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NCERT Notes Class 6 science Chapter 4: Exploring Magnets

NCERT Notes Class 6 science Chapter 4: Exploring Magnets के अंतर्गत उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के आकर्षण-प्रतिकर्षण के बुनियादी नियमों और पृथ्वी के स्वयं के चुंबकीय गुणों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, एक साधारण दिशासूचक यंत्र (Compass) से लेकर विशाल औद्योगिक मोटरों और डेटा स्टोरेज उपकरणों तक एक सुदृढ़ तकनीकी ताने-बाने में बंधा है। आज का यह चुंबकीय अध्ययन केवल खिलौनों और लोहे को चिपकाने का कोई सामान्य खेल नहीं है, बल्कि दिशाओं के ज्ञान, ऊर्जा के रूपांतरण और आधुनिक भौतिकी के अंतर्संबंधों की वह बेजोड़ दास्तान है जिसने वैश्विक परिवहन, संचार और तकनीकी प्रगति को एक नई गति देकर वैश्विक पटल पर विज्ञान की एक अद्वितीय और शाश्वत पहचान बनाई है। चुंबक की खोज / Exploring Magnets चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ / Magnetic and Non-magnetic Materials पदार्थों का चुंबकीय परीक्षण एवं प्रेक्षण वस्तु का नाम (Object) निर्माण सामग्री (Material) चुंबक के प्रति आकर्षण (Attracted) पदार्थ का प्रकार (Classification) लोहे की कील / ब्लेड लोहा (Iron) हाँ (Yes) चुंबकीय पदार्थ (Magnetic) सिक्के (विशिष्ट प्रकार) निकेल / कोबाल्ट मिश्रण हाँ (Yes) चुंबकीय पदार्थ (Magnetic) पेंसिल लकड़ी (Wood) ✗ नहीं (No) अचुंबकीय पदार्थ (Non-magnetic) इरेज़र रबर (Rubber) ✗ नहीं (No) अचुंबकीय पदार्थ (Non-magnetic) प्लास्टिक स्केल प्लास्टिक (Plastic) ✗ नहीं (No) अचुंबकीय पदार्थ (Non-magnetic) चुंबक के ध्रुव (Poles of Magnet) चुंबकीय ध्रुवों के विशिष्ट भौतिक नियम भौतिक गुण (Physical Property) वैज्ञानिक तथ्य और विवरण (Scientific Fact) मुख्य परीक्षा चुंबकीय एकलध्रुव का अभाव (Non-existence of Monopole) प्रकृति में कभी भी अकेले (Single) उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव का अस्तित्व संभव नहीं है। यह ब्रह्मांड के मूलभूत चुंबकीय नियमों को दर्शाता है। ध्रुवों की युग्म उपस्थिति (Existence in Pairs) यदि किसी चुंबक को दो या दो से अधिक छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक छोटा टुकड़ा स्वतः ही एक पूर्ण चुंबक बन जाता है जिसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव दोनों जोड़े (Pairs) में मौजूद होते हैं। चुंबक को कितना भी सूक्ष्म कर दिया जाए, उसके द्विध्रुवीय (Bipolar) गुण को समाप्त नहीं किया जा सकता। दिशा सूचक गुण (Directional Property) यदि किसी चुंबक को स्वतंत्र रूप से लटकाया जाए, तो वह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में संरेखित (Rest) होता है, जिसकी पुष्टि सूर्य के उगने (पूर्व) और डूबने (पश्चिम) की दिशा से की जा सकती है। यही गुण मैग्नेटिक कम्पास और प्राचीन नौवहन (Navigation) का आधार बना। दिशा खोजना / Finding Directions मैग्नेटिक कम्पास: संरचना और कार्यप्रणाली (Magnetic Compass) खुद का कम्पास बनाना (चुंबकीकरण प्रक्रिया) चुंबकीय उपकरण और निर्माण चरण उपकरण / प्रक्रिया मुख्य कार्य / विधि वैज्ञानिक अनुप्रयोग (Application) मैग्नेटिक कम्पास सुई का स्वतंत्र घूर्णन और डायल संरेखण। नौवहन (Navigation) और मानचित्र अध्ययन। सुई का चुंबकीकरण चुंबक को एक ही दिशा में 30-40 बार रगड़ना। कृत्रिम चुंबक (Artificial Magnet) का निर्माण। पानी में तैरता कॉर्क घर्षण रहित (Frictionless) घूर्णन प्रदान करना। सुई को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार संरेखित होने में मदद। चुंबक के बीच आकर्षण और प्रतिकर्षण / Attraction and Repulsion between Magnets आकर्षण बनाम प्रतिकर्षण: परीक्षण की स्थिति प्रेक्षण / परिणाम (Observation) वैज्ञानिक निष्कर्ष चुंबक + लोहे की छड़ लोहे की छड़ के दोनों सिरे चुंबक के दोनों ध्रुवों (N और S) से केवल आकर्षित होते हैं। आकर्षण से यह पता नहीं चलता कि सामने वाली वस्तु चुंबक है या केवल एक चुंबकीय धातु। चुंबक + अज्ञात चुंबक एक निश्चित स्थिति में सिरों के बीच प्रतिकर्षण (दूर जाना) दिखाई देता है। प्रतिकर्षण (Repulsion) ही किसी वस्तु के वास्तविक चुंबक होने की एकमात्र निश्चित पहचान है। गैर-चुंबकीय माध्यमों से चुंबकीय प्रभाव का गुजरना चुंबक के साथ मनोरंजन / Fun with Magnets चुंबक के ध्रुवों का चिन्हांकन चुंबक को सुरक्षित कैसे रखें? चुंबक के रख-रखाव के नियम क्या करें? (Do’s) क्या न करें? (Don’ts) वैज्ञानिक कारण (Scientific Reason) चुंबकों को हमेशा जोड़े (Pairs) में इस प्रकार रखें कि विपरीत ध्रुव (Unlike poles) एक ही तरफ हों। चुंबक को कभी भी गर्म (Heat) नहीं करना चाहिए। अत्यधिक ऊष्मा अणुओं की चुंबकीय दिशा को अस्त-व्यस्त कर देती है। दोनों चुंबकों के बीच में लकड़ी का एक टुकड़ा (Piece of wood) रखें। चुंबक को ऊंचाई से गिराने (Drop) या उन पर हथौड़ा मारने (Hammering) से बचें। यांत्रिक आघात (Mechanical shock) से चुंबकीय डोमेन (Domains) नष्ट हो जाते हैं। चुंबक के दोनों सिरों (Ends) पर नरम लोहे के दो टुकड़े (Soft iron keepers) लगाएं। इन्हें मोबाइल फोन या रिमोट कंट्रोल जैसी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के पास न रखें। चुंबक का मजबूत क्षेत्र इन उपकरणों के आंतरिक सर्किट को खराब कर सकता है। NCERT Ch-2 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 3: Mindful Eating: A Path to a Healthy Body

NCERT Notes Class 6 science Chapter 3: Mindful Eating: A Path to a Healthy Body के अंतर्गत मानव स्वास्थ्य और पोषण के केंद्र में स्थित हमारा शरीर प्राचीन काल के पारंपरिक आहार विज्ञान से लेकर आधुनिक पोषण जैव-प्रौद्योगिकी तक के क्रमिक और जैविक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। केवल पेट भरने की अचेतन आदतों से मुक्त होकर, पोषक तत्वों (Nutrients) की सचेत समझ और संतुलित आहार (Balanced Diet) के संकल्प के साथ, इस जैविक तंत्र ने अपनी आंतरिक ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्राप्त किया। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिजों के संतुलित उपभोग के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, हमारी थाली के सूक्ष्म घटकों से लेकर शरीर के समग्र उपापचय (Metabolism) तक एक सुदृढ़ स्वास्थ्य ताने-बाने में बंधा है। हम क्या खाते हैं? / What Do We Eat? विभिन्न क्षेत्रों में भोजन / Food in different regions भारतीय राज्यों के स्थानीय कृषि उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन राज्य (State) स्थानीय फसलें पारंपरिक व्यंजन स्थानीय पेय (Beverages) पंजाब मक्का, गेहूं, चना, दालें मक्के दी रोटी, सरसों दा साग, छोले भटूरे, परांठा, हलवा, खीर लस्सी, छाछ, दूध, चाय कर्नाटक चावल, रागी, उड़द, नारियल इडली, डोसा, सांभर, नारियल चटनी, रागी मुड्डे, पल्या, रसम, चावल छाछ, कॉफी, चाय मणिपुर चावल, बांस, सोयाबीन चावल, एरोम्बा (चटनी), उती (पीली मटर और हरी प्याज की करी), सिंग्जु, कांगसोई काली चाय (Black Tea) समय के साथ खाना पकाने के तरीकों में क्या बदलाव आया है? भोजन के घटक क्या हैं? / What are the Components of Food? 1. ऊर्जा देने वाले भोजन (Energy-giving Foods) A. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) B. वसा (Fats) 2. शरीर का निर्माण करने वाले भोजन (Body-building Foods) प्रोटीन (Proteins) 3. रक्षात्मक पोषक तत्व (Protective Nutrients) विटामिन और खनिज शरीर की रोगों से रक्षा करते हैं। ये कम मात्रा में आवश्यक होते हैं लेकिन अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य हैं। विटामिन और खनिज: कार्य, स्रोत एवं कमी से होने वाले रोग पोषक तत्व मुख्य कार्य प्रमुख स्रोत कमी से रोग (Deficiency) मुख्य लक्षण (Symptoms) विटामिन A आंखों और त्वचा को स्वस्थ रखना। गाजर, पपीता, आम, दूध रतोंधी (Loss of vision) कमजोर दृष्टि, अंधेरे में दिखाई न देना। विटामिन B1 हृदय को स्वस्थ रखना और शारीरिक क्रियाओं में मदद। फलियां (Legumes), साबुत अनाज, मेवे, दूध उत्पाद बेरीबेरी हाथ-पैरों में सूजन/जलन, सांस लेने में तकलीफ। विटामिन C रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) बढ़ाना। आंवला, अमरूद, नींबू, संतरा, हरी मिर्च स्कर्वी मसूड़ों से खून आना, घावों का देरी से भरना। विटामिन D हड्डियों और दांतों के लिए कैल्शियम का अवशोषण। सूर्य का प्रकाश (त्वचा स्वयं बनाती है), दूध, मक्खन, अंडा सूखा रोग (Rickets) हड्डियां मुलायम होकर मुड़ जाती हैं। कैल्शियम हड्डियों और दांतों की मजबूती। दूध, दही, पनीर, सोया मिल्क अस्थि और दंत क्षय कमजोर हड्डियां, दांतों का सड़ना। आयोडीन शारीरिक और मानसिक विकास का नियमन। आयोडीन युक्त नमक, समुद्री घास (Seaweed), सिंघाड़ा घेंघा रोग (Goitre) गर्दन के अग्र भाग में सूजन। लोहा (Iron) रक्त (हीमोग्लोबिन) का निर्माण करना। हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार एनीमिया शरीर में कमजोरी, सांस फूलना। 4. आहारीय रेशे और जल (Dietary Fibres and Water) भोजन पकाते समय पोषक तत्वों का नुकसान ऐतिहासिक मामले (Historical Cases) डॉ. कोलथुर गोपालन (1918–2019) भोजन के विभिन्न घटकों का परीक्षण कैसे करें? / How to Test Different Components of Food? स्टार्च के लिए परीक्ष / Test for starch वसा के लिए परीक्षण / Test for fats प्रोटीन के लिए परीक्षण / Test for proteins खाद्य पदार्थों के परीक्षण और उनके परिणाम खाद्य घटक (Nutrient) प्रयुक्त रीएजेंट / सामग्री अंतिम रंग / प्रेक्षण (Observation) मुख्य उदाहरण (Sources) स्टार्च तनु आयोडीन विलयन नीला-काला (Blue-Black) आलू, ब्रेड, उबले चावल वसा (Fat) सादा कागज पारभासी तैलीय धब्बा (Oily Patch) तेल, मक्खन, नारियल, मूंगफली प्रोटीन ( कॉपर सल्फेट + कास्टिक सोडा बैंगनी (Violet) सोयाबीन, मटर, मूंगफ संतुलित आहार / Balanced Diet जंक फूड बनाम पौष्टिक भोजन (Junk Food vs Healthy Food) पोटैटो वेफर्स बनाम भुना चना: पोषण तुलनात्मक सारणी (Per 100 g) पोषण घटक (Nutrients) पोटैटो वेफर्स भुना चना (Roasted Chana) विश्लेषण ऊर्जा (Energy) 536 kcal (अत्यधिक उच्च) 355 kcal (संतुलित) वेफर्स में वसा के कारण कैलोरी अधिक है। वसा (Fats) 35.0 g (हानिकारक स्तर) 6.26 g (कम वसा) वेफर्स में लगभग 6 गुना अधिक वसा है। प्रोटीन 7.0 g (न्यूनतम) 18.64 g (उच्च प्रोटीन) चना मांसपेशियों के विकास के लिए बेहतर है। आहारीय रेशा (Fibre) 4.8 g 16.8 g (अत्यधिक उच्च) चना पाचन क्रिया और आंतों के लिए सर्वोत्तम है। खाद्य सुदृढ़ीकरण और नियामक ढांचा (Food Fortification & Regulation) बाजरा (मोटा अनाज): पोषण से भरपूर अनाज / Millets: Nutrition-rich Cereals मुख्य मोटे अनाज और उनके पोषण संबंधी लाभ अनाज का नाम (Millet) प्रमुख विशेषता महत्वपूर्ण ज्वार, बाजरा, सांवा विटामिन्स और प्रचुर मात्रा में आहारीय रेशा (Dietary Fibre)। पाचन तंत्र को सुधारने और कुपोषण से लड़ने में सहायक। रागी कैल्शियम का बेहद समृद्ध स्रोत। हड्डियों की मजबूती और हिडन हंगर (Hidden Hunger) के समाधान के लिए सर्वोत्तम। फूड माइल्स: खेत से हमारी थाली तक / Food Miles: From Farm to Our Plate फूड माइल्स को कम करने का महत्व (Importance of Reducing Food Miles) लाभ का क्षेत्र मुख्य प्रभाव महत्वपूर्ण लागत में कमी (Cost Control) लंबी दूरी के परिवहन, बिचौलियों और कोल्ड स्टोरेज पर होने वाले खर्च में भारी कटौती होती है। खाद्य सामर्थ्य (Food Affordability) प्रदूषण नियंत्रण (Pollution Reduction) वाहनों के कम संचालन से कार्बन उत्सर्जन (Carbon Footprint) और ग्रीनहाउस गैसों का स्राव घटता है। जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Mitigation) स्थानीय अर्थव्यवस्था (Local Economy) स्थानीय स्तर पर उपभोग बढ़ने से क्षेत्रीय किसानों को सीधा आर्थिक लाभ और सुरक्षा मिलती है। ग्रामीण विकास (Rural Development) स्वास्थ्य लाभ (Health & Freshness) भोजन को दूर से नहीं लाना पड़ता, जिससे वह अधिक ताजा, पौष्टिक और प्रिजर्वेटिव-मुक्त बना रहता है। पोषण सुरक्षा (Nutritional Security) NCERT Chapter-1 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 2: Diversity in the Living World

NCERT Notes Class 6 science Chapter 2: Diversity in the Living World के अंतर्गत वैश्विक जैव-विविधता के केंद्र में स्थित हमारा जीव जगत प्राचीन काल की सूक्ष्म कोशिकीय संरचनाओं से लेकर विशालकाय जंतुओं और वनस्पतियों तक के क्रमिक और प्राकृतिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। एकसमान दिखने वाले निर्जीव वातावरण से मुक्त होकर, अनुकूलन (Adaptation) की अद्भुत क्षमताओं और जीवन के अनगिनत रूपों के संकल्प के साथ, इस प्रकृति ने अपनी जैविक अखंडता को प्राप्त किया। जीवों के वर्गीकरण, उनके विशिष्ट आवासों (Habitats) और परस्पर अंतर्निर्भरता के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, मरुस्थल की कँटीली झाड़ियों से लेकर घने वर्षावनों के विशाल वृक्षों तक एक सुदृढ़ पारिस्थितिक ताने-बाने में बंधा है। हमारे आस-पास के पौधों और जानवरों में विविधता 1. जीव जगत में विविधता / Diversity in the Living World पौधों की प्रमुख विशेषताएं प्रकृति में पौधों का वर्गीकरण उनके निम्नलिखित भौतिक लक्षणों के आधार पर होता है: पौधों की विविधता सारणी पौधे का नाम (Local Name) तने की प्रकृति (Stem) पत्तियों की बनावट/व्यवस्था (Leaves) फूलों का रंग (Flowers) घास (Common Grass) मुलायम और पतला हरी पत्तियां – तुलसी सख्त और पतला पत्तियां जोड़े में आमने-सामने (Opposite direction) – गुड़हल (Hibiscus) सख्त तने पर एक-एक करके एकांतर (Alternate) व्यवस्था गुलाबी-बैंगनी (Pinkish purple) नीम सख्त और मोटा सतह चिकनी (Smooth surface) – जानवरों की विविधता और आवास (Animal Diversity & Habitats) जानवरों में विविधता उनके रहने के स्थान, भोजन और चलने के तरीके के आधार पर देखी जाती है: जानवरों की विविधता सारणी जीव का नाम (Animal) आवास (Habitat) मुख्य भोजन (Food) चलने का तरीका (Movement) अन्य विशेषता (Features) कौआ (Crow) पेड़ (Tree) कीड़े-मकोड़े (Insects) उड़ना और चलना चोंच में तिनके दबाना चींटी (Ant) मिट्टी/बिल (Soil/Burrow) पत्तियां, बीज, कीड़े चलना छह पैर होना गाय (Cow) भूमि (Land) घास और पत्तियां चलना पौधों और जानवरों का समूहन कैसे करें? पौधों का समूहन कैसे करें? शारीरिक बनावट, ऊंचाई और तने की प्रकृति के आधार पर पौधों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: पौधों के मुख्य प्रकार (Types of Plants) श्रेणी (Category) मुख्य विशेषताएँ (Key उदाहरण (Examples) जड़ी-बूटी (Herbs) छोटे पौधे; तना कोमल, पतला और हरा (Tender & Green) होता है। टमाटर (Tomato) झाड़ी (Shrubs) मध्यम ऊंचाई; तने सख्त लेकिन बहुत मोटे नहीं होते; शाखाएं जमीन के ठीक पास से निकलती हैं। गुलाब (Rose) पेड़ (Trees) अत्यधिक लंबे; तना कठोर, मोटा, भूरा और लकड़ीदार (Woody) होता है; शाखाएं जमीन से बहुत ऊपर लगती हैं। आम (Mango) पत्तियों में शिरा-विन्यास (Leaf Venation) पत्तियों पर दिखने वाली पतली रेखाओं को शिरा (Veins) कहते हैं, और इनके प्रतिरूप (Pattern) को शिरा-विन्यास (Venation) कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है: जड़ों के प्रकार (Types of Roots) सह-संबंध सूत्र (Dicot vs Monocot) जंतुओं का समूहन कैसे करें? जंतु गमन सारणी जंतु का नाम (Animal) गमन का प्रकार (Movement) प्रयुक्त अंग (Body Parts Used) चींटी (Ant) चलना और कूदना पैर (Legs) बकरी (Goat) चलना और दौड़ना पैर (Legs) कबूतर / घरेलू मक्खी चलना और उड़ना पैर और पंख (Legs & Wings) मछली (Fish) तैरना फिन/पंख (Fins विभिन्न परिवेशों में पौधे और जीव विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट पादप अनुकूलन (Plant Adaptations) क्षेत्र / पौधा शारीरिक विशेषता अनुकूलन का कारण रेगिस्तान / कैक्टस तने मोटे और गूदेदार (Thick & Fleshy) होते हैं। पानी को स्टोर करने और अत्यधिक गर्मी को सहन करने के लिए। पहाड़ / देवदार शंकुधारी आकार (Conical) और ढलान वाली लचीली शाखाएं। बर्फबारी के दौरान बर्फ को आसानी से नीचे फिसलने देने के लिए। नीलगिरि (शोला वन) / रोडोडेंड्रोन ऊंचाई कम और पत्तियां छोटी होती हैं। पहाड़ों की चोटियों पर चलने वाली तेज हवाओं से बचने के लिए। सिक्किम के पहाड़ / रोडोडेंड्रोन अपेक्षाकृत अधिक लंबे पेड़। स्थानीय पर्वतीय परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए। ऊँटों में अनुकूलन: गर्म रेगिस्तान बनाम शीत मरुस्थल (Camel Adaptations) लक्षण (Features) गर्म रेगिस्तान का ऊँट (e.g., राजस्थान) शीत मरुस्थल का ऊँट (e.g., लद्दाख) पैर और खुर (Legs & Hooves) पैर लंबे और खुर चौड़े होते हैं ताकि रेतीली जमीन में धंसे बिना चल सकें। पैर छोटे होते हैं जो पहाड़ी और पथरीले क्षेत्रों में चलने में मदद करते हैं। कूबड़ (Hump) एक कूबड़ होता है, जिसमें भोजन/वसा जमा रहती है। दो कूबड़ होते हैं, जो सर्दियों के अंत में भोजन की कमी के कारण सिकुड़ जाते हैं। शरीर के बाल सामान्य बाल। सिर से गर्दन तक लंबे बाल होते हैं, जो अत्यधिक ठंड से बचाते हैं। जल संरक्षण कम मूत्र विसर्जन, सूखा गोबर, और पसीना न आना (Survive for many days)। शीत मरुस्थल के अनुसार अनुकूलित। आवास और अनुकूलन की बुनियादी परिभाषाएं NCERT Class 6, Ch-1 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 1: The Wonderful World of Science

NCERT Notes Class 6 science Chapter 1: The Wonderful World of Science के अंतर्गत प्रकृति के बुनियादी नियमों और दैनिक जीवन में छिपे वैज्ञानिक कारणों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, रसोईघर में होने वाले परिवर्तनों से लेकर सुदूर अंतरिक्ष की गगनचुंबी यात्राओं तक एक अटूट व्यावहारिक ताने-बाने में बंधा है। आज का यह वैज्ञानिक स्वरूप केवल तथ्यों और परिभाषाओं की कोई बंद किताब नहीं है, बल्कि निरंतर उठने वाले प्रश्नों, प्रयोगों की कसौटी और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण की वह बेजोड़ दास्तान है जिसने अज्ञानता के अंधकार को दूर कर मानव मस्तिष्क को एक नई चेतना प्रदान की है और वैश्विक पटल पर तार्किक प्रगति की एक अद्वितीय और शाश्वत पहचान बनाई है। विज्ञान क्या है?/What is Science? इस पुस्तक की मदद से हम क्या खोजेंगे? हम अपने सवालों के जवाब खुद कैसे खोजें? वैज्ञानिक पद्धति के 5 मुख्य चरण वैज्ञानिक कौन है? / Who is a Scientist? NCERT Class 6 (Ch-5) यहाँ पढ़ें

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10 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

10 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत-ऑस्ट्रेलिया PACTS साझेदारी, तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन 2026 की बड़ी उपलब्धियां, और कपड़ा क्षेत्र में MSMEs के विकास के लिए ITADCs व ATUFS योजना की विस्तृत। आंतरिक आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर, यह बुलेटिन केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय द्वारा ग्रामीण और लघु उद्योगों के विकास के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करता है, जिसके अंतर्गत पुराने पावरलूम सेंटर्स को अत्याधुनिक ‘एकीकृत कपड़ा और परिधान विकास केंद्रों’ (ITADCs) के रूप में बदलने और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने वाली ATUFS योजना के स्वतंत्र प्रभाव आकलन के शानदार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, SC-NBWL की 91वीं बैठक: विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन Why in News? (चर्चा में क्यों?) केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में तमिलनाडु के कोयंबटूर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) की 91वीं बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जहां एक ओर 100 से अधिक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई, वहीं दूसरी ओर देश की सबसे संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए गए। बैठक के प्रमुख नीतिगत निर्णय और रणनीतिक स्तंभ 1. समाधान-आधारित नीतिगत हस्तक्षेप बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन्यजीव संरक्षण केवल कानूनी दायरा नहीं बल्कि वैज्ञानिक नियोजन का हिस्सा होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख स्तंभों को एकीकृत करने की बात कही: 2. 100 से अधिक विकास परियोजनाओं की समीक्षा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत समिति ने देश भर के 100 से अधिक विकास प्रस्तावों का मूल्यांकन किया। 3. संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ बैठक के दौरान भारत की तीन सबसे महत्वपूर्ण और खतरे में पड़ी प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशिष्ट रोडमैप पर चर्चा की गई और वैज्ञानिक प्रकाशन जारी किए गए: प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य विशिष्ट संस्था / प्रजाति / प्रणाली महत्वपूर्ण तथ्य राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। भारत के प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं। NBWL की स्थायी समिति (SC-NBWL) इसकी अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री करते हैं। यही समिति व्यावहारिक रूप से वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास विकास परियोजनाओं को मंजूरी देती है। राइनो डीएनए इंडेक्सिंग (RhinoDGIS) यह गैंडों के डीएनए का एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने की तकनीक है, जिससे शिकार किए गए सींगों की फोरेंसिक जांच कर अपराधियों को पकड़ने में मदद मिलती है। पिग्मी हॉग वैज्ञानिक नाम: Porcula salvania। यह दुनिया का सबसे छोटा जंगली सुअर है जो मुख्य रूप से असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान के ऊंचे घास के मैदानों (Terai Grasslands) में पाया जाता है। IUCN स्थिति: Critically Endangered। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) यह राजस्थान का राज्य पक्षी है और मुख्य रूप से डेजर्ट नेशनल पार्क में पाया जाता है। IUCN स्थिति: Critically Endangered। यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है। प्रजाति सुधार कार्यक्रम (Species Recovery Programme) यह एकीकृत वन्यजीव आवास विकास (IDWH) योजना के तहत एक केंद्रीय घटक है, जिसके तहत अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने के लिए विशेष वित्तीय सहायता दी जाती है। भारत PACTS साझेदारी: साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन Why in News? (चर्चा में क्यों?) 9 जुलाई 2026 को भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को आगे बढ़ाते हुए ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन साझेदारी’ (PACTS) की घोषणा की है। यह नया समझौता वर्ष 2020 के पुराने फ्रेमवर्क व्यवस्था का स्थान लेगा और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में दोनों देशों की तकनीकी प्राथमिकताओं को एक नया रणनीतिक आयाम देगा। PACTS के तहत सहयोग के 5 प्रमुख स्तंभ यह साझेदारी सरकार, निजी क्षेत्र, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए निम्नलिखित पांच स्तंभों पर केंद्रित है: 1. आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और विविधीकरण 2. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी 3. साइबर सुरक्षा 4. डिजिटल लचीलापन 5. रक्षा अनुसंधान सहयोग गवर्नेंस और प्रशासनिक ढांचा इस साझेदारी की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत द्विपक्षीय संरचना तैयार की गई है: विभागीय नेतृत्व: स्तंभ भारतीय नेतृत्व ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व 1. सप्लाई चेन लचीलापन राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय 2. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय 3. साइबर सुरक्षा साइबर कूटनीति प्रभाग, विदेश मंत्रालय (MEA) साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय 4. डिजिटल लचीलापन ओशिनिया प्रभाग, विदेश मंत्रालय (MEA) साइबर मामलों और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के राजदूत का कार्यालय 5. रक्षा अनुसंधान रक्षा मंत्रालय (MoD) रक्षा विभाग (Department of Defence) प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष प्रमुख तथ्य महत्वपूर्ण शब्दावली प्रमुख तथ्य PACTS इसका पूरा नाम Australia-India Partnership on Cyber, Critical Technologies and Supply Chains है, जिसने 2020 के पुराने फ्रेमवर्क का स्थान लिया है। DPI (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) यह डिजिटल पहचान, भुगतान प्रणाली और डेटा विनिमय के खुले, इंटरऑपरेबल नेटवर्क को संदर्भित करता है। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसके विस्तार के लिए अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अंडरसी केबल्स महासागरों के तल पर बिछाई गई फाइबर-ऑप्टिक केबल जो दुनिया का 95% से अधिक इंटरनेट डेटा ट्रांसफर करती हैं। रणनीतिक रूप से यह बेहद संवेदनशील बुनियादी ढांचा है। क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे खनिज (जैसे कोबाल्ट, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स) जो आधुनिक तकनीक, ग्रीन एनर्जी और रक्षा उपकरणों के लिए अनिवार्य हैं, और जिनकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है। तीसरा भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन: रणनीतिक संबंधों को मिली नई ऊंचाई Why in News? (चर्चा में क्यों?) प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज द्वारा आयोजित तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह बैठक दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के सफल 6 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की और सुरक्षा से लेकर संस्कृति तक कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगाई। शिखर सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और द्विपक्षीय कूटनीति 1. आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी (CECA की दिशा में कदम) 2. रणनीतिक एवं बहुपक्षीय सहयोग 3. सांस्कृतिक पुरावशेषों की वापसी ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों द्वारा भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े

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India: Origin of Indian Territory for UPSC in Hindi

भारत – भारतीय क्षेत्र का उद्गम प्राचीन काल की सांस्कृतिक चेतना से लेकर आधुनिक संप्रभु राष्ट्र बनने तक के ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। औपनिवेशिक काल के खंडित राजनीतिक मानचित्र से मुक्त होकर, स्वतंत्रता के समय मौजूद 560 से अधिक रियासतों के भारत संघ में ऐतिहासिक विलय और मजबूत लौह संकल्प के साथ, इस महान देश ने अपनी भौगोलिक अखंडता को पुनः प्राप्त किया। भारतीय संविधान के भाग-1 और ऐतिहासिक राज्यों के पुनर्गठन अधिनियमों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह क्षेत्र, उत्तर में जम्मू-कश्मीर व लद्दाख से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी और सुदूर द्वीपों तक एक सुदृढ़ प्रशासनिक ताने-बाने में बंधा है। भारतीय भू-भाग की उत्पत्ति (Origin of Indian Territory) महाद्वीपीय विस्थापन और विभाजन (Continental Drift) क्रैटॉन और प्राचीन वलित-संरचनाएँ पश्चिमी घाट और दक्कन ट्रैप का निर्माण यूरेशियाई प्लेट से टक्कर और हिमालय की उत्पत्ति हिमालय की विभिन्न श्रेणियों की उत्पत्ति का कालक्रम निम्नवत है: विशाल मैदानों का निर्माण NCERT Class 6, Chapter-2 यहाँ पढ़ें;-

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India: Geological Structure for UPSC in Hindi

दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित भारत – भूवैज्ञानिक संरचना (India: Geological Structure) भारतवर्ष प्राचीन काल की भूवैज्ञानिक उथल-पुथल से लेकर आधुनिक स्थलाकृतियों के निर्माण तक के क्रमिक और जटिल विवर्तनिक (Tectonic) विकास का एक अनूठा उदाहरण है। प्रागैतिहासिक काल के पैंजिया के विखंडन और गोंदवानालैंड के उत्तरमुखी प्रवाह के साथ, इस महान भूभाग ने प्राचीनतम स्थिर प्रायद्वीपीय पठार, नवीन वलित हिमालय पर्वत श्रेणियों और विशाल सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानी भागों के रूप में अपनी भौगोलिक अखंडता को प्राप्त किया। भारतीय भू-गर्भिक संरचना (India: Geological Structure) पृथ्वी के भू-गर्भिक इतिहास को 5 प्रमुख कल्पों (ERA) में विभाजित किया गया है। ये कल्प पुनः क्रमिक रूप से युगों (EPOCH) में व्यवस्थित किये गये हैं। प्रत्येक युग पुनः कई उपविभागों में, जिन्हें शक (Period) कहा जाता है, में बंटा है। प्रत्येक शक की कालअवधि निर्धारित की गयी है तथा जीवों और वनस्पतियों के विकास पर भी प्रकाश डाला गया है। भूगर्भिक काल एवं घटनाएँ महाकल्प कल्प (Period) युग (Epoch) आयु/आधुनिक वर्ष पहले (Age/Years before Present) जीवन/मुख्य घटनाएँ (Life/Major events) नवीनतम नवजीवन (Cenozoic) आज से 6.5 करोड़ वर्ष पहले चतुर्थ (Quaternary) अभिनवअत्यंत नूतन 0 से 10,00010,000 से 20 लाख वर्ष आधुनिक मानवआदिमानव (Homo Sapiens)आरंभिक मनुष्य के पूर्वज तृतीयक (Tertiary) अतिनूतनअल्पनूतनअधिनूतनआदिनूतनपुरानूतन 20 लाख से 50 लाख50 लाख से 2.4 करोड़2.4 करोड़ से 3.7 करोड़3.7 करोड़ से 5.8 करोड़5.8 करोड़ से 6.5 करोड़ वनमानुष, फूल वाले पौधे और वृक्षमनुष्य से मिलता-जुलता वनमानुष जंतुस्तनपायीखरगोश (Rabbit)छोटे-स्तनपायी-चूहे आदि। मध्यजीवी (Mesozoic) 6.5 करोड़ से 24.5 करोड़ वर्ष पहले क्रिटेशियसजुरेसिकट्रियासिक 6.5 करोड़ से 14.4 करोड़14.4 करोड़ से 20.8 करोड़20.8 करोड़ से 24.5 करोड़ वर्ष डायनासोर का विलुप्त होना।डायनासोर का युगमेंढ़क व समुद्री कछुआ पुराजीव (24.5 करोड़ वर्ष से 57.0 करोड़ वर्ष पहले) पर्मियन कार्बोनिफेरस डेवोनियनप्रवालविद/सिलुरियन ऑडोविशियन कैम्ब्रियन 24.5 करोड़ से 28.6 करोड़ वर्ष 28.6 करोड़ से 36.0 करोड़ 36.0 करोड़ से 40.8 करोड़ वर्ष40.8 करोड़ से 43.8 करोड़ 43.8 से 50.5 करोड़ वर्ष 50.5 करोड़ से 57.0 करोड़ वर्ष रेंगने वाले जीवों की अधिकता, जलस्थलचरपहले रेंगने वाले जंतु, रीढ़ की हड्डी वाले पहले जीव।स्थल व जल पर रहने वाले जीवस्थल पर जीवन के प्रथम चिह्न-पौधेपहली मछलीस्थल पर कोई जीवन नहीं, जल में बिना रीढ़ की हड्डी वाले जीव प्राचीनतम प्री-कैम्ब्रियन (57 करोड़ से 4 अरब 80 करोड़ वर्ष पहले) 57 करोड़ से 2.50 अरब वर्ष2.5 अरब से 3.8 अरब वर्ष 3.8 अरब से 4.8 अरब वर्ष पहले 5 अरब वर्ष पहले5 अरब से 13.7 अरब वर्ष पहले12 अरब वर्ष पहले13.8 अरब वर्ष पहले भारतीय चट्टानों का वर्गीकरण भारत में सभी भू-वैज्ञानिक कालों में निर्मित चट्टानें पाई जाती हैं, इसलिए भारत की भू-गर्भीय संरचना विविधता पूर्ण है, इसी विविधता के फलस्वरूप प्राकृतिक संसाधनों (खनिज पदार्थ, वनस्पतियाँ इत्यादि) में भी विविधता पायी जाती है। भू-वैज्ञानिक इतिहास के आधार पर भारतीय भू-भाग की चट्टानों को उनके निर्माण क्रम (प्राचीन से नवीन) के अनुसार क्रमशः वर्गीकृत किया गया है: 1. आर्कियन क्रम की चट्टानें 2. धारवाड़ क्रम की चट्टानें 3. कुडप्पा क्रम की चट्टानें 4. विंध्यन क्रम की चट्टानें 5. गोंडवाना क्रम की चट्टानें 6. दक्कन ट्रैप 7. टर्शियरी क्रम की चट्टानें 8. क्वार्टनरी (नवजीव) क्रम की चट्टानें भारत में हिमयुग भारत में घटित ज्वालामुखी क्रियाएँ एवं क्षेत्र भारत में सर्वप्रथम ज्वालामुखी क्रिया धारवाड़ युग में हुई। उसके बाद कुडप्पा, विंध्यन, पैल्योजोइक, कार्बोनीफेरस, मेसोजोइक के अन्त तथा टर्शियरी के प्रारम्भ में हुई। भारत के छः क्षेत्रों में ज्वालामुखी क्रिया हुई— NCERT Class 6, Ch-4 यहाँ पढ़ें:-

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9 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

9 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत-ऑस्ट्रेलिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) फोरम, हाई-सीज़ (High Seas) मत्स्यपालन के लिए प्राधिकरण पत्र (LoA), भुवनेश्वर घोषणापत्र (TRIs का कायाकल्प), उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE रिपोर्ट), ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक और रक्षा क्षेत्र में पिनाका रॉकेट प्रणाली के नए मील के पत्थर जैसे महत्वपूर्ण विषयों को यूपीएससी पाठ्यक्रम (UPSC Syllabus) के अनुसार विश्लेषित किया गया है। वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए डेटा सृजन और सुलभता को मजबूत करना Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 8 जुलाई 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने नई दिल्ली के पूसा (PUSA) परिसर में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक का आयोजन किया है। इस परामर्श का मुख्य विषय “भारत के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में कुशल परियोजना योजना और कार्यान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा सृजन और प्रसार: बाधाओं को दूर करने की चुनौतियों का समाधान” था। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य राज्यों के कृषि विभागों की वास्तविक डेटा आवश्यकताओं को समझना और गुणवत्तापूर्ण डेटा की कमी से पैदा होने वाली जमीनी बाधाओं को दूर करना है। भारत का लगभग 50% से अधिक कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है, जहाँ बिना सटीक डेटा के किसी भी कल्याणकारी योजना का सफल होना असंभव है: वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा की आवश्यकता क्यों? डेटा सृजन और साझाकरण की संस्थागत व्यवस्था इस राष्ट्रीय परामर्श के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिसमें देश के प्रमुख अनुसंधान संगठनों ने अपने डेटाबेस और चुनौतियों को प्रस्तुत किया: प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य संगठन / संस्थान महत्वपूर्ण तथ्य NRAA (राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण) यह केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक विशेषज्ञ निकाय है, जो देश के शुष्क और वर्षा आधारित क्षेत्रों के सतत विकास के लिए नीतियां बनाता है। क्रिडा केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, जो हैदराबाद में स्थित है और बारानी (Dryland) खेती पर शोध करता है। NBSSLUP राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग योजना ब्यूरो, जो भारत की मृदा आनुवंशिकी और भूमि क्षमता का मानचित्रण करता है। MNCFC महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र, जो कृषि में रिमोट सेंसिंग और उपग्रह डेटा के उपयोग को बढ़ावा देता है। भुवनेश्वर घोषणापत्र — जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) का कायाकल्प Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 7-8 जुलाई 2026 को जनजातीय मामलों के मंत्रालय और ओडिशा सरकार द्वारा भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन ऐतिहासिक ‘भुवनेश्वर घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (Tribal Research Institutes – TRIs) की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना और उन्हें ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policymaking) के केंद्रों के रूप में विकसित करना है। भुवनेश्वर घोषणापत्र के प्रमुख बिंदु कार्यशाला के रणनीतिक सत्र सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संस्थान कार्यशाला में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और उत्कृष्ट शोध के लिए देश के 7 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले TRIs को सम्मानित किया गया: राज्य पुरस्कृत जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) छत्तीसगढ़ जनजातीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) ओडिशा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (SCSTRTI) त्रिपुरा जनजातीय अनुसंधान और सांस्कृतिक संस्थान (TRCI) महाराष्ट्र जनजातीय अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) केरल किर्टाड्स (KIRTADS – केरल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति जनजातीय अनुसंधान संस्थान) तेलंगाना जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (TCRTI) झारखंड डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान माउंटेन ख्याम त्सो मैसिफ पर सफल पर्वतारोहण अभियान Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 8 जुलाई 2026 को रक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (JIM & WS), पहलगाम के 22 सदस्यीय दल ने लद्दाख के सुदूर रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित माउंट ख्याम त्सो मैसिफ पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की है। कर्नल हेम चंद्र सिंह के नेतृत्व में 26 जून 2026 को शुरू हुए इस अभियान ने न केवल दुर्गम चोटियों को फतह किया, बल्कि इस क्षेत्र में साहसिक खेलों के मामले में कुछ नए रिकॉर्ड भी स्थापित किए हैं। अभियान की मुख्य उपलब्धियां और भौगोलिक तथ्य अत्यंत प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करते हुए इस दल ने एक ही श्रृंखला (Massif) की कई चोटियों पर तिरंगा फहराया: मैसिफ क्या होता है?: भूगोल में ‘मैसिफ’ पहाड़ों के उस समूह या ब्लॉक को कहा जाता है, जो अपनी ही श्रृंखला में आसपास की चोटियों से बहुत अधिक स्पष्ट और ऊंचा होता है। यह आपस में जुड़ी कई चोटियों का एक दुर्गम समूह होता है। संस्थान की पृष्ठभूमि: JIM & WS प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य भौगोलिक स्थल / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य ख्याम त्सो मैसिफ यह लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के रुमत्से फू क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत दुर्गम और अल्प-अन्वेषित (Unexplored) पर्वत श्रृंखला है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड लद्दाख की किसी चोटी पर 5600 मीटर की ऊंचाई से पहली बार पैराग्लाइडिंग की सफल लॉन्चिंग की गई। JIM & WS रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाला शीतकालीन खेल और पर्वतारोहण संस्थान (पहलगाम)। ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक 2026 — वैश्विक मंच पर महिला-नेतृत्व वाला पंचायती राज Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 8 जुलाई 2026 को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत केरल के कोच्चि में ‘ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक’ का आयोजन किया गया। इस बैठक के दौरान पंचायती राज मंत्रालय ने “जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाना” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इसमें भारत ने दुनिया के सामने अपने ‘महिला-नेतृत्व वाले पंचायती राज’ को समावेशी और लोकतांत्रिक शासन के एक वैश्विक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। भारतीय स्थानीय स्वशासन में महिला सशक्तिकरण के प्रमुख स्तंभ मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं: 1. वास्तविक नेतृत्व और राष्ट्रीय पुरस्कारों में पहचान 2. सशक्त पंचायत नेत्री अभियान 3. मॉडल वीमेन-फ्रेंडली ग्राम पंचायत 4. सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का स्थानीयकरण और PAI प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य योजना / सूचकांक / बैठक महत्वपूर्ण तथ्य BRICS महिला मंत्रिस्तरीय बैठक 2026 इसका आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत केरल के कोच्चि में किया गया। सशक्त पंचायत नेत्री अभियान मार्च

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8 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

8 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की डिजिटल कूटनीति की बड़ी सफलता के रूप में भारत के ONDC मॉडल पर आधारित इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) की शुरुआत, प्रधानमंत्री को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंतंग अदिपूर्णा’, शिक्षा मंत्रालय की ऐतिहासिक UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट, राज्यों व जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0 और PGI-D) का विमोचन, तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक पहचान दिलाने वाली मिजोरम के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम को भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी घोषित किए जाने की अधिसूचना। कामराजार पोर्ट बना 18-मीटर ड्राफ्ट क्षमता वाला देश का दूसरा प्रमुख बंदरगाह Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 7 जुलाई 2026 को पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, कामराजार पोर्ट लिमिटेड (KPL) ने अपने ‘कैपिटल ड्रेजिंग चरण-VI’ (Capital Dredging Phase VI) प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस विकास के साथ ही यह बंदरगाह अब 18.0 मीटर के परिचालन ड्राफ्ट (Operational Draft) की क्षमता हासिल करने वाला विशाखापत्तनम पोर्ट के बाद देश का दूसरा ‘मेजर पोर्ट’ बन गया है। प्रोजेक्ट के मुख्य वित्तीय और तकनीकी घटक बंदरगाह की परिचालन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं: रणनीतिक और आर्थिक महत्व (Economic & Strategic Impacts) यह परियोजना ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है: प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य बंदरगाह / घटक महत्वपूर्ण तथ्य कामराजार पोर्ट यह तमिलनाडु के चेन्नई (एन्नोर) में स्थित है. यह भारत का पहला कॉरपोरेटाइज्ड मेजर पोर्ट (कंपनी के रूप में पंजीकृत सरकारी बंदरगाह) है। 18-मीटर ड्राफ्ट वाले भारत के मेजर पोर्ट पहला: विशाखापत्तनम पोर्ट (आंध्र प्रदेश), दूसरा: कामराजार पोर्ट (तमिलनाडु)। Capesize Vessels ये वे बहुत बड़े मालवाहक जहाज होते हैं जो स्वेज या पनामा नहरों से नहीं गुजर सकते और उन्हें ‘केप ऑफ गुड होप’ या ‘केप हॉर्न’ से होकर जाना पड़ता है. इनके लिए गहरा ड्राफ्ट (कम से कम 18 मीटर) अनिवार्य होता है। डेडवेट टनेज (DWT) यह किसी जहाज की कुल सुरक्षित वजन उठाने की क्षमता (कार्गो, ईंधन, चालक दल आदि सहित) का माप है। कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) — भारतीय कपड़ा क्षेत्र में नई क्रांति Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन को कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति) की प्रगति और रूपरेखा के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उपराष्ट्रपति ने इस मिशन के समग्र दृष्टिकोण की सराहना करते हुए नई तकनीकों को तेजी से अपनाने और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया। मिशन के तीन सबसे महत्वपूर्ण घटक मिशन की रणनीतिक आवश्यकता और मुख्य एजेंडा प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य संगठन / पहल महत्वपूर्ण तथ्य मिशन का नाम कपास उत्पादकता मिशन (कपास कांति)। संबंधित मंत्रालय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त पहल। कस्तूरी कॉटन भारतीय कपास की ब्रांडिंग, ट्रेसेबिलिटी और प्रीमियम गुणवत्ता प्रमाणन के लिए भारत सरकार की फ्लैगशिप पहल। किसान कपास ऐप कपास किसानों की बाजार तक पहुंच और डिजिटल सहायता सुनिश्चित करने वाला ऐप। राज्यों और जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0 और PGI-D) रिपोर्ट 2025-26 Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 7 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 (PGI-S) और जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D) की संयुक्त रिपोर्ट (वर्ष 2025-26) जारी की है. भारत की विशाल स्कूली शिक्षा प्रणाली (14.67 लाख से अधिक स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और लगभग 24.72 करोड़ छात्र) की गुणवत्ता और प्रशासनिक कमियों को ट्रैक करने के लिए यह रिपोर्ट एक मार्गदर्शक का काम करती है। परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-S 2.0): राज्यों की ग्रेडिंग PGI-S का मुख्य उद्देश्य राज्यों को रैंक देने के बजाय उन्हें ‘समान प्रदर्शन बैंड’ या ग्रेड में रखकर एक स्वस्थ और रचनात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D) राज्यों के बाद शासन की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई यानी जिला स्तर पर शिक्षा की वास्तविक स्थिति को मापने के लिए शिक्षा मंत्रालय PGI-D सूचकांक जारी करता है. इसका मुख्य फोकस शैक्षिक नीतियों के परिणाम आधारित मापन (Outcome Measurement) पर है। प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य सूचकांक / घटक महत्वपूर्ण तथ्य नोडल मंत्रालय केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग)। PGI-S 2.0 (राज्यों के लिए) कुल 1000 अंक, 2 मुख्य श्रेणियां और 6 डोमेन पर आधारित। PGI-D (जिलों के लिए) कुल 600 अंक, 6 श्रेणियां और 11 डोमेन पर आधारित। मुख्य डेटा प्रदाता UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) और परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024। मिजोरम का नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम बना भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 7 जुलाई 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत ‘नामित रिपोजिटरी’ (Designated Repository) घोषित किया गया है. 19 जून 2026 को जारी इस आधिकारिक अधिसूचना के बाद यह म्यूजियम भारत का 21वां नामित रिपोजिटरी बन गया है, जो उत्तर-पूर्वी भारत की समृद्ध जैविक संपदा के संरक्षण में एक बड़ा मील का पत्थर है। नामित रिपोजिटरी (Designated Repository) क्या है और इसका महत्व? भारत के जैव विविधता शासन ढांचे (Biodiversity Governance Framework) में इनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण होता है: मिजोरम नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) की विशेषताएं वैश्विक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जुड़ाव प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य 21वां नामित रिपोजिटरी नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM), मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल। वैधानिक प्रावधान जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित (राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण – NBA की सिफारिश पर)। Leptobrachella tamdil मिजोरम में खोजी गई एक स्थानिक उभयचर (Amphibian) प्रजाति। बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट मिजोरम भारत के इंडो-बर्मा हॉटस्पॉट का हिस्सा है। Ex-situ Conservation जीवों या वनस्पतियों को उनके प्राकृतिक आवास से दूर (जैसे म्यूजियम, जीन बैंक,

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NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 14: Economic Activities Around Us

NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 14: Economic Activities Around Us के अंतर्गत आर्थिक गतिविधियों को प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक जैसे मुख्य क्षेत्रों में वर्गीकृत करना सिखाता है, जिसमें प्रकृति से सीधे जुड़े कार्यों से लेकर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र तक की पूरी कतार शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आजीविका के बदलते स्वरूपों और विभिन्न व्यवसायों की परस्पर निर्भरता पर भी प्रकाश डालता है। एक भावी प्रशासनिक अधिकारी के लिए देश के आर्थिक ताने-बाने, रोजगार सृजन और समावेशी विकास को जमीनी स्तर से समझने के लिए इस अध्याय का अध्ययन बेहद अनिवार्य है। प्रस्तावना (Introduction) आर्थिक गतिविधियों का ऐतिहासिक क्रमिक विकास आर्थिक क्षेत्रकों में आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण (The Classification of Economic Activities into Economic Sectors) a. प्राथमिक गतिविधियाँ (Primary activities) b. द्वितीयक गतिविधियाँ (Secondary activities) c. तृतीयक गतिविधियाँ (Tertiary activities) क्षेत्रक (Sector) फोकस विशिष्ट उदाहरण Primary / प्राथमिक क्षेत्र प्रकृति से सीधे दोहन ग्रीनहाउस फार्मिंग, फिशरी, माइनिंग, फॉरेस्ट्री, लाइवस्टॉक। Secondary / द्वितीयक क्षेत्र मूल्य संवर्धन और विनिर्माण आटा मिल, स्टील से ऑटोमोबाइल, रोड/बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, बिजली उत्पादन। Tertiary / तृतीयक क्षेत्र (सेवा) सेवा और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, banking, वेयरहाउसिंग, मैकेनिक/तकनीशियन, ट्रांसपोर्ट। क्षेत्रकों में परस्पर निर्भरता (Interdependence Among Sectors) डेयरी सहकारी समिति: खेत से थाली तक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और चुनौतियाँ सहकारिता आंदोलन का उदय विकास और आधुनिकीकरण AMUL के माध्यम से तीनों आर्थिक क्षेत्रकों का लाइव लिंकेज मुख्य परीक्षा हेतु आर्थिक चरण (Economic Stage) अमूल मॉडल में भूमिका आर्थिक क्षेत्रक (Economic Sector) कच्चा माल संग्रहण ग्रामीण किसानों द्वारा दुग्ध उत्पादन (पशुपालन)। Primary Sector (प्राथमिक) मूल्य संवर्धन (Value Addition) प्लांट/फैक्ट्री में पाश्चुरीकरण, घी-पनीर का निर्माण। Secondary Sector (द्वितीयक) बाज़ार संयोजन (Market Linkage) कोल्ड चेन, ट्रक/रेलवे परिवहन, रिटेल चेन, वैश्विक निर्यात। Tertiary Sector (तृतीयक/सेवा)CC Chapter – 12 यहाँ पढ़ें:-

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