
| शीर्ष निर्यात उत्पाद | एक्टिवेटेड कार्बन |