ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में स्थित हमारा Solar System (सौरमंडल) विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों, धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों का एक गतिशील परिवार है, जिसके केंद्र में सूर्य अवस्थित है। संपूर्ण सौरमंडल को ऊर्जा और प्रकाश प्रदान करने वाला सूर्य वास्तव में नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया पर आधारित एक विशाल तारा है। प्रकाशमंडल और कोरोना जैसी जटिल परतों से निर्मित सूर्य की सतह न केवल अंतरिक्ष में सौर ज्वालाओं और ध्रुवीय प्रकाश (ओरोरा) को जन्म देती है, बल्कि इसके ‘सौर कलंक’ (Sunspots) पृथ्वी के बेतार संचार तंत्र को भी सीधे प्रभावित करते हैं।
सौरमंडल का परिचय
- परिभाषा: सौरमंडल में चारों ओर भ्रमण करने वाले ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु, उल्काएँ तथा क्षुद्रग्रह आदि सभी को शामिल किया जाता है।
- सूर्य की भूमिका: सूर्य हमारे सौरमंडल के केन्द्र में स्थित है। यह सौरमंडल का जन्मदाता है तथा सम्पूर्ण सौरमंडल को ऊर्जा एवं प्रकाश प्रदान करता है।
- ऊर्जा का स्रोत: सूर्य की ऊर्जा का स्रोत उसके केन्द्र (क्रोड) में हाइड्रोजन परमाणुओं का नाभिकीय संलयन द्वारा हीलियम में बदलना है।
सूर्य की आंतरिक एवं बाह्य संरचना
(A) रासायनिक संघटन
रासायनिक संगठन के आधार पर सूर्य में निम्नलिखित तत्व विद्यमान हैं:
- हाइड्रोजन: 71%
- हीलियम: 26.5%
- अन्य तत्त्व (जैसे कार्बन, नियॉन, लोहा आदि): 2.5%
(B) प्रकाशमंडल (Photosphere)
- यह सूर्य की दीप्तिमान सतह होती है।
- यहाँ से ही इसका प्रकाश फोटॉन के रूप में निकलकर चारों ओर फैलता है।
- इसी सतह पर सौर कलंक पाए जाते हैं।
(C) कोरोना (Corona)
- सूर्य के वायुमंडल के चारों ओर विद्यमान एक छल्लेनुमा क्षेत्र को कोरोना कहते हैं।
- यह चमकीले छल्ले के रूप में चमकता है।
सूर्य : महत्त्वपूर्ण तथ्य (सारणी)
| विषय / विशेषता | विवरण / डेटा |
| पृथ्वी से न्यूनतम दूरी | 14.70 करोड़ किमी. |
| पृथ्वी से अधिकतम दूरी | 15.21 करोड़ किमी. |
| व्यास | 13,92,000 किलोमीटर |
| क्रोड (Core) का तापमान | 15-20 मिलियन °C |
| प्रकाश मंडल का तापमान | 6000 °C (लगभग) |
| सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में लगा समय | 8 मिनट 20 सेकेंड |
| सूर्य के प्रकाश की चाल | 3 लाख किमी. प्रति सेकण्ड |
| संभावित आयु | 5 बिलियन वर्ष (लगभग) |
| सामान्य तारे का संभावित जीवन काल | 10 बिलियन वर्ष (लगभग) |
| घूर्णन अवधि | 25.38 दिन (विषुवत रेखा के सापेक्ष) 33 दिन (ध्रुवों के सापेक्ष) |
सौर ज्वाला (Solar Flares) एवं ध्रुवीय प्रकाश
- परिभाषा: फोटोस्फेयर से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लघु तरंग विकिरणों के अतिरिक्त प्रोटॉन तथा इलेक्ट्रॉन के आवेशित कण भी उत्सर्जित होते हैं। कभी-कभी ये कण बड़े पैमाने पर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर अंतरिक्ष में चले जाते हैं, इन्हें ही सौर ज्वाला कहते हैं।
- औरूरा (Auroras) का निर्माण: ये सौर ज्वालाएँ (आवेशित कण) जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा ध्रुवों की ओर विक्षेपित हो जाती हैं और हवा के कणों से टकराकर रंगीन प्रकाश उत्पन्न करती हैं, जिसे उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव पर देखा जा सकता है।
- उत्तरी ध्रुव पर: इसे ‘ओरोरा बोरियालिस’ (Auroral Borealis) कहते हैं।
- दक्षिणी ध्रुव पर: इसे ‘ओरोरा ऑस्ट्रेलिस’ (Aurora Australis) कहते हैं।
सौर कलंक (Sunspots) एवं ‘रेडियो फेड आउट’
- परिभाषा: सौर ज्वाला जहाँ से निकलती है, वहाँ काले धब्बे से दिखाई पड़ते हैं। इन्हें ही सौर कलंक (Sunspot) कहते हैं। ये सूर्य के अपेक्षाकृत ठण्डे भाग होते हैं, जहाँ ऊर्जा का विकिरण अन्य क्षेत्रों की तुलना में अत्यंत कम मात्रा में होता है।
- विशेषताएँ व जीवन काल: एक सौर कलंक का जीवन काल कुछ घंटों से कुछ माह का ही होता है। सौर कलंक प्रायः जोड़े में होते हैं तथा सूर्य की सतह पर एक-दूसरे के विपरीत पाए जाते हैं।
- प्रभाव (रेडियो फेड आउट): सौर कलंक प्रबल चुम्बकीय विकिरण भी उत्सर्जित करते हैं, जो पृथ्वी की बेतार संचार व्यवस्था को बाधित करते हैं। इससे रेडियो प्रसारण आदि में व्यवधान उत्पन्न हो जाता है, जिसे ‘रेडियो फेड आउट’ कहा जाता है।