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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 13: The Value of Work

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 13: The Value of Work के अंतर्गत आर्थिक गतिविधियों के सामाजिक और नैतिक आयामों को समझने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वैचारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह बहुत ही संवेदनशील और प्रशासनिक रूप से प्रासंगिक विषय—‘अदृश्य श्रम’ (Invisible Work) पर प्रकाश डालता है, जिसमें घरेलू काम, देखभाल की अर्थव्यवस्था (Care Economy) और महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अवैतनिक कार्यों का विश्लेषण शामिल है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि जीडीपी (GDP) के आंकड़ों से अलग, सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने में अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) और घरेलू श्रम का क्या आर्थिक मूल्य है। आर्थिक गतिविधियाँ (Economic activities) गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (Non-economic activities) आर्थिक बनाम गैर-आर्थिक गतिविधियाँ मापदंड / कारक आर्थिक गतिविधियाँ (Economic Activities) गैर-आर्थिक गतिविधियाँ (Non-Economic Activities) मुख्य उद्देश्य धन, आय या संपत्ति का सृजन करना। भावनात्मक संतुष्टि, प्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व। प्रतिफल (Consideration) फीस, वेतन, लाभ या मौद्रिक मूल्य। कोई मौद्रिक प्रतिफल नहीं (निःशुल्क/स्वैच्छिक)। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) यह देश की आर्थिक गणना और राष्ट्रीय आय में सीधे जुड़ती हैं। इन्हें पारंपरिक राष्ट्रीय आय गणना में शामिल नहीं किया जाता। उदाहरण व्यावसायिक कृषि, नौकरी, वकालत, विनिर्माण क्षेत्र में श्रम। घरेलू कार्य, बच्चों को पढ़ाना, बुजुर्गों की सेवा, सामाजिक स्वयंसेवा। आर्थिक गतिविधियों के प्रकार (Types of Economic Activities) मूल्य संवर्धन (Value Addition) गैर-आर्थिक गतिविधियों का महत्व (The Importance of Non-Economic Activities) 1. सेवा: निःस्वार्थ सेवा सामुदायिक भागीदारी का महत्व जब व्यक्तिगत स्तर की गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सामूहिक रूप लेती हैं, तो वे बड़े राष्ट्रीय बदलावों का आधार बनती हैं: त्वरित प्रीलिम्स रिवीजन गैर-आर्थिक गतिविधि / अवधारणा व्यावहारिक उदाहरण मुख्य परीक्षा मूल्य निःस्वार्थ सेवा गुरुद्वारों में लंगर, मंदिरों में प्रसाद वितरण। सामाजिक पूंजी और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देना। सामूहिक स्वच्छता प्रयास स्वच्छ भारत अभियान के तहत सार्वजनिक स्थानों की सफाई। नागरिक कर्तव्यों (Fundamental Duties) का निर्वहन और विकेंद्रीकृत नागरिक भागीदारी। पर्यावरणीय जन-भागीदारी वन महोत्सव (वृक्षारोपण अभियान)। सतत विकास (Sustainable Development) और पर्यावरण संरक्षण में सामुदायि Chapter 7 यहाँ पढ़ें:-

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7 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

7 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत ग्रामीण और स्वदेशी शिल्पकारों को वैश्विक मंच प्रदान करने वाला वस्त्र मंत्रालय का ‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित वैधानिक निकाय CAQM की हालिया दंडात्मक एवं नियामक कार्रवाइयाँ, देश के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूती देने वाली NHLML की मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, भारत-EFTA व्यापार समझौते (TEPA) के तहत भारतीय समुद्री खाद्य (Seafood) क्षेत्र के लिए खुले नए वैश्विक द्वार, सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे होने पर लॉन्च की गई e-PACS, सहकार सहयोगी AI प्लेटफॉर्म व ‘भारत टैक्सी’ जैसी डिजिटल क्रांतियां, तथा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु अपनाई जाने वाली ‘भुवनेश्वर घोषणा’ और ‘TribeX’ प्लेटफॉर्म जैसे अति-महत्वपूर्ण अध्यायों को समाहित किया गया है। इंडियाहैंडमेड पोर्टल — हस्तशिल्प विरासत का डिजिटल सेतु Why in News? (चर्चा में क्यों?) हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र को सीधे डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित ‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल ग्रामीण कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है. वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया यह समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिचौलियों को समाप्त कर बुनकरों और शिल्पकारों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ रहा है। हस्तशिल्प क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और महिला भागीदारी भारत का हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा आधार है: ‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल की अनूठी विशेषताएं और कार्यप्रणाली प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / टर्म महत्वपूर्ण तथ्य इंडियाहैंडमेड पोर्टल वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया एक नो-कमीशन डिजिटल मार्केटप्लेस। नोडल मंत्रालय वस्त्र मंत्रालय (तकनीकी विकास: डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन)। वर्कफोर्स डेटा देश के कुल हथकरघा बुनकरों में 71% महिला कार्यबल शामिल है। GST छूट विकल्प बिना जीएसटी वाले छोटे शिल्पी Enrolment ID से सिर्फ अपने राज्य में व्यापार कर सकते हैं। CAQM द्वारा एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों की समीक्षा Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 6 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की प्रवर्तन कार्यबल (Enforcement Task Force – ETF) की 134वीं बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में दिल्ली-एनसीआर (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में की गई कानूनी कार्रवाइयों, औचक निरीक्षणों और नियमों के अनुपालन की स्थिति की गहन समीक्षा की गई। कार्रवाई और निरीक्षण रिपोर्ट: मुख्य आंकड़े संचयी (cumulative) प्रवर्तन स्थिति 6 जुलाई 2026 तक के संचयी आंकड़ों के अनुसार, CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड ने अब तक कुल 27,750 इकाइयों/परियोजनाओं का निरीक्षण किया है. इन निरीक्षणों के आधार पर: प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य निकाय / घटक महत्वपूर्ण तथ्य CAQM यह एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसे संसद के अधिनियम द्वारा दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की निगरानी और सुधार के लिए गठित किया गया है। ETF और फ्लाइंग स्क्वॉड यह CAQM के तहत प्रवर्तन विंग है, जिसके पास प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने, सील करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है। प्रदूषण के तीन प्राथमिक स्रोत औद्योगिक उत्सर्जन (Industrial Emissions), निर्माण गतिविधियां (C&D) और अवैध डीजल जनरेटर (DG Sets)। भारत में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 6 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (NHLML) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में देश भर में विकसित किए जा रहे मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों (MMLPs), रोपवे (Ropeways), इंटरमॉडल स्टेशनों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वे-साइड एमेनिटीज की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया। परियोजनाओं की रणनीतिक प्रासंगिकता और मुख्य उद्देश्य NHLML के तहत विकसित हो रहे प्रमुख घटक प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य संगठन / परियोजना महत्वपूर्ण तथ्य NHLML National Highways Logistics Management Limited — यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पूर्ण स्वामित्व वाली विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) कंपनी है। नोडल मंत्रालय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार। MMLP का उद्देश्य माल ढुलाई की लागत को कम करना, जो वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में वैश्विक मानकों से अधिक है। मुख्य फोकस क्षेत्र MMLPs, रोपवे, इंटरमॉडल स्टेशन और वे-साइड एमेनिटीज। भारत-EFTA TEPA के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसर Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में वाणिज्य विभाग (Department of Commerce), भारत सरकार द्वारा 3 जुलाई 2026 को चेन्नई ट्रेड सेंटर में “भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसर” विषय पर एक ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श सत्र का आयोजन ‘सीफूड एक्सपो भारत 2026’ के इतर किया गया था। भारत-ईएफटीए टेपा: प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक बिंदु समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए विशिष्ट टैरिफ रियायतें TEPA के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सीमा शुल्क लाभ दिए गए हैं: चिंतन शिविर के मुख्य एजेंडे प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / संगठन महत्वपूर्ण तथ्य EFTA देश आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड। TEPA समझौता लक्ष्य $100 बिलियन का निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन। शून्य आयात शुल्क लाभ आइसलैंड और नॉर्वे द्वारा फिश/श्रिंप फीड पर तथा स्विट्जरलैंड द्वारा फिश ऑयल पर सीमा शुल्क शून्य। नोडल हितधारक वाणिज्य विभाग, इन्वेस्ट इंडिया, DGFT, EIC, और FIEO। सहकार से समृद्धि — भारत के सहकारी आंदोलन के सुदृढ़ीकरण के 5 वर्ष Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का पांचवां स्थापना दिवस मनाया गया. 6 जुलाई 2021 को स्थापित इस मंत्रालय ने ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ पिछले 5 वर्षों में 152 से अधिक ऐतिहासिक और नीतिगत सुधारों को लागू कर भारतीय सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया है। स्थापना दिवस की मुख्य डिजिटल और अवसंरचनात्मक पहलें मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण और बैंकिंग सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए: ढांचागत सुधार और प्रगति (Scale & Structural Reforms) 1. PACS का बहु-सेवा केंद्रों (Multi-Service Centres)

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6 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

6 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार विजेता ICMR-MINDS प्लेटफॉर्म, ग्रामीण भारत के डिजिटल सुशासन का आधार स्तंभ लोकोसऔर SHE-LEAPS ऐप, भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में साणंद में स्थापित CG Semi OSAT सुविधा, ₹29,000 करोड़ की लागत वाली संशोधित उड़ान योजना, ईंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रमाण E20 इथेनॉल कार्यक्रम, तथा भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) जैसे अति-महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। ICMR-MINDS को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2026 Why in News? (चर्चा में क्यों?) 1-2 जुलाई 2026 को जयपुर (राजस्थान) में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की प्रमुख पहल ICMR-MINDS को प्रतिष्ठित स्वर्ण पुरस्कार (Gold Award) से सम्मानित किया गया है। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा यह पुरस्कार “नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के लिए एआई (AI) और अन्य नई तकनीकों के उपयोग में नवाचार” श्रेणी के तहत केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया। ICMR-MINDS क्या है और यह कैसे काम करता है? यह मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के माध्यम से जमीनी स्तर पर बड़े सुधार लाने वाली एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान प्राथमिकता परियोजना है। परियोजना का भौगोलिक विस्तार और कार्यान्वयन यह महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल वर्तमान में देश के 7 राज्यों में संबंधित राज्य स्वास्थ्य विभागों और 7 प्रमुख भागीदार संस्थानों के सहयोग से चलाई जा रही है: राज्य सहयोगी संस्थान (Collaborating Institutions) असम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), गुवाहाटी गुजरात गुजरात मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (GIMH), अहमदाबाद हरियाणा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली कर्नाटक सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु मध्य प्रदेश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भोपाल ओडिशा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भुवनेश्वर पंजाब पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य लोकोस प्लेटफॉर्म — ग्रामीण आजीविका का डिजिटल आधार स्तंभ Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत लोकोस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के नेटवर्क के भीतर सालाना ₹2 लाख करोड़ के वित्तीय लेनदेन को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है। LokOS प्लेटफॉर्म क्या है और इसके मुख्य कार्य? लोकोस (Lok = लोग, OS = ऑपरेटिंग सिस्टम) एक व्यापक वेब और मोबाइल एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और उनके संघों (Federations) के व्यापक एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण के लिए काम करता है। शी-लीप्स: ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा हाल ही में 29 जून 2026 को लोकोस प्लेटफॉर्म के ही एक हिस्से के रूप में SHE-LEAPS (Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) को लॉन्च किया गया है। लोकोस प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच यह प्लेटफॉर्म भारत के 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 762 जिलों, 7,241 ब्लॉकों और लगभग 5.92 लाख गांवों तक फैल चुका है: 1. शामिल संस्थागत ढांचा 2. गतिमान की गई वित्तीय सहायता यह प्लेटफॉर्म विभिन्न फंडों के कुशल प्रबंधन और ट्रैकिंग को सुनिश्चित करता है: 3. ‘लखपति दीदी’ पहल को सशक्त बनाना लोकोस प्लेटफॉर्म सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ योजना के क्रियान्वयन की डिजिटल रीढ़ है: प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / टर्म तथ्य LokOS प्लेटफॉर्म DAY-NRLM के तहत ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के डिजिटलीकरण का राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म। SHE-LEAPS 29 जून 2026 को लॉन्च, ग्रामीण महिला उद्यमियों के व्यावसायिक प्रबंधन के लिए समर्पित डिजिटल ऐप। डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) ग्रामीण परिवारों की आजीविका गतिविधियों और योजना की निगरानी के लिए लोकोस पर बना डिजिटल डेटाबेस। DAY-NRLM ग्रामीण विकास मंत्रालय का गरीबी उन्मूलन और स्वरोजगार संवर्धन का प्रमुख मिशन। साणंद में CG Semi OSAT सुविधा का उद्घाटन Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में CG Semi OSAT (आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) सुविधा का उद्घाटन किया। भारत को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने के विजन के साथ, यह देश का तीसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र है जहां चिप पैकेजिंग और वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) की शुरुआत हो चुकी है। CG Semi OSAT सुविधा के मुख्य बिंदु भारत में सेमीकंडक्टर क्लस्टर का उदय दुनिया के बड़े औद्योगिक केंद्र हमेशा एकल फैक्ट्रियों के बजाय ‘क्लस्टर्स’ के रूप में विकसित हुए हैं (जैसे अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ताइवान का सिंचू साइंस पार्क)। भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / शब्द महत्वपूर्ण तथ्य संयंत्र का स्थान साणंद, गुजरात। OSAT का अर्थ Outsourced Semiconductor Assembly and Test (चिप निर्माण के बाद उसकी पैकेजिंग और टेस्टिंग करने वाली इकाई)। सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए शुरू किया गया राष्ट्रीय कार्यक्रम। साझेदार देश भारत, जापान और थाईलैंड। लक्षित उत्पादन भविष्य में सालाना 5 अरब चिप्स का उत्पादन करना। E20 ईंधन कार्यक्रम — भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र का ‘विश्वास वक्तव्य’ Why in News? (चर्चा में क्यों?) 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें देश के शीर्ष ऊर्जा और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) कार्यक्रम की सफलता और सुरक्षा पर एक ‘विश्वास वक्तव्य’ जारी किया। विशेषज्ञों ने आश्वस्त किया कि वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद यह साबित हो चुका है कि E20 ईंधन से पुराने वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। E20 ईंधन और वाहन क्षमता: मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष इथेनॉल सम्मिश्रण की भावी दिशा और बुनियादी ढांचा भारत का इथेनॉल कार्यक्रम केवल E20 तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के स्वच्छ ईंधन ईकोसिस्टम की नींव रख रहा है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य बिंदु / घटक महत्वपूर्ण तथ्य E20 ईंधन 80% गैसोलीन (पेट्रोल) और 20% इथेनॉल का मिश्रण। नियामक मानक यह ईंधन BIS (Bureau of Indian Standards) और BS-VI मानदंडों के अनुरूप है। UNECE जुड़ाव भारत United Nations Economic Commission for Europe के वाहन नियमों का पालन करता है, जिससे इसके परीक्षण मानक वैश्विक स्तर के हैं। E85 ईंधन उच्च इथेनॉल

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Drainage System of India Notes in Hindi Pdf

भारत का अपवाह तंत्र (Drainage System of India) देश की भौगोलिक संरचना, कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। भारतीय नदी प्रणाली को मुख्य रूप से दो भागों में वर्गीकृत किया गया है—पहला, हिमालयी अपवाह तंत्र, जिसमें वर्षभर बहने वाली गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदियाँ शामिल हैं; और दूसरा, प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र, जिसमें गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और तापी जैसी मौसमी नदियाँ आती हैं। यह समृद्ध जल तंत्र न केवल सिंचाई और जल-विद्युत का मुख्य स्रोत है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी आधार है। भारत का अपवाह तंत्र (Drainage System) मुख्य अवधारणाएँ एवं परिभाषाएँ नदियों का महत्त्व भारत जैसे उष्ण और मौसमी वर्षा वाले देश के लिए इन नदियों का विशेष महत्त्व है: अपवाह तंत्र को प्रभावित करने वाले कारक किसी भी क्षेत्र का अपवाह तंत्र व प्रतिरूप (Pattern) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है: नदी द्रोणियों का वर्गीकरण भारत में 4000 से अधिक छोटी एवं बड़ी नदियाँ मिलती हैं। इनके क्षेत्र के आधार पर अंतर निम्न प्रकार है: आकार की दृष्टि से भारतीय नदियों की श्रेणियाँ श्रेणी अपवाह क्षेत्र (प्रति नदी बेसिन) नदी बेसिनों की संख्या देश के कुल जल में हिस्सेदारी बड़ी नदियाँ 20,000 वर्ग कि.मी. से अधिक 14 संयुक्त रूप से बड़ी और मध्यम नदियाँ मिलकर कुल जल मात्रा का 90% भाग संजोए रखती हैं। मध्यम नदियाँ 2,000 से 20,000 वर्ग कि.मी. 44 छोटी नदियाँ 2,000 वर्ग कि.मी. से कम अत्यधिक शेष हिस्सा उत्पत्ति के आधार पर भारतीय अपवाह तंत्र उत्पत्ति के आधार पर भारत के अपवाह तंत्र को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है: क. हिमालयी अपवाह तंत्र हिमालय क्षेत्र की नदियाँ बारहमासी होती हैं और इनका मुख्य स्रोत ग्लेशियर और मानसून दोनों हैं। मुख्य अपवाह प्रतिरूप (Patterns): हिमालयी नदियों की मुख्य विशेषताएँ: ख. प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती हैं और तुलनात्मक रूप से अधिक पुरानी हैं। मुख्य अपवाह प्रतिरूप (Patterns): प्रायद्वीपीय नदियों की मुख्य विशेषताएँ: भारत की विस्तृत जल-विभाजक प्रणाली संपूर्ण भारत की अपवाह प्रणाली को मुख्य रूप से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और आंतरिक अपवाह क्षेत्रों में बाँटा गया है। आंतरिक अपवाह क्षेत्र: जब नदियाँ किसी सागर में न मिलकर आंतरिक भागों (मरूस्थल या झील) में ही विलुप्त हो जाती हैं। यह क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तरी कश्मीर, दक्षिणी-पूर्वी असम और पश्चिमी राजस्थान तक सीमित है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1.6 लाख वर्ग कि.मी. है। उदाहरण: लूनी, घग्गर, रूपनगढ़, मेढ़ा आदि। मुख्य जल-विभाजक रेखा (The Great Indian Watershed) भारत के कुल अपवाह का लगभग 3/4 भाग (75%) बंगाल की खाड़ी में गिरता है और शेष अरब सागर तथा आंतरिक तंत्र का हिस्सा है। इन दोनों बड़े अपवाह तंत्रों के बीच की विभाजक रेखा निम्नलिखित मार्ग का अनुसरण करती है: हिमालयी अपवाह तंत्र हिमालयी अपवाह तंत्र का अध्ययन, सुविधा की दृष्टि से तीन मुख्य नदी तंत्रों के माध्यम से किया जा सकता है। 1. सिन्धु नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें 11. गंगा नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें III. ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र – इसे विस्तार से पढने के लिए यहाँ Click करें प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) मुख्य विशेषताएँ एवं सामान्य परिचय प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र: विस्तार से पढने के लिए यहाँ click करें महत्वपूर्ण भौगोलिक परिभाषाएँ डेल्टा (Delta): नदी जब सागर या झील में गिरती है तो वेग में अत्यधिक कमी के कारण उसके मुहाने पर मलबा का निक्षेप होने लगता है, जिससे वहाँ विशेष प्रकार के स्थलरूप का निर्माण होता है, जिसे ‘डेल्टा’ कहते हैं। ज्यादातर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ ‘डेल्टा’ का निर्माण करती हैं। एश्चुअरी / ज्वार नदमुख (Estuary): नदी के जल में तीव्र प्रवाह के कारण जब उसके मुहाने पर साथ लाये गए मलबे का निक्षेप नहीं होता है, तथा नदी जल के साथ मलबा भी समुद्र में गिर जाता है, तो नदी का मुहाना उथला होने के बजाय गहरा हो जाता है। ऐसे गहरे मुहाने को ही ज्वारनदमुख कहा जाता है। ज्यादातर अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ एश्चुअरी का निर्माण करती हैं।

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Peninsular Drainage System Notes in Hindi Pdf

प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे प्राचीन और सुव्यवस्थित नदी तंत्र है, जो हिमालयी नदी प्रणाली से भी पुराना माना जाता है। इस तंत्र में मुख्य जल-विभाजक की भूमिका ‘पश्चिमी घाट’ निभाता है। यहाँ की नदियाँ मुख्य रूप से दो दिशाओं में बहती हैं—महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी बड़ी नदियाँ पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में डेल्टा बनाती हैं, जबकि नर्मदा और तापी जैसी नदियाँ अपवादस्वरूप पश्चिम की ओर भ्रंश घाटी में बहती हुई अरब सागर में एश्चुअरी (ज्वारनदमुख) का निर्माण करती हैं। प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र (Peninsular Drainage System) मुख्य विशेषताएँ एवं सामान्य परिचय निकासी के आधार पर नदियों का वर्गीकरण प्रायद्वीपीय नदियों को हम सुविधा के लिए इनकी निकासी के आधार पर निम्नलिखित भागों में बाँटकर अध्ययन कर सकते हैं: बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली प्रमुख नदियाँ क. गोदावरी (दक्षिण की गंगा / वृद्ध गंगा) ख. महानदी ग. कृष्णा घ. पेन्नार ङ. कावेरी (दक्षिणी गंगा) अरब सागर, खम्भात की खाड़ी व कच्छ के रण में गिरने वाली नदियाँ क. नर्मदा ख. तापी (ताप्ती) ग. माही घ. साबरमती ङ. लूनी प्रायद्वीपीय भारत की अन्य छोटी नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत में कई अन्य छोटी नदियाँ हैं। इनमें से कई नदियाँ तीव्र ढाल एवं जलप्रपात के कारण जल-विद्युत उत्पादन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं (खासकर पश्चिमी तट पर बहने वाली नदियाँ)। पूर्वी तट की छोटी नदियाँ सिंचाई व नौवहन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। अरब सागर / खम्भात की खाड़ी / कच्छ के रण में गिरने वाली लघु नदियाँ: बंगाल की खाड़ी / मन्नार की खाड़ी में गिरने वाली लघु नदियाँ:

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Brahmaputra River System Notes in Hindi Pdf

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (Brahmaputra River System) एशिया की सबसे बड़ी और गतिशील नदी प्रणालियों में से एक है, जो तिब्बत, भारत और बांग्लादेश के विशाल भू-भाग को कवर करता है। कैलाश पर्वत के निकट से ‘सांग्पो’ के रूप में निकलने वाली यह नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर बहती है, जहाँ इसे ‘ब्रह्मपुत्र’ नाम मिलता है। यह नदी तंत्र न केवल अपनी विशाल जल क्षमता और ‘माजुली’ जैसे विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की कृषि, जैव विविधता और राष्ट्रीय जलमार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (Brahmaputra River System) ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का विस्तार 5,80,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र पर है, जिसमें 2,58,008 वर्ग कि.मी. क्षेत्र भारत में स्थित है। ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) ब्रह्मपुत्र विश्व की बड़ी नदियों में से एक है। प्रवाह मार्ग एवं नाम परिवर्तन तट के आधार पर सहायक नदियाँ असम घाटी की 725 कि.मी. की यात्रा में इसमें निम्नलिखित सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं: मुख्य विशेषताएँ एवं तटीय नगर

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Ganga River System Notes In Hindi Pdf

गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) भारत का सबसे बड़ा और सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण अपवाह तंत्र है, जो देश के लगभग एक-चौथाई क्षेत्र को कवर करता है। उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में भागीरथी और अलकनंदा के मिलन से उत्पन्न होने वाली गंगा नदी, अपने सफर में यमुना, घाघरा, गंडक और कोसी जैसी विशाल सहायक नदियों को समेटती है। यह नदी तंत्र न केवल उत्तर भारत के विशाल मैदानों को ‘भारत का अन्न भंडार’ बनाता है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि, जलविद्युत और धार्मिक आस्था का मुख्य आधार भी है। गंगा नदी तंत्र (Ganga River System) गंगा नदी तंत्र के अन्तर्गत हिमालय से निकलने वाली नदियाँ जैसे यमुना, रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी इत्यादि तथा प्रायद्वीपीय उच्च भूमि से निकलने वाली चंबल, केन, बेतवा, सिंध (यमुना में मिलती है) तथा सोन (दक्षिण से निकलने वाली गंगा की एकमात्र ‘उत्तरमुखी’ सहायक नदी) आदि नदियाँ आती हैं। मुख्य विशेषताएँ एवं विस्तार गंगा नदी का उद्गम और पंचप्रयाग की संरचना गंगा नदी वास्तव में ‘भागीरथी’ और ‘अलकनंदा’ नदियों का ही सम्मिलित रूप है। इसकी उद्गम कड़ियाँ इस प्रकार हैं: गंगा का प्रवाह मार्ग एवं डेल्टा तट के आधार पर सहायक नदियाँ बायें तट पर मिलने वाली नदियाँ (Left Bank Tributaries) दायें तट पर मिलने वाली नदियाँ (Right Bank Tributaries) रामगंगा, महानंदा, गोमती, घाघरा, गंडक, बागमती और कोसी यमुना, सोन, पुनपुन, दामोदर और रूप नारायण हिमालय से निकलने वाली मुख्य सहायक नदियाँ क. यमुना नदी ख. रामगंगा ग. काली नदी (काली गंगा / गारवाया चौका / शारदा) घ. घाघरा (करनाली या कोणिपाली) ङ. गण्डक च. कोसी या कौशिकी (बिहार का शोक) पठार से निकलने वाली गंगा की सहायक नदियाँ यद्यपि, गंगा में जल मुख्यतः उन सहायक नदियों से आता है जिनका उद्‌गम स्थान हिमालय में है, किन्तु कुछ जल पठारी नदियों से भी प्राप्त होता है। ये चम्बल, बेतवा, काली सिंध, केन और सोन हैं। क. चम्बल (पौराणिक नाम – चर्मावती/चर्मण्वती) ख. बेतवा या वेत्रवती ग. सोन या स्वर्ण नदी

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Indus River System Notes in Hindi Pdf

सिन्धु नदी तंत्र (Indus River System) विश्व के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नदी बेसिन्स में से एक है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के जल को अरब सागर तक ले जाता है। इस तंत्र की मुख्य नदी सिन्धु है, जो तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट से निकलती है। झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज जैसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ (पंचनद) उत्तर-पश्चिम भारत की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं। यह नदी तंत्र न केवल भूगोल बल्कि कृषि, व्यापार और भारत-पाकिस्तान जल समझौते की दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सिन्धु नदी तंत्र (Indus River System) इस क्रम की नदियाँ पश्चिमी हिमालय प्रदेश का जल अरब सागर में गिराती हैं। यह संसार की कुछ सबसे बड़ी नदी द्रोणियों में से एक है। इस तंत्र में सिन्धु सबसे बड़ी नदी है तथा झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज व अन्य इसकी सहायक नदियाँ हैं। सिन्धु नदी (Indus River) सिन्धु जल समझौता (Indus Water Treaty) मुख्य सहायक नदियाँ (पंचनद) क. झेलम नदी ख. चिनाब नदी ग. रावी नदी घ. व्यास नदी ङ. सतलज नदी

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The Universe Notes in Hindi pdf

असीम रहस्यों और अनंत विस्तार को अपने भीतर समेटे हुए The Universe (ब्रह्मांड) अति सूक्ष्म कणों से लेकर विशालकाय आकाशगंगाओं और खगोलीय पिंडों का एक विराट स्वरूप है। अंतरिक्ष विज्ञान (Cosmology) के अंतर्गत ब्रह्मांड का अध्ययन सदियों से मानव जिज्ञासा का केंद्र रहा है। लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व हुए ‘बिग बैंग’ (महाविस्फोट) से उत्पन्न हुआ हमारा ब्रह्मांड आज भी निरंतर विस्तारित हो रहा है। इसके इसी विस्मयकारी जीवन चक्र, तारों के जन्म, और सौरमंडल की गतियों को समझना आधुनिक विज्ञान का सबसे बड़ा रोमांच है। ब्रह्मांड का परिचय ब्रह्मांड से संबंधित ऐतिहासिक एवं आधुनिक परिकल्पनाएँ (A) भू-केन्द्रीय परिकल्पना (Geocentric Concept) (B) सूर्य-केन्द्रीय परिकल्पना (Heliocentric Concept) (C) उत्तरवर्ती अध्ययन एवं हब्बल का नियम ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति (Origin of The Universe) ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित मुख्य रूप से निम्नलिखित चार अवधारणाएँ प्रस्तुत की गई हैं: ब्रह्मांड की उत्पत्ति के प्रमुख सिद्धांत (सर्वमान्य मत) डाप्लर प्रभाव (Doppler Effect) आकाशगंगा एवं संबंधित खगोलीय पिंड तारे की परिभाषा एवं प्रारंभिक विकास (आद्य तारा) तारे के विकास को विस्तार से पढने के लिए यहाँ click करें सौरमंडल (Solar System) सौरमंडल में चारों ओर भ्रमण करने वाले ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु, उल्काएँ तथा क्षुद्रग्रह आदि सभी को शामिल किया जाता है। सूर्य जो कि सौरमंडल का जन्मदाता है, सम्पूर्ण सौरमंडल को ऊर्जा एवं प्रकाश प्रदान करता है। सूर्य की ऊर्जा का स्रोत उसके केन्द्र में हाइड्रोजन परमाणुओं का नाभिकीय संलयन द्वारा हीलियम में बदलना है। सूर्य हमारे सौरमंडल के केन्द्र में स्थित है। सौरमंडल (Solar System): विस्तार से पढने के लिए यहाँ click करें सौरमंडल के ग्रह (Planets of Solar System) ग्रह की परिभाषा एवं सामान्य विशेषताएँ ग्रहों का वर्गीकरण सूर्य से दूरी एवं आकार के अनुसार ग्रहों का क्रम सभी 8 ग्रहों का विस्तृत विवरण यहाँ पढ़ें उपग्रह (Satellite) ग्रहों के उपग्रहों की विवरणात्मक सारणी क्रम सं. ग्रह उपग्रहों की संख्या उपग्रहों के नाम 1 बुध 0 — 2 शुक्र 0 — 3 पृथ्वी 1 चन्द्रमा 4 मंगल 2 फोबोस, डिमोस 5 बृहस्पति 79 गैनीमीड (Ganymede), कैलिस्टो, यूरोपा आदि। 6 शनि 82 टाइटन, रेहा (Rhea), इथापेटस, डिओन आदि। 7 अरुण 27 टाइटेनिया (Titania), ओबेरॉन, उम्ब्रियल (Umbriel), एरियल, मिरांडा आदि। 8 वरुण 13 ट्राइटन (Triton) (सबसे बड़ा), नेरोड (Neried) चन्द्रमा (Moon) एवं उसके भौतिक लक्षण चन्द्रमा के सांख्यिकीय आँकड़े भारत के चन्द्र अन्वेषण अभियान (चन्द्रयान) (A) चन्द्रयान-1 (B) चन्द्रयान-2 उल्काश्म तथा उल्का पिंड (Meteors & Shooting Stars) ब्लू मून (Blue Moon) परिघटना विगत वर्षों में सिविल सर्विसेज की परीक्षा में आए हुए प्रश्न प्रश्न 1. ‘क्षुद्रग्रहों’ के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: उपर्युक्त दिए गए कथनों में से कौन-सा कथन सत्य है? उत्तर: (a) 1 और 2 व्याख्या: उपर्युक्त दिए गए कथनों में से केवल 1 और 2 सत्य हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। क्षुद्रग्रहों (Asteroids) की कक्षा मंगल एवं बृहस्पति की कक्षाओं के मध्य स्थित है। प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन उल्का से संबंधित है? उत्तर: (c) बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट हुए द्रव्य का अंश व्याख्या: उल्का बाह्य अंतरिक्ष से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट हुए द्रव्य का अंश होता है। यह एक ठोस आकाशीय पिण्ड होता है, जो वायुमंडल में प्रवेश करते ही घर्षण से जलने के कारण चमकने लगता है। इन्हें ‘टूटा हुआ तारा’ (Shooting Star) भी कहा जाता है। जबकि वे पिण्ड जो वायुमंडल के घर्षण से पूर्णतः जल नहीं पाते और चट्टानों के रूप में पृथ्वी पर आ गिरते हैं, उन्हें उल्का पिण्ड (Meteorites) कहते हैं। प्रश्न 3. मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने वाले शैल के टुकड़ों के समूह को क्या कहते हैं? उत्तर: (d) क्षुद्रग्रह व्याख्या: मंगल एवं बृहस्पति के मध्य क्षेत्र में सूर्य की परिक्रमा करने वाले अपेक्षाकृत छोटे पिण्ड को क्षुद्रग्रह (Asteroids) कहते हैं। इनकी उत्पत्ति ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे हुए खण्डों से हुई है। प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक तारा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट है? उत्तर: (a) सूर्य व्याख्या: सूर्य पृथ्वी का सबसे निकटतम तारा है। पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश पहुँचने में लगभग 8 मिनट 16.6 सेकेण्ड लगते हैं। सूर्य का आयतन पृथ्वी से 13 लाख गुना अधिक पाया जाता है। प्रश्न 5. सूर्य से दूरी के क्रम में, निम्नलिखित में से कौन-से दो ग्रह, मंगल और यूरेनस के बीच हैं? उत्तर: (b) बृहस्पति और शनि व्याख्या: सूर्य से दूरी के बढ़ते क्रम में बृहस्पति और शनि ग्रह, मंगल (Mars) और यूरेनस (अरुण) के बीच स्थित हैं। प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौन-से ग्रह के सर्वाधिक प्राकृतिक उपग्रह या चन्द्र हैं? (वर्ष 2009 के प्रश्न के संदर्भ में) उत्तर: (c) शनि व्याख्या: वर्तमान डेटा के अनुसार शनि ग्रह के सर्वाधिक उपग्रह हैं, जबकि बृहस्पति दूसरा सर्वाधिक उपग्रह वाला ग्रह है।

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Planets of Solar System Notes in Hindi pdf

अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) की नवीन परिभाषा के अनुसार हमारे Planets of the Solar System (सौरमंडल के ग्रह) सूर्य की परिक्रमा करने वाले वे विशाल पिंड हैं जो एक निश्चित गुरुत्वाकर्षण, आकार और स्वतंत्र कक्षा रखते हैं। आंतरिक चट्टानी ग्रहों (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल) से लेकर गैसों से बने विशाल बाह्य महाग्रहों (बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण) तक, प्रत्येक ग्रह अपनी अनूठी वायुमंडलीय दशाओं, वलय प्रणालियों और उपग्रहों के कारण विशिष्ट है। इन ग्रहों की भौतिक संरचना, प्राचीन काल से चली आ रही गतियों और आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों का अध्ययन ब्रह्मांड विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। सौरमंडल के ग्रह (Planets of Solar System) ग्रह की परिभाषा एवं सामान्य विशेषताएँ ग्रहों का वर्गीकरण सभी 8 ग्रहों का विस्तृत विवरण (A) बुध (Mercury) (B) शुक्र (Venus) (C) पृथ्वी (Earth) पृथ्वी: महत्त्वपूर्ण सांख्यिकीय तथ्य (सारणी) विशेषता / प्राचल विवरण / डेटा आकृति लगभग गोलाभ (Geoid) धरातलीय क्षेत्रफल 51.1 करोड़ वर्ग किमी. अनुमानित आयु 4.6 बिलियन वर्ष विषुवतरेखीय व्यास 12,756 किमी. अक्षध्रुवीय व्यास 12,714 किमी. विषुवतरेखीय परिधि 40,075 किमी. ध्रुवीय परिधि 40,008 किमी. सूर्य से न्यूनतम दूरी (उपसौर) 14.70 करोड़ किमी. सूर्य से अधिकतम दूरी (अपसौर) 15.21 करोड़ किमी. सूर्य से माध्य/औसत दूरी 14.98 करोड़ किमी. चन्द्रमा से दूरी 3,84,315 किमी. परिक्रमण समय (सूर्य की परिक्रमा) 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकण्ड परिभ्रमण समय (अपने अक्ष पर घूर्णन) 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकण्ड पृथ्वी का द्रव्यमान 5.9722×10²⁴ kg समुद्रतल से स्थल की सर्वोच्च ऊँचाई 8,850 मीटर (माउंट एवरेस्ट) समुद्रतल से सागर की सर्वाधिक गहराई 11,022 मीटर (मैरियाना ट्रेंच) (D) मंगल (Mars) (E) बृहस्पति (Jupiter) (F) शनि (Saturn) (G) अरुण (Uranus) (H) वरुण (Neptune) प्लूटो का वर्गीकरण (विवाद एवं निष्कासन) क्षुद्र ग्रह या अवान्तर ग्रह (Asteroids) ग्रह: परीक्षा उपयोगी महत्त्वपूर्ण तथ्य (त्वरित सारणी) प्राचल / प्रश्न उत्तर (ग्रह / पिंड) सबसे बड़ा और सर्वाधिक द्रव्यमान वाला ग्रह बृहस्पति सर्वाधिक तीव्र कक्षीय गति वाला ग्रह बुध सबसे लम्बा संयुति (Synodic) दिवस वाला ग्रह बुध सबसे छोटा संयुति दिवस वाला ग्रह बृहस्पति सर्वाधिक उपग्रहों वाला ग्रह शनि (82 उपग्रह) सबसे बड़े उपग्रह (गैनीमीड) वाला ग्रह बृहस्पति सर्वाधिक औसत घनत्व वाला ग्रह पृथ्वी न्यूनतम औसत घनत्व वाला ग्रह शनि सर्वोच्च पर्वत (निक्स ओलंपिया) युक्त ग्रह मंगल सबसे गहरे सागर युक्त ग्रह बृहस्पति प्रबलतम चुम्बकीय क्षेत्र वाला ग्रह बृहस्पति सर्वाधिक वृत्ताकार कक्षा वाला ग्रह शुक्र सबसे गर्म ग्रह शुक्र चन्द्रमा (उपग्रह) रहित ग्रह बुध और शुक्र धरातल पर तरल (जल) की सर्वाधिक मात्रा युक्त ग्रह पृथ्वी सर्वाधिक उत्केन्द्रित कक्षा वाले चन्द्रमा युक्त ग्रह वरुण

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