NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life
NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 3: Landforms and Life “हमारी पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है; कहीं ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ हैं, कहीं खनिजों से भरे पठार, तो कहीं फसलों से लहलहाते विशाल मैदान। नए NCERT पैटर्न के तहत कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान (भूगोल) का अध्याय 3: भू-आकृतियाँ और जीवन (Landforms and Life) हमें इसी भौगोलिक और मानवीय विविधता के सफर पर ले जाता है। यह अध्याय केवल स्कूली बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि UPSC (IAS/IPS) प्रारंभिक परीक्षा के बुनियादी भूगोल (Basics of Geography) को मजबूत करने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। भू-आकृतियाँ: सामान्य परिचय (Landforms: An Introduction) परिभाषा: भू-आकृति (Landform) हमारे ग्रह पृथ्वी की सतह पर मौजूद एक भौतिक विशेषता (Physical feature) है। निर्माण अवधि: भू-आकृतियों का आकार/निर्माण लाखों वर्षों (Millions of years) की लंबी अवधि में तय होता है। पर्यावरण और जीवन से संबंध: इन भौतिक आकृतियों का पर्यावरण (Environment) और पृथ्वी पर मौजूद जीवन के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण व गहरा संबंध होता है। भू-आकृतियों का वर्गीकरण (Classification of Landforms) पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली भू-आकृतियों को व्यापक रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: पर्वत (Mountains) पठार (Plateaus) मैदान (Plains) पारिस्थितिक एवं मानवीय विशेषताएँ: इन तीनों भू-आकृतियों में अलग-अलग प्रकार की जलवायु (Climate) पाई जाती है, जिसके कारण ये विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों (Flora) और जीवों (Fauna) के आवास स्थान हैं। यद्यपि मनुष्यों ने इन सभी भू-आकृतियों के अनुकूल खुद को ढाल (Adapt) लिया है, फिर भी दुनिया भर में विभिन्न भू-आकृतियों पर रहने वाले लोगों की संख्या (जनसंख्या घनत्व) में काफी भिन्नता पाई जाती है। भारत के संदर्भ में भू-आकृतिक विविधता (उदाहरण) यदि कोई व्यक्ति भारत के विभिन्न राज्यों के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करता है, तो उसे परिदृश्य (Landscape) में अत्यधिक बदलाव देखने को मिलता है। गद्यांश में दिए गए यात्रा मार्ग के अनुसार तीन प्रमुख भू-आकृतिक परिवर्तन इस प्रकार देखे जा सकते हैं: छोटा नागपुर (झारखंड): यात्रा का प्रारंभिक बिंदु, जो अपनी विशिष्ट भू-आकृति (पठारी क्षेत्र) को प्रदर्शित करता है। प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): यात्रा का मध्यवर्ती बिंदु, जो मैदानी भू-आकृति को दर्शाता है। अल्मोड़ा (उत्तराखंड): यात्रा का अंतिम बिंदु, जो पर्वतीय भू-आकृति का प्रतिनिधित्व करता है। पारिभाषिक शब्दावली: तुंगता/ऊंचाई (Altitude) अर्थ: समुद्र तल (Sea level) के ऊपर किसी भी वस्तु या भौगोलिक पिंड की ऊर्ध्वाधर ऊंचाई को ‘अल्टीट्यूड’ (Altitude) कहा जाता है। प्रमुख उदाहरण: किसी पर्वत (Mountain) की समुद्र तल से ऊंचाई। उड़ान के दौरान किसी पक्षी या हवाई जहाज (Plane) की ऊंचाई। अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे किसी उपग्रह (Satellite) की समुद्र तल से ऊंचाई। पर्वत (Mountains) भौतिक विशेषताएँ पर्वत (Mountains): ये ऐसी भू-आकृतियाँ हैं जो अपने आस-पास के परिदृश्य (Landscape) से काफी ऊंची होती हैं। इन्हें इनके विस्तृत आधार (Broad base), तीव्र ढाल (Steep slopes) और संकीर्ण शिखर (Narrow summit) द्वारा पहचाना जाता है। पहाड़ियाँ (Hills): पर्वतों की तुलना में कम ऊंचाई, कम तीव्र ढाल (Less steep slopes) और गोलाकार शीर्ष (Rounded tops) वाले उच्च अंचलों को पहाड़ियाँ कहा जाता है। पर्वतों पर बर्फ और नदियों का संबंध कम ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: यहाँ गर्मियों में बर्फ पिघलकर पानी में बदल जाती है, जो नदियों को जल प्रदान करती है (Feeds rivers)। अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्र: अत्यधिक ऊंचाई (High altitudes) पर बर्फ कभी नहीं पिघलती, जिससे पर्वत स्थायी रूप से बर्फ से ढके (Permanently snow-capped) रहते हैं। पर्वतों की आयु और भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ युवा पर्वत (Young Mountains): ऊंचे और तीखे/नुकीले शिखर वाले पर्वत (जैसे हिमालय) अपेक्षाकृत ‘युवा’ हैं। इसका अर्थ यह है कि इनका निर्माण पृथ्वी के इतिहास में हाल ही में (लाखों वर्ष पूर्व) हुआ है। हिमालय जैसे पर्वतों में उत्थान (Upliftment) और अपरदन (Erosion) की प्रक्रिया आज भी जारी है, जिसके कारण इनकी ऊंचाई अभी भी बढ़ रही है। प्राचीन पर्वत (Older Mountains): कम ऊंचे और अधिक गोलाकार पर्वत या पहाड़ियाँ (जैसे अरावली पर्वतमाला) बहुत पुरानी हैं। समय के साथ अपरदन (Erosion) की निरंतर प्रक्रिया ने इन्हें गोलाकार आकार दे दिया है। विश्व की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ और चोटियाँ संसार के अधिकांश पर्वत समूहों या श्रृंखलाओं (Mountain ranges) में व्यवस्थित हैं, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं। प्रमुख श्रृंखलाएं और चोटियां निम्नलिखित हैं: पर्वत चोटी (Mountain Peak) पर्वत श्रृंखला (Range) भौगोलिक अवस्थिति / मुख्य विशेषता माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) हिमालय (Himalayas) – एशिया तिब्बत (चीन) और नेपाल के बीच; विश्व की सर्वोच्च चोटियों में से एक। कांचनजंगा (Kanchenjunga) हिमालय (Himalayas) – एशिया नेपाल और भारत के सिक्किम राज्य के बीच स्थित। माउंट अकोंकागुआ (Mount Aconcagua) एंडीज (Andes) – दक्षिण अमेरिका एंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी। मोंट ब्लांक (Mont Blanc) आल्प्स (Alps) – पश्चिमी यूरोप आल्प्स पर्वतमाला का सबसे ऊंचा पर्वत। माउंट किलिमंजारो (Mount Kilimanjaro) — (कोई श्रृंखला नहीं) पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक एकाकी पर्वत (Isolated mountain) जो किसी श्रृंखला का हिस्सा नहीं है। अनामुडी (Anamudi / Anai Peak) — दक्षिण भारत का सबसे ऊंचा पर्वत (केरल में स्थित)। पारिभाषिक शब्दावली (पर्वतीय पारिस्थितिकी) पर्वतीय वन (Montane forest): एक विशेष प्रकार के वन जो केवल पर्वतीय क्षेत्रों में उगते हैं। मॉस (Moss): बिना फूल या वास्तविक जड़ों (True roots) वाला एक छोटा हरा पौधा, जो अक्सर गद्देदार आवरण (Cushion-like cover) के रूप में फैलता है। लाइकेन (Lichen): पौधे जैसा दिखने वाला एक जीव (Plant-like organism) जो सामान्यतः चट्टानों, दीवारों या पेड़ों से चिपका रहता है। वर्षण (Precipitation) और बर्फ (Snow) वर्षण (Precipitation) की परिभाषा: वायुमंडल से किसी भी रूप में पानी का पृथ्वी की सतह तक पहुँचना वर्षण कहलाता है। वर्षा (Rain), बर्फ (Snow) और ओले (Hail) वर्षण के सबसे सामान्य रूप हैं। बर्फ और ओले: ये दोनों पानी के ठोस रूप (Solid state) में होने वाले वर्षण हैं। भारत के अधिकांश हिस्सों में वर्षण मुख्य रूप से बारिश और ओलों के रूप में होता है, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों (जैसे हिमालयी क्षेत्र: कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश) में यह बर्फबारी (Snowfall) के रूप में होता है। पर्वतीय पर्यावरण (Mountain Environment) पर्वतीय वन (Montane Forest): पर्वतीय ढालों पर एक विशेष प्रकार के वन पाए जाते हैं जिन्हें ‘मोंटेन वन’ या पर्वतीय वन कहा जाता है। शंकुधारी वृक्ष (Conifer Trees): इन वनों में मुख्य रूप से शंकुधारी वृक्ष पाए जाते हैं। प्रमुख उदाहरण: चीड़ (Pine), फर (Fir),