NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 11: From Barter to Money
NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 11: From Barter to Money के अंतर्गत प्राचीन काल की वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) की मूलभूत सीमाओं—जैसे ‘आवश्यकताओं का दोहरा संयोग’ (Double Coincidence of Wants)—को स्पष्ट करता है और किस प्रकार धातु के सिक्कों, कागजी नोटों और आधुनिक चेक प्रणाली के आगमन ने व्यापार को सुगम बनाया। तथा आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली, ऋण (Credit) की भूमिका, वर्तमान समय में यूपीआई (UPI), क्रेडिट/डेबिट कार्ड और डिजिटल करेंसी के बढ़ते प्रभाव के पीछे छिपे आर्थिक सिद्धांतों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समजाता है। हमें मुद्रा की आवश्यकता क्यों है? (Why Do we Need Money?) वस्तु विनिमय प्रणाली की प्रमुख समस्याएँ वस्तु विनिमय की सीमाएँ vs. मुद्रा का समाधान वस्तु विनिमय की समस्या मुद्रा (Money) द्वारा समाधान आवश्यकताओं का दोहरा संयोग मुद्रा विनिमय का सर्वस्वीकार्य माध्यम (Medium of Exchange) है। मूल्य के मानक का अभाव मुद्रा मूल्य की एक समान इकाई (Unit of Account) प्रदान करती है। विभाज्यता की कमी मुद्रा को छोटी इकाइयों (रुपये, पैसे) में विभाजित किया जा सकता है। वहनीयता की समस्या कागज़ी नोट या डिजिटल मनी को कहीं भी ले जाना बेहद आसान है। टिकाऊपन की कमी मुद्रा का लंबे समय तक मूल्य ह्रास के बिना संचय (Store of Value) संभव है। आधुनिक समय में वस्तु विनिमय के उदाहरण मुद्रा के मूलभूत कार्य (Basic Functions of Money) ज़रूरत आविष्कार की जननी है। व्यापार बढ़ा। दूरियां भी बढ़ीं। ऐसे में वस्तु विनिमय प्रणाली फेल हो गई। इसी ज़रूरत ने ‘मुद्रा’ (Money) को जन्म दिया। मुद्रा के चार प्रमुख कार्य हैं: मुद्रा के कार्य मुद्रा का कार्य (Function) व्यावहारिक अर्थ (Practical Meaning) विनिमय का माध्यम खरीदने-बेचने का सर्वमान्य और आसान तरीका। मूल्य का संचय भविष्य की ज़रूरतों के लिए धन की बचत। मूल्य का मापक वस्तुओं और सेवाओं की कीमत तय करना। स्थगित भुगतान का मान कर्ज लेने और भविष्य में उसे चुकाने का आधार। मुद्रा की यात्रा (The Journey of Money) मुद्रा का विकास मानव सभ्यता और व्यापार की प्रगति को दर्शाता है। प्राचीन भारतीय सिक्कों की शब्दावली व विशेषताएँ भाषाई व पुरातात्विक साक्ष्य रुपया प्रतीक (Rupee Symbol) सिक्का निर्माण: प्राचीन vs. आधुनिक पैमाना प्राचीन काल के सिक्के आधुनिक सिक्के धातु (Material) सोना, चाँदी, ताँबा व प्राकृतिक मिश्रधातु लोहे की मिश्रधातु (लोहा, क्रोमियम, कार्बन) निर्माण तकनीक आहत (Punch-marked) / ठप्पा आधुनिक टंकण मशीनें (Modern Mints) अंकित प्रतीक राजा-रानी, प्रकृति (पहाड़, वृक्ष), देवी-देवता राष्ट्र चिन्ह, मूल्य (मूल्यवर्ग), द्विभाषी पाठ (हिंदी/अंग्रेजी), स्मारक प्रतीक जारीकर्ता प्राचीन राजा/साम्राज्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) / भारत सरकार कागज़ी मुद्रा (Paper Money) सिक्कों के अत्यधिक उपयोग से उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना (Carrying) और संभालकर रखना (Storing) मुश्किल हो गया। इस समस्या के समाधान के रूप में कागज़ी मुद्रा की शुरुआत हुई। शब्दावली सांस्कृतिक व तकनीकी विशेषताएँ मुद्रा निर्गमन प्राधिकरण मुद्रा के नए रूप प्रौद्योगिकी और बैंकिंग सुधारों के विकास के साथ मुद्रा के भौतिक स्वरूप के अलावा अमूर्त (Intangible) रूप सामने आए हैं। मुद्रा के रूपों की तुलना आधार भौतिक मुद्रा डिजिटल मुद्रा (Intangible Money) स्वरूप सिक्के और कागज़ी नोट इलेक्ट्रॉनिक अंक / डिजिटल डेटा हस्तांतरण विधि हाथों-हाथ (Physical exchange) यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग, क्यूआर कोड सुविधा बड़े लेन-देन में भारी और असुरक्षित त्वरित, सुरक्षित और प्रत्यक्ष खाता अंतरण NCERT Class 7, Social Science Ch-10 यहाँ पढ़ें:-