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Author name: Nirmanias

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 10: Living Creatures: Exploring their Characteristics

NCERT Notes Class 6 science Chapter 10: Living Creatures: Exploring their Characteristics के अंतर्गत पौधे और जंतु किस प्रकार भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं, समय के साथ उनमें निरंतर वृद्धि कैसे होती है, और वे जीवित रहने के लिए श्वसन की प्रक्रिया को कैसे अपनाते हैं। बाहरी वातावरण में होने वाले बदलावों के प्रति सजीवों द्वारा दिखाई जाने वाली अनुक्रिया, शरीर के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए उत्सर्जन की व्यवस्था और अपनी प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए प्रजनन के वैज्ञानिक महत्व को भी स्पष्ट किया गया है। सजीवों को निर्जीवों से क्या अलग करता है? सजीव प्राणी: उनके लक्षणों की खोज सजीवों और निर्जीवों के बीच अंतर स्पष्ट करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक लक्षण निम्नलिखित हैं: 1. पौधों में गति (Movement in Plants) 2. वृद्धि और पोषण (Growth and Nutrition) 3. श्वसन प्रक्रिया (Respiration) 4. उत्सर्जन (Excretion) 5. उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया (Response to Stimuli) 6. प्रजनन और मृत्यु (Reproduction and Death) सजीवों के मूलभूत जैविक लक्षणों का सारांश जैविक प्रक्रिया जंतुओं में स्वरूप पौधों में स्वरूप वैज्ञानिक महत्व गति (Movement) स्थान परिवर्तन (लोकोमोशन) पत्तियों का मुड़ना, फूलों का खिलना पौधों में रासायनिक उद्दीपनों द्वारा नियंत्रित गति होती है। श्वसन (Respiration) फेफड़ों/त्वचा द्वारा गैस विनिमय पत्तियों पर मौजूद रंध्रों (Stomata) द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लिए कोशिकीय स्तर पर अनिवार्य। उत्सर्जन (Excretion) मूत्र और पसीने के माध्यम से पत्तियों पर बूंदों के रूप में (Guttation) शरीर के आंतरिक संतुलन (Homeostasis) के लिए आवश्यक। अनुक्रिया (Response) तंत्रिका तंत्र द्वारा तीव्र प्रतिक्रिया स्पर्श या प्रकाश (जैसे छुई-मुई और आंवला) के प्रति पर्यावरण के अनुकूल जीवित रहने की उत्तरजीविता रण बीज के अंकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ विभिन्न परिस्थितियों का बीजों पर प्रभाव गमला (Pot) उपलब्ध परिस्थितियाँ वायु की उपलब्धता अंकुरण का परिणाम वैज्ञानिक कारण Pot A सीधी धूप + पानी बिल्कुल नहीं उपलब्ध अंकुरण नहीं पानी के बिना आंतरिक जैविक क्रियाएं शुरू नहीं हो पाती हैं। Pot B सीधी धूप + अत्यधिक पानी (जलजमाव) अनुपलब्ध (मिट्टी के छिद्र पानी से बंद) अंकुरण नहीं वायु (ऑक्सीजन) न मिलने से बीज श्वसन नहीं कर पाता और सड़ जाता है। Pot C पूर्ण अंधकार + नमी (सीमित पानी) उपलब्ध अंकुरण सफल अधिकांश बीजों को अंकुरित होने के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती। Pot D सीधी धूप + नमी (सीमित पानी) उपलब्ध अंकुरण सफल अंकुरण के लिए आवश्यक तीनों प्राथमिक घटक (वायु, नमी, सही तापमान) मौजूद हैं। अंकुरण के तीन मुख्य घटक और उनका कार्य 1. जल (Water) 2. वायु और मिट्टी (Air and Soil) 3. प्रकाश और अंधकार की स्थिति (Light and Dark Conditions) पौधों में वृद्धि और गति विभिन्न परिस्थितियों में जड़ और तने की वृद्धि बीकर ) पौधे की स्थिति और प्रकाश की दिशा तने (Shoot) की वृद्धि की दिशा जड़ (Root) की वृद्धि की दिशा वैज्ञानिक निष्कर्ष Beaker A सीधा पौधा (Upright): सभी दिशाओं से समान धूप। ऊपर की ओर (Upward) नीचे की ओर सामान्य परिस्थितियों में तना प्रकाश की ओर और जड़ें जमीन की ओर बढ़ती हैं। Beaker B उल्टा पौधा (Inverted): सभी दिशाओं से समान धूप। मुड़कर ऊपर की ओर मुड़कर नीचे की ओर पौधा उल्टा होने पर भी जड़ें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे और तना ऊपर घूम जाता है। Beaker C सीधा पौधा: एक छोटे छेद से केवल एक दिशा से प्रकाश। प्रकाश के स्रोत की ओर मुड़ना नीचे की ओर (सीधी) तना प्रकाश की ओर आकर्षित होकर झुक जाता है, जबकि जड़ों पर इस प्रकाश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष भारतीय वैज्ञानिक: सर जगदीश चंद्र बोस (1858–1937) पौधे का जीवन चक्र पौधे के विकास के विभिन्न चरण और उनके रूपात्मक परिवर्तन विकासात्मक चरण मुख्य रूपात्मक परिवर्तन वैज्ञानिक परिघटना और महत्व 1. बीजारोपण व अंकुरण बीज को मिट्टी में बोकर अनुकूल परिस्थितियां (नमी, वायु, सही तापमान) दी जाती हैं। सुशुप्तावस्था (Dormancy) समाप्त होती है और भ्रूण सक्रिय होकर अंकुर (Sprout) बनता है। 2. वानस्पतिक वृद्धि अंकुर एक युवा पौधे (Young Plant) में बदलता है और तेजी से तने तथा पत्तियों का विस्तार करता है। पौधा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा अपनी वृद्धि के लिए ऊर्जा संचित करता है। 3. पुष्पन (Flowering) एक निश्चित अवधि (परिपक्वता) के बाद पौधे पर पहला फूल दिखाई देता है। यह पौधे का प्रजनन चरण (Reproductive Phase) होता है जो आगे फल बनने की नींव रखता है। 4. फलन व बीज निर्माण फूल के कुछ हिस्से सूखकर गिर जाते हैं और शेष भाग एक फली या फल (Pod/Fruit) में विकसित होता है। निषेचन (Fertilization) के बाद अंडाशय फल में और बीजांड बीजों में बदल जाते हैं, जिसमें नई पीढ़ी के बीज सुरक्षित रहते हैं। 5. शून्यता व प्राकृतिक मृत्यु फल और बीज पूरी तरह परिपक्व होने के बाद पौधा धीरे-धीरे पीला और सूखा होने लगता है। जीवन की सभी चयापचय गतिविधियाँ (Metabolic Activities) समाप्त हो जाती हैं और पौधा मृत हो जाता है जंतुओं का जीवन चक्र मच्छर का जीवन चक्र मच्छर के विकास के चार मुख्य चरण: मेंढक का जीवन चक्र मेंढक के विकास का क्रमिक वर्गीकरण: चरण (Stage) नाम समयावधि/विशेषताएं शारीरिक अनुकूलन और महत्व Stage IA स्पॉन Day 1 पानी की सतह पर जेली के रूप में सुरक्षित अंडों का समूह। Stage IB भ्रूण (Embryo) Day 3-4 अंडे के भीतर भ्रूण का प्रारंभिक विकास। Stage IIA टैडपोल पूंछ के साथ Day 7-10 प्रारंभिक डिंभक (Larva); इसमें केवल पूंछ होती है, पैर नहीं होते। पूंछ पानी में तैरने में मदद करती है। Stage IIB पैर वाला टैडपोल 8-10 सप्ताह टैडपोल के पिछले पैर (Hind legs) विकसित होने लगते हैं, लेकिन पूंछ बनी रहती है। Stage III फ्रॉगलेट (Froglet) 12 सप्ताह यह छोटा मेंढक जैसा दिखता है। यह पानी में रहने के साथ-साथ भूमि पर भी कुछ समय बिताना शुरू करता है। Stage IV वयस्क मेंढक (Adult) 14 सप्ताह पूंछ पूरी तरह गायब हो जाती है। इसके पैर कूदने और जमीन पर उतरने के लिए मजबूत हो जाते हैं। यह पानी और जमीन दोनों पर रह सकता है। NCERT Class 6, Social Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-

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17 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

17 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय समय संप्रभुता को रेखांकित करता ‘वन नेशन, वन टाइम’ विज़न (व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी), CSIR-NIScPR और CGPDTM का ऐतिहासिक समझौता (NKRC), तथा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रमाण देती स्पिरुलिना आधारित ‘सी-फाइकोसायनिन’ उत्पादन तकनीक, वैश्विक व्यापार को गति देता भारत-यूके CETA व सामाजिक सुरक्षा समझौता, कपड़ा उद्योग में चक्रीयता को रेखांकित करता भारत टेक्स 2026 (तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र और चक्रीय अर्थव्यवस्था), दिल्ली-NCR में पर्यावरण सुधार हेतु वायु प्रदूषण नियंत्रण की नई शमन कार्ययोजना, और कृषि-लचीलेपन व जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से REWARD कार्यक्रम के तहत सैटेलाइट और ड्रोन आधारित जलागम प्रबंधन की दूरगामी तकनीकी पहल शामिल हैं। भारत टेक्स 2026-तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र, चक्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार चर्चा में क्यों? भारत के सबसे बड़े वैश्विक कपड़ा महाकुंभ ‘भारत टेक्स 2026’ का तीसरा दिन संपन्न हुआ। इस दिन का मुख्य फोकस भारतीय वस्त्र उद्योग में सस्टेनेबिलिटी (सस्टेनेबल विकास), सर्कुलरिटी (चक्रीयता), भविष्य के कौशल, टिकाऊ सोर्सिंग और वैश्विक व्यापार एकीकरण पर केंद्रित रहा। इसमें विभिन्न नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, निवेशकों और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं 1. विजननेक्स्ट ट्रेंड पब्लिकेशन का अनावरण 2. सर्कुलरिटी और हरित नवाचार 3. जैविक कपास मूल्य श्रृंखला और निष्पक्ष मूल्य निर्धारण 4. डिजिटल और वैश्विक निर्यात बाजार 5. मध्य प्रदेश राज्य सत्र प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य घटक / पहल मुख्य बिंदु भारत टेक्स 2026 भारत का सबसे बड़ा एकीकृत वैश्विक कपड़ा व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रम। इसका उद्देश्य संपूर्ण मूल्य श्रृंखला – ‘फाइबर से फैशन’ का प्रदर्शन करना है। VisionNxt NIFT द्वारा संचालित देश का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) फैशन ट्रेंड फोरकास्टिंग पोर्टल/प्रकाशन। चक्रीय अर्थव्यवस्था ऐसा मॉडल जिसमें संसाधनों के उपयोग को कम से कम किया जाता है तथा कचरे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग योग्य बनाया जाता है। इंडिया सस्टेनेबल टेक्सटाइल मार्क UNDP और भारत सरकार की संयुक्त पहल, जिसका उद्देश्य भारतीय वस्त्रों को वैश्विक पर्यावरणीय मानदंडों के अनुकूल प्रमाणित करना है। परिवर्तन योजना: दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की नई पहल चर्चा में क्यों? केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने परिवर्तन योजना के परिचालन दिशानिर्देशों (Guidelines) को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में चलने वाली पुरानी, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली बसों और ट्रकों को हटाकर उनके स्थान पर नए BS-VI मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना है। योजना की मुख्य बातें लाभार्थियों को मिलने वाले प्रमुख प्रोत्साहन पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (Scrap) में देकर नई गाड़ी खरीदने वालों को सरकार ये बड़े फायदे दे रही है: प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य तथ्य विवरण नोडल मंत्रालय मंजूरी: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा।कार्यान्वयन: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा। लक्षित क्षेत्र संपूर्ण दिल्ली-NCR क्षेत्र (शामिल राज्य: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR जिले)। लक्षित वाहन केवल वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicles) जैसे ट्रक और बसें। NCRPB राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (यह MoHUA के तहत एक वैधानिक निकाय है)। REWARD कार्यक्रम: सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक से जलागम प्रबंधन चर्चा में क्यों? राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के ज्ञान भागीदार (Knowledge Partner) के रूप में जयपुर, राजस्थान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। विश्व बैंक की सहायता से चल रहे REWARD कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यशाला का विषय “वाटरशेड योजना और निगरानी के लिए सैटेलाइट और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण” था। कार्यशाला के मुख्य बिंदु और रणनीतिक निर्णय प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य पहल / संस्था मुख्य बिंदु REWARD कार्यक्रम पूरा नाम: Rejuvenating Watersheds for Agricultural Resilience through Innovative Development.वित्तपोषण: यह विश्व बैंक (World Bank) द्वारा सहायता प्राप्त परियोजना है।लक्ष्य: वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में जल सुरक्षा और लचीलापन (Resilience) बढ़ाना। NRAA राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण: यह भारत के वर्षासिंचित क्षेत्रों में स्थायी कृषि पद्धतियों के लिए नीतियां बनाने वाला नोडल निकाय है। तकनीक का लाभ ड्रोन और सैटेलाइट से जलभराव, मृदा क्षरण, और वनस्पतियों के घनत्व की रीयल-टाइम सटीक मैपिंग संभव होती है, जिससे वाटरशेड का बेहतर नियोजन (Planning) होता है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता की दिशा में ऐतिहासिक कदम चर्चा में क्यों? भारतीय रेलवे देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) आधारित ट्रेन का परिचालन शुरू करने जा रही है। इस ट्रेन का उद्घाटन हरियाणा के जींद-सोनीपत खंड (Northern Railway) पर किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के दृष्टिकोण के तहत विकसित यह परियोजना भारत को उन चुनिंदा वैश्विक देशों की श्रेणी में खड़ा करती है जो शून्य-कार्बन रेल परिवहन प्रणाली पर काम कर रहे हैं। मुख्य बिंदु: तकनीक, अवसंरचना और सुरक्षात्मक पहलू 1. ट्रेन की तकनीकी विशिष्टताएँ 2. ईंधन सेल कार्यप्रणाली 3. सुदृढ़ हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर 4. व्यापक सुरक्षा तंत्र प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य PEMFC प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल — वह तकनीक जो परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) झिल्ली का उपयोग कर शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ बिजली बनाती है। RDSO अनुसंधान, अभिकल्प और मानक संगठन — भारतीय रेलवे की वह तकनीकी संस्था जिसने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के डिजाइन और विशिष्टताओं को मंजूरी दी है। PESO पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन — भारत में विस्फोटक, संपीड़ित गैसों और पेट्रोलियम पदार्थों की सुरक्षा को विनियमित करने वाला नोडल निकाय, जिसने जींद स्टेशन को मंजूरी दी। TUV SUD जर्मनी की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तकनीकी निरीक्षण एजेंसी जिसने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (Safety Assessment) किया है। जींद-सोनीपत खंड भारत का पहला रेल खंड जहां 17 जुलाई 2026 से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन का व्यावसायिक परिचालन शुरू किया जा रहा है। पैमाना डैशबोर्ड: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र की त्रैमासिक रिपोर्ट चर्चा में क्यों? हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की निगरानी को मजबूत करने के लिए PAIMANA (Project Assessment, Infrastructure Monitoring & Analytics for Nation-building) परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का नवीनतम त्रैमासिक अपडेट जारी किया है। आपको बता दें कि इस डिजिटल डैशबोर्ड को पहली बार 16 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य ‘वन नेशन, वन टाइम’ की तर्ज पर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policymaking) को बढ़ावा

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 9: Methods of Separation in Everyday Life

NCERT Notes Class 6 science Chapter 9: Methods of Separation in Everyday Life के अंतर्गत ठोस पदार्थों को अलग करने वाली विधियों जैसे हस्तचयन (Handpicking), थ्रेशिंग, निष्पावन (Winnowing) और चालन (Sieving) से लेकर द्रव और अघुलनशील ठोस के मिश्रणों को पृथक करने वाली प्रक्रियाओं जैसे अवसादन (Sedimentation), निस्तारण (Decantation) और निस्यंदन (Filtration) के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया गया है। इसके साथ ही, घुलनशील पदार्थों को अलग करने के लिए वाष्पन (Evaporation) और संघनन (Condensation) जैसी भौतिक प्रक्रियाओं के महत्व को भी समझाया गया है। दैनिक जीवन में पृथक्करण की विधियाँ दैनिक जीवन में किसी मिश्रण से उसके विभिन्न घटकों को अलग करने के लिए भौतिक गुणों (आकार, रंग, वजन) के अंतर के आधार पर निम्नलिखित प्राथमिक विधियों का उपयोग किया जाता है: 1. हस्तचयन (Handpicking) 2. थ्रेशिंग 3. निष्पावन या ओसाई 4. चालन या छानना भौतिक पृथक्करण विधियों का सारांश विधि (Method) मुख्य पृथक्करण कारक व्यावहारिक उदाहरण हस्तचयन रंग, रूप और आकार में बड़ा अंतर पुलाव में से साबुत काली मिर्च को अलग करना। थ्रेशिंग यांत्रिक आघात (Beating) गेहूं के सूखे डंठलों से दानों को अलग करना। निष्पावन घनत्व/वजन में अंतर (भारी बनाम हल्का) गेहूं के दानों से हल्के भूसे को अलग करना। चालन कणों के भौतिक आकार (Particle Size) का अंतर गेहूं के आटे से चोकर (Bran) को अलग करना। दैनिक जीवन में पृथक्करण की विधियाँ (भाग-2) 1. वाष्पीकरण द्वारा पुनरावृत्ति 2. अवसादन और निस्तारण 3. निस्यंदन या छानना (Filtration) 4. मंथन या बिलोना 5. चुंबकीय पृथक्करण (Magnetic Separation) उन्नत पृथक्करण विधियों का सारांश तकनीक पृथक्करण का भौतिक आधार मुख्य अनुप्रयोग अवसादन व निस्तारण गुरुत्वाकर्षण और अघुलनशील भारीपन तेल और पानी को अलग करना; चावल धोना। निस्यंदन (Filtration) कणों का आकार बनाम फिल्टर के छिद्र गंदे पानी से मिट्टी अलग करना; चाय छानना। मंथन (Churning) घनत्व का अंतर (हल्का बनाम भारी) दही से मक्खन को अलग करना। चुंबकीय पृथक्करण चुंबकीय गुणों की उपस्थिति कचरे के ढेर से लोहे के स्क्रैप को अलग करना। पर्यावरण संकट: प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) समुद्र के पानी से नमक (Salt from Seawater) ऐतिहासिक जुड़ाव: नमक सत्याग्रह (Dandi March) NCERT Class 6, Science Ch-3 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 8: A Journey through States of Water

NCERT Notes Class 6 science Chapter 8: A Journey through States of Water के अंतर्गत जल पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से तीनों अवस्थाओं: ठोस (बर्फ), द्रव (पानी) और गैस (जलवाष्प) में एक साथ मौजूद रहने वाला पदार्थ है। जब बर्फ (ठोस) ऊष्मा पाकर पिघलती है, तो वह द्रव जल में परिवर्तित होती है, और गर्म करने पर यही जल वाष्पीकरण (Evaporation) के जरिए अदृश्य गैस यानी जलवाष्प में बदल जाता है। इसके विपरीत, वायुमंडल में ऊपर जाकर जब यह जलवाष्प ठंडी होती है, तो संघनन (Condensation) की प्रक्रिया द्वारा पुनः पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बदलकर बादलों का निर्माण करती है, जो अंततः वर्षा या बर्फबारी के रूप में वापस हमारी धरती पर लौट आते हैं। जल के गायब होने की प्रक्रिया की जांच वाष्पीकरण का सिद्धांत (Evaporation) वाष्पीकरण के व्यावहारिक उदाहरण एवं वैज्ञानिक अनुप्रयोग दैनिक जीवन के उदाहरण वैज्ञानिक परिघटना महत्वपूर्ण प्रभाव गीले कपड़ों का सूखना कपड़ों में मौजूद जल सूर्य की गर्मी और हवा के कारण वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है। यह वायुमंडलीय आर्द्रता को प्रभावित करता है। गर्म तवे पर पानी की बूंदें गर्म सतह के संपर्क में आते ही पानी तुरंत भाप (Steam/Water vapour) में बदल जाता है। उच्च तापमान पर वाष्पीकरण की दर तीव्र हो जाती है। शरीर से पसीना सूखना त्वचा से पसीने का वाष्पीकरण शरीर की गुप्त ऊष्मा को सोखकर होता है। यह मानव शरीर के तापमान नियमन और शीतलन प्रभाव (Cooling effect) के लिए अनिवार्य है। हैंड सैनिटाइज़र का गायब होना सैनिटाइज़र में अल्कोहल होता है, जो हथेली की गर्मी से अत्यधिक तीव्रता से वाष्पीकृत होता है। इसे वाष्पशील द्रव कहा जाता है, जिसका क्वथनांक जल से बहुत कम होता है। एक और रहस्य (Another Mystery) जल की अवस्थाओं की यात्रा संघनन के व्यावहारिक उदाहरण एवं मापन प्रयोग दैनिक जीवन के उदाहरण वैज्ञानिक परिघटना व्यावहारिक/प्रायोगिक महत्व पौधों पर ओस की बूंदें सुबह के समय वायुमंडलीय तापमान कम होने से हवा की जल वाष्प पौधों की पत्तियों पर संघनित हो जाती है। यह रात में होने वाले विकिरण शीतलन के कारण सुबह अधिक दिखाई देती है। उबलते बर्तन की प्लेट के नीचे बूंदें बर्तन के अंदर उबलते पानी से बनी भाप ऊपर रखी ठंडी स्टील की प्लेट की आंतरिक सतह से टकराकर संघनित होती है। बंद प्रणाली में वाष्पीकरण और संघनन की प्रक्रियाएं एक साथ देखी जा सकती हैं। डिजिटल बैलेंस प्रयोग बर्फ वाले बंद गिलास को डिजिटल तराजू पर रखने पर समय के साथ उसका कुल द्रव्यमान (Mass) बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ द्रव्यमान यह प्रमाणित करता है कि वायुमंडल से अतिरिक्त जल वाष्प संघनित होकर गिलास की बाहरी सतह पर जुड़ गई है। वायुमंडलीय आर्द्रता (Humidity) जल की विभिन्न अवस्थाएँ पदार्थ की तीनों अवस्थाओं का तुलनात्मक विश्लेषण गुण बर्फ / ठोस (Solid) जल / द्रव (Liquid) जल वाष्प / गैस (Gas) आकार (Shape) निश्चित: बर्तन बदलने पर भी इसका आकार नहीं बदलता। अनिश्चित: यह उसी बर्तन का आकार ले लेता है जिसमें इसे रखा जाता है। अनिश्चित: इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता। आयतन (Volume) निश्चित: स्थान घेरने की क्षमता स्थिर रहती है। निश्चित: आकार बदलने पर भी जल का कुल आयतन स्थिर रहता है। अनिश्चित: यह उपलब्ध पूरे स्थान (Entire space) में फैल जाती है। प्रवाह क्षमता (Flow) नहीं: ठोस प्रवाहित नहीं हो सकते। हाँ: द्रव ऊंचे तल से नीचे की ओर बहते हैं। हाँ: गैस के अणु सभी दिशाओं में तेजी से प्रवाहित होते हैं। फैलने की क्षमता (Spread) नहीं: यह सतह पर फैलता नहीं है। हाँ: निश्चित आयतन बनाए रखते हुए सतह पर फैल सकता है। अत्यधिक: संपूर्ण उपलब्ध क्षेत्र में स्वतः विस्तृत (Diffuse) हो जाती है। दैनिक जीवन के अन्य उदाहरण हम जल की अवस्थाओं को कैसे बदल सकते हैं? अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाएं जल का वाष्पीकरण तीव्र या धीमा कैसे हो सकता है? वाष्पीकरण की दर को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कारक वाष्पीकरण की दर पर प्रभाव व्यावहारिक उदाहरण सतह का क्षेत्रफल अधिक क्षेत्रफल = तीव्र वाष्पीकरण बोतल के ढक्कन की तुलना में प्लेट में फैला पानी जल्दी सूखता है क्योंकि वायु के संपर्क में आने वाले अणुओं की संख्या बढ़ जाती है। तापमान उच्च तापमान = तीव्र वाष्पीकरण छाया (की तुलना में सीधे सूर्य के प्रकाश में रखा पानी तेजी से उड़ता है; इसी कारण गर्म दिनों में कपड़े जल्दी सूखते हैं। वायु की गति तेज हवा = तीव्र वाष्पीकरण हवादार दिनों में जल वाष्प के कण हवा के साथ तेजी से हट जाते हैं, जिससे पंखे के नीचे गीले कपड़े जल्दी सूख जाते हैं। आर्द्रता अधिक आर्द्रता = धीमा वाष्पीकरण वर्षा के दिनों में हवा में पहले से ही जल वाष्प की मात्रा अधिक होती है, जिससे वायु की नमी सोखने की क्षमता कम हो जाती है और कपड़े बहुत धीरे सूखते हैं शीतलन प्रभाव (Cooling Effect) बादल हमें वर्षा कैसे देते हैं? बादलों का निर्माण और संघनन नाभिक बादल बनने के लिए केवल नमी का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वायुमंडल में सूक्ष्म कणों की उपस्थिति अनिवार्य है: घटक / कारक वैज्ञानिक भूमिका प्रयोगात्मक प्रमाण (Activity 8.10) धूल के कण / एरोसोल ये ‘संघनन नाभिक’ के रूप में कार्य करते हैं, जिसके चारों ओर जल वाष्प चिपक कर बूंदों में बदलती है। खाली बोतल में पानी हिलाने पर बादल नहीं बनता, लेकिन जले हुए अखबार का धुआँ डालते ही बोतल में धुंध (haziness/बादल) बन जाती है। बादल जब हवा अत्यधिक ठंडी हो जाती है, तो जल वाष्प इन धूल के कणों के चारों ओर संघनित होकर तैरती हुई छोटी बूंदें बनाती है, जो सामूहिक रूप से बादल कहलाते हैं। धुआं/धूल के कण वाष्प को संघनित होने के लिए आवश्यक प्राथमिक सतह (Aerosol surface) प्रदान करते हैं। वर्षण जब लाखों छोटी बूंदें आपस में जुड़कर बड़ी और भारी हो जाती हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वे तैर नहीं पातीं और नीचे गिरने लगती हैं। यह सतह पर वर्षा के रूप में गिरती है। विशेष परिस्थितियों में यह ओले (Hail) या बर्फबारी के रूप में भी गिर सकती है। जल चक्र NCERT Class 6, Science Ch-6 यहाँ पढ़ें:-

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16 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

16 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत इसमें घरेलू तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ₹1,27,500 करोड़ का सेमीकॉन 2.0 मिशन, देश के वैज्ञानिक कार्यबल को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शुरू किया गया ₹1,500 करोड़ का बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) चरण-III, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के वैज्ञानिकों द्वारा असम में खोजा गया 2.4 करोड़ वर्ष पुराना केवड़ा का जीवाश्म, भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनाने वाली नई रणनीति मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS) की प्रशासनिक रूपरेखा और इसके वैश्विक लक्ष्यों को समझेंगे, जो देश में उच्च मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के स्वदेशी उत्पादन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी। मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS): भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की नई रणनीति चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹62,500 करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन निर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS) को मंजूरी दे दी है। यह नई योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई ‘बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन’ (PLI-LSEM) योजना का स्थान लेगी, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को और अधिक मजबूत करना है। MPMS योजना की प्रमुख विशेषताएं यह योजना भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है: योजना से अपेक्षित परिणाम 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान इस योजना से भारतीय अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है: भारत में मोबाइल विनिर्माण का परिदृश्य ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत पिछले एक दशक में भारत ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है: प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य योजना / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य PLI-LSEM योजना बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, जिसने वैश्विक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया। इसका कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया है। घरेलू मूल्य संवर्धन इसका अर्थ है कि किसी उत्पाद को बनाने में विदेशों से आयातित पुर्जों के बजाय देश के भीतर बने कच्चे माल और पुर्जों का अधिक से अधिक उपयोग करना। तकनीकी संप्रभुता किसी देश की विदेशी प्रौद्योगिकियों या सॉफ्टवेयर पर निर्भरता को कम करके अपनी स्वदेशी तकनीक, पेटेंट और आरएंडडी (R&D) क्षमताओं को विकसित करना। सिंचन 2026: प्रयोगशाला अनुसंधान को व्यावहारिक चिकित्सा में बदलने की नई पहल चर्चा में क्यों? जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (BRIC) के एक प्रमुख संस्थान ‘ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान’ (THSTI) ने फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर परिसर में अपने तीसरे वार्षिक उद्योग-व्यवसाय सम्मेलन ‘ सिंचन 2026‘ (Synergistic Collaboration in Healthcare Innovation) का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य जगत के नेताओं, जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, उद्यम पूंजीपतियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाना है ताकि प्रयोगशाला के वैज्ञानिक अनुसंधानों (Lab-bench science) को वाणिज्यिक स्तर पर मरीजों के इलाज के व्यावहारिक समाधानों में बदला जा सके। सिंचन 2026 की मुख्य विशेषताएं और प्रगति यह मंच भारत के स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है: THSTI की अनुसंधान क्षमताएं और ढांचागत तंत्र संस्थान ने प्रयोगशाला के शोध और बाजार के बीच के अंतर (घाटी) को पाटने के लिए कई अत्याधुनिक प्रणालियां विकसित की हैं: मुख्य पैनल सत्र और उनके निष्कर्ष सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए तीन प्रमुख नीतिगत स्तंभों पर गहन चर्चा की गई: पैनल / सत्र मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक बिंदु ग्लोबल हेल्थ: विज्ञान, विनिर्माण और साझेदारी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता, सुदृढ़ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और लचीले अनुसंधान तंत्र का विकास करना। प्रारंभिक नैदानिक ​​अनुवाद में तेजी लाना शैक्षणिक अनुसंधानों को इंसानों पर होने वाले पहले चरण के परीक्षणों में तेजी से बदलने के लिए एकीकृत नैदानिक अनुसंधान प्लेटफार्मों का उपयोग करना। व्यावसायिक अनुवाद मंचों की दक्षता बढ़ाना नए नवोन्मेषकों, निवेशकों और नीतिगत एक्सीलेटरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को वाणिज्यिक स्तर पर बड़े उद्योगों में बदला जा सके। आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026): उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया अध्याय चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (CCEA) ने उर्वरक विभाग के एक बड़े सुधार प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026’ (National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat – NIPU-2026) को हरी झंडी दे दी है। यह नई नीति देश में गैस आधारित नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए निजी और सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करेगी, जिससे भारत यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सके। नीति की आवश्यकता: पृष्ठभूमि और वर्तमान परिदृश्य NIPU-2026 की प्रमुख विशेषताएं और NIP-2012 से तुलना नई नीति (NIPU-2026) को पुरानी नीति (NIP-2012) की तुलना में अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है: बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) का चरण-III: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को 300 बिलियन डॉलर बनाने की राह चर्चा में क्यों? केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के चरण-III का औपचारिक शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और लंदन स्थित परोपकारी संस्था वेलकम ट्रस्ट (UK) द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस तीसरे चरण के लिए ₹1,500 करोड़ का कुल बजटीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है, जो देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोमेडिकल अनुसंधान कार्यबल तैयार करने में मदद करेगा। BRCP चरण-III की मुख्य विशेषताएं यह कार्यक्रम भारत को जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है: भारत का बढ़ता जैव प्रौद्योगिकी परिदृश्य केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में पिछले एक दशक में आए क्रांतिकारी बदलावों के आधिकारिक आंकड़े साझा किए: प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य घटक / आयाम मुख्य बिंदु कार्यक्रम का नाम बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) – चरण-III। नोडल विभाग / मंत्रालय जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार। अंतर्राष्ट्रीय भागीदार वेलकम ट्रस्ट, लंदन (ब्रिटेन) स्थित एक वैश्विक परोपकारी संस्था। कुल बजटीय आवंटन ₹1,500 करोड़ (साझा वित्तीय पोषण: ₹1,000 करोड़ DBT

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15 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

15 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत में सीमा सुरक्षा और विकास को धार देने वाला नेसाक (NESAC) का स्पेस-बेस्ड मिशन, देश के पहले ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह, पंचायतों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने वाला ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को यूरेनियम की सुरक्षा देने वाला ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया नागरिक परमाणु सहयोग’ और औद्योगिक दुर्घटनाओं से मानव जीवन की रक्षा करने वाला CeNS बेंगलुरु का अल्ट्रा-सेंसिटिव अमोनिया सेंसर शामिल हैं। कैपासीटीज कार्यक्रम: शहरी जलवायु लचीलापन और नेट-जीरो कार्य योजना Why in News? (चर्चा में क्यों?) 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय शहरों को कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-अनुकूल बनाने वाले ‘कैपासीटीज’ कार्यक्रम के शानदार 10 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘स्केलिंग अर्बन क्लाइमेट रेजिलिएंस: द कैपासीटीज लेगेसी एंड वे फॉरवर्ड’ नामक इस कार्यक्रम का आयोजन ‘इक्ली साउथ एशिया’ और राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर भारतीय शहरों को नेट-जीरो की राह पर ले जाने के लिए तीन महत्वपूर्ण ‘नॉलेज प्रोडक्ट्स’ (दस्तावेज) भी लॉन्च किए गए। ‘कैपासीटीज’ परियोजना क्या है? इस परियोजना का मूल उद्देश्य भारतीय शहरों को ऐसे उपकरणों और क्षमता से लैस करना है ताकि वे अपने विकास नियोजन में जलवायु चिंताओं को शामिल कर सकें: पिछले एक दशक में कार्यक्रम के महत्वपूर्ण प्रभाव इस कार्यक्रम ने देश के 8 प्रमुख शहरों (कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, उदयपुर और सिलीगुड़ी) में व्यावहारिक जमीनी बदलाव दिखाए हैं: 1. नेट-जीरो क्लाइमेट रेजिलिएंट सिटी एक्शन प्लान (CRCAPs) 2. संस्थागत बदलाव 3. सफल जमीनी परियोजनाएं शहर (State) लागू किया गया सफल मॉडल अहमदाबाद (गुजरात) सौर-ऊर्जा संचालित ई-बस चार्जिंग स्टेशन की स्थापना। कोयंबटूर (तमिलनाडु) 154 kWp क्षमता वाले देश के अभिनव तैरते हुए सौर संयंत्र (Floating Solar Plant) का विकास। राजकोट (गुजरात) 100 रियायती ई-ऑटो के साथ ‘ग्रीन मोबिलिटी जोन’ की शुरुआत। तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) शहरी जल निकायों और झीलों का पारिस्थितिक पुनरुद्धार। तिरुनेलवेली (तमिलनाडु) संभावित बाढ़ से सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक ‘अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम’। वडोदरा (गुजरात) तेजी से घने वन विकसित करने के लिए ‘मियावाकी शहरी वानिकी’ मॉडल। नए लॉन्च किए गए तीन ‘नॉलेज प्रोडक्ट्स’ शहरी नीति निर्माताओं और इंजीनियरों की मदद के लिए निम्नलिखित मार्गदर्शिकाएं जारी की गई हैं: प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य संस्था / कार्यक्रम महत्वपूर्ण बिंदु NIUA राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान; यह केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत शहरी क्षेत्र के अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए एक शीर्ष स्वायत्त निकाय है। ICLEI South Asia पर्यावरण और सतत विकास के लिए काम करने वाला स्थानीय सरकारों का एक वैश्विक नेटवर्क (International Council for Local Environmental Initiatives)। मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित पद्धति, जिसमें बहुत कम जगह में देशी प्रजातियों के पौधे लगाकर कम समय में घने वन बनाए जाते हैं। CAC49 में भारत की ऐतिहासिक सफलता: वैश्विक खाद्य मानकों में बढ़ी धाक Why in News? (चर्चा में क्यों?) 6 से 10 जुलाई 2026 तक जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन के 49वें सत्र (CAC49) में भारत ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों के निर्धारण में एक बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी सफलता हासिल की है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री रजित पुन्हानी ने किया। इस सत्र में भारत की अध्यक्षता में तैयार किए गए सात महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानकों को मंजूरी दी गई और भारतीय काजू के लिए वैश्विक मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। भारत की अगुआई में अपनाए गए 7 कोडेक्स मानक इस सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता और सह-अध्यक्षता में विकसित निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया गया, जो वैश्विक व्यापार में भारतीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिलाएंगे: 1. भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए मानक: 2. भारत की सह-अध्यक्षता में अपनाए गए मानक: ‘काजू की गुठली’ के लिए नया मानक सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत के उस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना था, जिसके तहत अब काजू की गुठली के लिए एक समर्पित कोडेक्स मानक विकसित किया जाएगा: कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) क्या है? प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य संस्था / पहल मुख्य तथ्य FSSAI खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय; यह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। Spices Board वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करने वाला वैधानिक निकाय, जो भारतीय मसालों के विकास और निर्यात संवर्धन के लिए जिम्मेदार है। CCPFV Codex Committee on Processed Fruits and Vegetables; यह प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों के वैश्विक मानकों का निर्धारण करने वाली विशिष्ट कोडेक्स समिति है। नेसाक: पूर्वोत्तर में सीमा प्रबंधन और विकास को रफ्तार दे रही अंतरिक्ष तकनीक Why in News? (चर्चा में क्यों?) 14 जुलाई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष मंत्रालय, डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेघालय के उमियम (Umiam) में उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास और देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं (जैसे सीमा प्रबंधन) को मजबूत करने में ‘नेसाक’ की बढ़ती भूमिका की सराहना की। वर्तमान में नेसाक पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में लगभग 130 अंतरिक्ष अनुप्रयोग परियोजनाओं (Space Application Projects) पर काम कर रहा है। नेसाक की प्रमुख परियोजनाएं और उनके अनुप्रयोग 1. सीमा प्रबंधन और सुरक्षा (Border Management) 2. आपदा प्रबंधन (Disaster Management) 3. कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन 4. पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) क्या है? पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए उपग्रह आधारित विकास के प्रमुख क्षेत्र क्षेत्र (Sector) उपयोग की जाने वाली तकनीक दूरसंचार दुर्गम पहाड़ी इलाकों में उपग्रह संचार SatCom के जरिए शिक्षा EduSat और टेली-मेडिसिन नेटवर्क का विस्तार। शहरी विकास भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करके स्मार्ट शहरों का नियोजन और वन आवरण की निगरानी। ड्रोन तकनीक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में ड्रोन (UAV) का उपयोग करके सटीक कृषि और आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति। प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य संस्था / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाला एक वैधानिक निकाय, जिसे उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 7: Temperature and its Measurement

NCERT Notes Class 6 science Chapter 7: Temperature and its Measurement के अंतर्गत मानव शरीर का तापमान मापने वाले क्लिनिकल थर्मामीटर और वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रयुक्त होने वाले प्रयोगशाला (Laboratory) थर्मामीटर—के कार्य सिद्धांतों और उनके उपयोग की सावधानियों को समझाता है। इसके साथ ही, यह पारे (Mercury) के तापीय विस्तार और सेल्सियस (C) जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पैमानों के बुनियादी नियमों को भी स्पष्ट करता है गर्म या ठंडा? (Hot or Cold?) ऊष्मा की अनुभूति और व्यावहारिक उदाहरण स्थिति / माध्यम (Medium) तापमान की सापेक्षिक स्थिति (Relative Temperature) व्यावहारिक पक्ष मटके का पानी ठंडा (Cool) मिट्टी के घड़े के सूक्ष्म छिद्रों से होने वाले वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण पानी ठंडा रहता है। गर्मियों में नल का पानी गर्म (Hotter) वायुमंडलीय उच्च तापमान और सौर विकिरण के सीधे संपर्क के कारण। रेफ्रिजरेटर का पानी अत्यधिक ठंडा (Cold) कृत्रिम शीतलन (Artificial cooling) प्रणाली द्वारा ऊष्मा को बाहर निकालने के कारण। तापमान (Temperature) तापमान का मापन (Clinical thermometer) मानव शरीर का तापमान और तकनीकी बारीकियां (Human Body Temperature) मापन पैरामीटर वैज्ञानिक मान / तथ्य व्यावहारिक एवं जैविक कारक (Biological Factors) सामान्य तापमान 37.0 C या 98.6 F यह बड़ी संख्या में स्वस्थ लोगों का औसत (Average) है। एक स्वस्थ व्यक्ति का तापमान इससे थोड़ा कम या अधिक हो सकता है। मानव शरीर की सीमा 35 C से 42 C सामान्य परिस्थितियों में मानव शरीर का तापमान इस सीमा से बाहर नहीं जाता है। बगल (Armpit) से मापन 0.5 C से 1 C कम छोटे बच्चों या बुजुर्गों के लिए जीभ के स्थान पर बगल से मापने पर तापमान वास्तविक शरीर के तापमान से थोड़ा कम आता है। तापमान को प्रभावित करने वाले कारक आयु, दिन का समय, शारीरिक गतिविधि सामान्यतः छोटे बच्चों का तापमान वयस्कों से थोड़ा अधिक और वृद्धों का थोड़ा कम हो सकता है। तापमान के पैमाने और अंतर्राष्ट्रीय मानक नियम प्रयोगशाला थर्मामीटर (Laboratory thermometer) प्रयोगशाला थर्मामीटर के उपयोग के मानक नियम उपयोग के चरण / सावधानियां वैज्ञानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण कारण सीधा रखना (Orientation) थर्मामीटर को हमेशा बिल्कुल लंबवत (Vertically) सीधा पकड़ें, इसे कभी झुकाएं नहीं। झुकाने से नली में द्रव के स्तंभ (Liquid column) का पाठ्यांक प्रभावित हो सकता है। बल्ब की स्थिति (Bulb Placement) थर्मामीटर का बल्ब बर्तन के तल (Bottom) या दीवारों (Sides) को नहीं छूना चाहिए। यदि बल्ब बर्तन की सतह को छुएगा, तो यह द्रव के बजाय सीधे पात्र का तापमान मापने लगेगा। रीडिंग का समय (Reading Protocol) तापमान का पाठ्यांक हमेशा द्रव में डूबे रहने के दौरान ही लें। जैसे ही थर्मामीटर को पानी से बाहर निकाला जाता है, हवा के संपर्क में आने से द्रव का स्तर तुरंत गिरने लगता है। दृष्टि रेखा (Line of Sight) पाठ्यांक लेते समय आँख को द्रव स्तंभ के ठीक समानांतर (Direct line) रखना चाहिए। टेढ़ा देखने से लंबन त्रुटि (Parallax Error) होती है, जिससे पाठ्यांक अशुद्ध हो जाता है। अवस्था परिवर्तन और ऊष्मागतिकी के नियम वायु का तापमान (Air temperature) 🇮🇳 वैज्ञानिक योगदान: अन्ना मणि NCERT Class 6, Science Ch-1 यहाँ पढ़ें:-

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14 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

14 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वित्तीय क्षेत्र के लिए जारी ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए आयोजित ‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस समिट’ तथा शिलॉन्ग में आयोजित ‘नेक्स्ट-जेन ई-गवर्नेंस प्रशासनिक सुधार सम्मेलन’ की प्रमुख नीतिगत चर्चाओं को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, शहरी जल सुरक्षा के लिए ‘कैच द रेन’ (AMRUT 2.0) अभियान, ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने वाली ‘NIDAR 2.0’ (SwaYaan पहल) तथा भारत-जापान रक्षा नीति संवाद के 8वें संस्करण सहित सुरक्षा और संगठित अपराधों पर प्रहार करने वाले ‘ऑपरेशन वज्र’ (CBN) का संपूर्ण विश्लेषण किया गया है। RBI की फॉरेक्स स्वैप योजनाएं: FCNR(B), ECB और OFCB के जरिए विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूती Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों (MDs & CEOs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जून 2026 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा घोषित FCNR(B) जमा, ECB (बाह्य वाणिज्यिक उधार) और OFCB (विदेशी मुद्रा उधार) के लिए विशेष फॉरेक्स स्वैप पहलों की प्रगति की समीक्षा करना और विदेशी मुद्रा प्रवाह को और गति देना है। फॉरेक्स स्वैप योजनाएं क्या हैं और इनका उद्देश्य? वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूत करने और भुगतान संतुलन (BoP) को अनुकूल बनाए रखने के लिए यह योजनाएं एक महत्वपूर्ण रक्षा कवच हैं: समीक्षा बैठक के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतियाँ प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य शब्दावली / घटक मुख्य तथ्य FCNR(B) खाता Foreign Currency Non-Resident (Bank) जमा खाता।इसे अनिवासी भारतीय (NRIs) भारत में विदेशी मुद्रा (जैसे डॉलर, पाउंड) में ही खोलते हैं। इसमें जमाकर्ता को विनिमय दर का जोखिम (Exchange Rate Risk) नहीं होता। ECB External Commercial Borrowings (बाह्य वाणिज्यिक उधार)।भारतीय कॉरपोरेट्स और बैंक व्यावसायिक गतिविधियों के लिए विदेशी स्रोतों से जो वाणिज्यिक ऋण लेते हैं, उसे ECB कहा जाता है। फॉरेक्स स्वैप यह एक ऐसी वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें आरबीआई बैंकों से डॉलर खरीदता है और उसके बदले रुपये देता है, साथ ही भविष्य की एक निश्चित तारीख पर इसे वापस करने का समझौता होता है। यह बाजार में तरलता (Liquidity) और विनिमय दर को स्थिर रखता है। BFSI क्षेत्र के लिए डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26: साइबर सुरक्षा और AI असंतुलन Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 13 जुलाई 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने CERT-In, CSIRT-Fin और साइबर सुरक्षा फर्म SISA के सहयोग से भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) तथा भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’ का दूसरा संस्करण जारी किया है। यह रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों और नियामकों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में उभरते साइबर खतरों से निपटने का रोडमैप प्रदान करती है। रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष यह रिपोर्ट दर्शाती है कि तकनीकी नवाचार (Innovation) और उसके दुरुपयोग (Exploitation) के बीच का समय अब वर्षों से घटकर कुछ हफ्तों का रह गया है: साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रमुख संस्थान 1. CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) 2. CSIRT-Fin (कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम इन फाइनेंस) 3. SISA प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य विशिष्ट शब्द / निकाय मुख्य विशेषताएं CSIRT-Fin वित्तीय क्षेत्र के लिए विशिष्ट नोडल एजेंसी, जो बैंकिंग, शेयर बाजार, बीमा और पेंशन फंड के साइबर सुरक्षा प्रयासों का समन्वय करती है। AI Asymmetry वह स्थिति जहाँ साइबर अपराधियों के पास सुरक्षा नियामकों की तुलना में AI तकनीकों का उपयोग करके तेजी से और सस्ते में हमला करने की अधिक क्षमता होती है। 4-Layer Gap Archetype साइबर सुरक्षा में किसी प्रणालीगत विफलता के पीछे क्रमिक और आपस में जुड़ी कमजोरियों की पहचान करने वाला विश्लेषण ढांचा। ‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस’ शिखर सम्मेलन: लोक प्रशासन में एआई और डेटा-आधारित निर्णय क्षमता Why in News? (चर्चा में क्यों?) हाल ही में 13 से 15 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के होटल सम्राट में तीन दिवसीय ‘एआई चैंपियन्स फॉर डिजिटल गवर्नेंस’ शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन भारत पर्यटन विकास निगम (ITDC), स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेस (SCOPE) और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जो भारत सरकार के ‘इंडियाएआई मिशन’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शिखर सम्मेलन के मुख्य और रणनीतिक बिंदु यह तीन दिवसीय कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों में व्यावहारिक एआई क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है: आयोजक और सहयोगी संस्थान इस राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने में शामिल प्रमुख निकायों की प्रशासनिक भूमिका निम्नलिखित है: 1. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) 2. क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission – CBC) 3. SCOPE (स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेस) 4. ITDC (भारत पर्यटन विकास निगम) प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य विशिष्ट घटक / पहल मुख्य तथ्य इंडियाएआई मिशन भारत सरकार की एक व्यापक राष्ट्रीय पहल जिसका उद्देश्य देश में एआई के नवाचार, कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप्स और जिम्मेदार एआई उपयोग को बढ़ावा देना है। मिशन कर्मयोगी / CBC सिविल सेवा में ‘नियम-आधारित’ (Rule-based) व्यवस्था से ‘भूमिका-आधारित’ (Role-based) व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए क्षमता निर्माण आयोग (CBC) नोडल एजेंसी है। विकसित भारत @2047 भारत को अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष (2047) तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का विजन, जिसमें डिजिटल गवर्नेंस और एआई सक्षम प्रशासन एक मुख्य आधार स्तंभ है। नेक्स्ट-जेन प्रशासनिक और ई-गवर्नेंस सुधार: शिलॉन्ग राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 Why in News? (चर्चा में क्यों?) 13 जुलाई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शिलॉन्ग (मेघालय) में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) तथा मेघालय सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘नेक्स्ट जनरेशन प्रशासनिक और ई-गवर्नेंस सुधार’ पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। पीएम मोदी के “रिफॉर्म एक्सप्रेस” के आह्वान के तहत, यह सम्मेलन विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) आधारित भविष्य के सुधारों का खाका तैयार करता है। प्रमुख प्रशासनिक सुधार और डिजिटल पहल 1. अप्रचलित नियमों की समाप्ति (Repeal of Obsolete Rules) 2. CPGRAMS का कायाकल्प (Grievance Redressal) 3. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सफलता 4. अन्य महत्वपूर्ण शासन नवाचार विशेष राष्ट्रव्यापी

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 6: Materials Around Us

NCERT Notes Class 6 science Chapter 6: Materials Around Us के अंतर्गत । वस्तुओं के बिखरे हुए और अव्यवस्थित स्वरूप की समझ से मुक्त होकर, उनके विशिष्ट गुणों, बनावट और संरचना के व्यवस्थित वर्गीकरण (Classification) के संकल्प के साथ, इस व्यावहारिक विज्ञान ने प्रकृति को समझने की अपनी तार्किक क्षमता को प्राप्त किया। दिखावट, कठोरता, घुलनशीलता, पारदर्शिता और घनत्व (तैरना या डूबना) जैसे बुनियादी भौतिक गुणों के माध्यम से क्रमिक रूप से विकसित होता यह विषय, हमारी दैनिक उपयोग की छोटी वस्तुओं से लेकर विशाल औद्योगिक निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों तक एक सुदृढ़ व्यावहारिक ताने-बाने में बंधा है। हमारे चारों ओर की वस्तुओं का अवलोकन / Observing Objects Around Us प्राचीन भारतीय मृदभांड कला और तकनीकी विकास ऐतिहासिक काल/स्थल समय काल मृदभांड तकनीक और विशेषताएँ लाहुरादेवा (गंगा मैदान) और मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) लगभग 7,000 से 8,000 वर्ष पूर्व * भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनतम मिट्टी के बर्तनों (Earliest Pottery) के साक्ष्य मिले। सिंधु-सरस्वती क्षेत्र (शुरुआती चरण) 4000 ईसा पूर्व (BCE) से आगे * चाक से बने बर्तनों (Wheel-turned pottery) का उत्पादन शुरू हुआ।* बर्तनों पर पिगमेंटेशन (रंगद्रव्य) और बहु-रंगीन सुरक्षात्मक/सजावटी परतों (Slips) का प्रयोग आरंभ हुआ। सिंधु-सरस्वती / हड़प्पा सभ्यता (परिपक्व चरण) 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व * चमकदार लाल सतह पर काले रंग से डिज़ाइन (Black-on-Red Ware)।* ज्यामितीय पैटर्न, जलीय और स्थलीय जीवों के चित्र। मिट्टी के बर्तनों की निर्माण प्रक्रिया लेख के अनुसार, हड़प्पा काल की परिष्कृत मिट्टी की कला केवल कलात्मक नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित वैज्ञानिक प्रक्रिया थी: पदार्थों का समूहन कैसे करें? / How to Group Materials? उद्देश्य और गुणों के आधार पर पदार्थों का चयन वस्तु (Object) संभावित पदार्थ (Materials) चयन का वैज्ञानिक कारण जल पात्र / टम्बलर काँच, धातु (स्टील, तांबा), प्लास्टिक, मिट्टी। पदार्थ में जल धारण करने की क्षमता (Capable of holding water) होनी चाहिए। कपड़े या कागज का ग्लास पानी रोक नहीं सकता। खाना पकाने के बर्तन धातु (एल्युमिनियम, लोहा, तांबा), सिरेमिक। इनमें उच्च ऊष्मा प्रतिरोध (Heat resistance) होना चाहिए। कागज या प्लास्टिक जैसे पदार्थ आग पर जल जाएंगे। लेखन पेन प्लास्टिक, धातु, स्याही (Ink) का मिश्रण। वस्तु के विभिन्न भागों (जैसे बॉडी, निब, रीफिल) की अलग-अलग आवश्यकताओं के लिए मिश्रित पदार्थों का उपयोग होता है। खेल सामग्रियों में पदार्थों का अनुप्रयोग (Materials in Sports) दैनिक जीवन में वर्गीकरण के व्यावहारिक लाभ व्यवस्था और त्वरित पहचान के लिए समाज और व्यापार में वर्गीकरण का उपयोग व्यापक स्तर पर किया जाता है: पदार्थों के विभिन्न गुण क्या हैं? / What are the different Properties of Materials? पदार्थों को उनकी भौतिक और रासायनिक विशेषताओं के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, जो उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को निर्धारित करती हैं। सामग्र‍ियों के स्वरूप का अवलोकन करें और पहचान कठोरता और कोमलता प्रकाश की पारगम्यता श्रेणी (Category) वैज्ञानिक परिभाषा (Definition) प्रयोगात्मक उदाहरण (Examples) पारदर्शी (Transparent) जिनके आर-पार वस्तुओं को बिल्कुल स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। काँच (Glass), जल, वायु, सेलोफेन पेपर (Cellophane paper)। अपारदर्शी (Opaque) जिनके आर-पार बिल्कुल भी देखा नहीं जा सकता। लकड़ी (Wood), कार्डबोर्ड, धातुएं, दीवार। पारभासी (Translucent) जिनके आर-पार वस्तुएं दिखाई तो देती हैं, परंतु स्पष्ट नहीं (धुंधली/Hazy)। बटर पेपर (Butter paper), घिसा हुआ या फ्रॉस्टेड काँच (Frosted glass)। जल में विलेयता द्रव्यमान का सिद्धांत स्थान और आयतन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (GS-3: सामान्य विज्ञान – पदार्थ और मापन के मूल सिद्धांत) के दृष्टिकोण से दिए गए लेख के सभी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के नोट्स नीचे दिए गए हैं: पदार्थ क्या है? / What is Matter? मापन की इकाइयाँ और अंतर्राष्ट्रीय मानक भौतिक राशि (Quantity) एस.आई. इकाई (SI Unit) व्यावहारिक इकाई (Practical Unit) मानक लेखन नियम और संबंध द्रव्यमान (Mass) किलोग्राम (kg) ग्राम (g) अंग्रेजी के छोटे अक्षरों में kg लिखा जाता है (‘k’ और ‘g’ के बीच कोई स्पेस नहीं होता)।बहुवचन (जैसे kgs) लिखना सर्वथा गलत है। संख्या और इकाई के बीच हमेशा स्पेस होना चाहिए (जैसे: 7 kg)। आयतन (Volume) घन मीटर लीटर (L), मिलीलीटर (mL) लीटर को हमेशा कैपिटल L और मिलीलीटर को mL लिखा जाता है (m छोटा, L बड़ा)।संख्या और इकाई के बीच स्पेस आवश्यक है (जैसे: 500 mL, 2 m^3)।इकाई रूपांतरण सूत्र: 1m^3 = 1000 L वर्गीकरण का महत्व NCERT Class 6, Science Ch-3 यहाँ पढ़ें:-

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NCERT Notes Class 6 science Chapter 5: Measurement of Length and Motion

NCERT Notes Class 6 science Chapter 5: Measurement of Length and Motion के अंतर्गत भौतिक विज्ञान और मानव प्रगति के केंद्र में स्थित दूरियों का सटीक आकलन प्राचीन काल के अनिश्चित कदमों व हाथ की लम्बाइयों के अनुमान से लेकर आधुनिक वैश्विक मानक मात्रकों (SI Units) तक के क्रमिक और वैज्ञानिक विकास का एक अनूठा उदाहरण है। केवल व्यक्तिगत और स्थानीय पैमानों की विसंगतियों से मुक्त होकर, सार्वभौमिक शुद्धता और मापन की एकरूपता के संकल्प के साथ, इस व्यावहारिक विज्ञान ने वैश्विक व्यापार और वैज्ञानिक अनुसंधानों में अपनी सुदृढ़ सक्षमता को प्राप्त किया। यह मापन और गति का अध्ययन केवल पैमानों को मापने या दूरियों को गिनने का कोई सामान्य अभ्यास नहीं है, बल्कि यथार्थता (Precision), इंजीनियरिंग के सिद्धांतों और ब्रह्मांड की निरंतर गतिशीलता को समझने की वह बेजोड़ दास्तान है। हम कैसे मापते हैं? / How do we Measure? पारंपरिक मापन की सीमाएं और मात्रक का सिद्धांत (The Science of Measurement) मापन का घटक (Component) वैज्ञानिक परिभाषा व व्यावहारिक सत्य (Definition & Fact) वैचारिक समझ (Conceptual Insight) मापन के दो भाग (Parts of Measurement) किसी भी मापन को व्यक्त करने के लिए दो चीजों की आवश्यकता होती है — एक संख्या (Number) और दूसरा मात्रक/इकाई (Unit)। उदाहरण: ’13 बालिश्त’ में 13 संख्या है और ‘बालिश्त’ मापन के लिए चुनी गई इकाई है। व्यक्तिगत भिन्नता (Personal Variation) अलग-अलग व्यक्तियों के हाथ (Handspan), पैर (Foot), मुट्ठी (Fist) या उंगलियों के आकार भिन्न होते हैं। इसके कारण एक ही वस्तु को अलग-अलग लोगों द्वारा मापने पर परिणाम (जैसे 13 या 14 बालिश्त) अलग आते हैं। मानक मात्रक की आवश्यकता (Standard Unit) ऐसी वैश्विक इकाई की जरूरत, जिसका मान दुनिया के किसी भी व्यक्ति द्वारा मापने पर कभी न बदले। इसी आवश्यकता ने आधुनिक पैमानों (Scales) और मापन टेप (Measuring Tapes) के आविष्कार को जन्म दिया। भारत में मापन प्रणालियों का इतिहास (Ancient Indian Measurement Systems) मानक मात्रक / Standard Units मात्रक लिखने के आधिकारिक नियम (International Notation Rules) लंबाई मापने का सही तरीका सटीक मापन के तीन अनिवार्य नियम (Rules for Accurate Measurement) मापन की चुनौती (Challenge) सही व्यावहारिक तरीका वैज्ञानिक कारण स्केल की स्थिति (Placement) पैमाने को वस्तु की लंबाई के बिल्कुल समानांतर और संपर्क में सटाकर रखें। टेढ़ा रखने से मापन की वास्तविक लंबाई बढ़ जाती है। आंख की स्थिति (Eye Position) पाठ्यांक (Reading) लेते समय आंख सीधे बिंदु के ऊपर (90 डिग्री पर) होनी चाहिए। अगल-बगल (कोण A या C) से देखने पर लंबन त्रुटि (Parallax Error) होती है। टूटा हुआ पैमाना (Broken End) यदि शून्य (0) का सिरा टूटा हो, तो किसी अन्य पूर्ण अंक (जैसे 1.0 cm) से मापन शुरू करें। अंतिम छोर की रीडिंग में से शुरुआती अंक को घटाकर शुद्ध लंबाई प्राप्त होती है। वक्र रेखा की लंबाई मापना स्थिति का वर्णन करना / Describing Position संदर्भ बिंदु के व्यावहारिक उदाहरण संदर्भ का क्षेत्र व्यावहारिक गतिविधि (Activity) वैज्ञानिक महत्व खेल मैदान का रेखांकन खेल के मैदान में कबड्डी कोर्ट के लिए चूना पाउडर से लाइन खींचने से पहले जमीन पर एक स्थान तय करना। मैदान पर चुना गया वह शुरुआती बिंदु ही दूरी मापने के लिए ‘संदर्भ बिंदु’ बनता है। मील का पत्थर (Kilometre Stone) सड़क के किनारे लगे पत्थर पर ‘दिल्ली 70 किमी’ और अगले पत्थर पर ‘दिल्ली 60 किमी’ लिखा होना। यहाँ ‘दिल्ली’ एक संदर्भ बिंदु है, और घटती हुई संख्या यह दर्शाती है कि यात्री अपने गंतव्य के करीब पहुँच रहा है। गतिशील वस्तुएं / Moving Things स्थिति की सापेक्षता: बस यात्रा का उदाहरण (Relativity of Motion) प्रेक्षक का संदर्भ बिंदु वस्तु की अवस्था (State of Object) वैज्ञानिक कारण चलती बस या स्वयं पैसेंजर यात्री विराम अवस्था (At rest) में हैं। बस के अंदर समय के साथ यात्रियों की आपसी स्थिति नहीं बदल रही है। बस के बाहर की वस्तुएं (जैसे- इमारत/पेड़) यात्री गतिशील अवस्था (In motion) में हैं। बाहर की स्थिर वस्तुओं के सापेक्ष बस और यात्रियों की स्थिति लगातार बदल रही है। गति के प्रकार / Types of Motion भौतिकी के नियमों के अनुसार जब कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो उसके पथ (Path) और प्रकृति के आधार पर गति को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। गतियों का वर्गीकरण और उनके व्यावहारिक उदाहरण गति का प्रकार (Type of Motion) वैज्ञानिक परिभाषा (Scientific Definition) दैनिक जीवन एवं व्यावहारिक उदाहरण (Examples) रेखीय गति (Linear Motion) जब कोई पिंड या वस्तु एक सीधी रेखा (Straight line path) के अनुदिश गति करती है, तो उसे रेखीय गति कहा जाता है। * ऊंचाई से गिरता हुआ इरेज़र या पेड़ से गिरता संतरा।* गणतंत्र दिवस परेड में सैनिकों का मार्च-पास्ट।* फर्श पर धक्का दिया गया भारी बॉक्स। वृत्तीय गति (Circular Motion) जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिंदु को केंद्र मानकर एक वृत्ताकार पथ (Circular path) पर चक्कर लगाती है, तो उसे वृत्तीय गति कहते हैं। * धागे से बांधकर चारों ओर घुमाया गया इरेज़र।* मेलों में चलने वाला हिंडोला या मेरी-गो-राउंड (Merry-go-round)। दोलन गति (Oscillatory Motion) जब कोई पिंड अपनी एक निश्चित केंद्रीय स्थिति (Fixed mean position) के इधर-उधर या आगे-पीछे (To and fro / Up and down) गति करता है, तो उसे दोलन गति कहते हैं। * बच्चों का झूला (Swing)।* धागे से लटकाकर हिलाया गया पेंडुलम/इरेज़र।* टेबल पर दबाकर छोड़ी गई धातु की पट्टी (Metal strip) का ऊपर-नीचे होना। NCERT Class 6, Science Ch- 2 यहाँ पढ़ें:-

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