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24 July 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf

“सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में ‘द हिंदू’ (The Hindu) अखबार की भूमिका सर्वोपरि मानी जाती है। हालांकि, अंग्रेजी भाषा में होने के कारण कई हिंदी माध्यम के छात्रों को इसे समझने और इसके नोट्स बनाने में कठिनाई होती है। The Hindu Notes In Hindi इसी समस्या का एक प्रभावी समाधान है। डन्यूब नदी का सूखा (Danube River Drought) पृष्ठभूमि   डन्यूब नदी (Danube River) डन्यूब नदी (Danube) यूरोप की दूसरी सबसे लंबी नदी है (वोल्गा नदी के बाद)। यह मध्य और पूर्वी यूरोप की एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक नदी है। उद्गम और मुहाना (Source and Mouth) प्रवाहित होने वाले देश (10 देश) डन्यूब नदी दुनिया की ऐसी नदी है जो सबसे अधिक देशों (10 देशों) से होकर गुजरती है या उनकी अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है: जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोएशिया, सर्बिया, बुल्गारिया, रोमानिया, मोल्दोवा और यूक्रेन प्रमुख राजधानियाँ यह नदी यूरोप की चार प्रमुख राष्ट्रीय राजधानियों से होकर गुजरती है: मुख्य विशेषताएँ एवं महत्व  पिकएक्स माउंटेन और बंकर बस्टर गैंबल भौगोलिक और रणनीतिक पृष्ठभूमि तकनीकी एवं सामरिक चुनौतियाँ  Foreign Currency Non-Resident [Bank] or FCNR (B) Deposits जमा योजना परिचय एवं पृष्ठभूमि (Introduction & Context) योजना की मुख्य विशेषताएँ और RBI का हस्तक्षेप (Design Features) Bank credit-deposit ratio at a 62-year high   CD रेशियो (क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात): वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में भारतीय बैंकों का CD रेशियो 62 साल के उच्चतम स्तर 82.6% पर पहुंच गया।   लोन और डिपॉजिट की वृद्धि (Q1):   वृद्धि में अंतर (Variance): लोन और डिपॉजिट की वृद्धि के बीच का अंतर 5 प्रतिशत अंक (percentage points) था (जून तिमाही, FY24 के बाद से सबसे ज्यादा)।   CD रेशियो में तेजी के कारण (विश्लेषकों के अनुसार): क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात वह वित्तीय माप है जो यह बताता है कि बैंक अपनी कुल जमा राशि (डिपॉजिट) का कितना हिस्सा कर्ज (क्रेडिट) देने में उपयोग कर रहे हैं। इसका सूत्र कुल ऋण को कुल जमा से भाग देकर 100 से गुणा करना है। उच्च अनुपात (>85%): यह अधिक ऋण मांग और लाभ को दिखाता है, लेकिन बैंक की तरलता (लिक्विडिटी) पर जोखिम बढ़ा सकता है।कम अनुपात (<70%): यह सुरक्षित होता है, लेकिन संकेत देता है कि बैंक अपने पैसों का पूरा उपयोग कर्ज देने के लिए नहीं कर रहे हैं। ई-कॉमर्स सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में एक बड़ा बदलाव विरोध(Protest) करने का अधिकार और पुलिस शक्तियों की सीमाएँ संवैधानिक और कानूनी ढांचा सीजेपी (CJP) मार्च और कानून की स्थिति पुलिस कार्रवाई के मानक और नियम सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले नाटो (NATO) का अंकारा शिखर सम्मेलन (2026) और भू-राजनीतिक प्रभाव अंकारा शिखर सम्मेलन का परिचय रणनीतिक रोडमैप की चार मुख्य प्रतिबद्धताएं नाटो का विस्तार और रूस की प्रतिक्रिया नाटो के बदलाव और रक्षा उत्पादन की चुनौतियाँ भारत के लिए निहितार्थ और आत्म-निर्भरता की आवश्यकता

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24 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

24 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने वाली स्वदेशी ‘कुशा’ LR-SAM (लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस शील्ड) परियोजना, दक्षिणी नौसेना कमान कोच्चि में संपन्न ‘ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2’, और महान स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव की पुण्यतिथि पर उन्हें दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने हेतु पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन, भारत की अध्यक्षता में आयोजित 16वीं ब्रिक्स (BRICS) स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के सफल समापन, तथा देश की अमूर्त विरासत को सहेजने के उद्देश्य से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन एवं संग्रहालयों व अभिलेखागारों के व्यापक डिजिटलीकरण की राष्ट्रीय योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। ‘कुशा’ एलआर-एसएएम: भारत का स्वदेशी लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस शील्ड चर्चा में क्यों? रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘कुशा’ (LRSAM) का पहला सफल उड़ान-परीक्षण संपन्न किया। इस ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान मिसाइल प्रणाली ने उच्च गति और अधिक ऊंचाई वाले एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य का सटीक रूप से पीछा करते हुए उसे हवा में ही नष्ट कर दिया। यह परीक्षण भारत की राष्ट्रीय वायु रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं, स्वदेशीकरण और रणनीतिक महत्व 1. ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली की प्रमुख क्षमताएं 2. स्वदेशी डिजाइन एवं तकनीकी घटक 3. रणनीतिक महत्व एवं आत्मनिर्भरता प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य प्रणाली का नाम ‘कुशा’ LRSAM। प्रकार लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Surface-to-Air Missile)। परीक्षण स्थल डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा तट)। विकासकर्ता DRDO एवं भारतीय उद्योग साझेदार। मुख्य कार्य लड़ाकू विमान, मिसाइल, UAV और बड़े विमानों को मार गिराना। ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2: दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में समापन चर्चा में क्यों? कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास ‘ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के सहयोग से और भारत के नेतृत्व वाली कंबाइंड टास्क फोर्स 154 (CTF 154) के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। 20 से 23 जुलाई 2026 तक चले इस कार्यक्रम में 27 देशों के 276 कर्मियों, 76 विशेषज्ञों और 4 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया। इस अभ्यास ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और भाग लेने वाले देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्य बिंदु: प्रशिक्षण क्षेत्र, वैश्विक सहयोग और सामरिक महत्व 1. अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी एवं प्रशिक्षण ढांचा 2. प्रमुख प्रशिक्षण विषय और व्यावहारिक क्षेत्र 3. भारतीय नौसेना और दक्षिणी कमान का रणनीतिक महत्व प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य अभ्यास का नाम ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2 (OSR 26-2)। आयोजन स्थल दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि (20-23 जुलाई 2026)। आयोजक भारतीय नौसेना + कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) / CTF 154। कुल भागीदार 27 देश, 276 कर्मी, 4 अंतरराष्ट्रीय संगठन (जैसे UNODC, IMO IMLI)। CTF 154 का नेतृत्व भारतीय नौसेना (कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी – कमांडर CTF 154)। मुख्य सूचना नोड IFC-IOR (भारत) और JMIC (CMF)। स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव: पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि चर्चा में क्यों? भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने महान स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव की पुण्यतिथि पर उन्हें उपराष्ट्रपति भवन में पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने तिरु सुब्रमण्य शिव के अटूट राष्ट्रप्रेम, वन्दे मातरम के जन-जागरण अभियान और ब्रिटिश जेल में कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान को याद किया। यह श्रद्धांजलि भारत के उन महान नायकों के प्रति सम्मान प्रकट करती है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। मुख्य बिंदु: जीवन परिचय, योगदान और ऐतिहासिक संदर्भ 1. प्रारंभिक जीवन और राष्ट्रवादी कार्य 2. वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई (VOC) के साथ सहयोग 3. संघर्ष, बीमारी और अदम्य साहस प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य व्यक्तित्व तिरु सुब्रमण्य शिव। जन्मस्थान वटलुगुंडु, तमिलनाडु। प्रमुख सहयोगी तिरु वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई। मुख्य नारा/विचार ‘वन्दे मातरम’ का प्रचार और भारत माता की भक्ति। ऐतिहासिक संघर्ष ब्रिटिश जेल में कारावास और कुष्ठ रोग से ग्रसित होने के बावजूद निरंतर राष्ट्र सेवा। पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और छात्रों के हित की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणालियों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कड़े संदेश के तुरंत बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मुकदमों की विशेष सुनवाई के लिए पहली फास्ट-ट्रैक अदालत भी अधिसूचित कर दी है। मुख्य बिंदु: निर्णय का उद्देश्य, न्यायिक तंत्र और कानूनी ढांचा 1. घोषणा का मूल उद्देश्य एवं प्रशासनिक निर्देश 2. फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन और अधिकार क्षेत्र 3. पृष्ठभूमि एवं लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य हालिया घोषणा पेपर लीक मामलों की सुनवाई हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स (FTC) का गठन। संबद्ध अधिनियम लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024। गठन का अधिकार राज्य सरकारें / केंद्र शासित प्रदेश, संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से। पहली विशेष अदालत राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली (दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अधिसूचित)। कानूनी प्रावधान 3 से 10 साल का कारावास और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना। 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक: भारत की अध्यक्षता में सफल समापन चर्चा में क्यों? भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत चंडीगढ़ में ’16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक’ का सफल समापन हुआ। “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) विषय के अंतर्गत आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और

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23 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

23 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत दूरसंचार क्षेत्र में अगली पीढ़ी की तकनीक हेतु ‘भारत 6G एलायंस’ व स्पेक्ट्रम रोडमैप, मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने वाले 6 किमी रिज़ॉल्यूशन वाले ‘भारत फॉरकास्ट सिस्टम’ और देश में पवन ऊर्जा क्षमता द्वारा 57,443 मेगावाट का आंकड़ा पार, बाल स्वास्थ्य को समर्पित नीतिगत सिफारिशों वाली ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) पहल, बाल कल्याण हेतु ‘मिशन वात्सल्य’ का एकीकृत ढांचा, ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु परमाणु ऊर्जा मिशन का दीर्घकालिक रोडमैप तथा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ प्रथम त्रि-सेवा महिला नौकायन अभियान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। भारत 6G एलायंस और भारत में 6G स्पेक्ट्रम रोडमैप चर्चा में क्यों? संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में 6G तकनीक पर विस्तृत जानकारी साझा की। भारत में 6G सेवाओं को तेजी से विकसित करने के लिए ‘भारत 6G एलायंस’ (B6GA) का विस्तार 90 सदस्यों तक हो चुका है। इसके साथ ही, दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत के 6G विजन को साकार करने के लिए ‘स्पेक्ट्रम रोडमैप फॉर 6G इन इंडिया’ जारी किया है। मुख्य बिंदु: 6G एलायंस, टेस्टबेड और वैश्विक मानक 1. भारत 6G एलायंस (B6GA) का विस्तार 2. 6G टेराहर्ट्ज (THz) टेस्टबेड प्रोजेक्ट 3. वैश्विक मानकों में भारत का योगदान (ITU और 3GPP) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य B6GA की प्रकृति उद्योग और अकादमिक क्षेत्र का संयुक्त मंच (90 सदस्य)। 6G टेस्टबेड केंद्र SAMEER (कोलकाता) + IIT मद्रास, गुवाहाटी, पटना। वित्त पोषण फंड डिजिटल भारत निधि का TTDF (Telecom Technology Development Fund)। अंतर्राष्ट्रीय निकाय ITU (IMT-2030 फ्रेमवर्क), 3GPP, oneM2M। सहायता योजना TDIP योजना – स्टार्टअप्स/MSMEs को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स बैठकों के लिए फंडिंग। स्पेक्ट्रम रोडमैप DoT द्वारा आधिकारिक रूप से 6G सेवाओं हेतु जारी। भारत फॉरकास्ट सिस्टम (BharatFS): 6 किमी रिज़ॉल्यूशन वाला मौसम मॉडल चर्चा में क्यों? केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘भारत फॉरकास्ट सिस्टम’ (BharatFS) पर आधिकारिक जानकारी दी। भारत 6 किमी के उच्च रिज़ॉल्यूशन पर रीयल-टाइम वैश्विक मौसम पूर्वानुमान मॉडल चलाने वाला दुनिया का एकमात्र देश बन गया है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर खड़ा करती है। मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं, लाभ और रणनीतिक महत्व 1. उन्नत तकनीक और सुपरकंप्यूटिंग 2. व्यावहारिक लाभ (कृषि और आपदा प्रबंधन) 3. रणनीतिक और क्षेत्रीय महत्व प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य मॉडल का नाम भारत फॉरकास्ट सिस्टम (BharatFS)। रिज़ॉल्यूशन क्षमता 6 किलोमीटर (विश्व में सबसे सटीक)। ग्रिड तकनीक ट्रायंगुलर क्युबिक ऑक्टाहेड्रल (TCo) ग्रिड। प्रयुक्त सुपरकंप्यूटर अर्क (पुणे) और अरुणिका (नोएडा)। नोडल मंत्रालय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences)। मुख्य लक्ष्य पंचायत स्तर पर मौसम अलर्ट और आपदा प्रबंधन। भारत में पवन ऊर्जा क्षमता: 57,443 मेगावाट का आंकड़ा पार Why in News? (चर्चा में क्यों? केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में देश के पवन ऊर्जा क्षेत्र की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट पेश की। इस आधिकारिक संसदीय वक्तव्य के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 57,443 MW हो गई है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 6,057 MW की नई क्षमता जुड़ने से कुल वार्षिक उत्पादन 106 अरब यूनिट (BU) तक पहुंच गया है। GWEC (ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल) रिपोर्ट 2026 के मुताबिक भारत वैश्विक स्तर पर पवन ऊर्जा की कुल क्षमता में चौथे स्थान पर मजबूती से कायम है। मुख्य बिंदु: क्षमता, राज्यवार स्थिति और सरकारी पहलें 1. भारत की वैश्विक स्थिति और वार्षिक वृद्धि 2. राज्यवार स्थिति (शीर्ष राज्य) 3. पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी नीतियां प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य कुल स्थापित क्षमता 57,443 MW (30 जून 2026 तक)। ग्लोबल रैंकिंग GWEC रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व में चौथे (4th) स्थान पर। शीर्ष राज्य (क्षमता में) 1. गुजरात (16,086 MW) 2. तमिलनाडु 3. कर्नाटक। वित्त वर्ष 2025-26 उत्पादन 106 बिलियन यूनिट (BU)। FDI सीमा ऑटोमैटिक रूट से 100% FDI की अनुमति। ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस 100 kW या उससे अधिक की मांग वाले उपभोक्ताओं के लिए लागू। लेट्स फिक्स अवर फूड (LFOF): बच्चों में स्वस्थ खान-पान के लिए नीतिगत सिफारिशें चर्चा में क्यों? ICMR-NIN के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) कन्सोर्टियम ने एक नया नीतिगत दस्तावेज जारी किया। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने नई दिल्ली में इसे लॉन्च किया। इसका शीर्षक “Priority Policy Actions to Promote Healthier Diets and Food Environments for Children and Adolescents in India” है। इसका मुख्य मकसद बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे और खान-पान से जुड़ी बीमारियों को रोकना है। मुख्य बिंदु: LFOF पहल, सिफारिशें और नए टूलकिट 1. ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) क्या है? 2. नीतिगत दस्तावेज की मुख्य सिफारिशें 3. नए लॉन्च किए गए संसाधन प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य LFOF का नेतृत्व ICMR – राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN)। लॉन्चकर्ता डॉ. एम. श्रीनिवास (सदस्य-स्वास्थ्य, नीति आयोग)। लक्ष्य समूह बच्चे और किशोर (Children and Adolescents)। NEAT-S टूलकिट स्कूलों में पोषण माहौल का आकलन करने का टूल। HFSS Foods High in Fat, Salt, and Sugar (अस्वास्थ्यकर जंक फूड)। मुख्य लक्ष्य मोटापा और गैर-संचारी रोगों (NCDs) को नियंत्रित करना। मिशन वात्सल्य: बाल देखभाल और संरक्षण ढांचा चर्चा में क्यों? महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संसद में ‘मिशन वात्सल्य’ की समीक्षा रिपोर्ट साझा की। मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित बैठकों के जरिए इस योजना की निगरानी करता है। हाल ही में नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने भी इस योजना की उच्च प्रासंगिकता और दक्षता को देखते हुए इसे जारी रखने की सिफारिश की है। मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, कानून और कार्यान्वयन 1. मिशन वात्सल्य की मूल संरचना 2. किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रमुख कानूनी प्रावधान 3. वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य योजना का प्रकार केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)। संबंधित मंत्रालय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय। वैधानिक कानून किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015। पंजीकरण नियम धारा 41 (अनिवार्य पंजीकरण) एवं धारा 42 (दंडनीय अपराध)। मूल्यांकन रिपोर्ट DMEO

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22 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

22 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत कपड़ा मंत्रालय की ‘ग्रेट’ योजना के तहत तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में स्टार्टअप्स और नवाचार को दिए जा रहे प्रोत्साहन, पश्चिमी घाट में खोजे गए ‘एलोग्राफा’ कवक की 5 नई प्रजातियों के पारिस्थितिकीय महत्व तथा स्थानीय शासन को पारदर्शी बनाने वाली ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल, CDSCO द्वारा भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को मिली तकनीकी मंजूरी, तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025 के ऑनलाइन नामांकन, ‘मिशन golden स्पाइस’ के अंतर्गत मेघालय की उच्च-करक्यूमिन लाकाडोंग हल्दी के कायाकल्प, अल्पसंख्यक समुदायों हेतु PM VIKAS योजना, बहुराष्ट्रीय वायुसेना युद्धाभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ और वस्त्र उद्योग में परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली ‘टैक्स-इको’ पहल का विस्तृत विश्लेष्ण किया गया है। ग्रेट योजना: तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में इनोवेशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा चर्चा में क्यों? वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्र मार्गेरिटा ने लोकसभा में बताया कि वस्त्र मंत्रालय वर्ष 2023 से राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के तहत ‘ग्रेट’ योजना को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य युवा अन्वेषकों और वैज्ञानिकों को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में अपने विचारों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में मदद करना है। योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति 1. ग्रेट योजना का परिचय और वित्तीय सहायता 2. राज्यवार स्टार्टअप प्रदर्शन 3. नवोन्मेष के प्रमुख तकनीक क्षेत्र 4. आउटरीच और क्षमता निर्माण प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य योजना का नाम ग्रेट – GREAT (Grant for Research and Entrepreneurship across Aspiring Innovators in Technical Textiles)। मूल मिशन राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन – NTTM (वस्त्र मंत्रालय)। शुरुआत वर्ष 2023। वित्तीय मदद सीमा प्रति स्वीकृत स्टार्टअप अधिकतम 50 लाख रुपये। सब्सिडी का दायरा केवल तकनीकी वस्त्र क्षेत्र (स्मार्ट टेक्सटाइल, मेडिकल, डिफेंस व बायो-कंपोजिट)। पश्चिमी घाट में ‘एलोग्राफा’ कवक की 5 नई प्रजातियों की खोज चर्चा में क्यों? विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, MACS आगरकर अनुसंधान संस्थान (पुणे) के वैज्ञानिकों ने भारत के जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र ‘पश्चिमी घाट’ से लाइकेन बनाने वाले कवक के ‘एलोग्राफा’ वंश की 5 नई प्रजातियों की खोज की घोषणा की है। खोज की प्रमुख विशेषताएं और पारिस्थितिक महत्व 1. एलोग्राफा क्या है और इसका महत्व 2. खोजी गई 5 नई प्रजातियां 3. शोध पद्धति और वैज्ञानिक तकनीक प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य खोज का नाम एलोग्राफा वंश की 5 नई कवक (Lichen) प्रजातियां। खोज का स्थान पश्चिमी घाट (उष्णकटिबंधीय वन आवास)। अनुसंधान संस्थान MACS आगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे (DST के अंतर्गत)। पारिस्थितिक कार्य वन स्वास्थ्य, प्रदूषण और पर्यावरण परिवर्तन के जैव-सूचक (Bio-indicators)। इस्तेमाल किए गए DNA मार्कर्स mtSSU, nrLSU, और RPB2। ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल चर्चा में क्यों? केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर देते हुए ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल की वर्तमान प्रगति रिपोर्ट पेश की। इस उत्तर के माध्यम से सरकार ने संसद के पटल पर यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सहकारिता प्रशिक्षण परिषद (NCCT) के तहत RICM चंडीगढ़ द्वारा शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल किस प्रकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के सशक्तीकरण, प्रशिक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है। पहल के मुख्य प्रावधान, उद्देश्य और लाभ 1. ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल क्या है? 2. डिजिटल प्रोफाइलिंग और पारदर्शिता 3. कार्यान्वयन का क्षेत्र और भावी योजना प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पहल का नाम मेरी समिति मेरा पटल। शुरुआत करने वाली संस्था RICM चंडीगढ़ (NCCT के अंतर्गत)। लक्ष्य निकाय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) और MPCS। कवर किए गए क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, J&K, दिल्ली, चंडीगढ़, और लेह-लद्दाख। प्रमुख कार्य PACS का डिजिटल प्रोफाइलिंग, रियल-टाइम डेटा पारदर्शिता और शासन में सुधार। CDSCO ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को दी मंजूरी चर्चा में क्यों? स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को देश में विपणन स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी से भारत में डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी राष्ट्रीय प्रयासों को अत्यधिक मजबूती मिलेगी। जर्मनी की प्रसिद्ध कंपनी ‘टकेडा जीएमबीएच’ द्वारा विकसित और भारत में आयात की जाने वाली इस ‘लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावेलेंट’ वैक्सीन को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कड़े वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता मानकों की पुष्टि के बाद अनुमोदित किया गया है। वैक्सीन के तकनीकी पहलू, प्रभावकारिता और महत्व 1. Qdenga® वैक्सीन की तकनीकी संरचना 2. खुराक और उपयोग की आयु-सीमा 3. वैश्विक साख और नैदानिक परीक्षण 4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में भूमिका प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य वैक्सीन का नाम Qdenga® (Dengue Tetravalent Vaccine – Live, Attenuated)। स्वीकृति देने वाली संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO)। निर्माता कंपनी टकेडा जीएमबीएच (Takeda GmbH), जर्मनी। तकनीक रीकॉम्बीनेंट डीएनए तकनीक (GMO आधारित)। उपयुक्त आयु सीमा 4 से 60 वर्ष। खुराक अनुसूची (Dosage Schedule) 2 खुराकें (3 महीने के अंतराल पर) – सबक्यूटेनियस इंजेक्शन। वैश्विक स्थिति WHO प्री-क्वालिफाइड; 42 देशों में स्वीकृत। तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025: ऑनलाइन नामांकन शुरू चर्चा में क्यों? युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (TNNAA) 2025’ के लिए ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह भारत में साहसिक गतिविधियों और एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। इसके लिए गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in) पर 21 जुलाई से 20 अगस्त 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं। मुख्य बिंदु: पुरस्कार के नियम, श्रेणियां और पात्रता 1. पुरस्कार की श्रेणियां और उद्देश्य 2. पुरस्कार की विशेषताएं और समकक्षता 3. पात्रता और आवेदन प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य पुरस्कार का नाम तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025। नोडल मंत्रालय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय। नामांकन पोर्टल गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in)। पुरस्कार की श्रेणियां 4 (स्थल, जल, वायु और लाइफटाइम अचीवमेंट)। पुरस्कार राशि व सम्मान ₹15 लाख, कांस्य प्रतिमा, प्रमाण पत्र और ब्लेज़र/साड़ी। समकक्षता अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष। ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’: मेघालय की लाकाडोंग हल्दी का कायाकल्प चर्चा में क्यों? केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने संयुक्त

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21 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

21 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ‘स्माइल’ योजना की समीक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व नीली अर्थव्यवस्था के तहत भारत द्वारा WTO मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते की स्वीकृति, ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा गोवा में संचालित ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला और भारत की समृद्ध अमूर्त विरासत के संरक्षण के लिए संस्कृति मंत्रालय के ‘नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग’ (NMCM) एवं ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ (MGMD) पोर्टल के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई है। स्माइल (SMILE) योजना: ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ की दिशा में कदम चर्चा में क्यों? 20 जुलाई 2026 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ‘स्माइल’ (SMILE) योजना की प्रगति साझा की। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वर्तमान में देश के 216 शहरों में लागू है और अब तक 10,200 से अधिक व्यक्तियों का पुनर्वास किया जा चुका है। योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति 1. स्माइल योजना का परिचय और उद्देश्य 2. योजना का विस्तार और भावी लक्ष्य (2026-31) 3. समग्र पुनर्वास रणनीति 4. डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य घटक / बिंदु त्वरित तथ्य योजना का नाम स्माइल – SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise)। संबंधित मंत्रालय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय। योजना का स्वरूप केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme)। लक्ष्य (2030-31 तक) 295 शहरों को कवर करना और 35,000 व्यक्तियों का पुनर्वास। डिजिटल पोर्टल स्माइल-बेगरी नेशनल पोर्टल (SMILE-Beggary National Portal)। भारत ने डब्ल्यूटीओ (WTO) मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते को दी स्वीकृति चर्चा में क्यों? भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ‘मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते‘ (Agreement on Fisheries Subsidies – AFS) की औपचारिक स्वीकृति का दस्तावेज (Instrument of Acceptance) जमा कर दिया है। वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने इसे WTO की महानिदेशक को सौंपा, जिसके साथ ही भारत आधिकारिक रूप से इस समझौते का पक्षकार बन गया है। मुख्य बिंदु: शोध के प्रमुख निष्कर्ष और वैज्ञानिक महत्व 1. डब्ल्यूटीओ मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता क्या है? 2. समझौते का दायरा 3. पारंपरिक और छोटे मछुआरों की सुरक्षा व वैश्विक लाभ 4. भारत का घरेलू ढांचा और नीतिगत सुरक्षा प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य समझौते का नाम WTO मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता (Agreement on Fisheries Subsidies – AFS)। स्वीकृति की तिथि 20 जुलाई 2026 (भारत 123वां सदस्य बना)। समझौते का मुख्य उद्देश्य अवैध (IUU) और अत्यधिक मत्स्यन को मिलने वाली हानिकारक सब्सिडी को समाप्त करना। दायरे से बाहर (Exclusions) जलकृषि (Aquaculture/झींगा पालन) और अंतर्देशीय (Inland) मत्स्य पालन। सहायक राष्ट्रीय योजनाएं प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) तथा EEZ/High Seas नियम 2025। गोवा में ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट पर भूमि संसाधन विभाग का स्पष्टीकरण चर्चा में क्यों? ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने गोवा के निपटान और भूमि रिकॉर्ड निदेशालय (DSLR) के साथ मिलकर ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट के संबंध में फैली अफवाहों का आधिकारिक खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस सर्वेक्षण से मूल भूमि रिकॉर्ड, कानूनी स्वामित्व और संपत्ति की सीमाओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और सभी मौजूदा रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। शोध के प्रमुख निष्कर्ष 1. नक्शा प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? 2. अनिवासी (NRI) और अनुपस्थित भू-स्वामियों के अधिकारों की सुरक्षा 3. मैपिंग अभ्यास बनाम भूमि अधिग्रहण और कर 4. आगामी औपचारिक जांच प्रक्रिया और नागरिक मार्गदर्शन प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य प्रोजेक्ट का नाम नक्शा – NAKSHA (National Geospatial Knowledge-based Land Survey of Urban Habitations)। मूल योजना डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)। संबंधित मंत्रालय व विभाग भूमि संसाधन विभाग (DoLR), ग्रामीण विकास मंत्रालय और गोवा सरकार का DSLR। प्रोजेक्ट की प्रकृति जीआईएस आधारित शहरी भूमि पार्सल मैपिंग पहल। जांच अवधि 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक (ISLR कार्यालय, मडगांव, गोवा)। कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला: आधार वर्ष 2022-23 जारी चर्चा में क्यों? उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) ने कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) का नया आधार वर्ष 2022-23 घोषित किया है। यह नई श्रृंखला पुराने आधार वर्ष 2011-12 का स्थान लेगी। जून 2026 के लिए इस नई श्रृंखला के तहत पहला अनंतिम सूचकांक जारी किया गया है। योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति 1. नई ICI श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के मुख्य बदलाव 2. जून 2026 में कोर उद्योगों का प्रदर्शन प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य नया आधार वर्ष 2022-23 (पुराना: 2011-12)। जारीकर्ता संस्था आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA), DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय। कोर उद्योगों की संख्या 9 (नया जुड़ा उद्योग: लौह अयस्क)। सर्वाधिक भार वाले क्षेत्र 1. बिजली (30.93%), 2. रिफाइनरी उत्पाद (22.57%), 3. स्टील (17.58%)। न्यूनतम भार वाले क्षेत्र उर्वरक (2.731%), प्राकृतिक गैस (3.841%), सीमेंट (4.41%)। फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार और आरबीआई के प्रयास चर्चा में क्यों? वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में फिनटेक क्षेत्र, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और पेमेंट एग्रीगेटर्स को सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के लिए कई नियामकीय कदम उठाए हैं। फिनटेक नियामक ढांचा एवं उपभोक्ता सुरक्षा उपाय 1. फिनटेक क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचा 2. डिजिटल भुगतान सुरक्षा और एआई का उपयोग 3. डेटा सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण 4. उपभोक्ता जागरूकता और शिकायत निवारण प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य SRO-FT ढांचा फिनटेक कंपनियों में स्व-नियमन और पारदर्शिता के लिए आरबीआई द्वारा मई 2024 में जारी। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 (नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल – गृह मंत्रालय द्वारा संचालित)। शिकायत निवारण पोर्टल सचेत (SACHET) – अवैध रूप से पैसे जुटाने वाली संस्थाओं की रिपोर्ट करने के लिए। डेटा संरक्षण ढांचा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम 2023 (MeitY द्वारा अधिसूचित)। eBAAT कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक-बैंकिंग अवेयरनेस एंड ट्रेनिंग (आरबीआई का धोखाधड़ी जागरूकता कार्यक्रम)। नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग (NMCM) और ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ चर्चा में क्यों? केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने

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19 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

19 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (2024) की आधिकारिक घोषणा और देश के निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (Private Space Sector) स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) रॉकेट के ‘मिशन आगमन’ और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत किए गए बड़े संरचनात्मक व एफडीआई (FDI) सुधारों को प्रस्तुत किया गया है। श्वेत क्रांति 2.0 और ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को गति देते हुए कोलकाता (हावड़ा फूड पार्क) में स्थापित होने वाले विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र (अमुल बंगाल डेयरी परियोजना) के भूमि पूजन तथा e-RCS पोर्टल के लॉन्च का विश्लेषण है। सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) द्वारा ‘जीरो मैनुअल स्कैवेंजिंग’ और सीवर सफाई के पूर्ण यंत्रीकरण के प्रशासनिक निर्देशों की समीक्षा की गई है। विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण: भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति चर्चा में क्यों? भारत की निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की अग्रणी स्टार्टअप कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने बहुप्रतीक्षित रॉकेट विक्रम-1 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। इस ऐतिहासिक तकनीकी मील के पत्थर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का एक ‘परिवर्तनकारी और निर्णायक क्षण’ (Defining Moment) करार दिया है, जो देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती और मजबूत होती भूमिका को रेखांकित करता है। विक्रम-1 का महत्व और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का भविष्य 1. विक्रम-1 रॉकेट क्या है? 2. इस प्रक्षेपण का रणनीतिक और व्यावहारिक महत्व प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य प्रक्षेपण यान का नाम विक्रम-1, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। विकासकर्ता कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस – हैदराबाद स्थित एक भारतीय निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप। रॉकेट की श्रेणी यह एक लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (Small Satellite Launch Vehicle) है जो पेलोड को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। सहयोगी नियामक संस्था इन-स्पेस – भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र, जो निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों की अनुमति देता है। ऐतिहासिक संदर्भ इससे पहले स्काईरूट ने नवंबर 2022 में भारत का पहला निजी रॉकेट ‘विक्रम-एस’ उप-कक्षीय (Sub-orbital) मिशन के तहत लॉन्च किया था। कोलकाता में विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन: ‘सहकार से समृद्धि’ की ओर कदम चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण और श्वेत क्रांति 2.0 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कोलकाता में ‘अमुल बंगाल डेयरी परियोजना’ के तहत विश्व के सबसे बड़े दही उत्पादन संयंत्र का भूमि पूजन करेंगे। यह कदम पश्चिम बंगाल के डेयरी क्षेत्र, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और डिजिटल सहकारी प्रशासन को मजबूत करने के लिए एक बड़े अभियान का हिस्सा है। मुख्य बिंदु: अमुल बंगाल डेयरी परियोजना और सहकारिता पहल 1. अमुल बंगाल डेयरी परियोजना 2. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और किसानों को लाभ 3. डिजिटल गवर्नेंस और अन्य महत्वपूर्ण पहल प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य विश्व का सबसे बड़ा दही संयंत्र हावड़ा फूड पार्क, पश्चिम बंगाल में अमुल द्वारा स्थापित (दैनिक क्षमता: 10 लाख किलोग्राम दही)। श्वेत क्रांति 2.0 इसका उद्देश्य देश में दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत करना, दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण आय को दोगुना करना है। e-RCS पोर्टल सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के डिजिटल संचालन और पारदर्शिता के लिए लॉन्च किया गया एक ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म। सहकार से समृद्धि विजन भारत सरकार द्वारा देश में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने और इसके लिए एक अलग सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) के गठन का मूल मंत्र। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) द्वारा स्वच्छता और कल्याण सुविधाओं की समीक्षा चर्चा में क्यों? राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) ने सफाई कर्मचारियों की कार्य स्थितियों, सुरक्षा और समग्र कल्याण को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की है। NCSK के सदस्य श्री करम सिंह कर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ‘जीरो मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (शून्य हाथ से मैला उठाना) के लक्ष्य को प्राप्त करने और सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण यंत्रीकरण अपनाने पर विशेष बल दिया गया। समीक्षा बैठक के प्रमुख निष्कर्ष और प्रशासनिक निर्देश 1. मुख्य प्राथमिकताएं: सुरक्षा और पूर्ण यंत्रीकरण 2. महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्देश और समय-सीमा प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य NCSK (राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग) यह 1993 में एक अधिनियम के तहत गठित एक वैधानिक निकाय के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन वर्तमान में यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक गैर-वैधानिक निकाय (Non-Statutory Body) के रूप में कार्य कर रहा है (जिसका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया जाता है)। बैठक का मुख्य फोकस सीवर और नालों की सफाई का पूर्ण मशीनीकरण करना ताकि इंसानों को जानलेवा जोखिमों से बचाया जा सके। संबद्ध स्थानीय निकाय NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) – जिसने राजधानी को स्वच्छ रखने के साथ-साथ कार्यबल की सुरक्षा के लिए उच्च-स्तरीय तकनीकी निगरानी प्रणालियों को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। संबंधित वैधानिक अधिकार सफाई कर्मचारियों को EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) और ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रदान करना कानूनन अनिवार्य है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2024) चर्चा में क्यों? वर्ष 2024 के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में फीचर फिल्मों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन की श्रेणियों में उत्कृष्ट कलात्मक प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए दिए जाते हैं। मुख्य विजेता एवं पुरस्कार श्रेणियां भारतीय सिनेमा के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं और शैलियों की फिल्मों को सम्मानित किया गया है। 1. फीचर फिल्म खंड 2. गैर-फीचर और वृत्तचित्र खंड प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य श्रेणी / पुरस्कार घटक महत्वपूर्ण तथ्य सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म ‘श्रीकांत’ – निर्देशक: तुषार हीराचंदानी। संविधान की 8वीं अनुसूची से बाहर की फिल्में गढ़वाली भाषा: फिल्म ‘धोली’ और तुलु भाषा: फिल्म ‘इम्बू‘ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक ‘नानिरुवुदे निमगागी नादिरुवुदे ननगागी: कन्नड़ सिनेमादा थथवा मथु राजकीया’ (कन्नड़) – लेखक: केंचनूरु प्रदीप कुमार शेट्टी। सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव (हिंदी भाषा के लिए स्वर्ण कमल)। फीचर फिल्म जूरी के अध्यक्ष

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18 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

18 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा स्पाइसजेट पर ‘डार्क पैटर्न्स’ (भ्रामक डिजिटल डिज़ाइन) के उपयोग के लिए लगाया गया ₹1 लाख का जुर्माना डिजिटल गवर्नेंस और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) ने कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आधार वर्ष को 2022-23 कर दिया है और ‘लौह अयस्क‘ को 9वें मूल उद्योग के रूप में शामिल किया है। कौशल विकास मंत्रालय द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के लिए ‘पीएम-नैप्स’ योजना के तहत अतिरिक्त ₹1,500 मासिक प्रोत्साहन के साथ विस्तार किया गया है। नीति आयोग सूचकांक: इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (IFI) चर्चा में क्यों? नीति आयोग ने आधिकारिक तौर पर “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स” IFI रिपोर्ट जारी की है। यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के स्तर पर व्यापार और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने, सुधारों को गति देने तथा ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक डेटा-संचालित (Data-Driven) ढांचा प्रदान करता है। सूचकांक का ढांचा, कार्यप्रणाली और महत्व 1. पृष्ठभूमि और विकास 2. सूचकांक के 8 प्रमुख स्तंभ यह इंडेक्स कुल 84 संकेतकों पर आधारित है, जिसमें प्राथमिक निवेशक सर्वेक्षण और द्वितीयक डेटा दोनों को शामिल किया गया है। मूल्यांकन इन 8 स्तंभों के तहत होता है: 3. राज्यों का वर्गीकरण और रैंकिंग प्रदर्शन विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों को तीन सहकर्मी समूहों (Peer Groups) में बांटा गया है: समूह प्रथम स्थान (Rank 1) द्वितीय स्थान (Rank 2) तृतीय स्थान (Rank 3) बड़े राज्य (Large States) गुजरात महाराष्ट्र तमिलनाडु पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्य उत्तराखंड असम हिमाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश और सिटी स्टेट गोवा दिल्ली चंडीगढ़ 4. इस सूचकांक का वास्तविक महत्व और लाभ प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य जारीकर्ता संस्था नीति आयोग द्वारा तैयार और जारी। घोषणा वर्ष केंद्रीय बजट 2025-26 में इस इंडेक्स को विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। कुल संकेतक कुल 84 संकेतक और 8 स्तंभों के आधार पर राज्यों का मूल्यांकन किया जाता है। समग्र शीर्ष राज्य समग्र रैंकिंग में गुजरात पहले, महाराष्ट्र दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर है। पहाड़ी राज्यों में शीर्ष उत्तराखंड पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी राज्यों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य है। ईपीएफओ ‘विश्वास, 2026’ योजना: विवाद समाधान की नई पहल चर्चा में क्यों? श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत कार्यरत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नियोक्ताओं (Employers) के लिए एक बड़ी राहत देते हुए “विश्वास, 2026” नामक एकमुश्त विवाद समाधान योजना (One-time Dispute Resolution Initiative) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य नियोक्ताओं पर लगाए गए हर्जाने/जुर्माने से जुड़े पुराने विवादों का सौहार्दपूर्ण और त्वरित निपटारा करना है। मुख्य बिंदु: योजना का ढांचा, रियायतें और संचालन प्रक्रिया 1. विधिक पृष्ठभूमि और कार्यान्वयन अवधि 2. शामिल होने वाले मामलों की 4 श्रेणियां 3. वित्तीय रियायतें 14 जून 2024 से पहले की चूक या डिफ़ॉल्ट अवधि के लिए हर्जाने की गणना अब बेहद कम और रियायती दरों पर की जाएगी: डिफ़ॉल्ट की अवधि संशोधित रियायती दर 2 महीने तक की देरी पर 0.25% प्रति माह 2 से 4 महीने तक की देरी पर 0.50% प्रति माह 4 महीने से अधिक की देरी पर 1.00% प्रति माह 4. लाभ उठाने की अनिवार्य शर्तें और अपवर्जन 5. पूर्णतः डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु त्वरित तथ्य नोडल संगठन व मंत्रालय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार। योजना की प्रकृति एकमुश्त विवाद समाधान योजना, जो कुल 6 महीने के लिए खुली है। कट-ऑफ तिथि 14 जून 2024 से पहले की डिफ़ॉल्ट अवधियों के लिए ही रियायती दरों पर हर्जाने की गणना का लाभ मिलेगा। धारा 14B और धारा 7Q धारा 14B ईपीएफओ को डिफ़ॉल्ट पर हर्जाना (Damages) लगाने का अधिकार देती है, जबकि धारा 7Q विलंबित भुगतान पर ब्याज (Interest) से संबंधित है। मुख्य उद्देश्य मुकदमों (Litigation) को कम करना, व्यापार सुगमता बढ़ाना और सामाजिक सुरक्षा प्रशासन को सुदृढ़ करना। सूर्य के वायुमंडल में ‘मैग्नेटिक ट्री’ और प्लाज्मा प्रवाह की खोज चर्चा में क्यों? विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के नेतृत्व में भारतीय और वैश्विक वैज्ञानिकों ने सूर्य की दृश्य सतह और उसकी ऊपरी परतों के बीच एक छिपे हुए जुड़ाव की खोज की है। इस शोध ने पहली बार सूर्य के ऊपरी वायुमंडल में मध्याह्न प्रवाह (Meridional Flow) की मौजूदगी के पुख्ता सबूत दिए हैं, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, वैश्विक संचार प्रणालियों, जीपीएस नेविगेशन नेटवर्क और पावर ग्रिड को प्रभावित करने वाले अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) की सटीक समझ विकसित करने में मदद करेगा। शोध के प्रमुख निष्कर्ष और वैज्ञानिक महत्व 1. मध्याह्न प्रवाह क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है? 2. अनुसंधान की अनोखी कार्यप्रणाली और डेटा 3. ‘मैग्नेटिक ट्री’ (चुंबकीय वृक्ष) परिकल्पना की वास्तविक पुष्टि 4. इस खोज का व्यावहारिक और रणनीतिक महत्व प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु महत्वपूर्ण तथ्य प्रमुख सहयोगी शोध संस्थान ARIES (नैनीताल) के नेतृत्व में फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL), IIT दिल्ली, IIST और नासा का गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर। ऊपरी क्रोमोस्फीयर यह सूर्य की दृश्य सतह (प्रकाशमंडल/Photosphere) से लगभग 3,000 किलोमीटर ऊपर स्थित वायुमंडलीय क्षेत्र है, जहाँ यह प्रवाह खोजा गया है। प्लाज्मा प्रवाह की गति ऊपरी क्रोमोस्फीयर में प्लाज्मा प्रवाह की गति 5 से 15 मीटर प्रति सेकंड दर्ज की गई है। मुख्य डेटा स्रोत जापान का नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ। शोध का प्रकाशन यह ऐतिहासिक खगोलीय शोध प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘The Astrophysical Journal’ में प्रकाशित हुआ है। समाधान पोर्टल 2.0 और डिजिटल श्रम प्रशासन चर्चा में क्यों? श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों के लिए ‘समाधान पोर्टल 2.0’ पर एक व्यापक जागरूकता सत्र का सफल आयोजन किया है। नई दिल्ली के ‘श्रमेव जयते भवन’ में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से श्रमिक संघों को सशक्त बनाना तथा औद्योगिक विवादों के त्वरित निवारण तंत्र को मजबूत करना है। समाधान पोर्टल 2.0, विशेषताएं और महत्व 1. समाधान पोर्टल क्या है? 2. पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं 3.

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17 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

17 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय समय संप्रभुता को रेखांकित करता ‘वन नेशन, वन टाइम’ विज़न (व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी), CSIR-NIScPR और CGPDTM का ऐतिहासिक समझौता (NKRC), तथा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रमाण देती स्पिरुलिना आधारित ‘सी-फाइकोसायनिन’ उत्पादन तकनीक, वैश्विक व्यापार को गति देता भारत-यूके CETA व सामाजिक सुरक्षा समझौता, कपड़ा उद्योग में चक्रीयता को रेखांकित करता भारत टेक्स 2026 (तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र और चक्रीय अर्थव्यवस्था), दिल्ली-NCR में पर्यावरण सुधार हेतु वायु प्रदूषण नियंत्रण की नई शमन कार्ययोजना, और कृषि-लचीलेपन व जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से REWARD कार्यक्रम के तहत सैटेलाइट और ड्रोन आधारित जलागम प्रबंधन की दूरगामी तकनीकी पहल शामिल हैं। भारत टेक्स 2026-तीसरा दिन: टिकाऊ वस्त्र, चक्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार चर्चा में क्यों? भारत के सबसे बड़े वैश्विक कपड़ा महाकुंभ ‘भारत टेक्स 2026’ का तीसरा दिन संपन्न हुआ। इस दिन का मुख्य फोकस भारतीय वस्त्र उद्योग में सस्टेनेबिलिटी (सस्टेनेबल विकास), सर्कुलरिटी (चक्रीयता), भविष्य के कौशल, टिकाऊ सोर्सिंग और वैश्विक व्यापार एकीकरण पर केंद्रित रहा। इसमें विभिन्न नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, निवेशकों और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मुख्य बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं 1. विजननेक्स्ट ट्रेंड पब्लिकेशन का अनावरण 2. सर्कुलरिटी और हरित नवाचार 3. जैविक कपास मूल्य श्रृंखला और निष्पक्ष मूल्य निर्धारण 4. डिजिटल और वैश्विक निर्यात बाजार 5. मध्य प्रदेश राज्य सत्र प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य घटक / पहल मुख्य बिंदु भारत टेक्स 2026 भारत का सबसे बड़ा एकीकृत वैश्विक कपड़ा व्यापार और सांस्कृतिक कार्यक्रम। इसका उद्देश्य संपूर्ण मूल्य श्रृंखला – ‘फाइबर से फैशन’ का प्रदर्शन करना है। VisionNxt NIFT द्वारा संचालित देश का पहला द्विभाषी (हिंदी-अंग्रेजी) फैशन ट्रेंड फोरकास्टिंग पोर्टल/प्रकाशन। चक्रीय अर्थव्यवस्था ऐसा मॉडल जिसमें संसाधनों के उपयोग को कम से कम किया जाता है तथा कचरे को रिसाइकिल कर पुनः उपयोग योग्य बनाया जाता है। इंडिया सस्टेनेबल टेक्सटाइल मार्क UNDP और भारत सरकार की संयुक्त पहल, जिसका उद्देश्य भारतीय वस्त्रों को वैश्विक पर्यावरणीय मानदंडों के अनुकूल प्रमाणित करना है। परिवर्तन योजना: दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की नई पहल चर्चा में क्यों? केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने परिवर्तन योजना के परिचालन दिशानिर्देशों (Guidelines) को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में चलने वाली पुरानी, अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाली बसों और ट्रकों को हटाकर उनके स्थान पर नए BS-VI मानकों वाले या इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को बढ़ावा देना है। योजना की मुख्य बातें लाभार्थियों को मिलने वाले प्रमुख प्रोत्साहन पुरानी गाड़ियों को कबाड़ (Scrap) में देकर नई गाड़ी खरीदने वालों को सरकार ये बड़े फायदे दे रही है: प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य तथ्य विवरण नोडल मंत्रालय मंजूरी: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) द्वारा।कार्यान्वयन: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा। लक्षित क्षेत्र संपूर्ण दिल्ली-NCR क्षेत्र (शामिल राज्य: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR जिले)। लक्षित वाहन केवल वाणिज्यिक वाहन (Commercial Vehicles) जैसे ट्रक और बसें। NCRPB राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (यह MoHUA के तहत एक वैधानिक निकाय है)। REWARD कार्यक्रम: सैटेलाइट और ड्रोन तकनीक से जलागम प्रबंधन चर्चा में क्यों? राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के ज्ञान भागीदार (Knowledge Partner) के रूप में जयपुर, राजस्थान में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। विश्व बैंक की सहायता से चल रहे REWARD कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कार्यशाला का विषय “वाटरशेड योजना और निगरानी के लिए सैटेलाइट और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण” था। कार्यशाला के मुख्य बिंदु और रणनीतिक निर्णय प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य पहल / संस्था मुख्य बिंदु REWARD कार्यक्रम पूरा नाम: Rejuvenating Watersheds for Agricultural Resilience through Innovative Development.वित्तपोषण: यह विश्व बैंक (World Bank) द्वारा सहायता प्राप्त परियोजना है।लक्ष्य: वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में जल सुरक्षा और लचीलापन (Resilience) बढ़ाना। NRAA राष्ट्रीय वर्षासिंचित क्षेत्र प्राधिकरण: यह भारत के वर्षासिंचित क्षेत्रों में स्थायी कृषि पद्धतियों के लिए नीतियां बनाने वाला नोडल निकाय है। तकनीक का लाभ ड्रोन और सैटेलाइट से जलभराव, मृदा क्षरण, और वनस्पतियों के घनत्व की रीयल-टाइम सटीक मैपिंग संभव होती है, जिससे वाटरशेड का बेहतर नियोजन (Planning) होता है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: हरित रेल गतिशीलता की दिशा में ऐतिहासिक कदम चर्चा में क्यों? भारतीय रेलवे देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल (Hydrogen Fuel Cell) आधारित ट्रेन का परिचालन शुरू करने जा रही है। इस ट्रेन का उद्घाटन हरियाणा के जींद-सोनीपत खंड (Northern Railway) पर किया जाएगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के दृष्टिकोण के तहत विकसित यह परियोजना भारत को उन चुनिंदा वैश्विक देशों की श्रेणी में खड़ा करती है जो शून्य-कार्बन रेल परिवहन प्रणाली पर काम कर रहे हैं। मुख्य बिंदु: तकनीक, अवसंरचना और सुरक्षात्मक पहलू 1. ट्रेन की तकनीकी विशिष्टताएँ 2. ईंधन सेल कार्यप्रणाली 3. सुदृढ़ हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर 4. व्यापक सुरक्षा तंत्र प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य घटक / बिंदु प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य PEMFC प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल — वह तकनीक जो परफ्लूरोसल्फोनिक एसिड (PFSA) झिल्ली का उपयोग कर शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ बिजली बनाती है। RDSO अनुसंधान, अभिकल्प और मानक संगठन — भारतीय रेलवे की वह तकनीकी संस्था जिसने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के डिजाइन और विशिष्टताओं को मंजूरी दी है। PESO पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन — भारत में विस्फोटक, संपीड़ित गैसों और पेट्रोलियम पदार्थों की सुरक्षा को विनियमित करने वाला नोडल निकाय, जिसने जींद स्टेशन को मंजूरी दी। TUV SUD जर्मनी की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तकनीकी निरीक्षण एजेंसी जिसने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन (Safety Assessment) किया है। जींद-सोनीपत खंड भारत का पहला रेल खंड जहां 17 जुलाई 2026 से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल ट्रेन का व्यावसायिक परिचालन शुरू किया जा रहा है। पैमाना डैशबोर्ड: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र की त्रैमासिक रिपोर्ट चर्चा में क्यों? हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की निगरानी को मजबूत करने के लिए PAIMANA (Project Assessment, Infrastructure Monitoring & Analytics for Nation-building) परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का नवीनतम त्रैमासिक अपडेट जारी किया है। आपको बता दें कि इस डिजिटल डैशबोर्ड को पहली बार 16 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य ‘वन नेशन, वन टाइम’ की तर्ज पर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policymaking) को बढ़ावा

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16 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

16 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत इसमें घरेलू तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत ₹1,27,500 करोड़ का सेमीकॉन 2.0 मिशन, देश के वैज्ञानिक कार्यबल को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए शुरू किया गया ₹1,500 करोड़ का बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) चरण-III, और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के वैज्ञानिकों द्वारा असम में खोजा गया 2.4 करोड़ वर्ष पुराना केवड़ा का जीवाश्म, भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का केंद्र बनाने वाली नई रणनीति मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS) की प्रशासनिक रूपरेखा और इसके वैश्विक लक्ष्यों को समझेंगे, जो देश में उच्च मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के स्वदेशी उत्पादन को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी। मोबाइल फोन निर्माण योजना (MPMS): भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की नई रणनीति चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹62,500 करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन निर्माण योजना (Mobile Phone Manufacturing Scheme – MPMS) को मंजूरी दे दी है। यह नई योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई ‘बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन’ (PLI-LSEM) योजना का स्थान लेगी, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को और अधिक मजबूत करना है। MPMS योजना की प्रमुख विशेषताएं यह योजना भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है: योजना से अपेक्षित परिणाम 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान इस योजना से भारतीय अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित बड़े लाभ मिलने की उम्मीद है: भारत में मोबाइल विनिर्माण का परिदृश्य ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत पिछले एक दशक में भारत ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है: प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य योजना / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य PLI-LSEM योजना बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना, जिसने वैश्विक कंपनियों को भारत की ओर आकर्षित किया। इसका कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया है। घरेलू मूल्य संवर्धन इसका अर्थ है कि किसी उत्पाद को बनाने में विदेशों से आयातित पुर्जों के बजाय देश के भीतर बने कच्चे माल और पुर्जों का अधिक से अधिक उपयोग करना। तकनीकी संप्रभुता किसी देश की विदेशी प्रौद्योगिकियों या सॉफ्टवेयर पर निर्भरता को कम करके अपनी स्वदेशी तकनीक, पेटेंट और आरएंडडी (R&D) क्षमताओं को विकसित करना। सिंचन 2026: प्रयोगशाला अनुसंधान को व्यावहारिक चिकित्सा में बदलने की नई पहल चर्चा में क्यों? जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (BRIC) के एक प्रमुख संस्थान ‘ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान’ (THSTI) ने फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर परिसर में अपने तीसरे वार्षिक उद्योग-व्यवसाय सम्मेलन ‘ सिंचन 2026‘ (Synergistic Collaboration in Healthcare Innovation) का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्वास्थ्य जगत के नेताओं, जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, उद्यम पूंजीपतियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाना है ताकि प्रयोगशाला के वैज्ञानिक अनुसंधानों (Lab-bench science) को वाणिज्यिक स्तर पर मरीजों के इलाज के व्यावहारिक समाधानों में बदला जा सके। सिंचन 2026 की मुख्य विशेषताएं और प्रगति यह मंच भारत के स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है: THSTI की अनुसंधान क्षमताएं और ढांचागत तंत्र संस्थान ने प्रयोगशाला के शोध और बाजार के बीच के अंतर (घाटी) को पाटने के लिए कई अत्याधुनिक प्रणालियां विकसित की हैं: मुख्य पैनल सत्र और उनके निष्कर्ष सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए तीन प्रमुख नीतिगत स्तंभों पर गहन चर्चा की गई: पैनल / सत्र मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक बिंदु ग्लोबल हेल्थ: विज्ञान, विनिर्माण और साझेदारी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता, सुदृढ़ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और लचीले अनुसंधान तंत्र का विकास करना। प्रारंभिक नैदानिक ​​अनुवाद में तेजी लाना शैक्षणिक अनुसंधानों को इंसानों पर होने वाले पहले चरण के परीक्षणों में तेजी से बदलने के लिए एकीकृत नैदानिक अनुसंधान प्लेटफार्मों का उपयोग करना। व्यावसायिक अनुवाद मंचों की दक्षता बढ़ाना नए नवोन्मेषकों, निवेशकों और नीतिगत एक्सीलेटरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को वाणिज्यिक स्तर पर बड़े उद्योगों में बदला जा सके। आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026): उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का नया अध्याय चर्चा में क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (CCEA) ने उर्वरक विभाग के एक बड़े सुधार प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026’ (National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat – NIPU-2026) को हरी झंडी दे दी है। यह नई नीति देश में गैस आधारित नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए निजी और सार्वजनिक निवेश को आकर्षित करेगी, जिससे भारत यूरिया उत्पादन के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सके। नीति की आवश्यकता: पृष्ठभूमि और वर्तमान परिदृश्य NIPU-2026 की प्रमुख विशेषताएं और NIP-2012 से तुलना नई नीति (NIPU-2026) को पुरानी नीति (NIP-2012) की तुलना में अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है: बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) का चरण-III: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को 300 बिलियन डॉलर बनाने की राह चर्चा में क्यों? केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के चरण-III का औपचारिक शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और लंदन स्थित परोपकारी संस्था वेलकम ट्रस्ट (UK) द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है। इस तीसरे चरण के लिए ₹1,500 करोड़ का कुल बजटीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है, जो देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बायोमेडिकल अनुसंधान कार्यबल तैयार करने में मदद करेगा। BRCP चरण-III की मुख्य विशेषताएं यह कार्यक्रम भारत को जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है: भारत का बढ़ता जैव प्रौद्योगिकी परिदृश्य केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में पिछले एक दशक में आए क्रांतिकारी बदलावों के आधिकारिक आंकड़े साझा किए: प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य घटक / आयाम मुख्य बिंदु कार्यक्रम का नाम बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) – चरण-III। नोडल विभाग / मंत्रालय जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार। अंतर्राष्ट्रीय भागीदार वेलकम ट्रस्ट, लंदन (ब्रिटेन) स्थित एक वैश्विक परोपकारी संस्था। कुल बजटीय आवंटन ₹1,500 करोड़ (साझा वित्तीय पोषण: ₹1,000 करोड़ DBT

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15 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

15 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत में सीमा सुरक्षा और विकास को धार देने वाला नेसाक (NESAC) का स्पेस-बेस्ड मिशन, देश के पहले ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह, पंचायतों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने वाला ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’, भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को यूरेनियम की सुरक्षा देने वाला ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया नागरिक परमाणु सहयोग’ और औद्योगिक दुर्घटनाओं से मानव जीवन की रक्षा करने वाला CeNS बेंगलुरु का अल्ट्रा-सेंसिटिव अमोनिया सेंसर शामिल हैं। कैपासीटीज कार्यक्रम: शहरी जलवायु लचीलापन और नेट-जीरो कार्य योजना Why in News? (चर्चा में क्यों?) 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में भारतीय शहरों को कम कार्बन उत्सर्जन और जलवायु-अनुकूल बनाने वाले ‘कैपासीटीज’ कार्यक्रम के शानदार 10 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। ‘स्केलिंग अर्बन क्लाइमेट रेजिलिएंस: द कैपासीटीज लेगेसी एंड वे फॉरवर्ड’ नामक इस कार्यक्रम का आयोजन ‘इक्ली साउथ एशिया’ और राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर भारतीय शहरों को नेट-जीरो की राह पर ले जाने के लिए तीन महत्वपूर्ण ‘नॉलेज प्रोडक्ट्स’ (दस्तावेज) भी लॉन्च किए गए। ‘कैपासीटीज’ परियोजना क्या है? इस परियोजना का मूल उद्देश्य भारतीय शहरों को ऐसे उपकरणों और क्षमता से लैस करना है ताकि वे अपने विकास नियोजन में जलवायु चिंताओं को शामिल कर सकें: पिछले एक दशक में कार्यक्रम के महत्वपूर्ण प्रभाव इस कार्यक्रम ने देश के 8 प्रमुख शहरों (कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, उदयपुर और सिलीगुड़ी) में व्यावहारिक जमीनी बदलाव दिखाए हैं: 1. नेट-जीरो क्लाइमेट रेजिलिएंट सिटी एक्शन प्लान (CRCAPs) 2. संस्थागत बदलाव 3. सफल जमीनी परियोजनाएं शहर (State) लागू किया गया सफल मॉडल अहमदाबाद (गुजरात) सौर-ऊर्जा संचालित ई-बस चार्जिंग स्टेशन की स्थापना। कोयंबटूर (तमिलनाडु) 154 kWp क्षमता वाले देश के अभिनव तैरते हुए सौर संयंत्र (Floating Solar Plant) का विकास। राजकोट (गुजरात) 100 रियायती ई-ऑटो के साथ ‘ग्रीन मोबिलिटी जोन’ की शुरुआत। तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु) शहरी जल निकायों और झीलों का पारिस्थितिक पुनरुद्धार। तिरुनेलवेली (तमिलनाडु) संभावित बाढ़ से सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक ‘अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम’। वडोदरा (गुजरात) तेजी से घने वन विकसित करने के लिए ‘मियावाकी शहरी वानिकी’ मॉडल। नए लॉन्च किए गए तीन ‘नॉलेज प्रोडक्ट्स’ शहरी नीति निर्माताओं और इंजीनियरों की मदद के लिए निम्नलिखित मार्गदर्शिकाएं जारी की गई हैं: प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य संस्था / कार्यक्रम महत्वपूर्ण बिंदु NIUA राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान; यह केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत शहरी क्षेत्र के अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए एक शीर्ष स्वायत्त निकाय है। ICLEI South Asia पर्यावरण और सतत विकास के लिए काम करने वाला स्थानीय सरकारों का एक वैश्विक नेटवर्क (International Council for Local Environmental Initiatives)। मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित पद्धति, जिसमें बहुत कम जगह में देशी प्रजातियों के पौधे लगाकर कम समय में घने वन बनाए जाते हैं। CAC49 में भारत की ऐतिहासिक सफलता: वैश्विक खाद्य मानकों में बढ़ी धाक Why in News? (चर्चा में क्यों?) 6 से 10 जुलाई 2026 तक जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन के 49वें सत्र (CAC49) में भारत ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा मानकों के निर्धारण में एक बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी सफलता हासिल की है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री रजित पुन्हानी ने किया। इस सत्र में भारत की अध्यक्षता में तैयार किए गए सात महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मानकों को मंजूरी दी गई और भारतीय काजू के लिए वैश्विक मानक विकसित करने के भारत के प्रस्ताव को भी सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। भारत की अगुआई में अपनाए गए 7 कोडेक्स मानक इस सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता और सह-अध्यक्षता में विकसित निम्नलिखित अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाया गया, जो वैश्विक व्यापार में भारतीय कृषि उत्पादों को नई पहचान दिलाएंगे: 1. भारत की अध्यक्षता में अपनाए गए मानक: 2. भारत की सह-अध्यक्षता में अपनाए गए मानक: ‘काजू की गुठली’ के लिए नया मानक सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक भारत के उस प्रस्ताव को मंजूरी मिलना था, जिसके तहत अब काजू की गुठली के लिए एक समर्पित कोडेक्स मानक विकसित किया जाएगा: कोडेक्स एलीमेंटेरियस कमीशन (CAC) क्या है? प्रारंभिक परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य संस्था / पहल मुख्य तथ्य FSSAI खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत स्थापित एक वैधानिक स्वायत्त निकाय; यह केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। Spices Board वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करने वाला वैधानिक निकाय, जो भारतीय मसालों के विकास और निर्यात संवर्धन के लिए जिम्मेदार है। CCPFV Codex Committee on Processed Fruits and Vegetables; यह प्रसंस्कृत फलों और सब्जियों के वैश्विक मानकों का निर्धारण करने वाली विशिष्ट कोडेक्स समिति है। नेसाक: पूर्वोत्तर में सीमा प्रबंधन और विकास को रफ्तार दे रही अंतरिक्ष तकनीक Why in News? (चर्चा में क्यों?) 14 जुलाई 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष मंत्रालय, डॉ. जितेंद्र सिंह ने मेघालय के उमियम (Umiam) में उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास और देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं (जैसे सीमा प्रबंधन) को मजबूत करने में ‘नेसाक’ की बढ़ती भूमिका की सराहना की। वर्तमान में नेसाक पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में लगभग 130 अंतरिक्ष अनुप्रयोग परियोजनाओं (Space Application Projects) पर काम कर रहा है। नेसाक की प्रमुख परियोजनाएं और उनके अनुप्रयोग 1. सीमा प्रबंधन और सुरक्षा (Border Management) 2. आपदा प्रबंधन (Disaster Management) 3. कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन 4. पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) क्या है? पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए उपग्रह आधारित विकास के प्रमुख क्षेत्र क्षेत्र (Sector) उपयोग की जाने वाली तकनीक दूरसंचार दुर्गम पहाड़ी इलाकों में उपग्रह संचार SatCom के जरिए शिक्षा EduSat और टेली-मेडिसिन नेटवर्क का विस्तार। शहरी विकास भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का उपयोग करके स्मार्ट शहरों का नियोजन और वन आवरण की निगरानी। ड्रोन तकनीक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में ड्रोन (UAV) का उपयोग करके सटीक कृषि और आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति। प्रारंभिक परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य संस्था / शब्दावली महत्वपूर्ण तथ्य उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करने वाला एक वैधानिक निकाय, जिसे उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971

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