New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: पृथ्वी की उत्पति और विकास PDF
New NCERT Notes class 11 Geography Chapter-2: The Origin and Evolution of the Earth PDF के अंतर्गत हम ब्रह्मांड की उत्पति से लेकर पृथ्वी की उत्त्पति और जीवन विकास को विस्तृत रूप में समझेंगे। पृथ्वी और ब्रह्मांड की उत्पत्ति (The Origin and Evolution of the Earth) ये सिद्धांत मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित हैं: प्रारंभिक सिद्धांत (पृथ्वी और सौरमंडल पर केंद्रित) तथा आधुनिक सिद्धांत (ब्रह्मांड पर केंद्रित)। 1. प्रारंभिक सिद्धांत (Early Theories): पृथ्वी की उत्पत्ति प्रारंभिक दौर में दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी और ग्रहों की उत्पत्ति को केंद्र में रखकर अपने सिद्धांत प्रस्तुत किए। क. निहारिका परिकल्पना (Nebular Hypothesis) प्रतिपादक: जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट (Immanuel Kant) ने इस संबंध में प्रारंभिक तर्क दिए। संशोधन: 1796 में गणितज्ञ लाप्लास (Laplace) द्वारा इसका संशोधन किया गया। मुख्य बिंदु: इस परिकल्पना के अनुसार, ग्रहों का निर्माण एक घूर्णन करते हुए (rotating) धीमे और युवा सूर्य से संबंधित मलबे या पदार्थ के बादलों से हुआ है। ख. संशोधित निहारिका परिकल्पना (1950) संशोधनकर्ता: रूस के ओटो श्मिट (Otto Schmidt) और जर्मनी के कार्ल वीज़ास्कर (Carl Weizascar)। मुख्य बिंदु: इनके अनुसार, सूर्य एक ‘सौर निहारिका’ (Solar Nebula) से घिरा हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन, हीलियम और धूलकण शामिल थे। इन कणों के बीच घर्षण और टकराव (Friction and Collision) के कारण एक तश्तरीनुमा (Disk-shaped) बादल का निर्माण हुआ। अंततः, अभिवृद्धि की प्रक्रिया (Process of Accretion) के माध्यम से ग्रहों का निर्माण हुआ। 2. आधुनिक सिद्धांत (Modern Theories): ब्रह्मांड की उत्पत्ति आधुनिक समय में वैज्ञानिकों ने केवल पृथ्वी तक सीमित न रहकर पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के प्रश्नों को सुलझाने का प्रयास किया। क. बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory) इसे ‘विस्तारित ब्रह्मांड परिकल्पना’ (Expanding Universe Hypothesis) भी कहा जाता है। यह वर्तमान में ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे लोकप्रिय और स्वीकृत सिद्धांत है। प्रमाण: 1920 में एडविन हबल (Edwin Hubble) ने प्रमाण दिए कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है और समय के साथ आकाशगंगाएँ (Galaxies) एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। गुब्बारे का उदाहरण (आंशिक सत्य): यदि एक गुब्बारे पर निशान लगाकर उसे फुलाया जाए, तो निशान एक-दूसरे से दूर जाते हैं। ठीक इसी तरह आकाशगंगाओं के बीच की दूरी भी बढ़ रही है। हालाँकि, गुब्बारे के विपरीत, वास्तविक प्रेक्षणों (Observations) के अनुसार स्वयं आकाशगंगाओं का विस्तार नहीं हो रहा है, केवल उनके बीच के अंतरिक्ष (Space) का विस्तार हो रहा है। बिग बैंग की प्रमुख अवस्थाएँ (Stages): प्रारंभिक अवस्था (विलक्षणता/Singularity): शुरुआत में ब्रह्मांड का निर्माण करने वाला संपूर्ण पदार्थ एक ही स्थान पर “एक छोटे गोले” (Singular Atom) के रूप में स्थित था। इसका आयतन अत्यंत सूक्ष्म (Unimaginably small), जबकि तापमान और घनत्व अनंत (Infinite) था। महाविस्फोट और विस्तार: इस छोटे गोले में एक भीषण विस्फोट (Big Bang) हुआ, जिससे अत्यधिक तीव्र गति से विस्तार हुआ। यह घटना वर्तमान से 13.7 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुई थी। यह विस्तार आज भी जारी है। पदार्थ का निर्माण: विस्फोट के कुछ सेकंड के भीतर ही अत्यधिक तीव्र विस्तार हुआ, जिसके बाद विस्तार की गति धीमी हो गई। इस प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा (Energy) पदार्थ (Matter) में परिवर्तित हो गई। प्रथम परमाणु का निर्माण: बिग बैंग की घटना के पहले 3 मिनट के भीतर पहले परमाणु का निर्माण शुरू हुआ। ब्रह्मांड का पारदर्शी होना: बिग बैंग के 3,00,000 वर्ष के भीतर तापमान गिरकर 4,500 K (केल्विन) तक आ गया और परमाण्विक पदार्थ (Atomic Matter) का उदय हुआ, जिससे ब्रह्मांड पारदर्शी (Transparent) हो गया। ख. स्थिर अवस्था संकल्पना (Steady State Concept) प्रतिपादक: यह हॉयल (Hoyle) द्वारा प्रस्तुत एक वैकल्पिक अवधारणा थी। मुख्य बिंदु: इसके अनुसार ब्रह्मांड समय के किसी भी मोड़ पर (भूत, वर्तमान या भविष्य में) हमेशा एक समान (Roughly the same) ही रहता है। वर्तमान स्थिति: विस्तारित ब्रह्मांड (Expanding Universe) के पक्ष में अधिक वैज्ञानिक साक्ष्य मिलने के कारण, वर्तमान वैज्ञानिक समुदाय स्थिर अवस्था संकल्पना के स्थान पर बिग बैंग सिद्धांत को प्राथमिकता देता है। PIB News Analysis तारों का निर्माण (The Star Formation) आरंभिक कारक (घनत्व में भिन्नता): प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ (Matter) और ऊर्जा (Energy) का वितरण समान नहीं था। घनत्व में मौजूद इस प्रारंभिक अंतर के कारण गुरुत्वाकर्षण बलों (Gravitational forces) में असमानता पैदा हुई। आकाशगंगाओं (Galaxies) का आधार: गुरुत्वाकर्षण में अंतर के कारण पदार्थ एक दूसरे की ओर आकर्षित होकर एकत्रित होने लगा, जिसने आकाशगंगाओं के विकास का आधार तैयार किया। आकाशगंगा (Galaxy) की विशेषताएँ: एक आकाशगंगा में बड़ी संख्या में तारे होते हैं। इनका विस्तार हजारों प्रकाश-वर्ष (Light-years) की विशाल दूरी में होता है। एक व्यक्तिगत आकाशगंगा का व्यास (Diameter) 80,000 से 150,000 प्रकाश-वर्ष के बीच होता है। तारों के निर्माण की प्रक्रिया: निहारिका (Nebula) का निर्माण: आकाशगंगा की शुरुआत हाइड्रोजन गैस के एक बहुत बड़े बादल के संचय (Accumulation) से होती है, जिसे ‘निहारिका’ कहा जाता है। गैस के झुंड (Clumps): समय के साथ इस बढ़ती हुई निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड (Localised clumps) विकसित होने लगते हैं। तारों का जन्म: ये झुंड निरंतर बढ़ते हुए और अधिक घने गैसीय पिंडों में बदल जाते हैं, जिससे अंततः तारों का निर्माण होता है। समय: माना जाता है कि तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 बिलियन (अरब) वर्ष पूर्व हुआ था। प्रकाश-वर्ष (Light Year) का वैज्ञानिक मापन परिभाषा: प्रकाश-वर्ष दूरी का माप है, न कि समय का। प्रकाश की गति: प्रकाश की गति 3,00,000 किमी प्रति सेकंड होती है। इस गति से प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई कुल दूरी को एक प्रकाश-वर्ष कहा जाता है। गणितीय मान: 1 प्रकाश-वर्ष = 9.4607 × 1012 किमी। पृथ्वी और सूर्य की दूरी: सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी 14,95,98,000 किमी है। प्रकाश-समय (Light-time) के संदर्भ में, यह दूरी 8.311 मिनट के बराबर है। ग्रहों का निर्माण (Formation of Planets) ग्रहों के विकास की प्रक्रिया को निम्नलिखित तीन मुख्य अवस्थाओं (Stages) में समझा जा सकता है: 1.प्रथम चरण: कोर और घूर्णन डिस्क का निर्माण: गैसीय कोर विकास: तारे निहारिका के भीतर गैस के स्थानीयकृत झुंड होते हैं। इन झुंडों के भीतर काम करने वाले आंतरिक गुरुत्वाकर्षण बल के कारण गैस के बादल के केंद्र में एक ‘कोर’ (Core) का निर्माण होता है। इसके बाद, इस गैसीय कोर के चारों ओर गैस और धूलकणों की एक विशाल घूर्णन करती हुई डिस्क (Rotating
