4 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf
4 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में सिंचाई व जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना, देश के स्वच्छ ऊर्जा परिदृश्य को नई दिशा देने वाली प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY), GI & Beyond 2.0 समिट, पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्लो लेक के रूप में अरुणाचल प्रदेश को मिले पहले रामसर स्थल, जलवायु अनुकूल शहरों और शहरी लू से निपटने के नीतिगत ढाँचे, ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय महिला एथलीटों के ऐतिहासिक प्रदर्शन, सड़क सुरक्षा को आधुनिक बनाने वाली वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली व केंद्रीय मोटर वाहन नियमों, तथा देश के सुदूर क्षेत्रों तक सार्वभौमिक बैंकिंग कवरेज और वित्तीय समावेशन के विस्तार का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना चर्चा में क्यों? केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में स्थित उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय के उपक्रम WAPCOS लिमिटेड के अधिकारियों के साथ परियोजना की चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति पर चर्चा की। दशकों से लंबित इस राष्ट्रीय परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य एक साथ चलाए जाएंगे। शाहपुरकंडी परियोजना के बाद उझ परियोजना का पुनरुद्धार रावी नदी के जल का भारत के हित में पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्य बिंदु: परियोजना का दायरा, सुरक्षा पहलू और जल संसाधन उपयोग 1. परियोजना का स्थान और बिजली उत्पादन 2. सिंचाई और पेयजल लाभ 3. रावी नदी जल का पूर्ण दोहन 4. सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर रोक प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य परियोजना का नाम उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना। संबंधित नदी उझ नदी (रावी नदी की प्रमुख सहायक नदी)। मुख्य स्थान कठुआ जिला, जम्मू-कश्मीर। बिजली उत्पादन क्षमता 186 MW से 212 MW। सिंचाई क्षमता ~90,000 हेक्टेयर (J&K के कठुआ, सांबा + पंजाब के पठानकोट, गुरदासपुर)। कार्यान्वयन एजेंसी WAPCOS लिमिटेड (जल शक्ति मंत्रालय का सार्वजनिक उपक्रम)। प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) एवं भारत का सौर ऊर्जा परिदृश्य चर्चा में क्यों? केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को ₹5,070 करोड़ के कुल बजटीय आवंटन के साथ ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ (PM-SSY) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाने वाली यह योजना देश में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इसमें न्यूनतम 2 घंटे की बैकअप क्षमता वाले ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) को जोड़ा जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भूमि संसाधनों पर दबाव डाले बिना जलाशयों का उपयोग करना और राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करना है। मुख्य बिंदु: रणनीतिक स्तंभ, नीतिगत ढांचा और वैश्विक प्रभाव 1. प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) के प्रमुख घटक 2. भारत का सौर ऊर्जा विस्तार (अद्यतन आंकड़े) 3. प्रमुख सरकारी योजनाएं एवं नीतियां 4. वैश्विक नेतृत्व एवं सहयोग प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य योजना का नाम प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)। लक्ष्य व बजट 5,000 MW फ्लोटिंग सोलर + 10,000 MWh ESS (बजट: ₹5,070 करोड़)। CFA (वित्तीय सहायता) ₹1 करोड़ प्रति MW (सफल कमीशनिंग पर) + ₹50 लाख तक सम्भाव्यता अध्ययन हेतु। कुल गैर-जीवाश्म क्षमता 283.46 GW (जून 2026 तक)। RPO लक्ष्य (2026-27) 35.95% (नवीकरणीय खरीद बाध्यता)। विश्व का सबसे बड़ा सोलर कॉम्प्लेक्स भादला सोलर पार्क, राजस्थान (2,245 MW)। GI & Beyond 2.0 समिट: भारतीय हथकरघा और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान चर्चा में क्यों? कपड़ा मंत्रालय का विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय और ‘हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद’ (HEPC) मिलकर 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में “GI & Beyond 2.0 Summit” का आयोजन कर रहे हैं। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के भौगोलिक संकेत (GI) प्राप्त हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देना तथा हितधारकों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। मुख्य बिंदु: डिजिटल एटलस, तकनीक और वैश्विक बाजार रणनीति 1. सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और लॉन्च 2. 100+ GI उत्पादों की प्रदर्शनी और लाइव प्रदर्शन 3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी सत्र प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य कार्यक्रम का नाम GI & Beyond 2.0 Summit (5 अगस्त 2026, नई दिल्ली)। आयोजक संस्थाएं विकास आयुक्त (हथकरघा), कपड़ा मंत्रालय + HEPC (हथकरघा निर्यात संवर्धन परिषद)। मुख्य डिजिटल पहल डिजिटल हैंडलूम एटलस (“One Platform. Endless Markets”)। तकनीकी भागीदार IIT मद्रास (GI इकोसिस्टम में AI का उपयोग)। GI के नियामक अधिकारी एकस्व, अभिकल्प और व्यापार चिन्ह महानियंत्रक (CGPDTM)। HEPC की उपलब्धि 60 वर्ष पूरे (डायमंड जुबली लोगो का अनावरण)। ग्लो लेक: अरुणाचल प्रदेश को मिला पहला रामसर स्थल चर्चा में क्यों? केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरुणाचल प्रदेश की ग्लो लेक को भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित किया है। यह उपलब्धि राज्य के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों में एक नया मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि ग्लो लेक अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा प्राप्त करने वाला अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल बन गया है। इसके साथ ही भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 101 हो गई है, जो 2014 के 26 स्थलों की तुलना में देश की सतत जल सुरक्षा और आर्द्रभूमि संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुख्य बिंदु: भौगोलिक स्थिति, जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व 1. भौगोलिक स्थिति और अवस्थिति 2. समृद्ध वनस्पति और जैव विविधता 3. भारत का रामसर नेटवर्क: 2014 से 2026 तक की यात्रा प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य नया रामसर स्थल ग्लो लेक (Glaw Lake)। राज्य अरुणाचल प्रदेश (राज्य का पहला रामसर स्थल)। संबंधित संरक्षित क्षेत्र कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभ्यारण्य। भारत में कुल रामसर स्थल 101 (अगस्त 2026 तक)। प्रकृति ताजे पानी की पहाड़ी झील (Freshwater Lake)। प्रमुख वनस्पति 150+ वृक्ष प्रजातियां, 49 आर्किड प्रजातियां। जलवायु अनुकूल शहर एवं शहरी लू चर्चा में क्यों? आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्य सभा में जलवायु-अनुकूल शहरों के निर्माण और शहरी हीटवेव से निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची के तहत शहरी नियोजन राज्य सरकारों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के अधिकार क्षेत्र में आता है। केंद्र सरकार दिशा-निर्देशों, तकनीकी सलाह और वित्तीय सहायता के माध्यम से