23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf
23 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस अंक में भारत की बहुआयामी उपलब्धियों का सार है। इसमें UNCTAD 2025 के अनुसार भारत का वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण (HKC) में शीर्ष स्थान, न्याय तक पहुँच के लिए ‘दिशा 2.0’ व अनुच्छेद 39A का विश्लेषण, राखीगढ़ी के मानव कंकालों पर AnSI का शोध और भारत के उभरते प्रौद्योगिकी (AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम) इकोसिस्टम के नवीनतम डेटा को शामिल किया गया है। भारत बना दुनिया का नंबर-1 शिप रीसाइक्लिंग देश: UNCTAD रिपोर्ट चर्चा में क्यों है? संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2025 में दुनिया का शीर्ष जहाज पुनर्चक्रण (Ship Recycling) देश बन गया है। भारत ने अपने ‘मैरिटाइम इंडिया विज़न (MIV) 2030’ के लक्ष्य को तय समय से 5 साल पहले ही हासिल कर लिया है। मुख्य आंकड़े पैरामीटर वर्ष 2024 वर्ष 2025 विकास / प्रभाव वैश्विक हिस्सेदारी 30.1% 35.4% दुनिया में सबसे ज्यादा रीसाइक्लिंग वॉल्यूम 1.86 मिलियन GT 2.99 मिलियन GT लगभग 60% की भारी वृद्धि भविष्य की संभावना (BIMCO) – – अगले दशक में भारत हर साल 500-600 जहाजों को रीसायकल करेगा। सरकार की 5 प्रमुख पहलें भारत को इस मुकाम तक पहुँचाने में सरकार की इन रणनीतिक पहलों का सबसे बड़ा हाथ रहा है: हांगकांग कन्वेंशन (HKC) हांगकांग कन्वेंशन (Hong Kong Convention – HKC) जहाजों को रीसायकल (यानी पुराने जहाजों को तोड़ने और उनके पार्ट्स का दोबारा इस्तेमाल करने) से जुड़ा एक अंतरराष्ट्रीय समझौता (Global Treaty) है। इसे 2009 में इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) द्वारा अपनाया गया था, और यह 26 जून 2025 से पूरी दुनिया में कानूनी रूप से लागू हो चुका है। मुख्य उद्देश्य जहाजों को तोड़ना दुनिया के सबसे खतरनाक कामों में से एक है। पुराने जहाजों में एस्बेस्टस, भारी धातुएं (Heavy Metals) और कई तरह के जहरीले रसायन होते हैं। इसका उद्देश्य दो चीजों को सुरक्षित करना है: भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग हब है (गुजरात का अलंग-सोसैया यार्ड दुनिया का सबसे बड़ा जहाज तोड़ने वाला यार्ड है)। भारत ने 2019 में इस कन्वेंशन की पुष्टि (Ratify) की थी। सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) और ब्लू इकोनॉमी: जहाजों को तोड़कर जो स्टील और अन्य कीमती धातुएं निकलती हैं, उन्हें रीसायकल करके दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इससे नए खनन (Mining) की जरूरत कम होती है, पर्यावरण बचता है, और तटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होता है। आगे की राह (Way Forward) नंबर-1 बनने के बाद अब भारत के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं जिन पर काम करना होगा: दिशा 2.0 (DISHA 2.0): न्याय तक समग्र पहुँच के लिए केंद्रीय योजना को मंजूरी चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (DISHA)’ के पुनर्गठित और अपग्रेड संस्करण ‘DISHA 2.0’ को अगले 5 वर्षों के लिए मंजूरी दे दी है। योजना के मुख्य तथ्य 23 June 2026 PIB Summary for UPSC DISHA 2.0 के 4 प्रमुख घटक (Four Core Components) पहले इस योजना में 3 घटक थे, लेकिन DISHA 2.0 में एक नया तकनीकी घटक जोड़ा गया है। घटक (Component) मुख्य कार्य और लक्ष्य तकनीक/पहुँच 1. टेली-लॉ (Tele-Law) मुकदमों से पहले मुफ्त कानूनी सलाह देना। देश के 36 राज्यों/UTs के 784 जिलों में 2,50,000 कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) का नेटवर्क। आकांक्षी ब्लॉकों में ‘न्याय सहायक’ घर-घर जाकर मदद करेंगे। 2. न्याय बंधु (Nyaya Bandhu) वकीलों और लॉ स्टूडेंट्स में मुफ्त कानूनी सहायता (Pro-Bono) की संस्कृति को बढ़ावा देना। कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र लोगों को मुफ्त अदालती प्रतिनिधित्व देना और लॉ कॉलेजों में ‘प्रो-बोनो क्लब’ बनाना। 3. कानूनी साक्षरता और जागरूकता (LLLAP) मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों (CSOs) और लॉ यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाना। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से देशव्यापी अभियान चलाना। 4. विधि-संजीवनी (VIDHI-Sanjeevani)(नया घटक) पूरे कार्यक्रम की निगरानी और डेटा-संचालित निर्णय लेने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म। ‘भाषिणी’ (BHASHINI) के सहयोग से विकसित एआई-संचालित बहुभाषी ‘न्याय सेतु’ (Nyaya Setu) चैटबॉट को शामिल किया गया है, जो कानूनी सवालों के तुरंत जवाब देगा। संवैधानिक और वैश्विक जुड़ाव यह योजना केवल एक डिजिटल पोर्टल नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के बड़े विज़न्स को पूरा करती है: 1. संवैधानिक जनादेश (Constitutional Mandate): यह भारतीय संविधान की प्रस्तावना (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय), अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और विशेष रूप से अनुच्छेद 39A (सभी के लिए समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता) को जमीन पर उतारती है। 2. ईज ऑफ जस्टिस (Ease of Justice): प्रधानमंत्री के विज़न के अनुसार, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ तब तक अधूरे हैं जब तक देश के गरीब से गरीब नागरिक को ‘ईज ऑफ जस्टिस’ (आसानी से न्याय) न मिले। 3. वैश्विक लक्ष्य (SDG-16): यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-16 (SDG-16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) और भारत के ‘विकसित भारत @ 2047’ के संकल्प को सीधा समर्थन देती है। पुराना ट्रैक रिकॉर्ड (DISHA 1.0: 2021-26) अनुच्छेद 39A (Article 39A): समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता यह अनुच्छेद राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का हिस्सा है। इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। नालसा (NALSA) की संगठनात्मक संरचना अनुच्छेद 39A के उद्देश्यों को कानूनी रूप देने के लिए संसद ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) पास किया। इसी एक्ट के तहत 1995 में NALSA (National Legal Services Authority – राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) का गठन हुआ। इसकी संगठनात्मक संरचना शीर्ष से लेकर जमीनी स्तर तक एक पिरामिड की तरह काम करती है: प्रमुख पद (Composition): NALSA के मुख्य कार्य (Core Functions) 23 June 2026 PIB Summary for UPSC मुफ्त कानूनी सहायता के लिए कौन पात्र है? (Section 12 of the Act) हर कोई NALSA के तहत मुफ्त वकील का दावा नहीं कर सकता। अधिनियम की धारा 12 के तहत निम्नलिखित लोग इसके पात्र हैं: राखीगढ़ी से मिले मानव कंकाल: वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए AnSI को सौंपे गए चर्चा में क्यों? (Why in News?) हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हरियाणा के राखीगढ़ी पुरास्थलीय उत्खनन (2025-26 सीजन) से मिले मानव कंकालों को विस्तृत वैज्ञानिक