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23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस अंक में भारत की बहुआयामी उपलब्धियों का सार है। इसमें UNCTAD 2025 के अनुसार भारत का वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण (HKC) में शीर्ष स्थान, न्याय तक पहुँच के लिए ‘दिशा 2.0’ व अनुच्छेद 39A का विश्लेषण, राखीगढ़ी के मानव कंकालों पर AnSI का शोध और भारत के उभरते प्रौद्योगिकी (AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम) इकोसिस्टम के नवीनतम डेटा को शामिल किया गया है। भारत बना दुनिया का नंबर-1 शिप रीसाइक्लिंग देश: UNCTAD रिपोर्ट चर्चा में क्यों है? संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में दुनिया का शीर्ष जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) देश बन गया है। भारत ने अपने ‘मैरिटाइम इंडिया विज़न (MIV) 2030’ के लक्ष्य को तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है। मुख्य आंकड़े पैरामीटर वर्ष 2024 वर्ष 2025 विकास / प्रभाव वैश्विक हिस्सेदारी 30.1% 35.4% दुनिया में सबसे ज्यादा रीसाइक्लिंग वॉल्यूम 1.86 मिलियन GT 2.99 मिलियन GT लगभग 60% की भारी वृद्धि भविष्य की संभावना (BIMCO) – – अगले दशक में भारत हर साल 500-600 जहाजों को रीसायकल करेगा। सरकार की 5 प्रमुख पहलें भारत को इस मुकाम तक पहुँचाने में सरकार की इन रणनीतिक पहलों का सबसे बड़ा हाथ रहा है: हांगकांग कन्वेंशन (HKC) हांगकांग कन्वेंशन (Hong Kong Convention – HKC) जहाजों को रीसायकल (यानी पुराने जहाजों को तोड़ने और उनके पार्ट्स का दोबारा इस्तेमाल करने) से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय समझौता (Global Treaty) है। इसे 2009 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) द्वारा अपनाया गया था, और यह 26 जून 2025 से पूरी दुनिया में कानूनी रूप से लागू हो चुका है। मुख्य उद्देश्य जहाजों को तोड़ना दुनिया के सबसे खतरनाक कामों में से एक है। पुराने जहाजों में एस्बेस्टस, भारी धातुएं (Heavy Metals) और कई तरह के जहरीले रसायन होते हैं। इसका उद्देश्य दो चीजों को सुरक्षित करना है: भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग हब है (गुजरात का अलंग-सोसैया यार्ड दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने वाला यार्ड है)। भारत ने 2019 में इस कन्वेंशन की पुष्टि (Ratify) की थी। सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और ब्लू इकोनॉमी: जहाजों को तोड़कर जो स्टील और अन्य कीमती धातुएं निकलती हैं, उन्हें रीसायकल करके दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे नए खनन (Mining) की जरूरत कम होती है, पर्यावरण बचता है, और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है। आगे की राह (Way Forward) नंबर-1 बनने के बाद अब भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं जिन पर काम करना होगा: दिशा 2.0 (DISHA 2.0): न्याय तक समग्र पहुँच के लिए केंद्रीय योजना को मंजूरी चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (DISHA)’ के पुनर्गठित और अपग्रेड संस्करण ‘DISHA 2.0’ को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। योजना के मुख्य तथ्य 23 June 2026 PIB Summary for UPSC DISHA 2.0 के 4 प्रमुख घटक (Four Core Components) पहले इस योजना में 3 घटक थे, लेकिन DISHA 2.0 में एक नया तकनीकी घटक जोड़ा गया है। घटक (Component) मुख्य कार्य और लक्ष्य तकनीक/पहुँच 1. टेली-लॉ (Tele-Law) मुकदमों से पहले मुफ्त कानूनी सलाह देना। देश के 36 राज्यों/UTs के 784 जिलों में 2,50,000 कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) का नेटवर्क। आकांक्षी ब्लॉकों में ‘न्याय सहायक’ घर-घर जाकर मदद करेंगे। 2. न्याय बंधु (Nyaya Bandhu) वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स में मुफ्त कानूनी सहायता (Pro-Bono) की संस्कृति को बढ़ावा देना। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र लोगों को मुफ्त अदालती प्रतिनिधित्व देना और लॉ कॉलेजों में ‘प्रो-बोनो क्लब’ बनाना। 3. कानूनी साक्षरता और जागरूकता (LLLAP) मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों (CSOs) और लॉ यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाना। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से देशव्यापी अभियान चलाना। 4. विधि-संजीवनी (VIDHI-Sanjeevani)(नया घटक) पूरे कार्यक्रम की निगरानी और डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म। ‘भाषिणी’ (BHASHINI) के सहयोग से विकसित एआई-संचालित बहुभाषी ‘न्याय सेतु’ (Nyaya Setu) चैटबॉट को शामिल किया गया है, जो कानूनी सवालों के तुरंत जवाब देगा। संवैधानिक और वैश्विक जुड़ाव यह योजना केवल एक डिजिटल पोर्टल नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के बड़े विज़न्स को पूरा करती है: 1. संवैधानिक जनादेश (Constitutional Mandate): यह भारतीय संविधान की प्रस्तावना (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय), अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और विशेष रूप से अनुच्छेद 39A (सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता) को जमीन पर उतारती है। 2. ईज ऑफ जस्टिस (Ease of Justice): प्रधानमंत्री के विज़न के अनुसार, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ तब तक अधूरे हैं जब तक देश के गरीब से गरीब नागरिक को ‘ईज ऑफ जस्टिस’ (आसानी से न्याय) न मिले। 3. वैश्विक लक्ष्य (SDG-16): यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG-16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) और भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को सीधा समर्थन देती है। पुराना ट्रैक रिकॉर्ड (DISHA 1.0: 2021-26) अनुच्छेद 39A (Article 39A): समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता यह अनुच्छेद राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। नालसा (NALSA) की संगठनात्मक संरचना अनुच्छेद 39A के उद्देश्यों को कानूनी रूप देने के लिए संसद ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) पास किया। इसी एक्ट के तहत 1995 में NALSA (National Legal Services Authority – राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) का गठन हुआ। इसकी संगठनात्मक संरचना शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक एक पिरामिड की तरह काम करती है: प्रमुख पद (Composition): NALSA के मुख्य कार्य (Core Functions) 23 June 2026 PIB Summary for UPSC मुफ्त कानूनी सहायता के लिए कौन पात्र है? (Section 12 of the Act) हर कोई NALSA के तहत मुफ्त वकील का दावा नहीं कर सकता। अधिनियम की धारा 12 के तहत निम्नलिखित लोग इसके पात्र हैं: राखीगढ़ी से मिले मानव कंकाल: वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए AnSI को सौंपे गए चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरास्थलीय उत्खनन (2025-26 सीजन) से मिले मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक

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21 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi 

21 June 2026 PIB Summary for UPSC में भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर और पर्यावरण नीतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम शामिल हैं। मुख्य आकर्षणों में कोलकाता में आयोजित ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ थीम पर आधारित 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, जैव विविधता अधिनियम के तहत स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने वाला सफल एबीएस (ABS) फ्रेमवर्क, और पश्चिम बंगा दिवस के अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का स्मरण प्रमुख हैं। ‘निर्भय चेतना’ अभियान (Nirbhay Chetna) यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper II (Governance, Panchayati Raj Institutions) और GS Paper III (Issues Related to Women & Gender Equality) के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? हाल ही में, पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) ने नई दिल्ली में 17-19 जून 2026 तक ‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) के तहत तीन दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया। यह जमीनी स्तर पर लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरुषों को संवेदनशील बनाने की अपनी तरह की पहली वैश्विक पहल है। ‘निर्भय चेतना’ (Nirbhay Chetna) क्या है? यह निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) के तहत पंचायती राज मंत्रालय की एक अनूठी राष्ट्रीय पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर शासन को जेंडर-रिस्पॉन्सिव (Gender-Responsive Governance) बनाना है। ‘निर्भय रहो’ (Nirbhay Raho) पहल के तीन स्तंभ ‘निर्भय चेतना’ वास्तव में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 11 मार्च 2026 को शुरू की गई ‘निर्भय रहो’ व्यापक योजना का एक हिस्सा है। इस योजना के तीन प्रमुख घटक (Components) हैं: घटक का नाम मुख्य फोकस / कार्य 1. निर्भय नेत्री (Nirbhay Netri) निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों (EWRs) की क्षमता निर्माण (Capacity Building) और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाना। 2. निर्भय चेतना (Nirbhay Chetna) निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को जेंडर इक्वलिटी और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर संवेदनशील बनाना। 3. निर्भय दृष्टि (Nirbhay Drishti) तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पंचायतों के रणनीतिक ग्रामीण स्थानों पर CCTV कैमरे लगाना। इस पहल के बड़े लक्ष्य (Data & Targets) मुख्य विषय और कार्यप्रणाली (Themes & Methodology) इस कार्यक्रम में केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया गया है: पश्चिम बंगा दिवस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Modern Indian History & Post-Independence Consolidation) और Prelims (Important Personalities) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? 20 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पश्चिम बंगा दिवस’ (Paschimbanga Divas) के अवसर पर पश्चिम बंगाल के नागरिकों को बधाई दी। इसके साथ ही, उन्होंने भारत के एकीकरण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अमूल्य योगदान को याद किया। आपको बता दें कि वर्ष 2026 डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती (125th Jayanti) का वर्ष भी है। पश्चिम बंगा दिवस (20 जून) का ऐतिहासिक महत्व UPSC प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए इस तारीख का बैकग्राउंड समझना जरूरी है: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और उनका योगदान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के इतिहास में एक बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व रहे हैं। क्षेत्र महत्वपूर्ण तथ्य / योगदान जन्म एवं प्रारंभिक जीवन उनका जन्म 1901 में हुआ था (वर्ष 2026 उनकी 125वीं जयंती है)। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति (Vice-Chancellor) बने थे। बंगाल विभाजन में भूमिका उन्होंने मुस्लिम लीग के पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने के प्लान का कड़ा विरोध किया और हिंदू बहुल क्षेत्रों के लिए पश्चिम बंगाल राज्य की स्थापना सुनिश्चित की। राजनीतिक करियर वे स्वतंत्र भारत की पहली कैबिनेट (1947) में उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। इस्तीफा और नई पार्टी जवाहरलाल नेहरू के साथ ‘लियाकत-नेहरू समझौते’ (1950) पर वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। जम्मू-कश्मीर मुद्दा उन्होंने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध किया और ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ का नारा दिया। पश्चिम बंगाल का भारत में योगदान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 (International Day of Yoga) यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper I (Indian Culture – Ancient Knowledge Traditions), GS Paper II (Social Sector – Health & Governance) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? 21 जून 2026 को दुनिया भर में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) मनाया गया। इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया गया। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से, यह आयोजन अब एक वार्षिक उत्सव से आगे बढ़कर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (बीमारियों से बचाव वाली स्वास्थ्य प्रणाली) का दुनिया का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम (Theme) थीम: ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing) योग का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर (Historical Legacy) कॉमन योग प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol – CYP) दुनिया भर के लोग एक साथ, एक ही लय में योग कर सकें, इसके लिए आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) ने शीर्ष योग गुरुओं के साथ मिलकर इसे तैयार किया है। योग दिवस 2026 से जुड़े प्रमुख मील के पत्थर (Key Highlights) इस वर्ष योग दिवस की तैयारियों को देश की संस्कृति और वैश्विक मंच से जोड़ने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए: आयोजन / अभियान मुख्य विशेषता / स्थान मुख्य राष्ट्रीय समारोह कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में आयोजित। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड 14 जून 2026 को एक विशेष लाइव सत्र में 4 लाख से अधिक लोगों ने एक साथ भाग लेकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। 100 दिवसीय काउंटडाउन इसकी शुरुआत विज्ञान भवन (नई दिल्ली) से हुई। इसके बाद 75वें दिन लोनार क्रेटर (महाराष्ट्र), 50वें दिन कान्हा शांति वनम (हैदराबाद) और 25वें दिन खजुराहो के स्मारकों में योग कार्यक्रम हुए। विशेष अभियान ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान के जरिए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। स्वस्थ उम्र बढ़ने (Healthy Ageing) में योग की भूमिका उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों को रोकने में योग विज्ञान बेहद व्यावहारिक भूमिका निभाता है: भारत का ABS फ्रेमवर्क और जैव विविधता संरक्षण यह टॉपिक UPSC Civil Services Examination के GS Paper III (Environment & Biodiversity – Conservation, Environmental Impact Assessment) और Prelims के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा में क्यों है? हाल ही

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22 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi 

22 june 2026 PIB Summary for upsc in hindi : आज के व्यापक पीआईबी (PIB) विश्लेषण में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक, रक्षा और कूटनीतिक विकासों को कवर किया गया है। इसमें जीएस पेपर-3 (विज्ञान, प्रौद्योगिकी व रक्षा) के तहत भारतीय नौसेना में तीन स्वदेशी युद्धपोतों—अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS दूनागिरी, सबसे उन्नत हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत INS संशोधक और एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट INS अग्रय के शामिल होने का रक्षा विश्लेषण प्रस्तुत है; साथ ही, ‘भारी जल बोर्ड बड़ौदा’ में नई परमाणु सुविधाओं का उद्घाटन भी शामिल है। जीएस पेपर-2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के अंतर्गत भारत की अध्यक्षता में गुरुग्राम में होने वाली 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक और आगरा में संपन्न हुए पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम (BRICS MSME Forum) के मुख्य निष्कर्षों को रेखांकित किया गया है। अंत में, कला और संस्कृति के तहत मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF 2026) में प्रदर्शित भारतीय महिला नायिकाओं पर आधारित एनीमेशन श्रृंखला ‘भारती और बीबो’ का यूपीएससी-उन्मुख विश्लेषण शामिल है। भारती और बीबो (MIFF 2026) चर्चा में क्यों है? पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus) श्रृंखला की विशेषताएं यह एडुटेनमेंट (शिक्षा और मनोरंजन) श्रृंखला युवा ‘भारती’ और उसके जादुई साथी ‘बीबो’ (जो भारत का स्त्री रूप है) के माध्यम से देश की चार महान महिला नायिकाओं की वास्तविक जीवन गाथाओं को प्रदर्शित करती है: विशेष दृष्टिकोण: यह श्रृंखला केवल एक मातृसत्तात्मक ढांचे के बजाय एक संतुलित नारीवादी दृष्टिकोण को अपनाती है। इसमें रूढ़िवादिता को तोड़ते हुए महिलाओं को चालकों, किसानों, कलाकारों और वैज्ञानिकों के रूप में भी दिखाया गया है। Prelims current affairs based Question प्रश्न. हाल ही में चर्चा में रही एनिमेशन श्रृंखला ‘भारती और बीबो’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (C) केवल 1 और 3 व्याख्या: कथन 2 गलत है क्योंकि इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा पर्यावरणविद् (सालुमारदा थिम्मक्का) और मध्यकालीन व आधुनिक भारत की प्रशासनिक व सामाजिक सुधारक महिलाओं को भी शामिल किया गया है। INS दुनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय स्रोत: पीआईबी (PIB) सिलेबस: GS Paper 3: बुनियादी ढांचा, सुरक्षा, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी) तथा प्रारंभिक परीक्षा के लिए। चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2026 (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और विश्व हाइड्रोग्राफी दिवस) को श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी युद्धपोतों को राष्ट्र को समर्पित किया। नव-कमीशन किए गए युद्धपोत और उनकी विशेषताएं भारतीय नौसेना की युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित इन तीनों जहाजों में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। युद्धपोत का नाम प्रकार/श्रेणी मुख्य भूमिका और सामरिक महत्व INS दुनागिरी (INS Dunagiri) एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट (Project 17A) दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता, तटीय सुरक्षा और आक्रामक अभियानों में सहायक। INS संशोधक (INS Sanshodhak) सर्वे वेसल – लार्ज (SVL) गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा स्रोतों की खोज और मानचित्रण। INS अग्रय (INS Agray) एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) तटीय जल में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम। भारत की समुद्री और रक्षा क्षमता नौसैनिक और समुद्री क्षेत्र से जुड़े नीतिगत सुधार “शांति की रक्षा के लिए शक्ति आवश्यक है, समृद्धि की सुरक्षा के लिए सुरक्षा जरूरी है, और भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है।” भारत वर्तमान में रक्षा क्षेत्र में ‘क्रेता’ (Buyer) से ‘निर्माता’ (Producer) बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। हाल ही में ख़बरों में रहे ‘INS दुनागिरी’, ‘INS संशोधक’ और ‘INS अग्रय’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 उत्तर: (a) व्याख्या: कथन 1 और 2 बिल्कुल सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि INS संशोधक एक ‘सर्वे वेसल – लार्ज’ (जल सर्वेक्षण पोत) है, जबकि एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट ‘INS अग्रय’ है। GS Paper 3 – (बुनियादी ढांचा और सुरक्षा) भारत के बढ़ते रक्षा विनिर्माण और निर्यात ग्राफ को रेखांकित करते हुए समझाइए कि ‘सागरमाला परियोजना’ और ‘ब्लू इकोनॉमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) नीतियां किस प्रकार देश को वैश्विक मंच पर एक निर्णायक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में स्थापित कर सकती हैं? (150 शब्द, 10 अंक) 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक: भारत करेगा मेजबानी 22 June 2026 PIB Notes for UPSC: भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम, हरियाणा में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। यह चौथा मौका है जब भारत ब्रिक्स की कमान संभाल रहा है। सिलेबस: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (GS Paper 2) और बुनियादी ढांचा व ऊर्जा (GS Paper 3)। बैठक की थीम और मुख्य एजेंडा ब्रिक्स (BRICS) का नया स्वरूप और ताकत विस्तार के बाद ब्रिक्स में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं: सदस्य देश: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)। ये 11 देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक जीडीपी (GDP) का 40% हिस्सा संभालते हैं। इनमें प्रमुख तेल उत्पादक (जैसे सऊदी अरब, यूएई, ईरान) और सबसे बड़े उपभोक्ता (भारत, चीन) दोनों शामिल हैं, जो इस मंच को वैश्विक ऊर्जा नीतियों के लिए सबसे पावरफुल बनाते हैं। भारत का ‘ऊर्जा परिवर्तन’ इस बैठक में भारत वैश्विक मंच पर अपनी उन बड़ी उपलब्धियों को सामने रखेगा, जो विकसित भारत 2047 के विजन का आधार हैं: क्षेत्र/पहल भारत की उपलब्धि और लक्ष्य सौर ऊर्जा पिछले एक दशक में भारत ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 50 गुना से अधिक बढ़ाया है। स्मार्ट मीटर देश भर में अब तक 6 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। ऊर्जा भंडारण साल 2032 तक 410 GWh ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। बायोफ्यूल्स भारत ने 20% एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य पा लिया है और अब 80-85% एथेनॉल वाले E85 ईंधन को रोलआउट किया जा रहा है। वैश्विक नेतृत्व भारत इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और ग्लोबल

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17 June 2026 PIB Notes for UPSC in Hindi

आज के 17 June 2026 PIB Notes for UPSC के इस विशेष अंक में हम केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कई दूरगामी कदमों का व्यापक विश्लेषण करेंगे। इनमें पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लॉन्च किया गया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल, देश में रोजगार के औपचारिकरण को गति देने वाली प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY), और खाद्यान्नों की आधुनिक ट्रैकिंग के लिए शुरू किया गया स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, रक्षा उत्पादन में भारत द्वारा हासिल किए गए ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर और मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए बॉन चैलेंज के तहत भारत की शानदार प्रगति जैसे मुख्य विषयों को परीक्षा-उपयोगी डेटा बैंक, फ्लोचार्ट और अभ्यास प्रश्नों के साथ नीचे विस्तार से समझाया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल (GHCI)   चर्चा में क्यों? केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) को मजबूत करने के लिए ‘ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल’ (GHCI) लॉन्च किया है। यह कदम भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा का केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल (GHCI) राज्यों की भागीदारी और नीतियां मिशन की अब तक की प्रमुख उपलब्धियां केस स्टडी (Case Study): नवंबर 2025 में JSW द्वारा 3,600 MTPA क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र का सफल संचालन शुरू किया जा चुका है, जो इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के बारे में यह मिशन साल 2023 में ₹19,744 करोड़ के कुल परिव्यय (Outlay) के साथ शुरू किया गया था। लक्ष्य सूचकांक निर्धारित लक्ष्य उत्पादन क्षमता सालाना 5 MMT (Million Metric Tonne) हरित हाइड्रोजन बनाना। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता इसके लिए 125 GW की समर्पित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ना। कुल निवेश ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना। रोजगार सृजन 6 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा करना। पर्यावरण प्रभाव सालाना 50 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना। प्रीलिम्स के लिए संभावित प्रश्न (Prelims Practice Question) प्रश्न: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? A) केवल 1 B) केवल 2 C) 1 और 2 दोनों D) न तो 1 और न ही 2 राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) में नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति   UPSC GS Paper 2 (महत्वपूर्ण संस्थाएं/वैधानिक निकाय) और GS Paper 3 (आर्थिक विकास और डेटा प्रबंधन) के लिए बेहद उपयोगी हैं। चर्चा में क्यों? हाल ही में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (National Statistical Commission – NSC) के नए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) कोलकाता के पूर्व निदेशक डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय को आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नई नियुक्तियों का विवरण कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा अनुमोदित नई नियुक्तियां इस प्रकार हैं: राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के बारे में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के मुख्य कार्य और शक्तियां प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question) प्रश्न: राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 1 और 3 D) 1, 2 और 3 प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY)   UPSC GS Paper 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और समावेशी विकास) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चर्चा में क्यों? पीएम द्वारा 19 जून 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत लगभग ₹2,400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित करेंगे। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) क्या है? यह भारत सरकार की एक प्रमुख रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (Employment-Linked Incentive) योजना है। इसे देश में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। योजना के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ और प्रोत्साहन यह योजना अनूठी है क्योंकि यह कर्मचारियों और नियोक्ताओं (Employers) दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन देती है: अब तक की प्रगति और आगामी लक्ष्य भारत में श्रम बल का एक बहुत बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) में काम करता है, जहाँ सामाजिक सुरक्षा (जैसे- पीएफ, पेंशन, बीमा) नहीं मिलती। PM-VBRY जैसी योजनाएं सीधे तौर पर नियोक्ताओं की लागत कम करके और कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देकर रोजगार के ‘औपचारिकरण’ को बढ़ावा देती हैं, जो ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question) प्रश्न: ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना’ (PM-VBRY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? A) केवल 1 और 2 B) केवल 2 और 3 C) केवल 1 और 3 D) 1, 2 और 3 खाद्यान्न भंडारण के लिए ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम’ और ‘डिपो दर्पण’   UPSC GS Paper 3 (मुख्य परीक्षा: खाद्य सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और बफर स्टॉक प्रबंधन) के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। हाल ही में, केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में खाद्यान्न भंडारण के लिए ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम’ (Smart Warehousing System) लॉन्च किया गया है। इसके साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले गोदामों को ‘डिपो दर्पण’ (Depot Darpan) फ्रेमवर्क के तहत सम्मानित भी किया गया। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम (Smart Warehousing System) क्या है? यह देश के सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण बुनियादी ढांचे (Public Storage Infrastructure) को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत समाधान है। डिपो दर्पण (Depot Darpan) मूल्यांकन ढांचा यह खाद्य भारतीय निगम (FCI), केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) और अन्य राज्य/निजी गोदामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए पेश किया गया एक संरचित ढांचा (Performance-monitoring framework) है। राष्ट्रीय अभियानों के साथ जुड़ाव और महत्व यह पहल भारत सरकार की विभिन्न रणनीतिक दूरदृष्टि के अनुकूल है: प्रीलिम्स के लिए अभ्यास प्रश्न (Prelims Practice Question) प्रश्न: हाल ही में चर्चा में रहे ‘डिपो दर्पण’ (Depot Darpan) पोर्टल का मुख्य उद्देश्य क्या है? A) देश के सभी रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और सुरक्षा बढ़ाना। B) खाद्यान्न भंडारण डिपो/गोदामों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उनका प्रदर्शन मूल्यांकन करना। C)

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Nirman ias Current Affairs 9 September 2025

Topic : जम्मू–कश्मीर की राज्यसभा सीटों का विवाद     चर्चा में क्यों : हाल ही में केंद्र के कानून और न्याय मंत्रालय ने चुनाव आयोग (EC) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें जम्मू-कश्मीर (J&K) की चार राज्यसभा सीटों की अवधि को क्रमबद्ध (staggered) करने के लिए राष्ट्रपति आदेश जारी करने की सिफारिश की गई थी।  इस फैसले के कारण 2021 से जम्मू-कश्मीर की कोई भी प्रतिनिधित्व राज्यसभा में नहीं है। UPSC पाठ्यक्रम:  प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राजनीति और शासन – संविधान, राजनीतिक व्यवस्था, पंचायती राज, सार्वजनिक नीति, अधिकार मुद्दे मुख्य परीक्षा: GS-II: संघ और राज्यों के कार्य और जिम्मेदारियाँ, संघीय ढांचे से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर तक शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसमें चुनौतियाँ।      पृष्ठभूमि 1. अनुच्छेद 370 और राज्य का पुनर्गठन संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू–कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करता था।  इस प्रावधान के अंतर्गत राज्य की अपनी विधानसभा और संविधान था, जिसके आधार पर राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव किया जाता था। 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने इस विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया और जम्मू–कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू किया। इसके परिणामस्वरूप राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किया गया: जम्मू–कश्मीर (विधानसभा सहित) लद्दाख (बिना विधानसभा) इस पुनर्गठन के बाद जम्मू–कश्मीर को राज्यसभा में चार सीटों का प्रतिनिधित्व मिला, जबकि लद्दाख को कोई सीट आवंटित नहीं हुई।  2. राज्यसभा सीटों का संवैधानिक प्रावधान (अनुच्छेद 80) भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80 राज्यसभा की संरचना और सदस्यों की संख्या को परिभाषित करता है। राज्यसभा के सदस्य दो प्रकार से चुने जाते हैं: राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से निर्वाचित सदस्य – इनका चुनाव संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य करते हैं। राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य – कला, साहित्य, विज्ञान और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों से। संविधान के अनुसार प्रत्येक राज्य को जनसंख्या के आधार पर सीटें दी जाती हैं। पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के बाद जम्मू–कश्मीर को चार सीटें प्रदान की गईं। 3. जम्मू–कश्मीर के विशेष दर्जे के बाद सीटों की स्थिति अनुच्छेद 370 के हटने से पहले जम्मू–कश्मीर के राज्यसभा सांसद राज्य की विधान सभा द्वारा चुने जाते थे। 2019 में पुनर्गठन के बाद विधानसभा भंग कर दी गई और वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। इसी दौरान, 2021 में चारों राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया। चूँकि उस समय नई विधानसभा मौजूद नहीं थी, इसलिए नए सदस्यों का चुनाव संभव नहीं हुआ। यद्यपि सितंबर–अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं, फिर भी अब तक राज्यसभा चुनाव नहीं कराए गए हैं। इसके कारण जम्मू–कश्मीर पिछले चार वर्षों से राज्यसभा में पूरी तरह से प्रतिनिधित्व विहीन बना हुआ है।   जम्मू–कश्मीर की राज्यसभा सीटों पर हालिया विवाद और संवैधानिक पहलू हालिया विवाद (Recent Developments) 1. कानून मंत्रालय और चुनाव आयोग के बीच मतभेद चुनाव आयोग ने वर्ष 2025 में यह सुझाव दिया कि जम्मू–कश्मीर की चार राज्यसभा सीटों के कार्यकाल को क्रमबद्ध (staggered) करने के लिए राष्ट्रपति आदेश जारी किया जाए, ताकि सभी सीटें एक साथ रिक्त न हों।  लेकिन कानून और न्याय मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और कहा कि वर्तमान कानून, विशेषकर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of People Act, 1951) में इस प्रकार के आदेश का कोई प्रावधान मौजूद नहीं है।  मंत्रालय का यह भी कहना था कि यदि ऐसा करना है तो संसद को विधायी संशोधन करना होगा और यह प्रावधान केवल जम्मू–कश्मीर के लिए नहीं बल्कि उन सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए लागू होना चाहिए जिनकी राज्यसभा सीटों का कार्यकाल एक साथ समाप्त होता है।  2. राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया और जम्मू–कश्मीर की विशेष परिस्थिति राज्यसभा के चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation by means of Single Transferable Vote) के आधार पर होते हैं, जिसमें संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की विधान सभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।  जम्मू–कश्मीर में वर्ष 2019 में पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद विधानसभा भंग कर दी गई और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।  इस अवधि में वर्ष 2021 में चारों राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया और नई विधानसभा के अभाव में चुनाव नहीं हो सका।  सितंबर–अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव सम्पन्न हो चुके हैं, लेकिन अब तक राज्यसभा चुनाव नहीं कराए गए हैं।  इस कारण जम्मू–कश्मीर पिछले चार वर्षों से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व से वंचित है।  संवैधानिक और कानूनी पहलू   1. अनुच्छेद 324 – चुनाव आयोग की स्वतंत्रता भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से चुनाव कराने की शक्ति प्रदान करता है।  इस अनुच्छेद में स्पष्ट किया गया है कि चुनाव आयोग संसद और राज्य विधानसभाओं के चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण करेगा।  हालांकि, जब चुनावी प्रक्रिया किसी विशेष कानून, जैसे कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 द्वारा सीमित हो जाती है, तब चुनाव आयोग अपने अधिकार का उपयोग केवल उसी दायरे में कर सकता है। यही कारण है कि जम्मू–कश्मीर के मामले में चुनाव आयोग को राष्ट्रपति आदेश की आवश्यकता पड़ी, जिसे कानून मंत्रालय ने अस्वीकार कर दिया।  2. अनुच्छेद 80(4) और राज्यसभा चुनाव भारतीय संविधान का अनुच्छेद 80(4) यह प्रावधान करता है कि राज्यसभा के सदस्य राज्य की विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाएंगे।  इसका अर्थ यह है कि जब तक विधानसभा अस्तित्व में नहीं होगी, तब तक राज्यसभा चुनाव संभव नहीं हो सकते।  जम्मू–कश्मीर के मामले में यह स्थिति वर्ष 2019 से 2024 तक बनी रही, जिसके कारण राज्यसभा चुनाव टल गए और क्षेत्र राज्यसभा में प्रतिनिधित्व से वंचित हो गया।  3. सुप्रीम कोर्ट और संविधान पीठ के प्रासंगिक निर्णय केशवानंद भारती बनाम राज्य केरल (1973): इस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994): इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन केवल अस्थायी उपाय है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली शीघ्र की जानी चाहिए। जम्मू–कश्मीर पुनर्गठन से संबंधित याचिकाएँ (2020–2023): संविधान पीठ ने यह माना कि संसद के पास पुनर्गठन करने का अधिकार है, किंतु लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को लंबे समय तक बाधित करना संविधान की भावना के विपरीत है। जम्मू–कश्मीर की राज्यसभा सीटों पर विवाद के प्रमुख मुद्दे (Key Issues) 1. प्रतिनिधित्व का अभाव और लोकतांत्रिक घाटा जम्मू–कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें 2021 से रिक्त हैं, जिसके कारण इस केंद्रशासित

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2 September 2025 Current Affairs

  Topic : भारत का कैंसर मैप: एक विश्लेषण     चर्चा में क्यों :  विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, “वर्तमान में 30% से 50% कैंसर को जोखिम कारकों से बचाव और प्रभावी रोकथाम रणनीतियों के माध्यम से रोका जा सकता है।” भारत में कैंसर की व्यापकता पर आधारित एक हालिया रिपोर्ट से यह सामने आया है कि कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, जिसमें क्षेत्रीय असमानताएं और सामाजिक-आर्थिक कारण प्रमुख भूमिका निभाते हैं। UPSC पाठ्यक्रम: प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ। मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन II, III: स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे- विकास और उनके अनुप्रयोग पृष्ठभूमि भारत में कैंसर की निगरानी के लिए ICMR–नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ इन्फ़ॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR) द्वारा कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम संचालित किया जाता है।  इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1981 में की गई थी और इसका उद्देश्य कैंसर की घटनाओं, मृत्यु दर और उपचार की सफलता का आकलन करना है। संविधान के अनुसार जन स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है, किंतु अनुच्छेद 47 के अंतर्गत राज्य को पोषण और जनस्वास्थ्य सुधार की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।  अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार माना है।  इस प्रकार कैंसर नियंत्रण केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का विषय है। 1. भारत में कैंसर का मौजूदा परिदृश्य भारत में कैंसर के मामलों पर आधारित 43 कैंसर रजिस्ट्री के विश्लेषण से यह सामने आया है कि किसी व्यक्ति के जीवनकाल में कैंसर विकसित होने का जोखिम लगभग 11 प्रतिशत है।  वर्ष 2024 में अनुमानित 15.6 लाख नए कैंसर मामलों और लगभग 8.74 लाख मौतों की सूचना दर्ज की गई।  ये रजिस्ट्री देश की 10 से 18 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं और 23 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में संचालित होती हैं। 2. 2015–2019 का कैंसर डेटा और रुझान साल 2015 से 2019 के बीच एकत्र किए गए आंकड़ों में लगभग 7.08 लाख कैंसर मामलों और 2.06 लाख मौतों को दर्ज किया गया।  इस अध्ययन को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली, टाटा मेमोरियल और अड्यार कैंसर संस्थान जैसे प्रमुख शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने पूरा किया।  कोविड-19 महामारी के प्रभाव के कारण वर्ष 2020 के आंकड़े इसमें शामिल नहीं किए गए। 3. लिंग आधारित असमानताएँ भारत में महिलाओं में कैंसर के 51.1 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए, लेकिन मौतों का प्रतिशत केवल 45 रहा।  इसका कारण यह है कि महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर जैसे स्तन और गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर आसानी से पहचाने और इलाज किए जा सकते हैं।  इसके विपरीत पुरुषों में सामान्य कैंसर जैसे फेफड़े और पेट का कैंसर देर से पकड़ में आते हैं और इनका परिणाम अपेक्षाकृत अधिक घातक होता है। 4. पुरुषों में मुँह का कैंसर पुरुषों में अब मुँह का कैंसर सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है।  यह फेफड़ों के कैंसर से भी अधिक पाया जा रहा है। तम्बाकू सेवन में कमी (2009–10 में 34.6% से घटकर 2016–17 में 28.6% तक) आने के बावजूद मुँह के कैंसर में वृद्धि देखी जा रही है।  इसका कारण तम्बाकू के प्रभाव का लंबी अवधि में सामने आना और शराब जैसे अन्य जोखिम कारक हैं। 5. पूर्वोत्तर भारत : कैंसर का हॉटस्पॉट पूर्वोत्तर भारत, विशेषकर मिज़ोरम, देश का कैंसर हॉटस्पॉट है।  यहाँ पुरुषों में जीवनकाल का जोखिम 21.1 प्रतिशत और महिलाओं में 18.9 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।  इसके पीछे उच्च तम्बाकू सेवन, अस्वस्थ आहार (फर्मेंटेड मांस, धूम्रित भोजन, अत्यधिक मसाले और गर्म पेय) तथा मानव पैपिलोमा वायरस (HPV), Helicobacter pylori और हेपेटाइटिस जैसी संक्रामक बीमारियों की अधिकता जिम्मेदार है। 6. कैंसर का भौगोलिक वितरण कैंसर का वितरण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार से दिखाई देता है। हैदराबाद में स्तन कैंसर की दर सबसे अधिक 54 प्रति 1,00,000 है। ऐज़ॉल में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर 27.1 प्रति 1,00,000 पर सबसे अधिक है। श्रीनगर में पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर 39.5 प्रति 1,00,000 पाया गया जबकि महिलाओं में ऐज़ॉल में इसकी दर 33.7 है। अहमदाबाद में पुरुषों में मुँह का कैंसर सबसे अधिक 33.6 है, जबकि महिलाओं में ईस्ट खासी हिल्स में यह दर 13.6 पाई गई। श्रीनगर में प्रोस्टेट कैंसर की दर 12.7 प्रति 1,00,000 दर्ज की गई। कैंसर क्या है? कैंसर बीमारियों का एक व्यापक समूह है,जो शरीर में कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास और विभाजन के कारण होने वाली बीमारी है।  यह तब होता है जब सामान्य कोशिकाओं के DNA में उत्परिवर्तन होता है, जिससे अनियंत्रित कोशिका विभाजन होता है।   कैंसर के 100 से अधिक प्रकार हैं, और वे शरीर के लगभग किसी भी भाग में हो सकते हैं। ट्यूमर: कैंसर कोशिकाओं का एक समूह ट्यूमर बना सकता है, जो सौम्य (गैर-कैंसरयुक्त) या घातक (कैंसरयुक्त) हो सकता है। मेटास्टेसिस: घातक ट्यूमर मूल स्थान से शरीर के अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है। कैंसर के प्राथमिक कारण कैंसर के विकास में कई जोखिम कारक योगदान करते हैं, लेकिन सटीक कारण अक्सर अज्ञात रहता है। कुछ प्राथमिक कारणों में शामिल हैं: तम्बाकू का उपयोग: धूम्रपान सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, विशेष रूप से फेफड़े, मुँह, गले और एसोफैजियल कैंसर के लिए। रेडिएशन एक्सपोजर:  एक्स-रे, रेडॉन गैस और पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आना शामिल है, जो DNA  को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संक्रमण: मानव पेपिलोमावायरस (HPV) और हेपेटाइटिस B और C जैसे वायरस गर्भाशय ग्रीवा और यकृत कैंसर जैसे कैंसर का कारण बन सकते हैं। आनुवंशिकी: विरासत में मिली आनुवंशिक उत्परिवर्तन, जैसे कि BRCA1 और BRCA2 जीन, स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। पर्यावरणीय कारक: रसायनों (एस्बेस्टस, बेंजीन) और प्रदूषकों के संपर्क में आने से कैंसर हो सकता है। जीवनशैली कारक: खराब आहार, शारीरिक निष्क्रियता, शराब का सेवन और मोटापा कई प्रकार के कैंसर से जुड़े हैं। आयु: मस्तिष्क ट्यूमर वृद्ध वयस्कों में अधिक आम है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ प्रकार, जैसे मेडुलोब्लास्टोमा, बच्चों में अधिक आम हैं। ब्रेन कैंसर के बारे में         ब्रेन कैंसर का मतलब है मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि, जिससे ट्यूमर का निर्माण होता है।  ये ट्यूमर या तो प्राथमिक (मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले) या द्वितीयक (मेटास्टेटिक, शरीर के अन्य भागों से फैलने वाले) हो सकते हैं।  प्राथमिक ब्रेन कैंसर मस्तिष्क की

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मिनिकॉय द्वीप : 27 August Current Affairs

 मिनिकॉय द्वीप  चर्चा में क्यों 25–26 अगस्त 2025 को लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप पर खुले मैदान में जमा कचरे में आग लग गई।  मिनिकॉय द्वीप के बारे में मिनिकॉय, जिसे स्थानीय रूप से मालिकु (Maliku) कहा जाता है, लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे दक्षिणी द्वीप है।  इसका आकार अर्धचंद्राकार (crescent-shaped) माना जाता है, और यही विशिष्ट आकृति इसे द्वीपीय भू-आकृति के दृष्टि से अलग पहचान देती है।  द्वीप का कुल भू-क्षेत्रफल लगभग 4.80 वर्ग किलोमीटर दर्ज है। भौगोलिक स्थिति मिनिकॉय नौ-डिग्री चैनल (9° Channel) के पास स्थित है, जो विश्व के व्यस्ततम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।  यह द्वीप मालदीव के उत्तरीतम द्वीप से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर और कोच्चि से लगभग 398 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित है, जिसके कारण इसका सामरिक तथा समुद्री परिवहन महत्त्व और बढ़ जाता है।   लैगून व स्थलाकृति द्वीप के पश्चिमी भाग में विशाल लैगून स्थित है, जिसकी अधिकतम चौड़ाई लगभग 6 किलोमीटर तक बताई जाती है।  इस लैगून में दो प्रवेशद्वार एक पश्चिमी ओर और दूसरा उत्तरी छोर पर निर्धारित हैं, तथा लैगून का क्षेत्रफल लगभग 30.60 वर्ग किलोमीटर माना जाता है।  मिनिकॉय की लंबाई लगभग 11 किलोमीटर है, जबकि समुद्र-तल से ऊँचाई पश्चिम की ओर करीब 2 मीटर और पूर्वी हिस्से में लगभग 3–4 मीटर तक आँकी गई है। ऐतिहासिक धरोहर मिनिकॉय का ऐतिहासिक लाइटहाउस (प्रकाश-स्तंभ) भारत के प्राचीन प्रकाश-स्तंभों में गिना जाता है।  इसका औपचारिक उद्घाटन 2 फ़रवरी 1885 को ब्रिटिश शासनकाल में किया गया था।  यह प्रकाश-स्तंभ आज भी समुद्री नौवहन के लिए एक महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शक चिह्न के रूप में कार्य करता है। सामाजिक संरचना मिनिकॉय के सुव्यवस्थित गाँव पारम्परिक रूप से “अवाह (Avah)” कहलाते हैं ।  प्रत्येक अवाह का नेतृत्व मूपन/बोडुकाका (Moopan/Bodukaka) के हाथों में होता है, जो सामुदायिक जीवन और निर्णय-प्रक्रिया का केंद्र होता है, और हर गाँव का अपना गाँव-घर (Village House) निर्धारित रहता है।  द्वीप पर कुल 10 गाँव सूचीबद्ध हैं— बादा, आउमागु, बोडुआथिरी, रममेदु, सेदिवालु, अलूदी, फुंहिलोल, कुदेही, फ़ालेस्सेरी और केंडिपार्टी—जिनकी ग्राम्य संरचना और समुदाय-केंद्रित व्यवस्थाएँ मिनिकॉय की विशिष्ट सामाजिक पहचान को दर्शाती हैं। भाषा-परिदृश्य लक्षद्वीप के अधिकांश द्वीपों में जहाँ मलयालम प्रमुखतः बोली जाती है, वहीं मिनिकॉय में “महाल/धिवेही (Mahl/Dhivehi)” भाषा प्रचलित है।  धिवेही थाना (Thaana) लिपि में लिखी जाती है। मिनिकॉय भारत का एकमात्र ऐसा समुदाय माना जाता है जहाँ महल/धिवेही भाषा स्थानीय बोलचाल और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम है, जबकि हिंदी और अंग्रेज़ी का प्रयोग भी प्रशासनिक एवं शैक्षिक संदर्भों में देखा जाता है। लोक-संस्कृति मिनिकॉय की सांस्कृतिक पहचान उसके लोक-नृत्यों और समुद्री परम्पराओं से सजीव रूप में सामने आती है।  यहाँ के प्रमुख नृत्य लावा (Lava), थाारा/थारा (Thaara), डंडी (Dandi), फुली (Fuli) और बंडिया (Bandiya) माने जाते हैं।  द्वीप की पारम्परिक जाहधोनी (Jahadhoni) नावें—अतिथि-स्वागत, उत्सवों और द्वीपीय पिकनिक के अवसरों पर स्थानीय जीवन-पद्धति और समुद्री संस्कृति का सौंदर्यपूर्ण प्रतीक प्रस्तुत करती हैं। ===================================  प्रश्न :मिनिकॉय द्वीप के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : यह लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे दक्षिणी द्वीप है, जिसे स्थानीय रूप से “मालिकु” कहा जाता है। यहाँ पर प्रचलित स्थानीय भाषा मलयालम है, जबकि हिंदी और अंग्रेज़ी का प्रयोग नहीं किया जाता। इसका ऐतिहासिक लाइटहाउस, जो 1885 में ब्रिटिश शासनकाल में शुरू हुआ था, आज भी समुद्री नौवहन के लिए महत्त्वपूर्ण है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3 सभी उत्तर : C. केवल 1 और 3  व्याख्या: कथन 1 सही है → मिनिकॉय लक्षद्वीप का दूसरा सबसे बड़ा तथा सबसे दक्षिणी द्वीप है, जिसे “मालिकु” कहा जाता है। कथन 2 गलत है → यहाँ पर महाल/धिवेही भाषा बोली जाती है, न कि मलयालम। साथ ही प्रशासनिक व शैक्षिक संदर्भों में हिंदी और अंग्रेज़ी का भी प्रयोग होता है। कथन 3 सही है → मिनिकॉय का लाइटहाउस (1885) ब्रिटिश काल में बना था और आज भी समुद्री नौवहन हेतु मार्गदर्शक चिह्न है।              

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UPSC ESSAY PAPER MODEL ANSWER 2025

सत्य कोई रंग नहीं जानता है। Truth knows no color.   1893 में दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्ज़बर्ग में एक युवा मोहनदास गांधी को केवल उनकी त्वचा के रंग के कारण ट्रेन से उतार दिया गया था। उस एक घटना ने गांधी के जीवन की दिशा बदल दी और उन्हें मानव समता के सार्वभौमिक सत्य का बोध कराया। यह ऐतिहासिक प्रसंग दर्शाता है कि पूर्वाग्रह जहाँ विभाजन पैदा करते हैं, वहीं सत्य स्वयं किसी “रंग” – जाति, नस्ल या किसी भी भेद – को नहीं जानता। सरल शब्दों में “सत्य कोई रंग नहीं जानता है” का आशय है कि सत्य निष्पक्ष, सार्वभौमिक एवं सबके लिए समान होता है। सत्य की यह निष्पक्षता ही न्याय, समानता, नैतिकता जैसे अन्य मानवीय मूल्यों का आधार बनती है।  दार्शनिक दृष्टिकोण दार्शनिक रूप से सत्य की अवधारणा लगभग सभी सभ्यताओं में सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित रही है। प्राचीन भारतीय उपनिषदों में कहा गया है “सत्यमेव जयते” अर्थात सत्य की ही अंततः विजय होती है। सत्य को कालातीत और परम धर्म माना गया है। महात्मा गांधी ने सत्य को ईश्वर का रूप माना और अंततः निष्कर्ष दिया कि “सत्य ही ईश्वर है” – अर्थात सत्य से बढ़कर कोई आराध्य नहीं। इसी तरह पश्चिमी दर्शन में इमैनुएल कांट के नैतिक दर्शन (कर्तव्यवादी दर्शन) में कहा गया कि नैतिक नियम सार्वभौमिक होते हैं और इन पर किसी व्यक्ति-विशेष या परिस्थिति का रंग नहीं चढ़ना चाहिए। सत्य अपने आप में निरपेक्ष है, उसका कोई व्यक्तिगत या सामूहिक पक्षपातपूर्ण “वर्गीकरण” नहीं होता। लेकिन दार्शनिक चिंतन में यह भी प्रतिपादित किया गया है कि यद्यपि अंतिम सत्य निष्पक्ष हो सकता है, practically मनुष्यों की सत्य तक पहुँच भिन्न हो सकती है। माइकल फूको जैसे विचारकों ने तर्क दिया कि समाज में जो कुछ “सत्य” माना जाता है, वह अक्सर सत्ता संरचनाओं द्वारा निर्धारित होता है। इसी प्रकार जर्मन दर्शनशास्त्री फ्रेडरिक नीत्शे ने कहा था, “यहाँ कोई तथ्य नहीं, केवल व्याख्याएँ हैं” – अर्थात अनेक बार सत्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा-परखा जाता है। उदाहरणार्थ, औपनिवेशिक शासकों ने भारत के शोषण को अपना “सभ्यता मिशन” कहकर प्रस्तुत किया, जो उनकी विकृत व्याख्या थी। इन दृष्टांतों से स्पष्ट होता है कि मानव मन अपने पूर्वाग्रहों या हितों के कारण सत्य को “रंगीन चश्मे” से देख सकता है। फिर भी, दार्शनिक आदर्श के रूप में सत्य किसी रंग-भेद को नहीं मानता – अंतिम सत्य सार्वभौमिक और निष्पक्ष ही रहेगा, भले ही उसकी प्राप्ति का मार्ग जटिल हो। कानूनी एवं संवैधानिक परिप्रेक्ष्य   चित्र: न्याय की देवी (Lady Justice) की एक प्रतिमा, जिसमें आँखे ढकी (पट्टीबंध) हैं और हाथों में तराज़ू व तलवार धारण किए हुए हैं। यह दृष्टांत दर्शाता है कि न्याय अंधा (निष्पक्ष) होता है और सत्य व न्याय का तराज़ू सभी के लिए समान रूप से तुला रहना चाहिए। वास्तव में, कानून के शासन में सत्य का कोई रंग नहीं होना चाहिए – कानून सभी व्यक्तियों के साथ समान बर्ताव करे, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग, भाषा कुछ भी हो। इसी सिद्धांत को भारतीय संविधान में “न्याय और समता” के रूप में प्रतिपादित किया गया है। संविधान का अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को क़ानून के समक्ष समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है। समान रूप से, अनुच्छेद 15 राज्य द्वारा केवल धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव निषिद्ध करता है। ये संवैधानिक प्रावधान इसी बात पर ज़ोर देते हैं कि न्यायिक सत्य किसी पूर्वाग्रह या “रंग” से प्रभावित नहीं होना चाहिए। कानूनी प्रक्रिया में भी सत्य की निष्पक्षता को संरक्षित रखने के प्रतीक मिलते हैं। न्यायालयों में गवाही से पहले गीता या धर्मग्रंथ को हाथ में लेकर सत्य बोलने की शपथ दिलाई जाती है, ताकि सत्य ही सामने आए। यदि कोई जानबूझकर झूठी गवाही दे, तो उसे कानून की दृष्टि में अपराध (कसम तोड़ना/झूठी गवाही) माना जाता है – यह सिद्धांत भी सत्य की पवित्रता स्थापित करता है। न्याय की देवी की आँखों पर पट्टी इसी ओर संकेत करती है कि न्याय करते समय न्यायाधीश को यह नहीं देखना चाहिए कि आरोपी या पीड़ित किस धर्म-जाति के हैं; न्याय केवल तथ्यों और सत्य पर आधारित हो। उदाहरण के लिए, एक अमीर एवं प्रभावशाली व्यक्ति दोषी हो तो कानूनी सत्य को उसकी हैसियत का “रंग” नहीं ढकना चाहिए, उसे भी कानून से वही सज़ा मिले जो किसी सामान्य व्यक्ति को मिलती। यह कारण है कि न्यायपालिका में निष्पक्षता (Ipartiality) को सबसे बड़ा गुण माना गया है। वर्तमान समय में सरकार की पारदर्शिता (transparency) भी “सत्य के रंगहीन” रहने से जुड़ी है। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) इसी आदर्श पर बना कि जनता को सत्य जानने का अधिकार है, और सरकारी तंत्र को किसी भेदभाव या छिपाव के बिना जानकारी देनी चाहिए। कुल मिलाकर, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधि का राज तभी स्थापित रह सकता है जब सत्यनिष्ठा हो और कानून सबको बराबर समझे – अर्थात सत्य किसी का पक्ष लेकर रंग न बदले। ऐतिहासिक दृष्टांत इतिहास गवाह है कि समय-समय पर कुछ लोग या व्यवस्थाएं सत्य को अपने “रंग” में रंगने की चेष्टा करती रहीं, किन्तु अंततः निष्पक्ष सत्य की ही विजय होती आई है। अमेरिका में 19वीं शताब्दी के दौरान रंगभेद और दासप्रथा का जोर था, लेकिन सुधारक फ्रेडरिक डग्लस जैसे नेताओं ने उद्घोष किया – “सही (न्याय) का कोई लिंग नहीं और सत्य का कोई रंग नहीं है”, परमात्मा हम सबका पिता है और हम सब भाई-बंधु हैं। यह प्रसिद्ध कथन 1847 में दिए गए डग्लस के उसी उद्धरण से लिया गया है जो दर्शाता है कि समानता और मानव अधिकार जैसे सत्य शाश्वत हैं, उन्हें नस्ल या लिंग के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए अमेरिका में अब्राहम लिंकन ने 1863 में दासप्रथा उन्मूलन (मुक्ति उद्घोषणा) किया। लिंकन ने सिद्धांततः यह स्वीकार किया कि सभी मनुष्य बराबर हैं, और काले-गोरे का भेद असत्य एवं अन्याय है। यह सत्य कि “सभी जन समान हैं” किसी रंग-भेद को नहीं जानता था और इसी ने आगे चलकर अमेरिका में बराबरी के अधिकार दिलाने में नींव रखी। भारतीय संदर्भ में भी अनेक ऐतिहासिक घटनाएँ इस कथन को पुष्ट करती हैं। महात्मा गांधी के लिए “सत्याग्रह” केवल राजनीतिक उपाय नहीं बल्कि नैतिक सिद्धांत था – सत्याग्रह का अर्थ ही है “सत्य के प्रति आग्रह”। गांधीजी ने कहा था, “कोई

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NIRMAN IAS 25 August CA 2025 Hindi

Topic जन विश्वास 2.0 : विश्वास आधारित शासन की दिशा में कदम परिचय जन विश्वास (संशोधन विधेयक), 2025 जिसे जन विश्वास 2.0 भी कहा जाता है, हाल ही में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। यह विधेयक जन विश्वास अधिनियम, 2023 का विस्तार है।  वर्ष 2023 में पारित कानून के अंतर्गत 42 अधिनियमों की 183 धाराओं को अपराधमुक्त किया गया था। नए विधेयक का उद्देश्य 16 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन कर छोटे अपराधों और अनुपालनों को अपराधमुक्त बनाना तथा दंड प्रावधानों को अधिक युक्तिसंगत करना है।  इससे न केवल नागरिकों के जीवन में सरलता आएगी बल्कि व्यापार करना भी आसान होगा पृष्ठभूमि : जन विश्वास 2.0 की आवश्यकता 1. कानूनों में अत्यधिक अपराधीकरण विदि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की रिपोर्ट बताती है कि 882 केंद्रीय कानूनों में से 370 में 7,305 अपराध परिभाषित हैं। इनमें से 75% अपराध ऐसे क्षेत्रों से जुड़े हैं जो मूल आपराधिक न्याय प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं, जैसे– कराधान, नौवहन, वित्तीय संस्थान और नगरपालिका शासन। 2. असंगत दंड कई बार बहुत छोटे कार्यों पर भी गिरफ्तारी हो सकती है। उदाहरण: सड़क पर गाय का दूध निकालना या पालतू कुत्ते को घुमाने में लापरवाही। यह स्थिति अपराध और दंड के अनुपात (Proportionality) के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। 3. व्यापार में रुकावट ORF रिपोर्ट 2022 के अनुसार: 1,536 व्यापारिक कानूनों में से 50% से अधिक में जेल की सजा का प्रावधान है। 69,233 अनुपालनों में से 37.8% में कारावास शामिल है। इस प्रकार, उद्यमिता, रोजगार सृजन और GDP वृद्धि प्रभावित होती है। 4. न्यायपालिका पर दबाव राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के अनुसार जिला अदालतों में 3.6 करोड़ से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 2.3 करोड़ मामले एक वर्ष से अधिक पुराने हैं। छोटे-छोटे प्रक्रियात्मक मामलों के कारण गंभीर अपराधों पर न्याय में देरी होती है। जन विश्वास विधेयक 2025 के प्रमुख प्रावधान 1. संशोधन का दायरा कुल 355 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव। 288 प्रावधान अपराधमुक्त। 67 प्रावधान नागरिकों के जीवन को आसान बनाने हेतु बदले जाएंगे। 2. शामिल अधिनियम इन 16 केंद्रीय अधिनियमों में संशोधन होगा, जिनमें शामिल हैं:  मोटर वाहन अधिनियम, 1988 भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 केंद्रीय रेशम बोर्ड अधिनियम, 1948 सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 चाय अधिनियम, 1953 अपरेंटिस अधिनियम, 1961 दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम, 1994 विद्युत अधिनियम, 2003 वस्त्र समिति अधिनियम, 1963 कोयर, जूट और अन्य औद्योगिक अधिनियम जन विश्वास अधिनियम, 2023 (पूरक संशोधन सहित) आदि। 3. प्रथम अपराधी के लिए प्रावधान पहली बार अपराध करने वालों के लिए चेतावनी और सुधार नोटिस जारी किया जाएगा। उदाहरण: ग़ैर-मानक वज़न और माप रखने पर पहले ₹1 लाख का जुर्माना था, अब सुधार का अवसर दिया जाएगा। 4. कारावास धाराओं का हटना छोटे प्रक्रियात्मक या तकनीकी अपराधों पर अब जेल की सजा नहीं होगी। उदाहरण: विद्युत अधिनियम, 2023 में गैर-अनुपालन पर पहले 3 माह की सजा थी, अब इसे केवल जुर्माने में बदला गया है। 5. दंड का युक्तिकरण हर 3 वर्ष में स्वतः 10% दंड वृद्धि का प्रावधान। फोकस अब जेल की बजाय आर्थिक दंड पर रहेगा। सरकार का तर्क यह विधेयक “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा को मजबूत करता है। यह मेक इन इंडिया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और न्यायिक सुधारों को समर्थन देता है। यह कानून तुच्छ अपराधों को अपराध घोषित करने वाले अप्रासंगिक और पुराने प्रावधानों को हटाने का प्रयास है।  विधेयक का महत्व यह विधेयक व्यवसाय करने की सरलता और नागरिकों के दैनिक जीवन को सहज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छोटे-छोटे अनुपालन उल्लंघनों के लिए कठोर दंड समाप्त कर भरोसेमंद शासन का वातावरण बनाया गया है। नागरिकों और उद्यमियों के बीच छोटे अपराधों या तकनीकी त्रुटियों के लिए दंडात्मक भय समाप्त होगा। इससे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास-आधारित संबंध मजबूत होंगे। छोटे और प्रक्रियागत मामलों को अब प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ही सुलझाया जा सकेगा। इससे न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ घटेगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी। व्यवसाय करने वालों के लिए पूर्वानुमेय और भरोसेमंद माहौल तैयार होगा। इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, नई आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और सतत विकास को गति मिलेगी। निष्कर्ष जन विश्वास 2.0 वर्तमान में लोकसभा की सिलेक्ट कमेटी द्वारा समीक्षा में है और रिपोर्ट अगले सत्र में प्रस्तुत की जाएगी। यदि यह लागू होता है तो: अदालतों में लंबित मामलों का बोझ घटेगा। नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास बढ़ेगा। भारत की छवि एक व्यापार-अनुकूल और निवेश-अनुकूल देश के रूप में और सशक्त होगी। Q. जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : इस विधेयक के अंतर्गत कुल 355 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। विधेयक में 288 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया है। यह विधेयक केवल भारतीय दंड संहिता, 1860 से संबंधित प्रावधानों को ही संशोधित करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? A. केवल 1 और 2 B. केवल 2 और 3 C. केवल 1 और 3 D. 1, 2 और 3 उत्तर : A (केवल 1 और 2) व्याख्या कथन 1 सही है : जन विश्वास 2.0 के अंतर्गत कुल 355 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है। कथन 2 सही है : इनमें से 288 प्रावधान अपराधमुक्त किए जाएंगे। कथन 3 गलत है : यह विधेयक केवल भारतीय दंड संहिता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 16 केंद्रीय अधिनियम (जैसे – RBI अधिनियम 1934, औषधि अधिनियम 1940, मोटर वाहन अधिनियम 1988, विद्युत अधिनियम 2003, MSME अधिनियम 2006, लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम 2009 आदि) को शामिल किया गया है। ड्रेक पैसेज (Drake Passage) चर्चा में क्यों :  हाल ही में यह क्षेत्र 7.5 तीव्रता के भूकंप और सुनामी चेतावनी के कारण समाचारों में चर्चा का विषय बना, जिससे तटीय इलाकों में अलर्ट और जनजीवन प्रभावित हुआ। ड्रेक पैसेज (Drake Passage) के बारे में ड्रेक पैसेज दक्षिण अमेरिका के केप हॉर्न (Cape Horn) और अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड द्वीप समूह के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।  यह मार्ग न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और जलवायु संबंधी दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भौगोलिक स्थिति ड्रेक पैसेज दक्षिण अमेरिका के केप हॉर्न और अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड द्वीप समूह के बीच स्थित है। इसकी चौड़ाई लगभग 800 किलोमीटर है। यह दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) का सबसे संकरा भाग माना जाता है। यह मार्ग दक्षिण-पश्चिम अटलांटिक महासागर और दक्षिण-पूर्व प्रशांत महासागर को जोड़ता है। नामकरण और ऐतिहासिक महत्व इस जलमार्ग का नाम

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18 August 2025 Current Affair

पलामू टाइगर रिज़र्व चर्चा में क्यों? झारखंड के पालामू टाइगर रिज़र्व (PTR) में गौर (Bos gaurus) की आबादी में गंभीर गिरावट दर्ज की गई है। पलामू टाइगर रिज़र्व के बारे में पलामू टाइगर रिज़र्व झारखंड राज्य का एकमात्र बाघ संरक्षण क्षेत्र है।  इसे वर्ष 1974 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के प्रथम चरण में देश के शुरुआती 9 टाइगर रिज़र्व में शामिल किया गया।  यह बेतला राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा है और अपनी जैव विविधता एवं संरक्षण इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। भौगोलिक सीमा उत्तर में : गढ़वा ज़िला दक्षिण में : लातेहार और गुमला के वन क्षेत्र पूर्व में : लोहरदगा और रांची के पठारी भाग पश्चिम में : छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे वन क्षेत्र भूगर्भीय संरचना यहाँ की प्रमुख चट्टानों में ग्नाइस, ग्रेनाइट, चूना पत्थर, क्वार्टज़ाइट और ऐंफिबोलाइट सम्मिलित हैं। गोंडवाना शैल संरचना में बलुआ पत्थर, शेल और हेमाटाइट पाई जाती हैं। यह क्षेत्र बॉक्साइट और कोयला जैसे खनिजों से समृद्ध है। भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार यह छोटानागपुर पठार पर लातेहार एवं गढ़वा जिलों में स्थित है। कुल क्षेत्रफल 1,129.93 वर्ग किलोमीटर है। कोर क्षेत्र : 414.08 वर्ग किलोमीटर (महत्वपूर्ण बाघ आवास)। बफर क्षेत्र : 715.85 वर्ग किलोमीटर। इसकी स्थलाकृति घाटियों, पहाड़ियों और समतल मैदानों से मिलकर बनी है। नदियाँ एवं जल स्रोत इस क्षेत्र से तीन प्रमुख नदियाँ बहती हैं : उत्तर कोयल (North Koel) बुरहा (Burha) – यह एकमात्र नदी है जो पूरे वर्ष प्रवाहित रहती है। औरंगा (Auranga) यहाँ कई प्राकृतिक जलभृत (Aquifers) पाए जाते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में चुआन कहा जाता है। बरवाडीह के निकट तथा नामक सल्फर युक्त गर्म पानी का झरना भी मौजूद है। जलवायु एवं वर्षा यह क्षेत्र वृष्टि-छाया प्रभाव (Rain-shadow effect) के कारण सूखाग्रस्त माना जाता है। औसत वार्षिक वर्षा लगभग 1075 मिमी होती है। अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, तथा दक्षिणी भागों में वर्षा की मात्रा उत्तरी भागों से अधिक है। वनस्पति यहाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं। प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ : साल   बांस (Bamboo) इस क्षेत्र में 970 पौधों की प्रजातियाँ, 17 घास की प्रजातियाँ तथा 56 औषधीय पौधों की प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। जीव-जंतु पालामू टाइगर रिज़र्व में प्रमुख जीव प्रजातियों में बाघ, एशियाई हाथी, तेंदुआ, ग्रे वुल्फ, गौर (Bos gaurus), स्लॉथ भालू (Sloth Bear) और चार सींग वाला मृग (Four-horned Antelope)  पाए जाते हैं, जबकि अन्य प्रजातियों में भारतीय पैंगोलिन, ऊदबिलाव शामिल हैं। ऐतिहासिक महत्व 1932 में पलामू क्षेत्र में विश्व का पहला पगमार्क आधारित बाघ गणना सर्वेक्षण आयोजित किया गया था।  इस सर्वेक्षण का नेतृत्व ब्रिटिश वन अधिकारी जे. डब्ल्यू. निकोल्सन ने किया था।  यह घटना वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन की दृष्टि से एक ऐतिहासिक पड़ाव मानी जाती है। वर्ष 1974 में पलामू को भारत सरकार द्वारा ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत अधिसूचित किया गया और इसे देश के शुरुआती 9 टाइगर रिज़र्व में शामिल किया गया। इस प्रकार यह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में विशेष स्थान रखता है। गौर (Bos gaurus) : भारतीय बाइसन गौर, जिसे भारतीय बाइसन (Indian Bison) के नाम से भी जाना जाता है, जंगली मवेशियों की सबसे बड़ी प्रजाति है।  यह बोविडाए (Bovidae) परिवार का सदस्य है और अपनी विशालकाय काया, शक्तिशाली रूप तथा सामाजिक झुंड आधारित जीवन शैली के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। वितरण गौर का मूल निवास क्षेत्र दक्षिण एशिया और दक्षिण–पूर्व एशिया है। भारत में इनकी उपस्थिति मुख्यतः निम्न क्षेत्रों में पाई जाती है : मध्य भारत झारखंड पश्चिमी घाट (केरल और कर्नाटक सहित) पूर्वोत्तर भारत के घने वन क्षेत्र आवास गौर का प्राकृतिक निवास घने और नम वनों में होता है। ये सदैव हरे (Evergreen), अर्ध-सदैव हरे (Semi-evergreen) और आर्द्र पर्णपाती (Moist deciduous) वनों में निवास करते हैं। इन्हें घासभूमि और खुले क्षेत्र विशेष रूप से उपयुक्त लगते हैं। इनका प्रमुख निवास क्षेत्र प्रायः 1500–1800 मीटर से नीचे की ऊँचाई वाले पहाड़ी इलाके होते हैं। इन्हें निर्बाध वन क्षेत्र और पर्याप्त जलस्रोत आवश्यक रूप से चाहिए होते हैं। संरक्षण स्थिति IUCN रेड लिस्ट में गौर (Bos gaurus) को संकटग्रस्त (Vulnerable) श्रेणी में शामिल किया गया है। साइट्स (CITES) में गौर को परिशिष्ट–I (Appendix I) में सूचीबद्ध किया गया है, जिसके तहत इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कड़ा नियंत्रण लागू है। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत गौर को अनुसूची–I (Schedule I) में रखा गया है, जिसके अंतर्गत इसे सर्वोच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। पारिस्थितिक महत्त्व गौर वनों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। यह बाघ और तेंदुए जैसे शीर्ष शिकारी जीवों के लिए एक प्रमुख शिकार प्रजाति है। शाकाहारी होने के कारण ये वनस्पति संरचना का संतुलन बनाए रखने और बीज प्रसार (Seed dispersal) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके संरक्षण से संपूर्ण वन्यजीव तंत्र का स्वास्थ्य और जैव विविधता सुरक्षित रहती है। प्रमुख खतरे वनों की कटाई, खनन और कृषि विस्तार के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ता जा रहा है। अवैध शिकार और मानव अतिक्रमण से वन्यजीवों की संख्या में तेजी से गिरावट आ रही है। पालतू पशुओं से रोग संक्रमण, विशेषकर रिंडरपेस्ट और फुट एंड माउथ डिज़ीज़ (FMD), वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है। आवासीय विखंडन के कारण वन्यजीव छोटे और अलग-थलग समूहों में सीमित हो गए हैं, जिससे उनकी आनुवंशिक विविधता घट रही है और भविष्य में उनका अस्तित्व और अधिक संकटग्रस्त हो सकता है। प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : पलामू टाइगर रिज़र्व भारत के शुरुआती नौ टाइगर रिज़र्व में से एक है जिसे 1974 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत अधिसूचित किया गया था। गौर (Bos gaurus) को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Vulnerable), साइट्स (CITES) के परिशिष्ट–I तथा भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I में शामिल किया गया है। पलामू टाइगर रिज़र्व में बहने वाली तीन प्रमुख नदियों में से केवल बुरहा (Burha) नदी ही बारहमासी है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3 उत्तर: (d) 1, 2 और 3 व्याख्या: कथन 1 सही है – पलामू टाइगर रिज़र्व देश के पहले 9 टाइगर रिज़र्व में शामिल है। कथन 2 सही है – गौर को IUCN में Vulnerable, CITES Appendix I और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची–I में रखा गया है। कथन 3 सही है – पलामू टाइगर रिज़र्व में उत्तर कोयल, औरंगा

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