5 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf
5 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने वाले ISRO द्वारा GSLV-F17 से EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए ‘डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स’ (DEH) पहल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों में सुशासन और कानूनी अनुपालन सुगम बनाने वाले ‘कॉर्पोरेट मित्र’ पाठ्यक्रम, राजमार्गों के पर्यावरण-अनुकूल विकास हेतु NHAI का ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’, वेस्ट हीट रिकवरी में क्रांतिकारी खोज स्कैंडियम नाइट्राइड (ScN) में रिकॉर्ड थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव, स्मार्ट ड्रग डिलीवरी व मेमोरी तकनीक में जाम्ड सिस्टम और माइक्रोगेल कण, जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए ‘पीएम-जनमन’ और ‘DA-JGUA’ पहलों की प्रगति समीक्षा, तथा बायोमेडिकल डिवाइसेस हेतु पेप्टाइड आधारित पीजोइलेक्ट्रिक बायोमटेरियल्स का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। ISRO की बड़ी उपलब्धि: GSLV-F17 द्वारा EOS-05 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO के GSLV-F17/EOS-05 मिशन के सफल प्रक्षेपण की सराहना करते हुए इसे देश के लिए एक गर्व का क्षण बताया। यह प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR), श्रीहरिकोटा के द्वितीय लॉन्च पैड से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य बिंदु: EOS-05 मिशन और अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार 1. जिओसिंक्रोनस कक्षा से पहला इमेजिंग सैटेलाइट 2. ISRO और भारतीय उद्योग की बढ़ती भागीदारी उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान: घटक विवरण प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) GSLV-F17 (GSLV Mk-II की 19वीं उड़ान) पेलोड / उपग्रह EOS-05 (भार: लगभग 2,367 किग्रा) कक्षा (Orbit) सब-जिओसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Sub-GTO) प्राथमिक उद्देश्य आपदा प्रबंधन, कृषि विश्लेषण और भू-भाग की निरंतर उच्च-गुणवत्ता इमेजिंग ‘डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स’ (DEH) पहल: भारत के हर जिले को निर्यात का केंद्र बनाने की रणनीति चर्चा में क्यों? वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (PIB दिल्ली) ने ‘Districts as Export Hubs (DEH)’ पहल की प्रगति और इसके कार्यान्वयन की रूपरेखा पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले की अनूठी उत्पादन और सेवा क्षमताओं को पहचानकर उन्हें सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। यह पहल भारत के पारंपरिक निर्यात मॉडल को, जो केवल कुछ बड़े शहरों और बंदरगाहों तक सीमित था, बदलकर विकेंद्रीकृत और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत छोटे व्यापारियों, एमएसएमई (MSMEs), स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सीधे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ा जा रहा है। मुख्य बिंदु: जिला-स्तरीय निर्यात मॉडल और इसका क्रियान्वयन 1. ODOP से DEH तक का सफर 2. तीन-स्तरीय संस्थागत संरचना 3. डिजिटलीकरण, अवसंरचना और क्षमता निर्माण प्रमुख जिला उत्पाद मैपिंग (DEH Product Mapping) जिला राज्य संभावित निर्यात उत्पाद साबरकांठा गुजरात सिरामिक एवं टाइल्स, आलू अरावली गुजरात खनिज, कृषि प्रसंस्करण, कांच एवं टाइल्स जलगाँव महाराष्ट्र जलगाँव केला, जलगाँव भरीत बैंगन आगर मालवा मध्य प्रदेश संतरा बस्तर छत्तीसगढ़ बस्तर आयरन क्राफ्ट, चावल, ज्वार, मक्का जामताड़ा झारखंड बांस शिल्प, काजू कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम: MSME अनुपालन और क्षमता निर्माण के लिए नई पहल चर्चा में क्यों? कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs – MCA) के मार्गदर्शन में ICAI, ICSI और ICoAI द्वारा ‘कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम’ के पहले बैच की औपचारिक शुरुआत की गई। इस योजना के तहत कॉर्पोरेट मित्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) भी लॉन्च किया गया है, जिसके पहले बैच में कुल 2,879 शिक्षार्थियों (Learners) ने अपना पंजीकरण कराया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए व्यावसायिक और नियामक अनुपालन को आसान और सुलभ बनाना है। मुख्य बिंदु: कॉर्पोरेट मित्र पहल की रूपरेखा और उद्देश्य 1. पृष्ठभूमि और बजटीय घोषणा 2. बहु-संस्थानीय सहयोग और तकनीकी साझेदारी 3. पाठ्यक्रम की संरचना और प्रशिक्षण मॉडल प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पहल का नाम कॉर्पोरेट मित्र पाठ्यक्रम प्रथम बैच पंजीकरण 2,879 शिक्षार्थी (Learners) प्रशासनिक मंत्रालय कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) बजटीय संदर्भ केंद्रीय बजट 2026-27 प्रशिक्षण अवधि 12 महीने (6 महीने अकादमिक + 6 महीने ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग) मुख्य लक्ष्य MSMEs के लिए अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना और पैरा-प्रोफेसनल्स तैयार करना NHAI का ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’: राष्ट्रीय राजमार्गों पर पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा चर्चा में क्यों? भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’ के विजेताओं की घोषणा की। इस पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर वृक्षारोपण और सौंदर्यकरण की सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देना है। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय स्थिरता को जोड़ने की NHAI की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ राजमार्गों के निर्माण के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों, ठेकेदारों, एनजीओ और निजी एजेंसियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्य बिंदु: पुरस्कार की श्रेणियां और मूल्यांकन ढांचा 1. पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियां और विजेता NHAI द्वारा यह पुरस्कार तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रदान किए गए हैं: 2. नामांकन और मूल्यांकन प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पुरस्कार का नाम ग्रीन हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026 आयोजक संस्था भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) स्थापना वर्ष वर्ष 2025 (हरित राजमार्ग नीति, 2015 के तहत) मूल्यांकन का मुख्य आधार पौधों की जीवित रहने की दर (Survival-rate Data) विशेष तकनीक/पार्क नागपुर में ऑक्सीजन बर्ड पार्क एवं लखनऊ में मियावाकी तकनीक पुरस्कार श्रेणियां एवेन्यू प्लांटेशन, मीडियन प्लांटेशन और लैंड पार्सल स्कैंडियम नाइट्राइड (ScN) में रिकॉर्ड थर्मोइलेक्ट्रिक प्रभाव: ताप से बिजली बनाने की सदी पुरानी सीमा टूटी चर्चा में क्यों? जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), सिडनी विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बैंगलोर के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की। उन्होंने एक विशेष क्रिस्टलीय सेमीकंडक्टर विकसित किया है जो तापमान के अंतर को सामान्य से लगभग 1,000 गुना अधिक विद्युत वोल्टेज में बदल देता है। यह खोज ठोस पदार्थों में तापीय ऊर्जा से बिजली बनाने (Seebeck Effect) की सदी पुरानी भौतिक सीमा को तोड़ती है। मुख्य बिंदु: खोज का विवरण, सीबेक प्रभाव और व्यावहारिक अनुप्रयोग 1. सीबेक प्रभाव और ऐतिहासिक सीमा का टूटना 2. सामग्री और निर्माण तकनीक (HDHC ScN) 3. प्रोटोटाइप सेंसर और भविष्य के अनुप्रयोग जाम्ड सिस्टम और माइक्रोगेल कण: तापीय आघात से मेमोरी इरेज़र और ड्रग डिलीवरी में नया मोड़ चर्चा में क्यों? रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI), बैंगलोर के वैज्ञानिकों ने जाम्ड सिस्टम्स में संरचनात्मक पुनर्प्राप्ति पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन प्रकाशित किया। उन्होंने साबित किया है कि ग्लास जैसे ठोस पदार्थों को अचानक तापीय आघात देकर उनके अंदर