NCERT Notes Class 6 science Chapter 10: Living Creatures: Exploring their Characteristics
NCERT Notes Class 6 science Chapter 10: Living Creatures: Exploring their Characteristics के अंतर्गत पौधे और जंतु किस प्रकार भोजन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं, समय के साथ उनमें निरंतर वृद्धि कैसे होती है, और वे जीवित रहने के लिए श्वसन की प्रक्रिया को कैसे अपनाते हैं। बाहरी वातावरण में होने वाले बदलावों के प्रति सजीवों द्वारा दिखाई जाने वाली अनुक्रिया, शरीर के हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए उत्सर्जन की व्यवस्था और अपनी प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए प्रजनन के वैज्ञानिक महत्व को भी स्पष्ट किया गया है। सजीवों को निर्जीवों से क्या अलग करता है? सजीव प्राणी: उनके लक्षणों की खोज सजीवों और निर्जीवों के बीच अंतर स्पष्ट करने वाले प्रमुख वैज्ञानिक लक्षण निम्नलिखित हैं: 1. पौधों में गति (Movement in Plants) 2. वृद्धि और पोषण (Growth and Nutrition) 3. श्वसन प्रक्रिया (Respiration) 4. उत्सर्जन (Excretion) 5. उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया (Response to Stimuli) 6. प्रजनन और मृत्यु (Reproduction and Death) सजीवों के मूलभूत जैविक लक्षणों का सारांश जैविक प्रक्रिया जंतुओं में स्वरूप पौधों में स्वरूप वैज्ञानिक महत्व गति (Movement) स्थान परिवर्तन (लोकोमोशन) पत्तियों का मुड़ना, फूलों का खिलना पौधों में रासायनिक उद्दीपनों द्वारा नियंत्रित गति होती है। श्वसन (Respiration) फेफड़ों/त्वचा द्वारा गैस विनिमय पत्तियों पर मौजूद रंध्रों (Stomata) द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लिए कोशिकीय स्तर पर अनिवार्य। उत्सर्जन (Excretion) मूत्र और पसीने के माध्यम से पत्तियों पर बूंदों के रूप में (Guttation) शरीर के आंतरिक संतुलन (Homeostasis) के लिए आवश्यक। अनुक्रिया (Response) तंत्रिका तंत्र द्वारा तीव्र प्रतिक्रिया स्पर्श या प्रकाश (जैसे छुई-मुई और आंवला) के प्रति पर्यावरण के अनुकूल जीवित रहने की उत्तरजीविता रण बीज के अंकुरण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ विभिन्न परिस्थितियों का बीजों पर प्रभाव गमला (Pot) उपलब्ध परिस्थितियाँ वायु की उपलब्धता अंकुरण का परिणाम वैज्ञानिक कारण Pot A सीधी धूप + पानी बिल्कुल नहीं उपलब्ध अंकुरण नहीं पानी के बिना आंतरिक जैविक क्रियाएं शुरू नहीं हो पाती हैं। Pot B सीधी धूप + अत्यधिक पानी (जलजमाव) अनुपलब्ध (मिट्टी के छिद्र पानी से बंद) अंकुरण नहीं वायु (ऑक्सीजन) न मिलने से बीज श्वसन नहीं कर पाता और सड़ जाता है। Pot C पूर्ण अंधकार + नमी (सीमित पानी) उपलब्ध अंकुरण सफल अधिकांश बीजों को अंकुरित होने के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती। Pot D सीधी धूप + नमी (सीमित पानी) उपलब्ध अंकुरण सफल अंकुरण के लिए आवश्यक तीनों प्राथमिक घटक (वायु, नमी, सही तापमान) मौजूद हैं। अंकुरण के तीन मुख्य घटक और उनका कार्य 1. जल (Water) 2. वायु और मिट्टी (Air and Soil) 3. प्रकाश और अंधकार की स्थिति (Light and Dark Conditions) पौधों में वृद्धि और गति विभिन्न परिस्थितियों में जड़ और तने की वृद्धि बीकर ) पौधे की स्थिति और प्रकाश की दिशा तने (Shoot) की वृद्धि की दिशा जड़ (Root) की वृद्धि की दिशा वैज्ञानिक निष्कर्ष Beaker A सीधा पौधा (Upright): सभी दिशाओं से समान धूप। ऊपर की ओर (Upward) नीचे की ओर सामान्य परिस्थितियों में तना प्रकाश की ओर और जड़ें जमीन की ओर बढ़ती हैं। Beaker B उल्टा पौधा (Inverted): सभी दिशाओं से समान धूप। मुड़कर ऊपर की ओर मुड़कर नीचे की ओर पौधा उल्टा होने पर भी जड़ें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में नीचे और तना ऊपर घूम जाता है। Beaker C सीधा पौधा: एक छोटे छेद से केवल एक दिशा से प्रकाश। प्रकाश के स्रोत की ओर मुड़ना नीचे की ओर (सीधी) तना प्रकाश की ओर आकर्षित होकर झुक जाता है, जबकि जड़ों पर इस प्रकाश का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष भारतीय वैज्ञानिक: सर जगदीश चंद्र बोस (1858–1937) पौधे का जीवन चक्र पौधे के विकास के विभिन्न चरण और उनके रूपात्मक परिवर्तन विकासात्मक चरण मुख्य रूपात्मक परिवर्तन वैज्ञानिक परिघटना और महत्व 1. बीजारोपण व अंकुरण बीज को मिट्टी में बोकर अनुकूल परिस्थितियां (नमी, वायु, सही तापमान) दी जाती हैं। सुशुप्तावस्था (Dormancy) समाप्त होती है और भ्रूण सक्रिय होकर अंकुर (Sprout) बनता है। 2. वानस्पतिक वृद्धि अंकुर एक युवा पौधे (Young Plant) में बदलता है और तेजी से तने तथा पत्तियों का विस्तार करता है। पौधा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) द्वारा अपनी वृद्धि के लिए ऊर्जा संचित करता है। 3. पुष्पन (Flowering) एक निश्चित अवधि (परिपक्वता) के बाद पौधे पर पहला फूल दिखाई देता है। यह पौधे का प्रजनन चरण (Reproductive Phase) होता है जो आगे फल बनने की नींव रखता है। 4. फलन व बीज निर्माण फूल के कुछ हिस्से सूखकर गिर जाते हैं और शेष भाग एक फली या फल (Pod/Fruit) में विकसित होता है। निषेचन (Fertilization) के बाद अंडाशय फल में और बीजांड बीजों में बदल जाते हैं, जिसमें नई पीढ़ी के बीज सुरक्षित रहते हैं। 5. शून्यता व प्राकृतिक मृत्यु फल और बीज पूरी तरह परिपक्व होने के बाद पौधा धीरे-धीरे पीला और सूखा होने लगता है। जीवन की सभी चयापचय गतिविधियाँ (Metabolic Activities) समाप्त हो जाती हैं और पौधा मृत हो जाता है जंतुओं का जीवन चक्र मच्छर का जीवन चक्र मच्छर के विकास के चार मुख्य चरण: मेंढक का जीवन चक्र मेंढक के विकास का क्रमिक वर्गीकरण: चरण (Stage) नाम समयावधि/विशेषताएं शारीरिक अनुकूलन और महत्व Stage IA स्पॉन Day 1 पानी की सतह पर जेली के रूप में सुरक्षित अंडों का समूह। Stage IB भ्रूण (Embryo) Day 3-4 अंडे के भीतर भ्रूण का प्रारंभिक विकास। Stage IIA टैडपोल पूंछ के साथ Day 7-10 प्रारंभिक डिंभक (Larva); इसमें केवल पूंछ होती है, पैर नहीं होते। पूंछ पानी में तैरने में मदद करती है। Stage IIB पैर वाला टैडपोल 8-10 सप्ताह टैडपोल के पिछले पैर (Hind legs) विकसित होने लगते हैं, लेकिन पूंछ बनी रहती है। Stage III फ्रॉगलेट (Froglet) 12 सप्ताह यह छोटा मेंढक जैसा दिखता है। यह पानी में रहने के साथ-साथ भूमि पर भी कुछ समय बिताना शुरू करता है। Stage IV वयस्क मेंढक (Adult) 14 सप्ताह पूंछ पूरी तरह गायब हो जाती है। इसके पैर कूदने और जमीन पर उतरने के लिए मजबूत हो जाते हैं। यह पानी और जमीन दोनों पर रह सकता है। NCERT Class 6, Social Science Ch-5 यहाँ पढ़ें:-