Give The Best…..Take The Best

Blog

Your blog category

Blog

Solar System Notes in Hindi Pdf

ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में स्थित हमारा Solar System (सौरमंडल) विभिन्न ग्रहों, उपग्रहों, धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों का एक गतिशील परिवार है, जिसके केंद्र में सूर्य अवस्थित है। संपूर्ण सौरमंडल को ऊर्जा और प्रकाश प्रदान करने वाला सूर्य वास्तव में नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया पर आधारित एक विशाल तारा है। प्रकाशमंडल और कोरोना जैसी जटिल परतों से निर्मित सूर्य की सतह न केवल अंतरिक्ष में सौर ज्वालाओं और ध्रुवीय प्रकाश (ओरोरा) को जन्म देती है, बल्कि इसके ‘सौर कलंक’ (Sunspots) पृथ्वी के बेतार संचार तंत्र को भी सीधे प्रभावित करते हैं। सौरमंडल का परिचय सूर्य की आंतरिक एवं बाह्य संरचना (A) रासायनिक संघटन रासायनिक संगठन के आधार पर सूर्य में निम्नलिखित तत्व विद्यमान हैं: (B) प्रकाशमंडल (Photosphere) (C) कोरोना (Corona) सूर्य : महत्त्वपूर्ण तथ्य (सारणी) विषय / विशेषता विवरण / डेटा पृथ्वी से न्यूनतम दूरी 14.70 करोड़ किमी. पृथ्वी से अधिकतम दूरी 15.21 करोड़ किमी. व्यास 13,92,000 किलोमीटर क्रोड (Core) का तापमान 15-20 मिलियन °C प्रकाश मंडल का तापमान 6000 °C (लगभग) सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में लगा समय 8 मिनट 20 सेकेंड सूर्य के प्रकाश की चाल 3 लाख किमी. प्रति सेकण्ड संभावित आयु 5 बिलियन वर्ष (लगभग) सामान्य तारे का संभावित जीवन काल 10 बिलियन वर्ष (लगभग) घूर्णन अवधि 25.38 दिन (विषुवत रेखा के सापेक्ष)33 दिन (ध्रुवों के सापेक्ष) सौर ज्वाला (Solar Flares) एवं ध्रुवीय प्रकाश सौर कलंक (Sunspots) एवं ‘रेडियो फेड आउट’

Blog

Star Formation: Stages of Stellar Evolution and Life Cycle Notes in Hindi pdf

Star Formation: Stages of Stellar Evolution and Life Cycle गैसों के बादलों से ‘आद्य तारा’ (Proto Star) बनने की प्रक्रिया से शुरू होकर, नाभिकीय संलयन के संतुलन, रक्त दानव (Red Giant) अवस्था और अंततः सुपरनोवा विस्फोट के बाद द्रव्यमान के आधार पर श्वेत वामन या न्यूट्रॉन तारा बनने तक का सफर, खगोल विज्ञान का एक अद्भुत और विस्मयकारी अध्याय है। तारे की परिभाषा एवं प्रारंभिक विकास (आद्य तारा) तारे के विकास की मुख्य अवस्थाएँ एवं जीवन चक्र (A) मुख्य/साम्य अवस्था (B) रक्त दानव अवस्था (Red Giants) (C) सुपरनोवा विस्फोट (Supernova) सुपरनोवा विस्फोट के बाद तारे का भविष्य (चंद्रशेखर सीमा) सुपरनोवा विस्फोट के पश्चात् तारे का भविष्य उसके बचे हुए द्रव्यमान पर निर्भर करता है, जिसे दो भागों में समझा जा सकता है (जहाँ Ms = सूर्य का द्रव्यमान / Mass of Sun है): स्थिति 1: यदि द्रव्यमान 1.4 Ms से कम हो स्थिति 2: यदि द्रव्यमान 1.4 Ms से अधिक हो प्रमुख तारे एवं उनकी विशेषताएँ चन्द्रशेखर सीमा ब्लैक होल (कृष्ण विवर)

Blog

India: A General Introduction Notes in Hindi pdf

दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित India: A General Introduction (भारत: एक सामान्य परिचय) विश्व की सबसे प्राचीन, जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध विविधताओं का देश है। उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में चतुष्कोणीय आकार में फैला भारत, उत्तर में हिमालय की गगनचुंबी श्रेणियों से लेकर दक्षिण में हिन्द महासागर के विस्तृत जलक्षेत्र तक फैला है। 32,87,263 वर्ग किमी क्षेत्रफल और अनूठे भू-आकृतिक प्रदेशों (मैदान, पठार, मरुस्थल, पर्वत और द्वीप समूह) के साथ, यह महान देश अपनी भौगोलिक संप्रभुता, समृद्ध जैव-संपदा और बेजोड़ जनसांख्यिकीय ताने-बाने के कारण वैश्विक पटल पर ‘भारतीय उपमहाद्वीप’ के रूप में अपनी एक अद्वितीय पहचान रखता है। भारत : एक सामान्य परिचय (India: A General Introduction) उत्तर यत समुदस्य, हिमादेश्चैव दक्षिणं। वर्ष तद् भारतं, नाम भारती यत्र संततिः “अर्थात् समुद्र के उत्तर में और हिमालय के दक्षिण में जो देश स्थित हैं उसका नाम भारत है और उसकी संतानें यानी उसके निवासी भारतीय कहे जाते हैं।” — विष्णु पुराण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भौगोलिक अवस्थिति एवं उपमहाद्वीप अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार कर्क रेखा (Standard Latitude) भारतीय मानक समय (Indian Standard Time – I.S.T.) समय का अंतराल (Time Difference) मानक याम्योत्तर के पूरक तथ्य विस्तार एवं आकार भारत के सीमा बिन्दु एवं दूरस्थ बिंदु भारत के अंतिम सीमा बिंदु निम्नवत हैं: सीमा रेखाओं की लंबाई भारत के समुद्री तटीय राज्य/संघ शासित प्रदेश क्र. राज्य/संघ तट रेखा (किमी.) 1. अण्डमान निकोबार द्वीप 1962.00 2. गुजरात 1214.70 3. आंध्र प्रदेश 973.70 4. तमिलनाडु 960.90 5. महाराष्ट्र 952.60 6. केरल 569.70 7. ओडिशा 476.70 8. कर्नाटक 208.00 9. पश्चिम बंगाल 157.50 10. लक्षद्वीप 132.00 11. गोवा 101.00 12. पुडुचेरी 47.60 13. दमन एवं दीव 42.50 कुल 7516.6 भारत की स्थलीय सीमा एवं पड़ोसी देश महत्वपूर्ण सीमा रेखाएँ पाक अधिकृत कश्मीर (POK) की पृष्ठभूमि भारत : पड़ोसी राष्ट्रों के साथ सीमा क्र.सं. देश सीमा की लंबाई (किमी. में) अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे हुए राज्य 1. भारत-बांग्लादेश 4,097.7 पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम 2. भारत-चीन 3,488 लद्दाख, Himachal प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश। 3. भारत-पाकिस्तान 3,323 जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, राजस्थान, गुजरात। 4. भारत-नेपाल 1,751 उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम। 5. भारत-म्यांमार 1643 अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम 6. भारत-भूटान 699 सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरूणाचल प्रदेश 7. भारत-अफगानिस्तान 106 लद्दाख भारत की जलीय सीमा समुद्री सीमा क्षेत्र (Maritime Zones) द्वीप समूह (Island Groups) 1. अण्डमान निकोबार द्वीप समूह 2. लक्षद्वीप समूह भारत की भौगोलिक संरचना (Physical Structure) भारत की मुख्य भूमि चार भागों में वर्गीकृत है: विस्तृत पर्वतीय प्रदेश, सिंधु और गंगा के मैदान, रेगिस्तान क्षेत्र और दक्षिणी प्रायद्वीप। 1. उत्तर का पर्वतीय प्रदेश (हिमालय) 2. गंगा-सिंधु का मैदान 3. रेगिस्तानी क्षेत्र रेगिस्तानी क्षेत्र को दो भागों में बाँटा जा सकता है: 4. दक्षिण प्रायद्वीप का पठार भारत की भूगर्भीय संरचना भारत की भूगर्भीय संरचना को 3 भागों में बांटा गया है, ये क्षेत्र भौगोलिक संरचना का अनुसरण करते हैं: नदी प्रणालियाँ (River Systems) भारत की नदी प्रणालियों को चार समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है: भारत की जलवायु/ऋतुएँ (Climate & Seasons) भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चार आधिकारिक ऋतुएँ निर्दिष्ट की हैं: विशेष नोट: हिमालयी क्षेत्र में अधिक समशीतोष्ण होने के कारण 2 अतिरिक्त ऋतुएँ (पतझड़ और बसंत) हैं। जैव संपदा : वनस्पति (Bio-Wealth & Vegetation) संरक्षित क्षेत्रों का सांख्यिकीय डेटा (Statics of Protected Areas): देश में अप्रैल 2019 तक का डेटा निम्न प्रकार है: भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2021 (India State of Forest Report) जैविक हॉट-स्पॉट (Biological Hot-Spots) वानस्पतिक भिन्नता को ध्यान में रखकर भारत में चार क्षेत्र प्रधान हैं। जिन्हें उनकी विविधता के कारण जैविक हॉट स्पॉट में भी शामिल किया गया है: भारतीय कृषि (Indian Agriculture) भारतीय संस्कृति (Indian Culture) भारत की जनसांख्यिकी (Demographics of India) राजनीतिक संरचना (Political Structure) भारत के अंचल (Zones of India) अंचल सम्मिलित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश पूर्वी अंचल (East Zone) बिहार, ओडिशा, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल पश्चिम अंचल (West Zone) राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दमन एवं दीव तथा दादरा एवं नगर हवेली। उत्तरी अंचल (North Zone) जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा चंडीगढ़ दक्षिणी अंचल (South Zone) आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा पुदुचेरी मध्यवर्ती अंचल (Central Zone) मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ पूर्वोत्तर अंचल (North-East Zone) असम, सिक्किम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड तथा अरूणाचल प्रदेश। नोटः सेवेन सिस्टर्स में सिक्किम शामिल नहीं है। भारत : एक दृष्टि में विषय विवरण / डेटा भौगोलिक स्थिति उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में अवस्थित। अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश देशांतरीय विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर से 97°25′ पूर्वी देशांतर मानक समय 82°30′ पूर्वी देशांतर (मिर्जापुर) भौगोलिक विस्तार चौड़ाई (उत्तर से दक्षिण 3214 किमी.) एवं लंबाई (पूर्व से पश्चिम 2933 किमी.) स्थलीय सीमा 15106.7 किमी. जलीय सीमा 7516.6 किमी. जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसून क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी. कुल जनसंख्या 1,21,08,54,977 (विश्व की कुल जनसंख्या का 17.5%) दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 17.7% लिंगानुपात 943 / 1000 जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति/वर्ग किमी. कुल साक्षरता 73.0% (पुरुष साक्षरता 80.9% एवं महिला साक्षरता 64.6%) राज्यों की संख्या 28 केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या 8 ज्यामितीय आकार चतुष्कोणीय भौगोलिक एवं भौतिक संरचना का विस्तार राष्ट्रीय प्रतीक एवं चरम बिंदु

Blog

Indian Islands and Island Groups Notes in Hindi Pdf

भारत के विशाल भू-भाग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा इसके Indian Islands and Island Groups (भारतीय द्वीप एवं द्वीप समूह) हैं, जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में मोतियों की तरह बिखरे हैं। इनमें जहाँ बंगाल की खाड़ी में स्थित अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह अपनी विवर्तनिक और पर्वतीय उत्पत्ति के साथ भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी समेटे हुए है, वहीं अरब सागर का लक्षद्वीप समूह अपनी अद्भुत प्रवाल भित्तियों (मूंगे के द्वीपों) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। सामरिक, सांस्कृतिक और जैविक दृष्टि से समृद्ध ये द्वीप समूह भारत की तटीय और समुद्री सीमा को अद्वितीय विविधता प्रदान करते हैं। द्वीप, द्वीप समूह एवं भारतीय द्वीप बुनियादी परिभाषाएँ भारत के द्वीपीय भाग: एक विहंगम दृष्टि 1. अण्डमान निकोबार द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी) स्थिति, विस्तार एवं क्षेत्रफल प्रमुख चोटियाँ, संख्या एवं प्रशासनिक केंद्र प्रादेशिक विभाजन विशिष्ट भौगोलिक तथ्य एवं चैनल 2. लक्षद्वीप समूह (अरब सागर) स्थिति, क्षेत्रफल एवं उत्पत्ति भौगोलिक विभाजन एवं चैनल जनजीवन, संस्कृति एवं जैव-विविधता प्रवाल क्या हैं?: प्रवाल कम समय तक जीवित रहने वाले सूक्ष्म प्राणी हैं, जो समूह में रहते हैं। इनका विकास छिछले तथा गर्म जल में होता है। इनसे कैल्शियम कार्बोनेट का स्राव होता है। प्रवाल स्राव तथा प्रवाल अस्थियाँ टीले के रूप में निक्षेपित होकर द्वीपों का रूप लेती हैं। 3. भारतीय द्वीप एवं द्वीप समूह (वर्गीकृत सारणी) सरकारी/आधिकारिक तौर पर भारत में कुल द्वीपों की संख्या (विभिन्न आकारों को मिलाकर) 1,308 तक विस्तृत है। इन्हें अध्ययन की दृष्टि से तीन भागों में बांटा जाता है: 1. तटीय द्वीप, 2. लक्षद्वीप समूह, और 3. अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह। (A) पश्चिमी तट पर उपस्थित प्रमुख द्वीप (अरब सागर क्षेत्र) क्रम द्वीप का नाम अवस्थिति / भौगोलिक विशेषता 1 भेट कच्छ की खाड़ी 2 नोरा कच्छ की खाड़ी 3 कारूम्भर कच्छ की खाड़ी 4 बेदी कच्छ की खाड़ी 5 पीरोटिन कच्छ की खाड़ी 6 शियाल खंभात की खाड़ी 7 पिरम खंभात की खाड़ी 8 पाचम कच्छ का रण 9 खादिर कच्छ का रण 10 बेला कच्छ का रण 11 दीव केंद्रशासित क्षेत्र (गुजरात के निकट) 12 साल्सेट अरब सागर। इसी द्वीप पर मुंबई महानगर बसा हुआ है। यह द्वीप सात द्वीपों का समूह है (माहिम, वर्ली, परेल, मज़गांव, बॉम्बे, कोलाबा, लिटिल कोलाबा)। 13 एलीफैंटा मुंबई के निकट 14 बसीन महाराष्ट्र का तट 15 दिवोर गोवा तट 16 अंजो गोवा तट 17 पटकल कर्नाटक तट 18 क्रोकोडायल कर्नाटक तट 19 विलिंग्टन केरल तट 20 मुनरो केरल तट (B) पूर्वी तट पर उपस्थित प्रमुख द्वीप (बंगाल की खाड़ी क्षेत्र) क्रम द्वीप का नाम अवस्थिति / भौगोलिक विशेषता 1 न्यूमूर बंगाल की खाड़ी (सुंदरवन के नजदीक) 2 फुल्य हुगली के मुहाने पर 3 गंगा सागर हुगली के मुहाने पर 4 पारीकुद बंगाल की खाड़ी (चिल्का झील एवं बंगाल की खाड़ी के बीच) 5 डॉ. कलाम (व्हीलर द्वीप) ओडिशा तट पर 6 ब्रेकफास्ट ओडिशा तट पर 7 कालोजल ओडिशा तट पर 8 होप आंध्र प्रदेश तट पर 9 भवानी आंध्र प्रदेश तट पर 10 श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश तट पर (यहीं से हमारे उपग्रहों का प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होता है) 11 कच्चा तिबु बंगाल की खाड़ी (आदम पुल एवं मन्नार की खाड़ी इसे श्रीलंका से अलग करते हैं) 12 पम्बन तमिलनाडु तट (इसी द्वीप पर प्रसिद्ध रामेश्वरम् नामक धार्मिक व ऐतिहासिक नगर अवस्थित है)

Blog

Coastal Plains of India in Hindi pdf

प्रायद्वीपीय पठार के दोनों ओर विस्तृत Coastal Plains of India (भारत के तटीय मैदान) देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण भौगोलिक और आर्थिक इकाई हैं। कच्छ के रन से लेकर गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा तक फैले ये मैदान मुख्य रूप से दो भागों—पश्चिमी तटीय मैदान और पूर्वी तटीय मैदान में विभाजित हैं। जहाँ पश्चिमी तट अपनी तीव्रगामी नदियों, एश्चुअरी और केरल के प्रसिद्ध ‘कयाल’ (पश्चजल) के लिए जाना जाता है, वहीं पूर्वी तट गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी बड़ी नदियों के विशाल उपजाऊ डेल्टा और चिल्का जैसी समृद्ध लैगून झीलों से संपन्न है। तटीय मैदान सामान्य परिचय एवं विस्तार (1) पश्चिमी समुद्र तटीय मैदान मुख्य विशेषताएँ प्रादेशिक विभाजन (चार भाग) भाग क्षेत्र / विस्तार (i) गुजरात का मैदान गुजरात का तटवर्ती क्षेत्र (द्वारिका से दमन के बीच) (ii) कोंकण का मैदान दमन से गोवा के बीच (iii) कन्नड़ का मैदान गोवा से मंगलौर के बीच (iv) मालाबार का मैदान मंगलौर से कन्याकुमारी के बीच अनूप (Lagoon) एवं पश्चजल (Back Water) (2) पूर्वी तटीय मैदान मुख्य विशेषताएँ तटीय संरचना एवं प्रमुख झीलें प्रादेशिक विभाजन (तीन भाग)

Blog

Indian Desert (Thar Desert) in Hindi Pdf

अरावली पहाड़ियों के उत्तर-पश्चिम में फैला Indian Desert (Thar Desert) भारत की एक विशिष्ट और जीवंत भू-आकृतिक इकाई है। प्रति वर्ष 150 मिलीमीटर से भी कम वर्षा प्राप्त करने वाला यह शुष्क प्रदेश अपने विशाल अर्धचन्द्राकार ‘बरखान’ और लम्बवत् बालू के टीलों के लिए जाना जाता है। अत्यधिक वाष्पीकरण और सीमित जल संसाधनों के बावजूद, यह मरुस्थल लूनी नदी तंत्र, समृद्ध खनिज भंडारों (जैसे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस) और अनूठे मरुद्यानों से संपन्न है, जो इसे वैश्विक स्तर पर सबसे अनूठा रेतीला मैदान बनाते हैं। भारतीय मरुस्थल (थार का मरुस्थल) स्थिति, विस्तार एवं जलवायु बालू के टीलों (Tibetans/Sand Dunes) की प्रकृति एवं गति उत्पत्ति के कारण अपवाह तंत्र (नदियाँ) एवं प्रमुख नगर (मरुद्यान) प्रमुख झीलें एवं खनिज संसाधन

Blog

The Great Northern Plain in Hindi Notes pdf

हिमालय और प्रायद्वीपीय पठार के मध्य स्थित The Great Northern Plain (उत्तर का विशाल मैदान) भारत का सबसे समृद्ध और सघन आबादी वाला भौतिक प्रदेश है। लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह मैदान सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी महान नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों (Alluvial Deposits) से निर्मित है। भू-आकृतिक और प्रादेशिक विविधताओं से संपन्न यह विशाल मैदानी भाग न केवल भारत का प्रमुख कृषि केंद्र है, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और आर्थिक विकास की जीवनरेखा भी है। सामान्य परिचय एवं भौगोलिक विस्तार उत्पत्ति एवं निर्माण प्रक्रिया प्रादेशिक विभाजन प्रादेशिक विभिन्नताओं के आधार पर इस मैदान को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है: (i) सिंधु का मैदान (ii) पंजाब का मैदान सामूहिक पंच-दोआब क्षेत्र इस मैदान की विशेषता यह रही है कि अलग-अलग दो नदियों के मध्य दोआब क्षेत्र का विकास हुआ है और ये सभी दोआब भिन्न-भिन्न नामों से जाने जाते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से पंच-दोआब कहा जाता है। ‘दोआब’ का अर्थ: दो नदियों के बीच का भाग [दो + आब (पानी)]। क्र. सं. नदियों के मध्य दोआब क्षेत्र का नाम 1. व्यास एवं सतलज बिस्ट दोआब 2. झेलम एवं सिन्धु सिन्ध सागर दोआब 3. झेलम एवं चेनाब चाज दोआब 4. चेनाब एवं रावी रचना दोआब 5. रावी एवं व्यास बारी दोआब क्षेत्रीय पारिभाषिक शब्दावली (iii) राजस्थान का मैदान (iv) गंगा का मैदान क्षेत्रीय विभाजन और भौगोलिक शब्दावली उत्तर प्रदेश में इस मैदान को दो भागों में बांटा गया है: गंगा के मैदान का उप-वर्गीकरण (v) असम का मैदान (ब्रह्मपुत्र मैदान या असम घाटी) विशाल मैदान का भौगोलिक विभाजन धरातल की ऊँचाई, गहराई तथा मिट्टी की संरचना के आधार पर इस मैदानी भाग को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया गया है: 1. भाबर का मैदान निर्माण एवं विस्तार विशेषताएँ 2. तराई का मैदान स्थिति एवं विस्तार क्षेत्रीय भिन्नता एवं मानवीय गतिविधियाँ 3. बांगर (भांगर) का मैदान विशेषताएँ एवं मृदा संरचना 4. खादर का मैदान विशेषताएँ एवं उपजाऊपन

Blog

The hills of Northeast India in Hindi Pdf

प्राकृतिक सौंदर्य और भू-गर्भिक विविधता से समृद्ध The hills of Northeast India (पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियाँ) देश के भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखती हैं। ब्रह्मपुत्र घाटी के बाद दक्षिण की ओर मुड़ने वाली ये पहाड़ियाँ पटकाई बुम, नागा, मणिपुर और मिजो हिल्स जैसी विभिन्न उप-श्रृंखलाओं में विभाजित हैं। यह क्षेत्र न केवल भारत और म्यांमार के बीच एक प्राकृतिक सीमारेखा का निर्माण करता है, बल्कि जैव-विविधता और भारी वर्षा के कारण अत्यधिक अनाच्छादन (Denudation) का गवाह भी है, जो इसे भौगोलिक अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। भौगोलिक पृष्ठभूमि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र भौगोलिक दृष्टिकोण से व्यापक भिन्नता रखता है। इस क्षेत्र में हिमालय, पूर्वांचल पहाड़ियाँ, प्रायद्वीपीय पठार के अन्तर्गत शिलांग का पठार तथा विशाल मैदान के अन्तर्गत असम का मैदान अवस्थित है। पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों का वर्गीकरण (A) हिमालय पर्वत की पहाड़ियाँ (B) प्रायद्वीपीय पठार की पहाड़ियाँ (शिलांग का पठार (C) पूर्वांचल की पहाड़ियाँ पूर्वांचल पहाड़ियों की मुख्य विशेषताएँ विद्वानों का मत / भू-गर्भिक तथ्य: कुछ विद्वानों के अनुसार पूर्वांचल श्रृंखला का दक्षिणी विस्तार बंगाल की खाड़ी में अण्डमान के रूप में दिखाई देता है, परन्तु प्लेट विवर्तनिक (Plate Tectonics) सिद्धांत से इस बात की पुष्टि नहीं होती है।

Blog

Trans-Himalaya or Tibet-Himalaya range Notes Pdf in Hindi

हिमालय के उत्तर में स्थित Trans-Himalaya or Tibet-Himalaya range भारत के भूगोल का एक अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण भूभाग है। मुख्य हिमालय श्रृंखला के पीछे लगभग 960 किलोमीटर की लंबाई में फैले इस क्षेत्र का निर्माण मुख्य हिमालय से भी पहले हो चुका था। सागरीय अवसादों से निर्मित इस श्रेणी के अंतर्गत काराकोरम, लद्दाख, जास्कर और कैलाश जैसी विशाल पर्वत शृंखलाएं आती हैं। यह पर्वतीय क्षेत्र न केवल सिंधु और सांगपो जैसी महान नदियों का उद्गम स्थल है, बल्कि एशिया के प्रमुख जल-विभाजक के रूप में भी कार्य करता है। सामान्य परिचय एवं भौगोलिक विस्तार प्रमुख श्रेणियाँ एवं जल-विभाजक इसके अन्तर्गत मुख्य रूप से चार पर्वत श्रेणियाँ शामिल हैं, जिनका निर्माण हिमालय से पहले ही हो चुका था: (A) काराकोरम श्रेणी प्रमुख ऊँचे शिखर ऊँचाई (मी. में) K2 ऑस्टिन (गॉडविन ऑस्टिन) 8611 मी. हिंडेन चोटी 8068 मी. ब्राड चोटी 8047 मी. गशेरब्रम II 8035 मी. प्रमुख हिमानी (ग्लेशियर): (B) लद्दाख श्रेणी विशेष तथ्य: ट्रांस हिमालय श्रेणी में कई दर्रे हैं (जैसे—डिगला 5795 मी.) जिनकी औसत ऊँचाइयाँ 5200 मी. है। (C) जास्कर श्रेणी हिमालय के दीर्घ मोड़ (Major Folds of the Himalaya) हिमालय पर्वत श्रेणियों के उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व के अन्तिम छोरों के निकट दीर्घ बलन (Mod) पाये जाते हैं, जिन्हें ‘उत्तर-पश्चिम मोड़’ और ‘उत्तर-पूर्वी मोड़’ कहा जाता है। 1. उत्तर-पश्चिम मोड़ (Western Syntaxial Bend) 2. उत्तर-पूर्व मोड़ (Eastern Syntaxial Bend) हिमालय का प्रादेशिक वर्गीकरण सर सिडनी बुराड ने प्रादेशिक आधार पर हिमालय पर्वत को निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया है: क्र. सं. नाम अवस्थिति लम्बाई (कि.मी. में) क्षेत्र / वर्गीकरण 1. पंजाब हिमालय सिन्धु तथा सतलज के मध्य 560 पश्चिमी हिमालय 2. कुमाऊँ हिमालय सतलज तथा काली के मध्य 320 पश्चिमी हिमालय 3. नेपाल हिमालय काली तथा तिस्ता के मध्य 800 मध्य हिमालय 4. असम हिमालय तिस्ता तथा ब्रह्मपुत्र के मध्य 750 उत्तर-पूर्वी पहाड़ियाँ हिमालय के प्रमुख भू-गर्भिक विभाजक क्षेत्र (Boundary Faults & Zones) 1. ITSZ (Indus – Tsangpo Suture Zone) 2. MCT (Main Central Thrust / मुख्य केन्द्रीय क्षेत्र) कश्मीर घाटी एवं करेवा 3. MBF (Main Boundary Fault) 4. HFF (Himalayan Frontal Fault) 5. GBF (Great Boundary Fault)

Blog

Himalayan Mountain Region Notes Pdf UPSC in Hindi

भारत का Himalayan Mountain Region (हिमालय पर्वतीय क्षेत्र) न केवल देश की उत्तरी सीमा का सजग प्रहरी है, बल्कि यह विश्व के सबसे युवा और जीवंत वलित पर्वतों में से एक है। पश्चिम में पाकिस्तान सीमा से लेकर पूर्व में म्यांमार तक लगभग 2500 किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र अपनी अनूठी भू-आकृतिक संरचना के लिए जाना जाता है। महान हिमाद्रि, मध्य हिमालय और बाहरी शिवालिक श्रेणियों में विभाजित यह पावन भूभाग अद्वितीय जैव-विविधता, सदानीरा नदियों और सामरिक महत्व का केंद्र है। हिमालय को मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है: (i) वृहद् हिमालय / आन्तरिक हिमालय / हिमाद्रि सामान्य परिचय एवं विस्तार ढाल एवं नदी उद्गम चट्टानी संरचना व अपरदन हिम रेखा (Snowline) की स्थिति महान हिमालय की प्रमुख चोटियाँ चोटियाँ ऊँचाई (मी. में) अवस्थिति / विशेषता केदारनाथ 6940 उत्तराखंड में बद्रीनाथ 7138 उत्तराखंड में नंदा देवी 7818 उत्तराखण्ड में नेपाल सीमा पर धौलागिरि 8172 नेपाल अन्नपूर्णा 8078 नेपाल मंसालू 8156 नेपाल गौरी शंकर 8153 नेपाल चो-यू 8153 नेपाल माउण्ट एवरेस्ट 8848 नेपाल (सागरमाथा) मकालू 8481 नेपाल कंचनजंगा 8598 भारत / नेपाल सीमा विशेष नोट: भारत का सर्वोच्च शिखर माउण्ट K2 (गॉडविन ऑस्टिन) है। इसकी ऊँचाई 8611 मीटर है। यह काराकोरम पर्वत श्रेणी में स्थित है, जिसकी यह सबसे ऊँची चोटी है। वर्तमान में यह ‘पाक अधिकृत कश्मीर’ (PoK) का भाग है। महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र (Boundary Zones) महान हिमालय के प्रमुख दर्रे (Passes) दर्रों से जुड़ी मुख्य विशेषताएँ: (ii) लघु हिमालय / मध्य हिमालय / हिमाचल श्रेणी सामान्य परिचय एवं विस्तार चट्टानी संरचना एवं प्रमुख पर्यटन स्थल वनस्पति और घास के मैदान लघु हिमालय की प्रमुख उप-श्रेणियाँ लघु हिमालय के अन्तर्गत कई छोटी-छोटी श्रेणियाँ हैं, जो निम्नलिखित हैं: प्रमुख घाटियाँ (Valleys) लघु हिमालय और वृहद् हिमालय के बीच दो खुली घाटियों का विकास हुआ है: आपके दिए गए टेक्स्ट के सभी वाक्यों, जानकारियों और शब्दों को बिल्कुल वैसा ही रखते हुए, इसे एक बेहतरीन, सुव्यवस्थित और पढ़ने में आसान स्ट्रक्चर (पॉइंटर्स और हाइलाइट्स के साथ) में नीचे री-फॉर्मेट किया गया है: (iii) शिवालिक श्रेणी या बाह्य हिमालय या उप हिमालय सामान्य परिचय एवं विस्तार चट्टानी संरचना एवं क्षेत्रीय नाम प्रमुख घाटियाँ: ‘दून’ और ‘द्वार’ वनस्पति एवं स्थानीय नाम हिमालय में सर्वाधिक वनस्पति गहनता इसी श्रृंखला में पाई जाती है। इन घने जंगलों को स्थानीय रूप से ‘चो’ के नाम से जाना जाता है। महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र (Boundary Faults)

Scroll to Top