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Author name: Nirmanias

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1 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

1 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत गृह मंत्रालय द्वारा पारदर्शिता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए FCRA 2.0 पोर्टल और ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड जैसी अत्याधुनिक डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई है। कृषि क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए जहां ‘खेत बचाओ अभियान’ को राष्ट्रीय मिशन का रूप दिया गया है, वहीं अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में भारतीय वैज्ञानिकों ने सौर तूफानों (ICMEs) के थर्मल सिग्नेचर की खोज कर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। GCC कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026: स्टार्टअप और उद्योग सहयोग को नई उड़ान Why in News? (चर्चा में क्यों?) 30 जून 2026 को अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ मिलकर बेंगलुरु में ‘GCC कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026’ का आयोजन किया। इसका उद्देश्य भारत के जमीनी स्तर के नवाचार (ग्रासरूट इनोवेशन) और स्टार्टअप्स को वैश्विक दिग्गजों (Global Leaders) से जोड़ना है। इसमें वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs), अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रमुखों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। कॉन्क्लेव के मुख्य बिंदु और रणनीतिक कदम 1. भारत का GCC इकोसिस्टम (एक महाशक्ति के रूप में) 2. तीन-स्तरीय नवाचार चक्र इस कॉन्क्लेव में AIM के तीन प्रमुख स्तंभों को वैश्विक उद्योग (GCC) से जोड़ने पर रणनीति बनी: 3. ‘AACESS’ पहल: औद्योगिक विस्तार का नया मंच सहयोग के 4 मुख्य विषय सम्मेलन में चार रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई: अध्याय: खेत बचाओ अभियान और हरियाणा का कृषि मॉडल Why in News? (चर्चा में क्यों?) 30 जून 2026 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में ‘खेत बचाओ अभियान‘ (Save the Farm Campaign) का समापन समारोह और ‘हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायाब सिंह सaini ने भाग लिया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ को एक राष्ट्रव्यापी दीर्घकालिक मिशन बनाने की घोषणा की। अभियान के मुख्य नीतिगत बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं 1. ‘खेत बचाओ अभियान’ अब एक राष्ट्रीय मिशन 2. हरियाणा का कृषि मॉडल: देश के लिए मार्गदर्शक केंद्रीय मंत्री ने अन्य राज्यों को हरियाणा के निम्नलिखित सफल कृषि और प्रशासनिक सुधारों को अपनाने की सलाह दी: 3. ‘मृदा स्वास्थ्य’ (Soil Health) और संतुलित उर्वरक पर चिंता 4. कृषि में तकनीकी नवाचार: मोबाइल आधारित सॉइल कार्ड जलवायु परिवर्तन और अल नीनो से निपटने की तैयारी मौसम विभाग द्वारा कम वर्षा के अनुमानों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रही हैं: प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य अभियान का नाम खेत बचाओ अभियान (Save the Fields, Save the Earth) आयोजन स्थल कृषि महाविद्यालय, बावल (रेवाड़ी जिला, हरियाणा) नई पहल की शुरुआत हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन का शुभारंभ प्रोत्साहन राशि धान से दलहन की ओर शिफ्ट करने पर ₹8,000 प्रति एकड़ (हरियाणा सरकार) तकनीकी समाधान सॉइल हेल्थ कार्ड को सीधे मोबाइल एप्लीकेशन से जोड़ने की योजना प्रमुख नारा “संतुलित उर्वरक ही स्वस्थ पृथ्वी की कुंजी है” तथा “खेत बचाओ, भविष्य बचाओ” राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 और ‘सरस शक्ति’ पहल Why in News? (चर्चा में क्यों?) ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS) 2026 का समापन 29 जून 2026 को हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित ग्राम, विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को गति देना था। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए ‘सरस शक्ति’ (SARAS Shakti) कलेक्शन और एक कॉफी टेबल बुक लॉन्च की। सम्मेलन के मुख्य बिंदु और रणनीतिक निर्णय 1. ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास की निम्नलिखित फ्लैगशिप योजनाओं की समीक्षा पर बल दिया गया: 2. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का सशक्तिकरण 3. ‘सारस आजीविका’ और ‘सारस शक्ति’ लॉन्च सरस आजीविका गैलरी: क्षेत्रीय कला का प्रदर्शन सम्मेलन के दौरान प्रदर्शित गैलरी में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विविधता को दिखाया गया, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं: सौर तूफानों के थर्मल सिग्नेचर और अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान Why in News? (चर्चा में क्यों?) 30 जून 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के खगोल वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी की ओर आने वाले बड़े सौर विस्फोटों, जिन्हें इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन (ICMEs) कहा जाता है, के ‘थर्मल व्यवहार’ (तापमान में बदलाव) का पहला दीर्घकालिक सांख्यिकीय अध्ययन किया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ (MNRAS) में प्रकाशित हुआ है। क्या होते हैं ICMEs और उनके प्रभाव? शोध के मुख्य निष्कर्ष यह अध्ययन 1995 से 2024 तक (लगभग 29 वर्षों और तीन सौर चक्रों- 23, 24, 25) के डेटा पर आधारित है, जिसे नासा (NASA) के ओम्नी (OMNI) डेटाबेस से लिया गया था। 1. पॉलीट्रोपिक इंडेक्स वैज्ञानिकों ने प्रत्येक ICME के भीतर दबाव/तापमान और घनत्व के संबंध को मापने के लिए पॉलीट्रोपिक इंडेक्स की गणना की। इससे प्लाज्मा के गर्म या ठंडे होने की अवस्था का पता चलता है। 2. सौर तूफान अंतरिक्ष में ठंडे नहीं, ‘थर्मिकली एक्टिव’ होते हैं 3. सौर चक्रों के साथ बदलाव शोध में पाया गया कि सौर चक्र-23 (Solar Cycle 23) के दौरान सौर तूफान अधिक गर्म अवस्था में थे, जबकि सौर चक्र-24 में वे अधिक ठंडे (Cooling-dominated) अवस्था में बदल गए। यह दर्शाता है कि सौर चक्र का चुंबकीय वातावरण इन तूफानों के तापमान को नियंत्रित करता है। 4. सबसे विनाशकारी तूफानों की पहचान पृथ्वी पर आने वाले सबसे गंभीर और प्रभावी (Geoeffective) सौर तूफान उन ICMEs के कारण आते हैं जो गर्म अवस्था (कम पॉलीट्रोपिक इंडेक्स-में होते हैं। इनमें मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और तीव्र विस्तार गति (Expansion Speed) होती है। अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में भारत का अगला कदम: आदित्य-L1 IIA के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस थर्मल मॉडल को भविष्य में भारत के आदित्य-L1 मिशन से मिलने वाले आंकड़ों के साथ जोड़ा जाएगा। आदित्य-L1 पर लगे कोरोनोग्राफ और

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 7: India’s Cultural Roots

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 7: India’s Cultural Roots के अंतर्गत प्राचीन भारत में केवल भौतिक सीमाओं का विस्तार नहीं हुआ, बल्कि ज्ञान, सहिष्णुता, और सार्वभौमिक कल्याण (वसुधैव कुटुंबकम) के सिद्धांतों का जन्म हुआ। इसमें वैदिक काल के विचार मंतव्यों, उपनिषदों के आध्यात्मिक चिंतन, तथा जैन और बौद्ध धर्म के रूप में उभरे सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों का बुनियादी और सटीक विवरण मिलता है। यह अध्याय केवल ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह वर्तमान भारतीय समाज के नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के मूल स्रोतों (Roots) को तलाशने का एक गंभीर प्रयास है। वेद और वैदिक संस्कृति (The Vedas and Vedic Culture) 1. वेद क्या हैं? (What are the Vedas?) 2. वैदिक समाज (Vedic society) 3. वैदिक विचारधाराएं/दर्शन बौद्ध धर्म (Buddhism) 1. सिद्धार्थ गौतम का जीवन और ज्ञानोदय 2. बुद्ध की शिक्षाएँ और संगठन उपनिषदों की कहानियाँ 1. श्वेतकेतु और वास्तविकता का बीज 2. नचिकेता और उसकी खोज 3. गार्गी और याज्ञवल्क्य का शास्त्रार्थ जैन धर्म (Jainism) जैन धर्म के तीन मुख्य स्तंभ/शिक्षाएँ: जातक कथाएँ और जैन कहानियाँ 1. जातक कथाएँ 2. रोहिणेय की जैन कहानी भिक्षु, गुफाएं और अन्य दर्शन लोक और जनजातीय जड़ें (Folk and Tribal Roots) 1. सांस्कृतिक आत्मसात और आदान-प्रदान के उदाहरण (Cultural Exchange Examples) 2. प्रकृति पूजा और चेतना (Nature Worship and Consciousness) 3. जनजातीय समाज में ‘सर्वोच्च ईश्वर’ की अवधारणा (Concept of Supreme Divinity) कई देवी-देवताओं की पूजा के बावजूद, विभिन्न जनजातियों में एक ‘सर्वोच्च सत्ता’ या ‘परमेश्वर’ की स्पष्ट अवधारणा मिलती है: जनजाति / क्षेत्र सर्वोच्च देवता (Supreme Deity) विशेषता अरुणाचल प्रदेश की जनजातियाँ दोन्यी-पोलो सूर्य (Donyi) और चंद्रमा (Polo) का संयुक्त रूप, जिन्हें सर्वोच्च भगवान का दर्जा प्राप्त है। मध्य भारत (Central India) खंडोबा मध्य भारत के कुछ हिस्सों में पूजे जाने वाले प्रमुख देव। पूर्वी भारत (Munda & Santhal) सिंगबोंगा मुंडा और संथाल जनजातियों के सर्वोच्च देवता, जिन्होंने इस पूरे संसार की रचना की। Chapter-3 यहाँ पढ़ें:-

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30 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

30 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के संकलन में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ के बड़े निर्णयों, जैसे मनरेगा (MGNREGS) का स्थान लेने वाली नई ‘VB-GRAM-G’ योजना और महिला सशक्तिकरण हेतु ‘SHE LEAPS’ प्लेटफॉर्म के साथ-साथ पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर जारी राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट को शामिल किया गया है। सुमन रोडमैप 2030: मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा रणनीति Why in News? (चर्चा में क्यों?) केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन के दौरान ‘सुमन रोडमैप 2030’ लॉन्च किया है। यह नीतिगत ढांचा वर्ष 2030 तक मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रोडमैप के मुख्य स्तंभ और रणनीतिक दृष्टिकोण 1. जीवन-चक्र दृष्टिकोण (Life-Cycle Approach) यह रोडमैप RMNCHA+N (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण) फ्रेमवर्क के तहत काम करता है। यह गर्भावस्था से पहले (Pre-pregnancy), गर्भावस्था के दौरान, प्रसव और प्रसव के तुरंत बाद की अवधि के हस्तक्षेपों को एक साथ जोड़ता है। 2. उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का 4-चरणीय प्रबंधन जटिलताओं को रोकने के लिए हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की ट्रैकिंग चार स्तरों पर होगी: 3. लक्षित भौगोलिक दृष्टिकोण (Differentiated Strategy) प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप और तकनीकी नवाचार उच्च-फोकस राज्यों के लिए विशेष पैकेज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सामान्य रणनीतियाँ रोडमैप के मुख्य लक्ष्य (2030) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य योजना / रोडमैप सुमन रोडमैप 2030 नोडल प्रभाग मातृ स्वास्थ्य प्रभाग, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय मूल फ्रेमवर्क RMNCHA+N (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण) MMR का लक्ष्य वर्ष 2030 तक < 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म निगरानी पोर्टल जननी पोर्टल (डिजिटल ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग हेतु) सामुदायिक जुड़ाव सुमन पंचायत और मदर्स पिकनिक पहलें शिशु सुरक्षा अवधि SSBSK के तहत जन्म से लेकर 36 महीने तक निरंतर घर पर देखभाल राष्ट्रीय बाघ पुनर्परिचय कार्यशाला और भविष्य का रोडमैप Why in News? (चर्चा में क्यों?) 28 जून 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के अलवर में “बाघ पुनर्परिचय: अवसर और चुनौतियाँ” (Tiger Reintroduction: Opportunities & Challenges) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में देश के 12 मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों (Chief Wildlife Wardens) और 18 फील्ड निदेशकों ने बाघ-कमी वाले क्षेत्रों (Tiger-deficient Landscapes) में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए एक वैज्ञानिक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक रोडमैप 1. वैज्ञानिक पुनर्परिचय और स्टॉक पुनर्प्राप्ति ढांचा 2. शिकार आधार में वृद्धि (Prey Augmentation) 3. कम बाघ घनत्व वाले रिज़र्व की तैयारी देश के जिन टाइगर रिज़र्व में बाघों का घनत्व बहुत कम है, उन्हें भविष्य की रिकवरी के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: प्रोजेक्ट चीता से सीख कार्यशाला में ‘प्रोजेक्ट चीता’ पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसे दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीव पुनर्परिचय कार्यक्रम (World’s first inter-continental large carnivore reintroduction) माना जाता है। इस प्रोजेक्ट से मिले अनुभवों और पाठों (जैसे सैटेलाइट ट्रैकिंग, सुरक्षा व्यवस्था और अनुकूलन प्रबंधन) का उपयोग अब भारत में बाघों और अन्य वन्यजीवों के भावी स्थानांतरण और पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों को सुरक्षित बनाने में किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) आयोजन स्थल अलवर, राजस्थान (इसके बाद प्रतिभागियों ने सरिस्का टाइगर रिजर्व का दौरा किया) आयोजक संस्था राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और MoEFCC तकनीकी भागीदार भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) शिकार संवर्धन जीव गौर (Gaur) और बारासिंघा (Prey Augmentation हेतु स्थानान्तरण) कम घनत्व वाले लक्षित रिज़र्व बुक्सा (WB), अचानकमार, उदंती-सीतानदी, इंद्रावती (Chhattisgarh), पलामू (Jharkhand) केस स्टडीज वाले रिज़र्व सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती, सतकोसिया, सिमलीपाल, राजाजी, सह्याद्रि, नवेगांव-नागझिरा किसान सारथी प्लेटफॉर्म और डिजिटल कृषि कूटनीति Why in News? भारत के सबसे बड़े एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार प्लेटफॉर्म ‘किसान सारथी’ ने देश के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। जुलाई 2021 में लॉन्च होने के बाद से 25 जून 2026 तक इस प्लेटफॉर्म ने देश के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 768 जिलों और 6.63 लाख गांवों को अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया है। किसान सारथी प्लेटफॉर्म क्या है? यह भारतीय किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में सही समय पर प्रामाणिक और वैज्ञानिक कृषि सलाह प्रदान करने वाला एक अग्रणी डिजिटल प्लेटफॉर्म है। प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी संरचना और कार्यप्रणाली 1. IIDS तकनीक (Interactive Information Dissemination System) किसान सारथी प्लेटफॉर्म की रीढ़ IIDS तकनीक है, जो किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच द्वि-मार्गी संचार (Two-way Communication) सुनिश्चित करती है। 2. अन्य राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकरण किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटचना न पड़े, इसलिए किसान सारथी को भारत के 5 बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकृत किया गया है: कृषि हितधारकों को मिलने वाले लाभ 1. किसानों के लिए (For Farmers) 2. वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए (For Policymakers & Experts) प्रगति और लाभार्थी कवरेज (25 जून 2026 तक के आंकड़े) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) प्लेटफ़ॉर्म का नाम किसान सारथी (Kisan Sarathi) – जुलाई 2021 में लॉन्च। संबद्ध मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) + कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय। कार्यान्वयनकर्ता IASRI और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC)। मुख्य तकनीक IIDS (Interactive Information Dissemination System) और KYF दृष्टिकोण। भाषा समर्थन 13 क्षेत्रीय भाषाओं में लाइव संवाद (भाषिनी प्लेटफॉर्म के सहयोग से)। योजनाओं की उपलब्धता कुल 610 योजनाएं (102 केंद्रीय और शेष राज्य/UT की योजनाएं)। पहुंच के माध्यम कॉल सेंटर, CSC, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप (WhatsApp) और मोबाइल ऐप। TRL कम्पास प्लेटफॉर्म और भारत का डीप-टेक इनोवेशन इकोसिस्टम Why in News? (चर्चा में क्यों?) 29 जून 2026 को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) ने ‘डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया’ (DSCI) के सहयोग से ‘TRL कम्पास प्लेटफॉर्म’ (TRL Compass Platform) लॉन्च किया है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद की

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29 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

29 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए जहां एक ओर नई व्यापक ‘7x7x7 रणनीति’ की शुरुआत की गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण विकास में पारदर्शिता के लिए देश का पहला AI-सक्षम लेखापरीक्षा पोर्टल लॉन्च किया गया है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक मंच पर भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ और ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)’ कूटनीति को सेशेल्स और मॉरीशस के साथ रणनीतिक वार्ताओं में नई मजबूती मिली है। समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK): बाल स्वास्थ्य और देखभाल का नया एकीकृत ढांचा Why in News? (चर्चा में क्यों?) SSBSK की प्रमुख विशेषताएं और रणनीतियां 1. कार्यक्रम का विज़न और एकीकरण 2. जोखिम-स्तरीकृत दृष्टिकोण 3. जमीनी समन्वय और सामुदायिक शिविर 4. मातृ मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण 5. डिजिटल ट्रैकिंग और शहरी फोकस प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य योजना और तकनीकी मैट्रिक्स अवयव / पोर्टल मुख्य भूमिका और तथ्य (Core Facts) SSBSK का लक्ष्य समूह जन्म से लेकर 36 महीने (3 वर्ष) तक के बच्चे। योजनाओं का विलय HBNC (नवजात देखभाल) + HBYC (छोटे बच्चों की देखभाल) = SSBSK Baal-ABHA ID बच्चों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान, जिससे उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टीकाकरण को ट्रैक किया जाएगा। डिजिटल लिंकेज U-WIN (टीकाकरण), POSHAN Tracker (पोषण), और JANANI पोर्टल के साथ सीधा जुड़ाव। नवाचार (Innovation) बच्चों के लिए ‘जोखिम-स्तरीकृत देखभाल’ (Risk-stratified care) और माताओं के लिए ‘प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य जांच’ की शुरुआत। दीक्षा और भारत का डिजिटल शिक्षा इकोसिस्टम Why in News? (चर्चा में क्यों?) दीक्षा प्लेटफॉर्म क्या है? यह स्कूली शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसे 2017 में लॉन्च किया गया था। इसे शिक्षा मंत्रालय के तहत NCERT और CIET (केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान) द्वारा संचालित किया जा रहा है। 1. प्रमुख विशेषताएं और समावेशन 2. प्लेटफॉर्म की संरचना: फेडेरेटेड आर्किटेक्चर यह प्लेटफॉर्म किसी एक केंद्रीकृत नियंत्रण पर काम नहीं करता, बल्कि एक विकेंद्रीकृत (Federated) ढांचे पर आधारित है: 3. भाषा और ऑफलाइन पहुंच की बाधाएं दूर प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य बिंदु मुख्य तथ्य (Quick Pointers) पूरा नाम Digital Infrastructure for Knowledge Sharing (DIKSHA) प्रशासनिक मंत्रालय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) मुख्य नोडल निकाय NCERT और CIET केंद्रीय योजना यह PM e-Vidya का एक प्रमुख हिस्सा है। भाषा दायरा कुल 135 भाषाओं का समर्थन; 22 अनुसूचित भाषाओं में NCERT किताबें उपलब्ध। तकनीकी अवयव ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म, सनबर्ड रजिस्ट्री, चैटबॉट और क्यूआर-कोडेड टेक्स्टबुक्स। एनीमिया मुक्त भारत अभियान – नए परिचालन दिशानिर्देश (2026) Why in News? (चर्चा में क्यों?) एनीमिया मुक्त भारत अभियान की मुख्य रणनीतियाँ 1. 6x6x6 से 7x7x7 रणनीति में बदलाव पहले से चल रही 6x6x6 रणनीति का विस्तार करते हुए अब इसमें एक नया लाभार्थी समूह, एक नया हस्तक्षेप (Intervention) और एक नया संस्थागत तंत्र जोड़ा गया है: 2. T3 से T4 दृष्टिकोण (Approach) यह अभियान अब पुरानी T3 रणनीति (Test, Treat, Talk) से आगे बढ़कर T4 दृष्टिकोण पर काम करेगा: 3. गंभीर एनीमिया के लिए नैदानिक हस्तक्षेप (Clinical Interventions) 4. मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Integration) अलग-अलग लाभार्थी समूहों के लिए हीमोग्लोबिन परीक्षण और उपचार के रिकॉर्ड को एकीकृत करने के लिए विभिन्न पोर्टलों का संयोजन किया जाएगा: 5. राष्ट्रव्यापी जन भागीदारी अभियान प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक (Component) मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) नोडल मंत्रालय केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय। रणनीति का नया नाम 7x7x7 फ्रेमवर्क (7 लाभार्थी, 7 हस्तक्षेप, 7 संस्थागत तंत्र)। नया जोड़ा गया लाभार्थी समूह कम जन्म वजन वाले (Low Birth Weight) शिशु (0–6 महीने)। नया दृष्टिकोण T4 (Test, Treat, Talk and Track)। गंभीर मामलों के लिए दवा फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ (FCM) और आयरन सुक्रोज़ (इंट्रावेनस थेरेपी)। एकीकृत डिजिटल पोर्टल जननी (JANANI), RBSK और U-WIN का AMB अभियान पोर्टल में विलय। भारत-सेशल्स संबंध और वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व (2026) Why in News? (चर्चा में क्यों?) सम्मान के मुख्य कारण और भारत का नेतृत्व यह पुरस्कार प्रधानमंत्री के ‘हरित नेतृत्व’ (Green Leadership) और वैश्विक मंच पर विकासशील देशों तथा छोटे द्वीपीय देशों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया है। इसके केंद्र में निम्नलिखित विषय हैं: 1. ब्लू इकोनॉमी और महासागर प्रबंधन 2. भारत की वैश्विक पर्यावरणीय पहलें यह पुरस्कार भारत द्वारा शुरू किए गए वैश्विक पर्यावरण आंदोलनों और संगठनों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है: सेशल्स के लिए भारत का महत्व प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य पुरस्कार एवं पर्यावरण पहल मैट्रिक्स घटक / तथ्य (Component) मुख्य विवरण (Core Facts for Prelims) पुरस्कार का नाम ‘गार्जियन ऑफ द बीच होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) प्रदाता देश सेशल्स (Seychelles) — हिंद महासागर का एक रणनीतिक द्वीपीय देश। राजनयिक मील का पत्थर वर्ष 2026 में भारत और सेशल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हुए। पूर्व में मिले वैश्विक पर्यावरण पुरस्कार * एफएओ (FAO) द्वारा एग्रिकोला मेडल (Agricola Medal)* संयुक्त राष्ट्र का ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार (UN Champion of the Earth)* सियोल शांति पुरस्कार। पीएम फैमिली केयर ट्रैकर और कल्याणकारी योजनाओं का सुदृढ़ीकरण Why in News? (चर्चा में क्यों?) पीएम फैमिली केयर ट्रैकर के मुख्य बिंदु 1. विज़न और उद्देश्य 2. कार्यप्रणाली और तकनीकी ढांचा 3. सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकरण 4. कल्याणकारी शासन में बदलाव (Welfare Governance) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) परियोजना का नाम पीएम फैमिली केयर ट्रैकर (PM Family Care Tracker) प्रायोगिक चरण (Pilot Project) की शुरुआत गांधीनगर, गुजरात से। मूल अवधारणा ‘एकत्रित डेटाबेस’ के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को एक यूनीक आईडी देना। डेटा का आधार जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटा का वास्तविक समय (Real-time) एकीकरण। मुख्य तकनीकी लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सुदृढ़ीकरण और स्वचालित लाभार्थी पहचान। भारत-मॉरीशस संबंध और ‘महासागर’ विज़न Why in News? (चर्चा में क्यों?) द्विपक्षीय बैठक के मुख्य बिंदु 1. विशेष आर्थिक पैकेज की समीक्षा 2. नीतिगत अभिसरण (Policy Convergence) दोनों देशों के बीच की साझेदारी भारत की दो प्रमुख विदेश नीतियों के तहत संचालित हो रही है: 3. ग्लोबल साउथ और क्षेत्रीय स्थिरता प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य बिंदु मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) बैठक का स्थान विक्टोरिया, माहे (सेशेल्स) – सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह के इतर। मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम (Dr. Navinchandra Ramgoolam)। मुख्य विज़न / नीति विज़न महासागर (MAHASAGAR) और नेबरहुड

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चलने के अधिकार’ (Right to Walk) को एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) की मान्यता

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में पैदल यात्रियों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित फुटपाथों पर चलने की स्वतंत्रता अब मात्र एक सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है। ‘Right to Walk’ को अनुच्छेद 21 और 19 के अंतर्गत मान्यता दी गई है। यह लेख UPSC के दृष्टिकोण से इस निर्णय के महत्व, मोटर वाहन अधिनियम की कमियों और सुरक्षित शहरी नियोजन पर इसके प्रभावों का संपूर्ण विश्लेषण करता है। चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मनियार इलियाज़ उर्फ शेख रियाज़ बनाम पी. अय्यप्पन व अन्य (2026) मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘चिह्नित और सुरक्षित फुटपाथों पर चलने के अधिकार’ (Right to Walk on Safe and Demarcated Footpaths) को एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) घोषित किया है। यह निर्णय देश में बढ़ते सड़क हादसों और पैदल यात्रियों की असुरक्षा को देखते हुए एक बड़ा प्रशासनिक और विधिक (Legal) मील का पत्थर है। पैदल यात्रियों की मौतों में अप्रत्याशित वृद्धि (The Grim Statistics) न्यायालय ने इस फैसले को देश में पैदल यात्रियों की बढ़ती संवेदनशीलता और जान के खतरे के संदर्भ में रेखांकित किया। हालिया आंकड़ों के अनुसार: सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के मुख्य बिंदु (Core Principles of the Judgment) 1. बहुआयामी संवैधानिक आधार (Constitutional Foundations) सुप्रीम कोर्ट ने ‘राइट टू वॉक’ को संविधान के भाग III के कई अनुच्छेदों के एक एकीकृत मिश्रण के रूप में स्थापित किया है: 2. वाहनों के विशेषाधिकार पर पूर्ण प्राथमिकता (Absolute Priority over Vehicles) न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि चलने की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त निर्बंधन (Reasonable Restrictions) लागू हो सकते हैं, लेकिन: 3. कानूनी रूप से लागू करने योग्य कर्तव्य (Enforceable Correlative Duty) 4. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की तीखी आलोचना सर्वोच्च न्यायालय ने मौजूदा कानून की सीमाओं को उजागर करते हुए कहा कि: न्यायालय का सुओ मोटो हस्तक्षेप और निर्देश न्यायालय ने इस फैसले के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए अपनी रजिस्ट्री को सीधे निर्देश दिए हैं कि निर्णय की प्रति निम्नलिखित को भेजी जाए: पूर्व के महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Past Supreme Court Verdicts) मामला (Case Law) न्यायिक सिद्धांत और निर्णय ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम (1985) कोर्ट ने माना था कि फुटपाथ प्राथमिक रूप से पैदल यात्रियों के चलने के लिए हैं और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के वहां रहने वालों को अचानक बेदखल नहीं किया जा सकता क्योंकि आजीविका का अधिकार (अनुच्छेद 21) महत्वपूर्ण है। सोदान सिंह बनाम नई दिल्ली नगर पालिका समिति (1989) कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फुटपाथों पर व्यापार करने का अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(g)) पूर्ण नहीं है। पैदल यात्रियों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन का अधिकार सर्वोपरि है। ‘न्यायिक विस्तार’ (Judicial Expansion) और न्यायिक सक्रियता न्यायिक विस्तार का औचित्य: यह क्यों आवश्यक है? (Arguments in Favour) न्यायपालिका द्वारा मौलिक अधिकारों के दायरे को बढ़ाने के पीछे ठोस सामाजिक और विधिक तर्क रहे हैं: 2न्यायिक विस्तार की चुनौतियाँ और आलोचना (Counter-Arguments / Criticisms) अधिकारों के इस निरंतर विस्तार को लेकर विधि विशेषज्ञों और आलोचकों द्वारा कई गंभीर चिंताएं भी जताई जाती हैं: पूर्व के कुछ प्रमुख विस्तारवादी निर्णय (Milestone Judgments) न्यायपालिका ने दशकों से इन अनुच्छेदों का दायरा बढ़ाया है: मामला (Case) विस्तारित अधिकार (Expanded Right) संबद्ध अनुच्छेद मेनका गांधी वाद (1978) विदेश यात्रा का अधिकार और “विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया” को “न्यायोचित और निष्पक्ष” होना चाहिए। अनुच्छेद 21 के.एस. पुट्टास्वामी वाद (2017) निजता का अधिकार (Right to Privacy) को मौलिक अधिकार माना गया। अनुच्छेद 21 अनुराधा भसीन वाद (2020) इंटरनेट तक पहुंच और इंटरनेट के माध्यम से व्यापार/अभिव्यक्ति को मौलिक अधिकार का हिस्सा माना गया। अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) मनियार इलियाज़ वाद (2026) चिह्नित और सुरक्षित फुटपाथ पर चलने का अधिकार। अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 आगे की राह (Way Forward) न्यायिक विस्तारवाद अपने आप में त्रुटिपूर्ण नहीं है, बशर्ते वह एक सीमा के भीतर हो। निष्कर्ष: न्यायपालिका द्वारा किया गया यह विस्तार भारतीय नागरिकों को बदलते समय के खतरों से सुरक्षा कवच प्रदान करता है। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कार्यपालिका इन अधिकारों को कितनी संजीदगी से नीतिगत स्तर पर लागू करती है। PIB SUMMARY पढ़ें

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NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 6: The Beginnings of Indian Civilisation in Hindi Pdf

NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 6: The Beginnings of Indian Civilisation in Hindi Pdf के अंतर्गत हम भारत की सबसे प्राचीन और गौरवशाली सभ्यता—जिन्हें हम सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) या सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जानते हैं, उसे बहुत ही सरल और आसान भाषा में समझेंगे। इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे हमारे पूर्वज हजारों साल पहले ग्रिड सिस्टम पर आधारित सुनियोजित शहरों में रहते थे, उनका जल प्रबंधन (Water Management) कैसा था और उनका व्यापार विदेशों तक कैसे फैला हुआ था। एक सभ्यता क्या है? (What Is a Civilisation?) समाज की खोज: भारत और उससे आगे (Exploring Society: India and Beyond) अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past) एक सभ्यता में कम से कम ये 7 खूबियां होनी चाहिए: दुनिया में सबसे पहले सभ्यता मेसोपोटामिया (लगभग 6000 साल पहले) और फिर मिस्र (Egypt) में शुरू हुई। भारत में इसकी शुरुआत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से हुई। धातुकर्म (Metallurgy) गांव से शहर तक (From Village to City) सहायक नदी (Tributary): अतीत का ताना-बाना (Tapestry of the Past) इस सभ्यता के अलग-अलग नाम और उनके कारण: हड़प्पा कालीन शहर और उनकी आधुनिक स्थिति (Harappan Cities & Modern Regions) हड़प्पा कालीन शहर (Harappan City) आधुनिक राज्य / क्षेत्र (Modern State / Region) हड़प्पा (Harappa) पंजाब (पाकिस्तान) मोहनजो-दड़ो (Mohenjo-daro) सिंध (पाकिस्तान) राखीगढ़ी (Rakhigarhi) हरियाणा (भारत) धोलावीरा (Dholavira) गुजरात (भारत) कालीबंगन (Kalibangan) राजस्थान (भारत) सरस्वती नदी (The Sarasvatī River) नगर-नियोजन (Town-Planning) महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms): नगरों की खोज और इतिहास (Discovery & History of Cities) हड़प्पा की नगर योजना और बनावट (City Structure & Layout) मोहनजो-दड़ो का ‘विशाल स्नानागार’ (The Great Bath) जल प्रबंधन (Water Management) साफ-सफाई और ड्रेनेज सिस्टम (Cleanliness & Drainage) पानी के स्रोत और संचयन (Water Sources & Harvesting) हड़प्पावासी क्या खाते थे? (What Did the Harappans Eat?) महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Key Terms): खेती और खान-पान (Agriculture & Diet) सक्रिय व्यापार (A Brisk Trade) निर्यात और शिल्प कला (Exports & Craftsmanship) परिवहन और लोथल का गोदीबाड़ा (Transport & Lothal Dockyard) हड़प्पा कालीन मुहरें (Harappan Seals) अंत या एक नई शुरुआत? (The End or a New Beginning?) NCERT Chapter 3 यहाँ पढ़ें

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28 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

28 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अन्तर्गत इस व्यापक विश्लेषण में हम मध्यकालीन इतिहास और सतत शहरी नियोजन के प्रतीक नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती, तकनीकी मोर्चे पर डिजिटल इंडिया के ऐतिहासिक 11 वर्ष (इंडियाएआई और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0), तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने वाले स्वदेशी पोत आईसीजीएस अक्षय, मध्य प्रदेश के आर्थिक गौरव जीआई-टैग प्राप्त रीवा के सुंदरजा आम का पहला कमर्शियल एक्सपोर्ट, स्वास्थ्य क्षेत्र की डिजिटल क्रांति आरोग्य सेतु 2.0 तथा भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 पर सरकार के नए रोडमैप का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई (MSME) दिवस 2026: ‘विकसित भारत @2047’ और डिजिटल पहलों का शुभारंभ चर्चा में क्यों? (Why in News?) भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 27 जून 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026’ (International MSME Day 2026) समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने देश के आर्थिक विकास में एमएसएमई के योगदान की सराहना करते हुए इस क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई बड़ी डिजिटल पहलों (Major Digital Initiatives) का शुभारंभ किया। मुख्य बिंदु: एमएसएमई का विकास और भविष्य का रोडमैप 1. ‘विकसित भारत @2047’ का मुख्य इंजन 2. दीर्घकालिक सफलता के तीन स्तंभ (Three Pillars of Success) एमएसएमई के वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए तीन तत्वों को अनिवार्य बताया गया है: 3. एआई (AI) और आधुनिक तकनीक: खतरे नहीं, अवसर प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) एमएसएमई और वैश्विक मंच (Fact Matrix) आरोग्य सेतु 2.0 और डिजिटल स्वास्थ्य पहलें: भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ का नया विस्तार चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा 29 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आरोग्य सेतु 2.0 (Aarogya Setu 2.0) और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कई अन्य डिजिटल पहलों को आधिकारिक तौर पर लॉन्च करेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर EHR स्टैंडर्ड्स (NRCeS) के तत्वावधान में विकसित ये पहलें देश के डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम को अत्यधिक सुदृढ़, इंटरऑपरेबल (Interoperable – विभिन्न प्रणालियों के बीच डेटा साझा करने की क्षमता) और नागरिक-केंद्रित बनाएंगी। मुख्य बिंदु: डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम और नई पहलें 1. आरोग्य सेतु 2.0: पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड (PHR) एप्लीकेशन कोविड-19 महामारी के दौरान बने भरोसे का लाभ उठाते हुए इस ऐप को अब नागरिकों के लिए एक व्यापक व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्लेटफॉर्म के रूप में अपग्रेड किया गया है, जो निम्नलिखित सुविधाएं देगा: 2. आयुष्मान ऐप (Ayushman App) एवं आयुष्मान सारथी (Ayushman Sarathi) 3. प्रदाता और बीमा-केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर 4. डिजिटल स्वास्थ्य की साझा भाषा (Standardization Tools) डेटा की सटीकता और नैदानिक निर्णयों को बेहतर बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण मानक जारी किए गए हैं: प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) विनियामक और विधिक अवयव (Regulatory Matrix) पहल / निकाय प्रमुख विनियामक और तकनीकी भूमिका (Core Function) राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) और PM-JAY के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी। NRCeS नेशनल रिसोर्स सेंटर फॉर EHR स्टैंडर्ड्स – भारत में स्वास्थ्य डेटा मानकीकरण (जैसे CLCI और BHTS) विकसित करने वाली संस्था। ABHA आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (Ayushman Bharat Health Account) – नागरिकों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान। NHCX नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज – अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच दावों के निपटान का डिजिटल हाईवे। CLCI कॉमन लोइंक कोड्स फॉर इंडिया – भारत के लिए प्रयोगशाला और नैदानिक जांच रिपोर्टों का मानक। रीवा के ‘सुंदरजा आम’ का पहला कमर्शियल एक्सपोर्ट: जीआई टैग और कृषि निर्यात को नई उड़ान चर्चा में क्यों? (Why in News?) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत अपेक्स बॉडी ‘एपीडा’ (APEDA) ने मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक भौगोलिक उपदर्शन (GI)-टैग प्राप्त ‘रीवा के सुंदरजा आम’ के पहले व्यावसायिक निर्यात (First Commercial Export) को सफलतापूर्वक सुगम बनाया है। 26 जून 2026 को हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई एक मीट्रिक टन की यह पहली अंतरराष्ट्रीय खेप संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भेजी गई है, जो भारतीय स्वदेशी कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। मुख्य बिंदु: वैश्विक बाजार में सुंदरजा आम और आर्थिक निहितार्थ 1. वैश्विक पहचान और विशिष्ट विशेषताएं (Unique Traits) 2. निर्यात अवसंरचना और संस्थागत समन्वय इस ऐतिहासिक शिपमेंट को धरातल पर उतारने के लिए एपीडा ने एक जटिल और बहुस्तरीय वैल्यू चेन का समन्वय किया: 3. किसानों को सीधा आर्थिक लाभ (Premium Pricing) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) विनियामक और भौगोलिक अवयव (Fact Matrix) डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष: एआई, सेमीकंडक्टर और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी से ‘विकसित भारत’ की ओर चर्चा में क्यों? (Why in News?) 1 जुलाई 2015 को लॉन्च हुए ‘डिजिटल इंडिया मिशन’ (Digital India Mission) के सफलतापर्वक 11 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत अब डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) के बुनियादी चरण से आगे बढ़कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और मजबूत डेटा गवर्नेंस के नए युग में प्रवेश कर चुका है। मुख्य बिंदु: डिजिटल इंडिया का नया चरण और कोर पिलर्स 1. इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन: स्वदेशी एआई इकोसिस्टम 2. भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM): नीति से उत्पादन तक 3. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और यूपीआई (UPI) की वैश्विक धाक 4. डिजिटल अवसंरचना का विस्तार 5. डिजिटल गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा का विनियामक ढांचा 6. नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) डिजिटल इंडिया प्रगति मैट्रिक्स (Fact Matrix) नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती: ऐतिहासिक विरासत और सतत शहरी नियोजन चर्चा में क्यों? (Why in News?) 27 जून 2026 को बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु श्री केम्पेगौड़ा की 517वीं जयंती (517th Birth Anniversary) मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति ने उन्हें एक दूरदर्शी प्रशासक, कुशल नगर निर्माता, पर्यावरणविद् और समाज सुधारक के रूप में याद किया, जिनके ऐतिहासिक आदर्श आज के ‘विकसित भारत’ के संकल्प और आधुनिक सतत शहरी विकास के लिए बेहद प्रासंगिक हैं। मुख्य बिंदु: केम्पेगौड़ा का ऐतिहासिक व प्रशासनिक योगदान 1. बेंगलुरु की स्थापना और ‘मिनी भारत’ की परिकल्पना 2. सतत शहरी नियोजन (Sustainable Urban Planning) 3. सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक सद्भाव 4. राष्ट्र निर्माण और उपराष्ट्रपति का संदेश प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts) तथ्य/पहलू विवरण

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27 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

27 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत हम परिवहन क्षेत्र में सहकारिता की नई क्रांति ‘भारत टैक्सी’, फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज में भारत की छलांग और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को वैश्विक मंच देने वाली सरस आजीविका पहल, सामाजिक न्याय के प्रणेता राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती और पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए जारी किए गए नए SOP का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे। एससीओ महिला मंच 2026: ‘महिला-नीत विकास’ और भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता चर्चा में क्यों? (Why in News?) किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक (Bishkek) में आयोजित ‘एससीओ महिला मंच (SCO Women’s Forum) 2026’ में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से इस मंच को संबोधित करते हुए भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बुनियादी सिद्धांतों जैसे आपसी सम्मान, समानता और आम सहमति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया तथा आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया। मुख्य बिंदु: आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका और भारतीय मॉडल (Key Notes) 1. ‘महिला-नीत विकास’ (Women-Led Development) का दृष्टिकोण 2. स्वयं सहायता समूह (SHGs) और ‘लखपति दीदी’ की सफलता 3. प्रमुख नीतिगत स्तंभ: मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0 4. क्षेत्रीय सहयोग के लिए भारत की तत्परता 10वीं शीर्ष स्तरीय NCORD बैठक: ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और नशामुक्त भारत का रोडमैप चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और ‘एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट-2025’ जारी की गई। साथ ही, ड्रग्स निपटान पाक्षिक अभियान’ (Online Drugs Disposal Fortnight Campaign) की शुरुआत की गई, जिसके तहत ₹6,000 करोड़ मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य बिंदु: भारत की नई नार्को-कंट्रोल रणनीति 1. उभरता हुआ नार्को-आतंकवाद इकोसिस्टम (Evolving Narco-Terrorism Ecosystem) 2. त्रि-स्तरीय रणनीति: ‘Detect, Disrupt, and Destroy’ 3. रोडमैप के 4 मुख्य स्तंभ (Four Pillars) यह रणनीति सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास (Whole of Government & Whole of Society Approach) पर आधारित है: 4. प्रशासनिक और संस्थागत सुधार (Institutional Reforms) 10 वर्षों में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की प्रगति (Comparative Data) मापदंड / अवधि 2004 – 2014 2014 – 2026 जब्त दवाओं का मूल्य ₹40,000 करोड़ (26 लाख किग्रा) ₹1,84,000 करोड़ (1.18 करोड़ किग्रा) नष्ट की गई दवाएं ₹8,000 करोड़ (3.26 लाख किग्रा) ₹89,896 करोड़ (42.47 लाख किग्रा) दर्ज किए गए मामले 1,73,000 मामले 8,75,000 मामले की गई गिरफ्तारियां 1,95,000 गिरफ्तारियां 10,97,000 गिरफ्तारियां अवैध अफीम खेती नष्ट की 10,000 एकड़ (2020 में) 42,282 एकड़ (2025 में) छत्रपति शाहू जी महाराज: सामाजिक न्याय और आधुनिक सुधारों के प्रणेता चर्चा में क्यों? (Why in News?) 26 जून 2026 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महान सामाजिक सुधारक और कोल्हापुर रियासत के दूरदर्शी राजा, राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए जीवनपर्यंत संघर्ष और आदर्शों को याद करते हुए उन्हें देश का मार्गदर्शक बताया। मुख्य बिंदु: शाहू जी महाराज का योगदान और ऐतिहासिक महत्व (Key Historical Notes) शाहू जी महाराज (1874-1922) कोल्हापुर के छत्रपति भोंसले राजवंश के एक ऐसे राजा थे, जिन्होंने अपने राजपाट का उपयोग केवल सत्ता चलाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के लिए किया: 1. सामाजिक न्याय और आरक्षण के जनक 2. शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार 3. डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संरक्षक और सहयोगी 4. उपाधि ‘राजर्षि’ (Rajarshi) का इतिहास ऐतिहासिक घटक (Component) परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) नाम और जीवनकाल राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज (26 जून 1874 – 6 मई 1922)। संबद्ध रियासत कोल्हापुर रियासत (मराठा भोंसले राजवंश)। ऐतिहासिक कदम (1902) प्रशासन और नौकरियों में पिछड़े वर्गों के लिए 50% आरक्षण की घोषणा करने वाले पहले भारतीय शासक। ‘राजर्षि’ उपाधि वर्ष 1919 में कानपुर की कुर्मी क्षत्रिय सभा द्वारा प्रदान की गई। डॉ. आंबेडकर से जुड़ाव डॉ. आंबेडकर की शिक्षा और उनके समाचार पत्र ‘मूकनायक’ (1920) को वित्तीय सहायता दी। प्रमुख सुधार अंतर्जातीय और विधवा विवाह को कानूनी मान्यता दी, बंधुआ मजदूरी और अस्पृश्यता को प्रतिबंधित किया। फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज: भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और आर्थिक संवृद्धि का नया रोडमैप चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक प्रमुख मीडिया कॉन्क्लेव में घोषणा की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), परमाणु (Nuclear), अंतरिक्ष (Space) और क्वांटम (Quantum) प्रौद्योगिकियां ही भारत के भविष्य की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तय करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वर्ष 2023 में लॉन्च हुए भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) ने अपने शुरुआती तीन वर्षों के भीतर ही अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक परिणाम समय से पहले हासिल कर लिए हैं। मुख्य बिंदु: फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज और भारत का बढ़ता प्रभाव 1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) की ऐतिहासिक प्रगति 2. नीतिगत सुधार और ट्रिपल-इंजन ग्रोथ (Space, Nuclear & AI) 3. अनुसंधान मॉडल में संरचनात्मक बदलाव (Structural Shift in R&D) 4. एनईपी 2020: नए इनोवेटर्स की नींव प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / मिशन (Component) परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया था। (वर्तमान में इसे संचालित होते हुए 3 वर्ष हो चुके हैं)। मुख्य फोकस क्षेत्र क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मौसम विज्ञान। प्राथमिक सफलता (2026) डिफेंस और रणनीतिक महत्व के लिए क्वांटम-सुरक्षित संचार लक्ष्यों की समय से पहले प्राप्ति। नवाचार का नया ढांचा सरकार-केंद्रित मॉडल से बदलकर “अकादमिक + उद्योग + स्टार्टअप” का पीपीपी मॉडल। लक्षित वर्ष वर्ष 2047 तक भारत को नवाचार-संचालित विकसित अर्थव्यवस्था बनाना। ‘भारत टैक्सी’: सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल और आर्थिक सशक्तिकरण चर्चा में क्यों? (Why in News?) केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 27 जून 2026 को महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर, गांधीनगर (गुजरात) से देश की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा “भारत टैक्सी” (Bharat Taxi) को आधिकारिक तौर

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India That Is Bharat

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 5: India, That Is Bharat अध्याय हमारी अपनी मातृभूमि के भौगोलिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नामकरण की कड़ियों को आपस में जोड़ता है। UPSC प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के नजरिए से यह समझना बेहद जरूरी है कि जिस भूमि को आज हम आधुनिक सीमाओं में ‘भारत’ के रूप में जानते हैं, उसका अतीत कितना गतिशील और विविधता से भरा रहा है। हम जानेंगे कि कैसे ऋग्वेद के ‘सप्त सिंधु’ से शुरू होकर, पुराणों के ‘भारतवर्ष’ और सम्राट अशोक के ‘जम्बुद्वीप’ से गुजरते हुए, प्राचीन पारसियों, यूनानियों और चीनियों के भाषाई रूपांतरण से ‘हिंदू’, ‘इंडिया’ और ‘यिन्दु’ जैसे वैश्विक नामों की उत्पत्ति हुई। हमारा देश: भारत / Our Country: India THINK ABOUT IT नाम की उत्पत्ति और ऐतिहासिक स्रोत / Names of India इतिहास के अलग-अलग कालखंडों में भारत को यहाँ के निवासियों और विदेशी यात्रियों द्वारा कई नामों से पुकारा गया है। इन नामों की जानकारी हमें निम्नलिखित तीन मुख्य माध्यमों से मिलती है: भारतीयों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Indians Named India सप्त सिंधु और ऋग्वैदिक काल महाभारत में वर्णित क्षेत्रीय नाम समय के साथ भारतीय साहित्य में देश के अन्य हिस्सों के नाम सामने आने लगे। महाभारत में पूरे उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों की सूची मिलती है, जिन्हें आज हम इस तरह पहचानते हैं: प्राचीन नाम (Ancient Name) वर्तमान क्षेत्र (Modern Region) काश्मीर (Kāshmīra) कश्मीर कुरुक्षेत्र (Kurukṣhetra) हरियाणा का हिस्से वंग (Vanga) बंगाल का हिस्से प्राग्ज्योतिष (Prāgjyotiṣha) असम कच्छ (Kaccha) कच्छ (गुजरात) केरल (Kerala) केरल संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए प्रयुक्त नाम प्राचीन भारतीय ग्रंथों की सटीक तिथि तय करना कठिन है, लेकिन विद्वानों के अनुसार ईसा पूर्व कुछ शताब्दियों (Centuries BCE) से लिखे गए ग्रंथों में पूरे उपमहाद्वीप के लिए दो मुख्य शब्दों का प्रयोग मिलता है: 1. भारतवर्ष (Bhāratavarṣha) 2. जम्बुद्वीप (Jambudvīpa) अशोक के अभिलेख का प्रमाण (250 BCE): सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों में पूरे भारत का वर्णन करने के लिए ‘जम्बुद्वीप’ शब्द का उपयोग किया था। उस समय के भारत में आज का बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिस्से भी शामिल थे। भौगोलिक परिभाषा और निरंतरता कुछ शताब्दियों बाद ‘भारत’ शब्द पूरे उपमहाद्वीप के लिए सर्वमान्य नाम बन गया। इसकी भौगोलिक सीमा को प्राचीन ग्रंथों में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया: विदेशियों ने भारत का नाम कैसे रखा / How Foreigners Named India पारसियों (Persians) का योगदान यूनानियों (Greeks) का योगदान चीनियों (Chinese) का योगदान प्राचीन चीन के लोगों ने भी भारत के साथ गहरे संबंध बनाए और अपने ग्रंथों में भारत को अलग-अलग नामों से पुकारा: भारतीय संविधान की कड़ियाँ नामकरण की संक्षिप्त तालिका (Summary Table) विभिन्न भाषाओं में सिंधु (Sindhu) नदी के आधार पर भारत के नाम इस प्रकार बदले: भाषा / विदेशी स्रोत भारत को दिया गया नाम प्राचीन पारसी (Persian) हिन्द (Hind), हिदु (Hidu), हिन्दू (Hindu) प्राचीन ग्रीक (Greek) इन्दोई (Indoi), इन्दिके (Indike) प्राचीन चीनी (Chinese) यिन्तु (Yintu), यिन्दु (Yindu), तिएनझू (Tianzhu) बाद की अरबी व फारसी हिंदुस्तान (Hindustān) अंग्रेजी (English) व लैटिन इंडिया (India) फ्रेंच (French) इंद (Inde) CH -4 यहाँ पढ़ें

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NCERT Notes class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History

 NCERT Notes Class 6 Social Science (Geography) Chapter 4: Timeline and Sources of History के अन्तर्गत इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है (BCE/CE का नियम), 300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा (Timeline), इतिहास के विभिन्न स्रोत (पुरातात्विक, साहित्यिक और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकें), मानव इतिहास की शुरुआत तथा हिमयुग की समाप्ति के बाद पहली फसलों व स्थायी बस्तियों के उदय को बेहद संक्षिप्त, बिंदुवार और टू-द-पॉइंट (Concise Notes) तरीके से संकलित किया गया है। यह क्रिस्प नोट्स न केवल आपकी समझ को मजबूत करेंगे बल्कि यूपीएससी प्रीलिम्स और मुख्य परीक्षा (GS-1) के लिए एक अचूक क्विक-रिवीजन गाइड साबित होंगे।  हम अतीत के बारे में केसे जानते हैं ?How Do We Learn About the Past? THINK ABOUT IT अतीत की समझ और वर्तमान: हमारी सबसे पुरानी यादें हमारे व्यक्तिगत अतीत का हिस्सा हैं, लेकिन जब हम बड़े पैमाने पर अतीत यानी इतिहास को समझते हैं, तभी हमें आज के वर्तमान विश्व (Present world) के ताने-बाने को समझने में मदद मिलती है। इतिहास (History) की परिभाषा: मानव अतीत के अध्ययन को ही सरल शब्दों में इतिहास (The study of the human past) कहा जाता है। Tapestry of the Past विज्ञान हमें सिखाता है कि पृथ्वी का अपना एक बहुत ही लंबा और गहरा इतिहास रहा है, जिसमें हम इंसान (Humans) केवल सबसे हालिया और एक बेहद छोटा सा हिस्सा (Tiny part) साझा करते हैं। जीवन के विकास के इस क्रमिक इतिहास को समझने के लिए नीचे दी गई समय-सीमा (Timeline) को कंठस्थ कर लें, क्योंकि प्रीलिम्स में इसका कालानुक्रमिक क्रम (Chronological order) पूछा जा सकता है। Timeline of Life and Human Evolution समय (Time Period) जीवन के विकास के चरण (Stages of Evolution) 4.54 Billion Years Ago पृथ्वी (Earth) की प्रारंभिक उत्पत्ति या इतिहास की शुरुआत। 2.33 Billion Years Ago वायुमंडलीय ऑक्सीजन (Atmospheric oxygen) का विकास। 700 Million Years Ago प्रथम कोशिकाएं (First cells), बैक्टीरिया (Bacteria), तथा स्पंज और कवक (Sponges and fungi) का उद्भव। 500 Million Years Ago मछलियां (Fish), रीढ़धारी जीव (Vertebrates), शार्क (Sharks) और मूंगा (Corals) का विकास। 300 Million Years Ago उभयचर (Amphibians), सरीसृप (Reptiles), कीड़े (Insects) और डायनासोर (Dinosaurs) का काल। 100 Million Years Ago फूलों वाले पौधे और मधुमक्खियाँ (Flowers and bees)। 60 Million Years Ago पक्षी (Birds) और स्तनधारी जीव (Mammals) अस्तित्व में आए। 10,000,000 Years Ago प्राइमेट्स (Primates) का आगमन (1 करोड़ वर्ष पहले)। 1,000,000 Years Ago मानव द्वारा आग (Fire) का उपयोग/خोज (10 लाख वर्ष पहले)। 300,000 Years Ago आधुनिक मानव यानी होमो सेपियन्स (Homo sapiens) का उदय (3 लाख वर्ष पहले)। 6,500 Years Ago मानव इतिहास में लेखन (Writing) कला की शुरुआत (6500 वर्ष पहले)। Specialists Studying the Earth and Our Past पृथ्वी की सतह के नीचे छिपे रहस्यों को खोजने और हमारे अतीत को डिकोड करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के प्रशिक्षित वैज्ञानिक काम करते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: Geologists (भूवैज्ञानिक): ये पृथ्वी की भौतिक विशेषताओं (Physical features) का गहन अध्ययन करते हैं, जिसके अंतर्गत मिट्टी, पत्थर, पहाड़ियाँ, पर्वत, नदियाँ, समुद्र और महासागर जैसे प्राकृतिक घटकों की जांच की जाती है। Palaeontologists (जीवाश्म वैज्ञानिक): इनका मुख्य कार्य लाखों वर्ष पहले पाए जाने वाले पौधों, जानवरों और शुरुआती मनुष्यों के अवशेषों का जीवाश्म (Fossils) के रूप में अध्ययन करना है। Anthropologists (मानवविज्ञानी): ये सबसे प्राचीन काल (Oldest times) से लेकर बिल्कुल आज के वर्तमान समय तक के मानव समाजों और उनकी संस्कृतियों (Human societies and cultures) के क्रमिक विकास का अध्ययन करते हैं। Archaeologists (पुरातत्वविद): ये जमीन की खुदाई (Digging) करके मनुष्यों, पौधों और जानवरों द्वारा पीछे छोड़े गए भौतिक अवशेषों के माध्यम से अतीत का विश्लेषण करते हैं। पुरातत्वविदों के अध्ययन के मुख्य स्रोत: उनके द्वारा खोजे गए औजार (Tools), बर्तन (Pots), मनके (Beads), छोटी मूर्तियां (Figurines), खिलौने, इंसानों और जानवरों की हड्डियां व दांत, जले हुए अनाज (Burnt grains), तथा पुराने घरों या ईंटों के अवशेष शामिल हैं। इतिहास में समय का मापन कैसे किया जाता है? / How Is Time Measured in History? THINK ABOUT IT समय मापन के पारंपरिक तरीके: हर संस्कृति के पास समय मापने के अपने अनूठे तरीके रहे हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के जन्म या शासक के शासनकाल की शुरुआत जैसे बड़े आयोजनों को अक्सर एक नए युग (Era – एक विशिष्ट समय अवधि) की शुरुआत माना जाता था। कैलेंडरों का सह-अस्तित्व: वर्तमान में दुनिया भर में ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही त्योहारों और अन्य शुभ (Auspicious – अनुकूल या भाग्यशाली) अवसरों की गणना के लिए हिंदू, मुस्लिम, यहूदी और चीनी कैलेंडर भी चलन में हैं। ईसा मसीह के जन्म का संदर्भ: पश्चिम में ईसा मसीह के पारंपरिक जन्म वर्ष को इस कैलेंडर का शुरुआती बिंदु माना गया है। AD और CE: इस बिंदु से आगे बढ़ने वाले वर्षों को पहले ‘AD’ (एनो डोमिनी) कहा जाता था, जिसे अब वैश्विक स्तर पर Common Era (CE) कहा जाता है (जैसे: भारत का स्वतंत्रता वर्ष 1947 CE)। BC und BCE: ईसा के जन्म से पहले के वर्षों की गणना पीछे की ओर की जाती है। इन्हें पहले BC (Before Christ) और अब Before Common Era (BCE) कहा जाता है (जैसे: गौतम बुद्ध का जन्म वर्ष लगभग 560 BCE है)।  LET’S EXPLORE ‘वर्ष शून्य’ (Year Zero) का अभाव: ग्रेगोरियन कैलेंडर में कोई ‘वर्ष शून्य’ नहीं होता है। वर्ष 1 BCE के तुरंत बाद वर्ष 1 CE आता है। इसी कारण 2 BCE से 2 CE के बीच केवल 3 वर्ष ही बीतते हैं। BCE और CE के बीच कुल वर्षों की गणना का नियम: एक BCE तिथि और एक CE तिथि के बीच के कुल वर्षों को जानने के लिए दोनों को जोड़कर उसमें से 1 घटाया जाता है। बुद्ध के जन्म का उदाहरण (यदि वर्तमान वर्ष 2026 CE माना जाए): 560 + 2026 – 1 = 2585 वर्ष पहले 300,000 BCE से प्रमुख घटनाओं की समय-सीमा / Timeline of Main Events Since 300,000 BCE ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालक्रम (Chronological order) इस प्रकार है: समय (Time) प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ (Main Historical Events) 300,000 BCE मानव इतिहास की शुरुआत और हिमयुग (Ice Age) का काल। 40,000 BCE विश्व में रॉक आर्ट (Rock Art – शैल चित्रकला) के पहले उदाहरण।

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